विपणन प्रबन्ध

वितरण वाहिका के चुनाव को प्रभावित करने वाले तत्व | Factors affecting the Choice of Channels of Distribution in Hindi

वितरण वाहिका के चुनाव को प्रभावित करने वाले तत्व | Factors affecting the Choice of Channels of Distribution in Hindi

वितरण वाहिका के चुनाव को प्रभावित करने वाले तत्व

(Factors affecting the Choice of Channels of Distribution)

वितरण वाहिका के चयन सम्बन्धित निर्णय को अनेक तत्व प्रभावित करते हैं। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन तत्वों का निम्न शीर्षकों में वर्गीकरण किया जा सकता है – (1) वस्तु सम्बन्धी तत्व (2) उपभोक्ता बाजार सम्बन्धी तत्व (3) कम्पनी या उपक्रम सम्बन्धी तत्व (4) मध्यस्थ सम्बन्धी तत्व (5) वातावरण सम्बन्धी तत्व। इनका विवेचन निम्नलिखित हैं-

(I) वस्तु या उत्पाद सम्बन्धी तत्व

(Product Considerations)

संस्था के द्वारा उत्पादित वस्तु के गुण, विशेषतायें तथा प्रकृति आदि तत्व वितरण वाहिका के चयन को प्रभावित करते हैं। इनका वर्णन निम्नलिखित हैं।

  1. प्रति इकाई कीमत (Selling Price Per Unit) – सामान्यतः वस्तु की प्रति इकाई कीमत कम होने पर वितरण वाहिका लम्बी होती है, जैसे- सिगरेट, माचिस आदि। इसके विपरीत इकाई कीमत अधिक होने पर वितरण वाहिका अपेक्षाकृत छोटी होती है, जैसे टेलीविजन आदि।
  2. वस्तु की नश्वरता (Product’s Perishability) – शीघ्र नावान वस्तुओं, जैसे – सब्जी, फल, बर्फ आदि के लिए वितरण वाहिका अपेक्षकृत छोटी होती है। इसके विपरीत यदि वस्तु नाश्वान प्रकृति की नहीं है तो वितरण मार्ग लम्बा हो सकता है।
  3. वजन (Weight) – भारी वस्तुओं के भौतिक हस्तान्तरण में अधिक लागत आती है। अतः इनका विक्रय प्रायः उत्पादक द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। अतः वितरण वाहिका छोटी होती है और जिन वस्तुओं का वजन कम होता है उसकी वितरण वाहिका लम्बी होती है।
  4. तकनीकी प्रकृति (Technical Nature) – यदि वस्तु का स्वभाव तकनीकी है तो बेचने के लिए विशिष्ट तकनीकी ज्ञान, अनुभव और विक्रय से पूर्व एवं विक्रयोपरान्त सेवाओं की आवश्यकता होती है। अतः तकनीकी वस्तु को छोटी वितरण वाहिका द्वारा अथवा उत्पादक द्वारा अपने शोरूम खोलकर बेचना अधिक श्रेयस्कर रहता है।
  5. आदेशित अथवा प्रभावित वस्तुयें (Ordered or Standardised Products)- जो वस्तुयें ग्राहकों के आदेशों के अनुसार बनायी जाती हैं उनको उत्पादक द्वारा उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बेचा जाता है और प्रमाणित वस्तुओं, जिनका आकार रंग, गुण, वजन आदि समान होता है, के लिए लम्बी वितरण वाहिका प्रयोग की जा सकती है।

(II) उपभोक्ता या बाजार सम्बन्धी तत्व

(Consumer or Marketing Factors)

वितरण वाहिकाओं के चयन को निम्नलिखित उपभोक्ता या बाजार सम्बन्धी तत्व भी प्रभावित करते हैं-

  1. उपभोक्ता या औद्योगिक बाजार (Consumer’s or Industrial Market)- यदि वस्तु का उपभोक्ता बाजार है तो वितरण वाहिका लम्बी हो सकती है अर्थात फुटकर व्यापारियों की सहायता ली जा सकती है। इसके विपरीत यदि वस्तु का औद्योगिक बाजार है तो वितरण वाहिका छोटी होती है क्योंकि ऐसी स्थिति में फुटकर व्यापारियों को वितरण वाहिका में सम्मिलित नहीं किया जाता है।
  2. उपभोक्ताओं की संख्या (Number of Consumers) – यदि उपभोक्ताओं की संख्या कम है तो उत्पादक अपने विक्रय प्रतिनिधियों द्वारा उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप में वस्तुएँ बेंच सकता है। इसके विपरीत यदि उपभोक्ताओं की संख्या अधिक है जैसे सिगरेट पीने वाले तो विक्रेता और फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से वस्तुयें बेचनी चाहिए।
  3. बाजार का भौगोलिक केन्द्रीयकरण (Geographical Concentration of Market) – यदि वस्तु के क्रेता काफी बड़े भौगोलिक क्षेत्र में बिखरे हुए हैं तो निर्माताओं को मध्यस्थों की सहायता लेनी चाहिए। इसके विपरीत, यदि वस्तु के क्रेता किसी एक विशेष क्षेत्र में ही केन्द्रित हों तो निर्माता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से विक्रय कार्य कर सकता है या इस कार्य के लिए अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है।
  4. आदेशों का आकार (Size of Orders) – यदि निर्माता द्वारा अपना उत्पाद कुछ ही बड़े भण्डारों को बड़ी मात्रा में विक्रय किया जाता है तो ऐसा निर्माता प्रत्यक्ष रूप से विक्रय कार्य कर सकता है। इसके विपरीत छोटे-छोटे भण्डारों को विक्रय करने के लिए निर्माता को थोक व्यापारियों की सहायता लेनी चाहिए।
  5. ग्राहकों की क्रय आदतें (Customers Buying Habits) – ग्राहकों की क्रय आदतें भी वितरण वाहिका के चुनाव पर प्रभाव डालती हैं, जैसे- साख सुविधायें, एक स्थान पर सब वस्तुयें क्रय करने की इच्छा, विक्रेताओं की व्यक्तिगत सेवाओं को प्राप्त करने की इच्छा आदि।

