विपणन प्रबन्ध

संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करने वाले घटक | Factors Influencing Promotion Mix in Hindi

संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करने वाले घटक | Factors Influencing Promotion Mix in Hindi

संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करने वाले घटक या तत्व

(Factors Influencing Promotion Mix)

संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करने वाले कुछ प्रमुख घटक या तत्व इस प्रकार हैं-

  1. मांग की वर्तमान स्थिति (Present State of Demand)- किसी उत्पाद की मांग की वर्तमान स्थिति उस उत्पाद के संवर्द्धन मिश्रण की प्रकृति को बहुत सीमा तक प्रभावित करती है। यदि किसी उत्पाद की ग्राहकों को पहले से ही जानकारी है तथा उस उत्पाद की पहले से ही अच्छी मांग है तो संवर्द्धन मिश्रण ऐसे तैयार किया जायेगा ताकि ग्राहक को उस उत्पाद की याद सदैव बनी रह सके एवं वे दूसरे प्रतिस्पर्धी ब्राण्ड की ओर आकर्षित न हो सके। उदाहरणार्थ मारुति कार के बारे में ग्राहक पहले से ही जानते हैं और उसकी बाजार में मांग भी अच्छी है। ऐसी स्थिति में मारुति कार का संवर्द्धन मिश्रण ऐसा होना चाहिए कि ग्राहकों को उस कार का नाम सदैव याद रहे तथा वह दूसरी प्रतिस्पर्धी ब्राण्ड की कार के प्रति आकर्षित न हो सके।
  2. उत्पाद की प्रकृति (Nature of Product)- उत्पाद की प्रकृति संवर्द्धन मिश्रण को बहुत बड़ी सीमा तक प्रभावित करती है। प्रकृति के आधार पर उत्पाद कई प्रकार के होते हैं जैसे- सुविधा उत्पाद, शॉपिंग उत्पाद, विशिष्ट उत्पादन आदि। सुविधा उत्पाद कहीं भी, कभी भी क्रय कर लिए जाते हैं। शॉपिंग उत्पाद एवं विशिष्ट उत्पाद सोच-समझकर नियोजित रूप से क्रय किये जाते हैं। इन सभी उत्पादों के लिए संवर्द्धन मिश्रण एक समान नहीं हो सकता है। सुविधा उत्पाद के संवर्द्धन मिश्रण विज्ञापन एवं विक्रय संवर्द्धन साधनों का महत्व अधिक होता है। किन्तु शॉपिंग उत्पाद या विशिष्ट उत्पादन के संवर्द्धन मिश्रण में व्यक्तिगत विक्रय एवं विक्रय संवर्द्धन का महत्व बढ़ जाता है।
  3. उत्पाद जीवन चक्र की अवस्था (Stage of Product Life Cycle)- संवर्द्धन मिश्रण को उत्पाद जीवन चक्र की अवस्था भी प्रभावित करती है। यदि उत्पाद बाजार में प्रस्तुत ही किया गया है और ग्राहक उसकी प्रकृति, उपयोगिता आदि को जानते ही नहीं हैं तो विपणनकर्त्ता को उस उत्पाद के लिए बाजार का सृजन करना होगा। फलतः संवर्द्धन मिश्रण अत्यन्त व्यापक होगा। इसमें बहुत अधिक धन भी व्यय करना होगा। अकेले विज्ञापन से ही काम नहीं चलेगा। विक्रय संवर्द्धन (प्रीमियम, नमूने, प्रतियोगिताएँ, कार्य प्रदर्शन या प्रदर्शनियाँ आदि) व्यक्तिगत विक्रय, प्रचार आदि सभी साधनों का समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप उपयोग करना होगा।

उत्पाद की परिपक्वता की अवस्था में संस्था के समक्ष उत्पाद की मांग को बनाये रखना ही एकमात्र लक्ष्य होता है। ऐसे में संवर्द्धन मिश्रण में अन्तर होगा तथा संवर्द्धन मिश्रण के घटकों का अनुपात बदल जायेगा। ऐसी अवस्था में विपणन का महत्व सामान्यतः बढ़ जाता है। विक्रय संवर्द्धन का महत्व भी बना रहता है, किन्तु उसकी विधियों या साधनों के मिश्रण में अन्तर करना ही पड़ता है।

