मानव संसाधन प्रबंधन

मानव संसाधन नियोजन पर तकनीकी का प्रभाव | Impact of Technology of HRP in Hindi

मानव संसाधन नियोजन पर तकनीकी का प्रभाव | Impact of Technology of HRP in Hindi

मानव संसाधन नियोजन पर तकनीकी का प्रभाव

(Impact of Technology of HRP)

बदलते वैश्विक व्यावसायिक वातावरण तथा बढ़ती प्रतियोगिता एवं तकनीकी की स्थिति में संगठन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी एक संगठन को उन चुनौतियों का सामना करते हुए उन्हें निम्न दो बातों को सुनिश्चित करना अनिवार्य है:

(1) माल एवं सेवा का अधिक कुशलता एवं मितव्ययिता के साथ उत्पादन (Producing goods and services more efficiently and economically)

(2) उत्पाद एवं उत्पादन प्रक्रिया को प्रतियोगी बनाने एवं उसका लाभ लेने के लिए शोध करना (Innovating Product and Processes so as to gain Competitive Advantages)

कम्प्यूटर तकनीकी के विकास ने संगठन के विकास को एक नया अवसर और नयी दिशाएँ दी हैं, जिससे उसके उत्पादन एवं प्रक्रिया में भी विकास हुआ हैं। कम्प्यूटर सम्बद्ध रूपरेखा (Computer Aided Design-CAD) तथा कम्प्यूटर निर्माण (Computer Aided Manufacturing-CAM) ने उत्पादन प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप (Human intervention) को कम कर दिया है। इसी प्रकार सूचना तंत्र के विकास ने भी संवादवाहन व्यवस्था को आसान बना दिया है। आज निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी प्रकार की सूचनाएँ इस तन्त्र के द्वारा आसानी से उपलब्ध हो पा रही हैं, जिससे प्रबन्धकों को निर्णय लेने में सहूलियत हो रही है। तकनीकी में इस प्रकार के सभी बदलाव ने संगठन में मानव संसाधन के स्वरूप को ही बदल दिया है और इस तकनीकी का सफल संचालन करने के लिए कुशल, शिक्षित, प्रशिक्षित, तकनीकी योग्यता युक्त मानव संसाधन की माँग बढ़ी है। आज प्रबन्धक भी अपने अधिकांश निर्णय कम्प्यूटर आधारित सूचनाओं के आधार पर ले रहे हैं। संगठन में प्रयुक्त नयी तकनीकी व योग्यता के लिए विभिन्न प्रकार के योग्यता परिवर्तन मूलतः निम्न बातों पर आधारित होते है

(1) मानव संसाधन प्रतिनियुक्ति के लिए प्रबन्धकीय नीतियाँ।

(2) श्रम संगठन की प्रवृत्ति एवं सौदेबाजी की शक्ति।

(3) मानव संसाधन को नयी तकनीकी को अपनाने तथा उसमें सामंजस्य स्थापित करने की योग्यता। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने स्पष्ट किया है कि बदलती तकनीकी ने कार्य जीवन (Working life) के विभिन्न पहलुओं, श्रमिकों की जिम्मेदारियों, योग्यता, भौतिक एवं मानसिक कार्य भार, विकास के अवसर, संवादवाहन, कार्य स्थल पर सामाजिक सम्बन्ध आदि को प्रभावित किया है।

According to ILO, ‘Introduction of new technology can affect other aspects of working life-workers responsibilities, skill requirements, job content, physical and mental workload, career prospects and communication and social relationships at work.”

स्पष्ट है कि मानव संसाधन की एक आदर्श आकृति को बनाये रखने के लिए बदलते तकनीकी के युग में उच्च ज्ञान (Higher knowlege), योग्यता (Skills) तथा गुण, क्षमता की आवश्यकता उत्पादन प्रक्रिया को संचालित करने में हो रही है। संगठन में मांसपेशी शक्ति (Brawn Power) का प्रादुर्भाव घटा है तथा दिमागी शक्ति (Brain Power) का प्रलचन बढ़ा है। आज के शिक्षित, योग्य, कुशल, तकनीकी युक्त मानव संसाधन अधिक प्रजातांत्रिक (Democratic) तथा विकेन्द्रित (Decentraised) प्रबन्धकीय पद्धति को पसन्द करते हैं और इससे उनका मनोबल अधिक बढ़ा है।

हमारे देश की वर्तमान शिक्षा पद्धति इन तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में असफल रही है। हमारे पाठ्यक्रम (Syllabus) पुराने हैं तथा देश में पर्याप्त संसाधन की कमी के कारण तकनीकी युक्त शिक्षा का अभी भी अभाव है। अतः कम्पनियों को उपयुक्त तकनीकी अपनाने के लिए अपने कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देना पड़ता है। यह प्रशिक्षण या तो संगठन के भीतर बाहर से प्रशिक्षक बुलाकर देना पड़ता है या प्रशिक्षु को दूसरे संस्थान में प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता है। अतः एक मानव संसाधन नियोजक (Human Resource Planner) को हमेशा यह ध्यान में रखना पड़ता है कि जब भी जिस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता कर्मचारियों को पड़े उसे दिलाया जाय अतः नियोजक को नियोजन करते समय विशेष तकनीकी परिवर्तन की चुनौतियाँ हमेशा एक समस्या बनकर खड़ी हो जाती है और उनका नियोजन असफल हो सकता है।

कार्य में परिवर्तन (Change in work) तथा कार्य स्वरूप (Work design) में परिवर्तन ने संगठन के बहुत से मानव संसाधन को अतिशय (Redundant) बना दिया है। संगठन में आधिक्य श्रम शक्ति (Surplus labour force) की स्थिति बनी हुई है। भारतीय श्रम सम्मेलन (Indian Labour Conference), 1960 में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि तकनीकी परिवर्तन के कारण उत्पन्न आधिक्य या अतिशय श्रम शक्ति को किसी प्रकार की छँटनी नहीं की जायेगी और उन आधिक्य तथा अतिशय को निम्नलिखित तरीके से कम किया जा सकता है:

(i) पुनर्प्रशिक्षक तथा पुनअवण्टन (Retraining and relocation),

(ii) उनके सेवा निवृत्ति तथा पद त्याग करने तक प्रतीक्षा करना,

(iii) स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति योजना (VRS),

(iv) बाह्य प्रतिनियुक्ति कार्यक्रम (Out Placement Programme),

(v) विविध योग्यता प्रशिक्षण (Multi-skilling Training) ताकि व बहुमुखी (Versatile) बन सकें,

(vi) अतिशय कर्मचारियों को निम्न उत्पादन, निम्न योग्यता वाले कार्यों में नियुक्ति के अवसर प्रदान करना आदि।

तीव्र गति से परिवर्तन तकनीकी एवं सूचना तंत्र से संगठनों को हायर एण्ड फायर (Hire and Fire) नीति को अपनाने के लिए बाध्य किया है। इससे मानव संसाधन नियोजन प्रभावित हुआ है। यहाँ तक कि कार्यकारी परिवर्तन (Executive turnover) आदि ने मानव संसाधन नियोजन के समक्ष कड़ी चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी है। अतः बदलते परिवेश में प्रभावी मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया को अपनाने एवं आदेश आकृति के निर्धारण करने में काफी सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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Pankaja Singh

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