(III) कम्पनी या उपक्रम सम्बन्धी तत्व

(Company or Enterprise Factors)

वितरण वाहिका के चयन को प्रभावित करने वाले कम्पनी या उपक्रम सम्बन्धी तत्व निम्नलिखित हैं-

  1. वित्तीय संसाधन (Financial Resources) – यदि कम्पनी के पास पर्याप्त मात्रा में वित्तीय साधन है तो मध्यस्थों की आवश्यकता कम होती है। इसके विपरीत यदि वित्तीय साधन अपर्याप्त हैं तो मध्यस्थों की सहायता ली जानी चाहिए।
  2. विपणन अनुभव एवं प्रबन्ध की योग्यता ( Marketing Experience and Ability of Management) – एक कम्पनी जिसके पास विपणन अनुभव नहीं है एवं प्रबन्ध भी अधिक कुशल नहीं है तो उसे मध्यस्थों की सहायता लेनी चाहिए। इसके विपरीत, एक ऐसी कम्पनी जिसके पास पर्याप्त विपणन अनुभव है एवं उसके पास कुशल प्रबन्धक है तो वह प्रत्यक्ष विक्रय करे सकती है।
  3. नियन्त्रण की इच्छा (Desire for Control) – यदि निर्माता विपणन वाहिका पर नियन्त्रण रखना चाहता है तो विरण वाहिका को छोटा रखा जाता है। जैसे- स्कूटर की बिक्री के लिए नियन्त्रण डीलरों की नियुक्ति की जाती है।
  4. कम्पनी का आकार (Size of the Company) – यदि कम्पनी में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है, उसके पास पर्याप्त वित्तीय साधन एवं प्रबन्ध सम्बन्ध योग्यता है तो ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष विक्रय करना उचित रहता है या छोटी वितरण वाहिका को चुना जा सकता है।

(IV) मध्यस्थ सम्बन्धी तत्व

(Middlemen Considerations)

वितरण वाहिका के चयन को प्रभावित करने वाले मध्यस्थ सम्बन्धी तत्व निम्नांकित हैं-

  1. प्रदान की जाने वाली सेवायें (Services Provided by Middlemen) – निर्माता को ऐसे मध्यस्थों का चयन करना चाहिए जो कि उन सेवाओं को देने के लिए तैयार हो जिन्हें निर्माता स्वयं प्रदान करने की स्थिति में न हों।
  2. मध्यस्थों का दृष्टिकोण (Attitude of Middlemen) – निर्माता की नीतियों के प्रति मध्यस्थों का दृष्टिकोण भी वितरण वाहिका के चुनाव को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए कुछ मध्यस्थ अपनी इच्छानुसार वस्तु की कीमत निर्धारित करना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में मध्यस्थ उस निर्माता का माल अपने यहाँ नहीं रखना चाहते जो पुनः विक्रय कीमत अनुसरण नीति का प्रयोग करते हैं। ऐसी स्थिति में वितरण वाहिका का चुनाव सीमित होता है।
  3. विक्रय सम्भावनायें (Sales Possibilities) – निर्माता को वहीं वितरणवाहिका चयन करनी चाहिए जिनसे सर्वाधिक विक्रय होने की सम्भावना हो। लेकिन इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि वितरण माध्यम महंगा न पड़े तथा साथ-साथ निर्माता का मध्यस्थों पर आवश्यक नियन्त्रण बना रहे।
  4. लागत तत्व (Cost Consideration) – वितरण वाहिका का चुनाव करते समय वितरण लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए और जिन वितरण साधनों से लागत कम पड़ती है उनको अपनाया जाना चाहिए। लेकिन हमें माल व विक्रय बाद की सेवाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।

(V) वातावरण सम्बन्धी तत्व

(Environmental Factors)

वितरण स्रोतों का चुनाव करते समय बाह्य तत्वों जैसे आर्थिक, सामाजिक एवं वैधानिक आदि तत्वों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उदाहरण के लिए मन्दी के समय में ऐसे वातावरण स्रोतों को चुनना चाहिए, जिनके द्वारा न्यूनतम कीमत पर अन्तिम उपभोक्ताओं पर वस्तु पहुँचायी जा सकें। मध्यस्थों के प्रति समाज का क्या दृष्टिकोण है। यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए। कभी-कभीं वितरण वाहिका के चयन को कानूनी प्रतिबंध भी प्रभावित करते हैं जैसे – नियन्त्रित वस्तुयें, शराब आदि के वितरण स्रोतों का चुनाव सरकारी नीति के अनुकूल ही किया जाता है।

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Pankaja Singh

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