जब उत्पाद पतन की अवस्था की ओर बढ़ने लगता है तब उसके विक्रय में निरन्तर गिरावट आने लगती है। ऐसे में विज्ञापन एवं विक्रय संवर्द्धन संसाधन भी बहुत प्रभावी नहीं रह जाता है। ऐसी अवस्था में संवर्द्धन मिश्रण का स्वरूप बिल्कुल बदल जाता है। संस्थएँ इसके बजट को बहुत कम कर देती हैं। कभी-कभी तो इस बजट को लगभग समाप्त ही कर देती हैं।

  1. बाजार का भौगोलिक क्षेत्र (Geographical Area of the Market)- बाजार का भौगोलिक क्षेत्र भी संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करता है। यदि किसी उत्पाद की मांग किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या सीमित भौगोलिक क्षेत्र (जैसे एक जिला, राज्य या प्रदेश) तक ही है तो कुछ विशेष संवर्द्धन साधनों या व्यक्तिगत विक्रय का उपयोग किया जा सकता है। किन्तु यदि बाजार क्षेत्र बहुत विस्तृत है। (जैसे कई शहर, राज्य या पूरा देश) तो भिन्न संवर्द्धन मिश्रण का उपयोग करना होगा। ऐसे में विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्द्धन, प्रचार सभी की भूमिका बढ़ जायेगी। परिणाम स्वरूप सभी को संवर्द्धन में सम्मिलित करना पड़ेगा।
  2. क्रेता की क्रय हेतु पहल (Buyer’s Initiative to Buy)- कुछ उत्पाद का विक्रय तभी सम्भव होता है जबकि क्रेता स्वयं पहल करता है या स्वयं क्रय करने का निर्णय करता है। उदाहरणार्थ भारी निवेश वाले उत्पाद, पूर्णतः व्यक्तिगत उपयोग के उत्पाद जैसे सहयोग निधियों, बीमापत्रों, अंशों, स्थायी सम्पत्तियों आदि में निवेश। ऐसे सभी उत्पादों के लिए संवर्द्धन मिश्रण एक विशेष प्रकार का होता है। जब क्रेता ऐसे किसी उत्पाद के क्रय की पहल करता है तो विपणनक उसी समय अपना संवर्द्धन मिश्रण तैयार कर लेता है और उसमें आवश्यकतानुसार संशोधन या परिवर्तन भी कर लेता है।
  3. उत्पाद की उपयोगिता के प्रमाण की आवश्यकता (Need for Proof of Utility of the Product) – कई उत्पादों की मांग उत्पन्न करने हेतु उनकी उपयोगिता को प्रभावित करना बहुत आवश्यक हो जाता है। लोग कुछ उत्पादों को तभी क्रय करना चाहते हैं जबकि वे उनकी उपयोगिता से संतुष्ट हो जाए। ऐसे उत्पादों के लिए कबेल विज्ञापन पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे उत्पदों के संवर्द्धन मिश्रण में क्रियात्मक प्रदर्शन, व्यापारिक मेले एवं प्रदर्शनियों, जाँच उपयोग या संचालन नमूने के वितरण का स्थान अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उदाहरणार्थ, वाहनों के संवर्द्धन मिश्रण में ‘टेस्ट ड्राइव’ का तथा पान मसाले, गुटके, बीड़ी, सिगरेट, वाशिंग पाउण्डर, चाय, कॉफी आदि के संवर्द्धन मिश्रण में नमूनों के वितरण का महत्व बढ़ रहा है। दूसरी ओर, जिनके उत्पादों की उपयोगिता के प्रमाण की आवश्यकता नहीं पड़ती है उनका संवर्द्धन मिश्रण भिन्न प्रकार का होता है। इनमें विज्ञापन का महत्व अधिक होता है।
  4. उत्पादक के ग्राहक (Customers of the Product)- उत्पाद के ग्राहक भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। यह उत्पाद की उपयोगिता पर निर्भर करता है किन्तु सामान्यतः उत्पादक के ग्राहकों को मोटे रूप से दो वर्गों में बांटा जा सकता है। प्रथम, घरेलू उपभोक्ता ग्राहक तथा द्वितीय औद्योगिक ग्राहक।

जब उत्पाद का ग्राहक घरेलू उपभोक्ता होता है, तो उत्पाद का व्यापक विज्ञापन करना पड़ता है। कई बार विक्रय संवर्द्धन के साधनों (यथा प्रीमियम, नमूने, प्रतियोगिताएँ, मूल्यों में कटौती आदि) का सहारा भी लेना पड़ता है।

