मानव संसाधन प्रबंधन

प्रेरणात्मक मजदूरी प्रणाली से आशय | प्रगतिशील मजदूरी प्रणाली से आशय | प्रब्याजी अधिलाभांश प्रणाली | प्रेरणात्मक प्रणाली के विभिन्न रूप | हैल्से प्रणाली के गुण | हैल्से प्रणाली के दोष | हैल्से तथा रोवन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन

प्रेरणात्मक मजदूरी प्रणाली से आशय | प्रगतिशील मजदूरी प्रणाली से आशय | प्रब्याजी अधिलाभांश प्रणाली | प्रेरणात्मक प्रणाली के विभिन्न रूप | हैल्से प्रणाली के गुण | हैल्से प्रणाली के दोष | हैल्से तथा रोवन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन | What is meant by motivational wage system in Hindi | Meaning of progressive wage system. Premium Dividend System in Hindi | Different forms of motivational system in Hindi | Properties of Halsey System in Hindi | Defects of Halsey System in Hindi | Comparative Study of Halsey and Rowan Methods in Hindi

प्रेरणात्मक (प्रगतिशील) मजदूरी प्रणाली से आशय

(Meaning of Incentive Progressive Wage System)

या

प्रब्याजी अधिलाभांश प्रणाली

(Premium Bonus System)

समयानुसार और कार्यानुसार मजदूरी प्रणालियाँ सुविधाजनक एवं पर्याप्त नहीं कही जा सकती। दोनों में अनेक गुण होने के साथ-साथ कुछ अवगुण भी है। समयानुसार मजदूरी प्रणाली में कुशल एवं अकुशल श्रमिक में भेद करने की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि कार्यानुसार मजूदरी प्रणाली में श्रमिक अधिक से अधिक कार्य करना चाहते हैं जिससे वस्तु श्रेष्ठ बनती है। उपर्युक्त दोनों प्रणालियों के दोषों को दूर करने की दृष्टि से एक नवीन पद्धति प्रकाश में आई है, जिसको प्रेरणात्मक प्रगतिशील मजदूरी प्रणाली (Progressive Wage System) या प्रब्याजी अधिलाभांश प्रणाली (Premium Bonus System) कहते हैं। यह समयानुसार और कार्यानुसार दोनों मजदूरी प्रणालियों का मिश्रण है, जिसमें दोनों प्रणालियों के गुण तो विद्यमान हैं परन्तु अवगुण एक भी नहीं है। इस प्रणाली में श्रमिक को न्यूनतम मजदूरी के अतिरिक्त अधिलाभांश (Bonus) भी प्रदान किया जाता है। इस प्रणाली में एक प्रमापी उत्पत्ति निश्चित कर दी जाती है तथा प्रमाप के पश्चात जितनी उत्पत्ति होती है, उस पर घटती हुई दर से कार्यानुसार मजदूरी दी जाती है। घटती हुई दरों से मजदूरी देने का अभिप्राय यह है कि इस प्रकार श्रमिक कार्य में शीघ्रता नहीं करता है जिसके फलस्वरूप वस्तु के गुणों पर कुप्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रेरणात्मक प्रणाली के विभिन्न रूप

(Types of Incentive System)

  1. टेलर प्रणाली (Tylor’s Plan) : एफ. डब्ल्यू. टेलर द्वारा प्रतिपादित भिन्नक कार्यानुसार मजूदरी प्रणाली (Taylor’s Differential Price Rate System) में मजदूरी की दर ऊंची और नीची, दो प्रकार की होती है, जिनको कार्यानुसार निर्धारित किया जाता है। वैज्ञानिक प्रबन्ध के जन्मदाता टेलर को साधारण कार्यानुसार प्रणाली से सन्तोष नहीं था। उनके मतानुसार यह प्रणाली श्रमिकों को पर्याप्त प्रेरणा देने में असफल रहती है। अतः उन्होंने एक नई प्रणाली प्रतिपादित की जिसमें प्रमाप से अधिक कार्य करने वालों को नीची दर से मजदूरी प्रदान की जाती है।

यह प्रणाली टेलर द्वारा सन् 1884 में आविष्कृत हो गई थी, जबकि उन्होंने इसको फिलाडेलफिया के मिडवैल स्टील में प्रयोग किया था। टेलर के विचारानुसार इसका प्रयोग वहीं करना चाहिये जहाँ यह व्यावहारिक हो तथा प्रमाप सम्बन्धी अन्य सभी बातें पूर्ण हों। टेलर की यह प्रणाली कुशल श्रमिकों के लिये विशेष रूप से प्रेरणात्मक है, क्योंकि ऊंची दर के द्वारा उनको अपने परिश्रम का पूर्ण पुरस्कार प्राप्त हो जाता है। परन्तु जो श्रमिक कार्य-कुशल नहीं होते हैं, उन्हें भुगतान की नीची दर द्वारा उपयुक्त दण्ड भी मिल जाता है। आजकल टेलर की प्रणाली केवल अध्ययन का विषय रह गई है, व्यावहारिक दृष्टि से इसका उपयोग नहीं होता है।

