प्रबंधन सूचना प्रणाली

डाटा संसाधन | डाटा संसाधन के विभिन्न चरण

डाटा संसाधन | डाटा संसाधन के विभिन्न चरण | Data Processing in Hindi | Different stages of data processing in Hindi

डाटा संसाधन (Data Resources)

डाटा संसाधन से अभिप्राय व्यक्तियों अथवा मशीनों द्वारा डाटा को पुनर्गठित अथवा पुनः व्यवस्थित करने से है, जिससे किसी विशेष उद्देश्य हेतु उन डाटा की उपयोगिता अथवा महत्व में वृद्धि हो सके। दूसरो शब्दों में, डाटा संसाधन एक ऐसी प्रणाली है, जिसके तहत आँकड़े प्रदान किये जाते हैं, जो हमें संसाधन के बाद उपयोगी सूचना के रूप में प्राप्त हो जाते हैं। डाटा संसाधान को व्यक्तियों द्वारा साधारण उपकरणों, जैसे- पेपर, पेन और फल रखने की अलमारी की मदद से या इलेक्ट्रो—मैकेनिकल विधि द्वारा यूनिट रिकॉर्ड मशीनों की मदद से अथवा इलेक्ट्रॉनिक विधि से कम्प्यूटर द्वारा सम्पन्न किया जा सकता है। डाटा संसाधन प्रणाली के मुख्य अंग व्यक्ति, पेपर, पेन लेखा उपकरण, टंकण यंत्र, कम्प्यूटर आदि होते हैं। डाटा संसाधन प्रणाली को और ज्यादा स्पष्ट रूप से समझने के लिये निम्न तथ्यों का अध्ययन जरूरी है-

  1. आगम (Entry)- आगम से तात्पर्य उन प्राथमिक डाटा दस्तावेज या अन्य आँकड़ों से है, जिनके आधार पर उपयोगी सूत्र प्राप्त करने के लिये संसाधन किया जाता है। उदाहरणार्थ, यदि हमें एक वेतन-पत्रक (salary-sheet) तैयार करना है तो हमें अपनी संसाधन प्रणाली में आगम के रूप में निम्न समंक देने होंगे-

कर्मचारी का नाम, उसका वेतन, पूर्व बकाया अथवा अग्रिम दिया गया वेतन, अतिरिक्त कार्य हेतु पारिश्रमिक आदि।

  1. संसाधन (Resources) – संसाधन से अभिप्राय उन सभी क्रियाओं से होता है जो कि हम अपनी जानकारी या वांछित सूचना या प्रतिवेदन प्राप्त करने के उद्देश्य से आगम किये गये डाटा पर सम्पन्न करते हैं। उदाहरणार्थ, वेतन पत्रक प्राप्त करने के लिये उपर्युक्त आँकड़े जोकि प्रणाली में आगम हो चुके हैं, उन पर प्रत्येक कर्मचारी हैं। संसाधान के दौरान प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में से अग्रिम भुगतान किये गये वेतन को घटा दिया जाता है।
  2. 3. निर्गम (Output) निर्गम से तात्पर्य उन सूचनाओं, प्रतिवेदनों या अन्य आँकड़ों से है जोकि संसाधन के पश्चात् परिणाम के रूप में प्राप्त होते हैं। उदाहरणार्थ, वेतन पत्रक (salary- sheet) वाले उदाहरण में संशोधन के उपरांत हमें कुल वेतन का जो वेतन-पत्रक प्राप्त होता है, वह विभाग हेतु उपयोगी सूचना है और इस वेतन-पत्रक को संसाधन प्रक्रिया का निर्गम कहते हैं।

डाटा संसाधन के विभिन्न चरण

(Different Steps of Data Resources)

डाटा संसाधन प्रणाली से अभिप्राय एक ऐसी सम्पूर्ण प्रणाली से है जिससे ऑकड़ें प्रदान किये जाते है, जो हमें संसाधन के बाद उपयोगी सूचना पेश करते हैं अर्थात डाटा को आगम के रूप में इस प्रणाली को प्रदान किया जाता है। उस डाटा को विभिन्न प्रकार की प्रोसेसिंग के बाद हमें प्रतिवेदन या किसी अन्य अर्थपूर्ण सूचना के रूप में पेश किया जाता है। इस प्रणाली के मुख्य अंग व्यक्ति पेपर, पेन, टंकण यंत्र लेखा उपकरण, कम्प्युटर प्रिन्टर्स, आदि होते है। डाटा के समाधान के मुख्य चरण निम्न है-