  1. मेरिक प्रणाली (Marric’s Plan) : मेरिक प्रणाली टेलर प्रणाली के बिल्कुल अनुरूप है। अन्तर केवल इतना है कि इसमें मजदूरी की दरें दो के स्थान पर तीन होती हैं। उदाहरणार्थ प्रथम प्रमाप कार्य के 63% पर, द्वितीय प्रमाप कार्य पर, तृतीय प्रमाप कार्य से अधिक पर। इस प्रकार यह योजना मजूदरों को तीन भागों में विभाजित करती है नवीन श्रमिक औसत श्रमिक तथा उच्च श्रेणी के श्रमिक।
  2. इमर्सन दक्षता प्रणाली (Emerson’s Efficiency Plan): गैण्ट प्रणाली के समान इस प्रणाली में भी श्रमिकों को उसके कार्य का लेखा-जोखा किए बिना दैनिक मजदूरी का आश्वासन होता है। इमर्सन प्रणाली की गैण्ट प्रणाली से तुलना में एक विशेषता यह है कि कार्य- पूर्ति में सुधार के साथ दिन-दर से इकाई दर में परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे होता है तथा पारिश्रमिक दक्षता (Efficiency) के आधार पर निश्चित किया जाता है। श्रमिक की दक्षता वह अनुपात है जो निर्धारित समय तक उसको कार्य करने में लगे समय के मध्य होता है। जो श्रमिक 66.7 प्रतिशत दक्षता से कम प्राप्त करते हैं, उन्हें बिना अधिलाभांश (Bonus) के दैनिक मजदूरी प्रदान की जाती है। इससे ऊपर अधिक उत्पादन के लिए एक निश्चित अनुपात से प्रगामी (Progressive) पैमाने से अधिलाभांश प्रदान किया जाता है।
  3. गैण्ट अधिलाभांश प्रणाली (Grand Bonus Plan) : हैल्स प्रणाली के समान गैण्ट प्रणाली भी धीमी गति से कार्य करने वाले श्रमिकों को प्रति घंटा की दर से तथा तीव्र गति से कार्य करने वाले श्रमिकों को इकाई दर से मजदूरी प्रदान करती है। यह प्रणाली टेलर योजना के समान प्रमाप तक पहुंचने में समर्थ एवं असमर्थ श्रमिकों में निश्चित भेद करती है। यह प्रभावी टेलर योजना से प्रकार से भिन्न है। यह सब श्रमिकों को प्रति घण्टा दर आश्वासन प्रदान करती है। जिसकी व्यवस्था टेलर प्रणाली में नहीं है। गैण्ट के मतानुसार, “यदि कोई व्यक्ति आदेशों के अनुसार चले और अपने दिन भर के लिए एक निश्चित कार्यभार को, जो प्रथम कोटि की कार्य पूर्ति को सूचित करता है पूर्ण कर लेता है तो उसे दैनिक दर के अतिरिक्त, जो प्रत्येक दशा में प्राप्त होती है, एक निश्चित अधिलाभांश (Bonus) भी दिया जाता है। परन्तु यदि दिन के अन्त तक वह कार्य पूर्ण न कर सके तो उसे अधिलाभांश प्राप्त नहीं होता है, केवल दिन की मजूदरी प्राप्त होती है।” यह अधिलाभांश 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक होता है और इसका गणित, दिन के अन्त में लगाते हैं। प्रारम्भ में तो इसके अन्तर्गत बचाए हुए समय से मूल्य के बितरण में श्रमिकों और कम्पनी के साथ-साथ फोरमैन को भी भाग प्राप्त होता था ताकि वह धीरे कार्य करने वाले श्रमिकों को कार्य तीव्र गति से करने में सहायता प्रदान करे और इस प्रकार पूर्ण क्षमता तक साधनों का प्रयोग हो सके।

इस प्रणाली में समय में होने वाली प्रत्येक कमी से तात्पर्य है आय में आगामी वृद्धि। यही कारण है कि गैण्ट प्रणाली को ‘प्रगामी’ दर प्रणाली भी कहते हैं।

इस योजना में विशेष दोष यह है कि प्रमाप-विन्दु पर मजदूरी में एकदम वृद्धि हो जाती है, इस कठिनाई को दूर करने की दृष्टि से इमर्सन प्रणाली के समान इसमें भी 62.5 प्रतिशत अथवा 66.7 प्रतिशत से दक्षता पुरस्कार प्रारम्भ किया जाए।

  1. बेडो प्रणाली (Bedau’s Plan) : बेडो प्रणाली को अंक प्रणाली भी कहते हैं। यह सम्भव है कि एक कारखाने में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिये प्रेरणात्मक योजनायें लागू की जाये। ऐसी परिस्थितियों में नियोजकों को यह ध्यान रखना पड़ता है कि अधिलाभांश (Bonus) उपलब्ध करने से एक विभाग के श्रमिकों को सुविधा तथा दूसरों को असुविधा न हो। अतः जहाँ विभागों में श्रमिकों का स्थानान्तरण हो, वहाँ मजदूरी प्रणाली इस प्रकार की होनी चाहिए, जिसमें कोई श्रमिक हानि में न रहे। अतः यह अति आवश्यक हो जाता है कि जिन प्रमापों पर एक दर से धनराशि प्रदान की जाती है, उनकी उपलब्धि सबके लिए समान होनी चाहिए अर्थात् कार्य- भार की असुविधा को मापने के लिए एक सामान्य मापक होना चाहिए।

बेडो प्रणाली यह मापक प्रदान करती है। इस प्रणाली में एक अंक या बेडो (संक्षेप में (B)) वह कार्य करता है जो एक व्यक्ति एक मिनट में पूर्ण कर लेता है। ‘B’ में साधारण विश्राम और शान्ति की व्यवस्था रहती है, जिसमें प्रमाप सामान्य हो। इसमें कार्यांश की असुविधा या कठिनाई को ‘B’ संख्या के रूप में नापते हैं और प्रमाप समय में प्रत्येक ‘B’ के लिए एक मिनट रखते हैं। मजदूरी की दर भी मिनट के आधार पर ज्ञात कर लेते हैं। इस प्रकार कार्यभार की परिभाषा 60 x ‘B’ घण्टें होती है। इस प्रकार 9 घंटे के दिन में यह 540 ‘B’ होती है। यदि श्रमिक दिन में 540B का जाता है। प्रमाप के नीचे प्रति घण्टा गारण्टी की हुई मजूदरी प्राप्त होती है। उसे प्रत्याजि (Premium) प्राप्त होती है जो सामान्यतः चा 75ोती है। प्रत्येक श्रमिक द्वारा उत्पादित ‘B’ की संख्या और जो कुछ इसने धनराशि की है, उसकी मात्रा प्रतिदिन लिख ली जाती है, जिसको प्रत्येक श्रमिक देख सकता है।

इस प्रकार हम कहते है कि मजदूरी भुगतान की उपर्युक्त सभी प्रेरणात्मक प्रणालियों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनमें, रीवन, इससैन प्रणालियाँ अधिक प्रयोग में लायी जाती हैं।

  1. हेन्स प्रव्याजि प्रणाली (Halsey Premium Plan) –

इस प्रणाली को प्रकाश में लाने का श्रेय एफ. ए. हैल्से को है। इस प्रणाली से उत्पादन का प्रमाप तथा उसके लिये समय निश्चित कर दिया जाता है। निश्चित समय के अन्दर उत्पादन में प्रमाप के अनुरूप कार्य करने पर श्रमिकों को निश्चित मजदूरी प्राप्त होती है, परन्तु यदि श्रमिक निश्चित समय पूर्व कार्य समाप्त कर लेता है तो उसके शेष बचे समय के लिये अतिरिक्त मजदूरी प्रदान की जाती है।

इस प्रकार इस पद्धति से नियोजन तथा श्रमिक दोनों का लाभ होता है। यह योजना ‘विभाजित अधिलाभ’ या ’50-50′ योजना के नाम से भी जानी जाती है। इंग्लैंड में इस योजना के समान ही वेबर प्रणाली है, जो कि काफी प्रचलित है।

हैल्से प्रणाली के गुण (Merits of Halsay Plan) –

इस प्रणाली के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-

(1) इस प्रणाली को प्रारम्भ करना अत्यन्त सरल है।

(2) इस बचे समय के लाभ को नियोजन को श्रमिकों में विभाजित कर, इसमें अधिलाभांश की दर स्थायी कर दी जाती है। इस प्रकार इससे दोनों पक्षों को लाभ होता है।

(3) इस प्रणाली में यद्यपि शेष बचे समय की मजदूरी का भाग नियोजन को भी प्राप्त होता है, परन्तु इसमें श्रमिकों को लाभ मिलता है उससे वह सन्तुष्ट हो जाता है। इस प्रकार यह प्रणाली मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