  1. अभिलेखन (Writing)-अभिलेखन से अ.भेप्राय डाटा की प्रतिलिपि बनाने से है। दूसरे शब्दों में, आकड़ों (Output) को लेखबद्ध करने की क्रिया के दौरान हम शुरूआती आँकड़ों को स्थायी रूप से लिखकर या प्रतिलिपि के रूप में एकत्रित करते हैं। इसे ही अभिलेखन कहते हैं। इलेक्ट्रानिक डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली में इस क्रिया के तहत् प्रारम्भिक आँकड़ों को कूट संकेत भी प्रदान किये जाते हैं।
  2. वर्गीकरण (Classification )- वर्गीकरण के तहत् समान मर्दों अथवा लेन- देनों (transactions) का समूह बनाया जाता है। समान्यतः डाटा को वर्णात्मक या संख्यात्मक संकेताक्षरों के रूप में कोड के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। इलेक्ट्रानिक डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली में इस क्रिया के तहत प्रारम्भिक आँकड़ों को कूट संकेत भी प्रदान किये जाते हैं।
  3. संयोजन (Assembling )- संयोजन से तात्पर्य आँकड़ों को उनकी उपयोगिता के अनुसार, आरोही अथवा अवरोही क्रम में पुनः व्यवस्थित करने की क्रिया से है। उदाहरणार्थ यदि डाटा फाइल में एक कक्षा के सभी विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम दिया हुआ है तो हम इस डाटा फाइल को उनके द्वारा प्राप्त नम्बरों के प्रतिशत के अनुसार या उनके अनुक्रमों के अनुसार या उनके नामों के वर्णों के आधार पर घटते एवं बढ़ते हुए क्रम में संयोजित कर सकते हैं।
  4. संगणना (Counting )- संगणना से अभिप्राय आँकड़ों के योग घटाने, गुणा या भाग करने से होता है। इसके तहत् वर्गमूल और अन्य गणितीय क्रियाओं को भी शामिल किया जाता है। उदाहरणार्थ, ग्राहकों के खातों में पोस्टिंग के द्वारा खाते को अद्यतन करते समय हम वर्तमान व्यवहारों को पिछली शेष राशि में जोड़कर नई शेष राशि में पता करते हैं। किसी खाते के आँकड़ों पर ब्याज की गणना एवं स्टॉक का नवीनीकरण आदि इस क्रिया का ही हिस्सा है।
  5. संक्षिप्तीकरण (Briefing )- इस प्रक्रिया के तहत् आँकड़ों का मुख्य बिन्दुओं या मुख्य व्यवहारों के आधार पर एकत्रीकरण किया जाता है और इसमें सामान्यतः योग निकालना, परिणाम ज्ञात करना अथवा प्रतिशत ज्ञात करना सम्मिलित है। उदाहरणार्थ, एक मजदूरी पत्रक में इस प्रक्रिया के तहत् हम कुल कर्मचारियों की संख्या उनके कुल मूल वेतन, कुल की गई कटौती और कुल शुद्ध देय वेतन आदि की गणना करते हैं।
  6. प्रतिवेदन तैयार करना ( To Prepare Report)- प्रतिवेदन तैयार करना डाटा संसाधन विभाग की क्रियाओं का अन्तिम चरण है। इसके तहत् हम डाटा का अभिलेखन, वर्गीकरण, संयोजन, संगणना एवं संक्षिप्तीकरण करके उन्हें अर्थपूर्ण एवं उपयोगी सूचना में परिवर्तित कर लेते हैं और उन्हें सुव्यवस्थित प्रकार से प्रबन्धकों या सूचना का उपयोग करने वाले व्यक्ति को प्रतिवेदन के रूप में पेश करते हैं। डाटा संसाधन का अन्तिम लक्ष्य प्रतिवेदन प्रस्तुत करना ही होता है। उदाहरणार्थ, कम्पनी ग्राहकों के खातों की शेष राशि को देय अवधि के अनुसार क्रम में लगाकर प्रतिवेदन को कम्पनी के प्रबन्धकों अथवा मालिकों को पेश करना।
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Pankaja Singh

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