हैल्से प्रणाली के दोष (Demerits of Halsay Plan)-

हैसे प्रणाली अवगुणों से रहित नहीं है तथा उसमें भी अनेक अवगुण यह हैं, जो निम्नलिखित हैं-

(i) इस प्रणाली का सबसे बड़ा अवगुण यह है कि अवैज्ञानिक रीति से निर्धारित किये गये प्रमाप समय के आधार पर इसमें कार्य दर निश्चित की जाती है। नये प्रमाप निर्धारित करने की अपेक्षा यह पिछले कार्य पर भी निर्भर रहती है।

(ii) शेष बचे समय की मजदूरी को श्रम और पूंजी के बीच विभाजित करने के औचित्य पर भी आपत्तियों की इस प्रणाली के अन्तर्गत कार्य करने वाले श्रमिक तो अत्यधिक परिश्रम कर थोड़ा ही लाभांश प्राप्त करें तथा समयानुसार प्रणाली के अन्तर्गत कार्य करने वाले कामचोरी करें तथा मजदूरी पूरी प्राप्त करें।

(iii) प्रशासन की दृष्टि से भी इस प्रणाली में अवगुण हैं। इससे निश्चित प्रमाप तक उत्पादन करने के पश्चात् इससे अधिक उत्पादन करने या न करने का निश्चय श्रमिक के ऊपर रहता है।

  1. रोवन प्रब्याजि प्रणाली (Rowan Premium Plan) : रोवन प्रणाली को प्रकाश में लाने का श्रेय ग्लासग के निवासी जेम्स रोवन (James Rowan) को है। इसमें श्रमिक की समयानुसार न्यूनतम मजूदरी निश्चित कर दी जाती है। इसके पश्चात् प्रत्येक कार्य के लिये प्रमाप समय निश्चित कर दिया जाता है और श्रमिक कार्य को समाप्त कर लेता है तो उसको प्रमाप- समय तथा शेष बचे समय के अनुपात में अधिलाभांश दिया जाता है।

इस प्रणाली में हैल्से प्रणाली से अधिक अधिलाभांश प्राप्त होता है। परन्तु यह प्रणाली उसी समय तक अधिक अधिलाभांश का आयोजन करती है जब तक कि बचाया गया समय 50% से कम रहते है। 50% पर हैल्से तथा रोबिन, दोनों प्रणालियों में समान लाभांश मिलता है और यदि बचाया गया लाभांश 50% से अधिक होता है तो हैल्से योजना इस दृष्टि से अधिक लाभांश प्रदान करती है।

रोवन प्रणाली श्रमिकों के लिये उतनी लाभदायी नहीं है जितनी कि हैल्से प्रणाली। हैल्से प्रणाली में नियोजन की दृष्टि से प्रमुख दोष यह है कि इसमें अपेक्षाकृत ऊँची मजदूरियाँ प्राप्त करना सम्भव है, क्योंकि इसमें श्रमिक को बढ़ती हुई धनराशि का एक निश्चित प्रतिशत मिलता है। रोवन प्रणाली में घटने वाली धनराशि का बढ़ने वाले अनुपात में अधिलाभांश प्राप्त होती है, किन्तु यदि बचाया हुआ समय अधिक नहीं है तो वहाँ रोवन प्रणाली लाभदायक नहीं होता। विलियम ऐशले के मतानुसार, “लिये हुए समय का वही अनुपात जो बचाये हुये समय को हो” में न्यूनतम की कोई तर्कसंगत व्याख्या नहीं होती है। श्रमिक अपनी मजदूरी की गणना समझने में भी असमर्थ रहता है। अतः यह प्रणाली उनमें अधिक लोकप्रिय नहीं है।

हैल्से तथा रोवन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study of Halsay & Rowan Plans)–

हैल्से एवं रोवन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन करने के पश्चात् अप्रलिखित तथ्य स्पष्ट होते हैं।

(1) प्रमापित समय का आधे से कम समय बचाने की स्थिति में रोवन पद्धति में, प्रब्याजि की दर हैल्से पद्धति की अपेक्षा अधिक रहती है।

(2) यदि बचाया गया समय प्रमापित समय के आधे से अधिक हो जाता है तो हैल्से पद्धति में प्रव्याजि की दर रोवन पद्धति की अपेक्षा अधिक रहती है।

(3) हैल्से योजना में अधिक कार्य की स्थिति में वेतन दुगुना तक हो जाता है जबकि रोवन पद्धति में ऐसा कभी नहीं हो सकता।

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Pankaja Singh

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