किन्तु जब उत्पाद औद्योगिक या व्यावसायिक ग्राहकों को विक्रय किया जाना है तो संवर्द्धन मिश्रण बहुत कुछ बदल जाता है। विज्ञापन के माध्यमों में सामान्य समाचार पत्रों पत्रिकाओं का कम और औद्योगिक या व्यावसायिक समाचार पत्र-पत्रिकाओं का उपयोग अधिक किया जाता है। उपभोक्ता संवर्द्धन विधियों के स्थान पर व्यापारी संवर्द्धन विधियों का उपयोग बढ़ जाता है। औद्योगिक मेले एवं प्रदर्शनियों पर विशेष ध्यान दिया जाने लगता है। ट्रेड डायरेक्टरियों या यलो पेजेज जैसी डायरेक्टरियों में विज्ञापन की प्रवृत्ति बढ़ने लगती है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि उत्पाद के ग्राहक भी संवर्द्धन मिश्रण की प्रभावित करते हैं।

  1. धन की उपलब्धता (Availability of Funds)- धन या कोषों की उपलब्धता भी संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करती है। कई संस्थाओं का संवर्द्धन मिश्रण उपर्युक्त वर्णित घटकों से नहीं अपितु केवल सीमित संसाधनों से ही प्रभावित हो जाता है। पर्याप्त वित्तीय संसाधनों वाली संस्थाओं का संवर्द्धन मिश्रण उपर्युक्त सभी घटकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
  2. प्रतिस्पर्धियों का मिश्रण (Competitors’ Mix)- कभी-कभी कुछ संस्थाओं का संवर्द्धन मिश्रण प्रतिस्पर्धा संस्थाओं के संवर्द्धन मिश्रण से भी प्रभावित होता है। यहीं कारण है कि कुछ संस्थाएँ कुछ संवर्द्धन साधनों का केवल इसलिए उपयोग करती है कि उनकी प्रतिस्पर्धी संस्थाएं उनका उपयोग कर रही हैं। तार्किक दृष्टि से ऐसा करना ठीक नहीं लगता किन्तु व्यवहार में कई विपणनकर्त्ताओं को ऐसा करना ही पड़ता है।
  3. आचार संहिता (Code of Conduct) – संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करने वाला एक और नया घटक है आचार संहिताएँ। कई समाचार पत्रों पत्रिकाओं, इलेक्ट्रोनिक मीडिया साधनों, भारतीय विज्ञापन परिषद, दूरदर्शन आदि ने कुछ आचार संहिताओं का निर्माण किया है। इनके अन्तर्गत कई ऐसी सकारात्मक एवं नकारात्मक बातें हैं जिनके अनुसार विज्ञापक एवं संचार माध्यम कुछ विज्ञापन प्रकाशित करवा सकते हैं और कुछ नहीं। फलतः कई संस्थाओं का संवर्द्धन मिश्रण इन आचार संहिताओं के प्रावधानों से प्रभावित होता है।
  4. कानूनी प्रावधान (Legal Provisions) – आधुनिक युग में संवर्द्धन मिश्रण का कानूनी प्रावधानों से नियमन किया जाता है। कई उत्पादों का विज्ञापन करना सम्भव नहीं होता है। इसी प्रकार कुछ उत्पादों के संवर्द्धन पर कुछ अन्य प्रतिबंध हो सकते हैं। अतः स्पष्ट है कि कानूनी प्रावधान भी संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करते हैं।
  5. उत्पाद का आकर्षण (Attraction of the Product)- उत्पाद की आकर्षण क्षमता उसके संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित किये बिना नहीं रहती है। कुछ उत्पाद ऐसे होते हैं जिन्हें लोग दूसरों के घरों में, राह चलते दुकानों या शोरूम में देखते ही उनके प्रति आकर्षित हो जाते हैं और उनके क्रय करने हेतु लालायित हो जाते हैं। ऐसे उत्पादों के लिए व्यक्तिगत विक्रय एवं विक्रय संवर्द्धन प्रयासों की आवश्यकता न्यूनतम हो जाती है। ऐसे उत्पाद के आकर्षण को बनाये रखने के लिए विपणन का ही अधिक सहारा लिया जाता है।
  6. ग्राहक के लिए उत्पाद का महत्व (Importance of Product for the Customer)-ग्राहक के लिए उत्पाद का महत्व भी संवर्द्धानान्तमक मिश्रण को प्रभावित करता है। यदि किसी ग्राहक के लिए कार या वाशिंग मशीन अत्यन्त महत्वपूर्ण है और वह उसे क्रय करना जीवन की बहुत महत्वपूर्ण घटना मानता है तो उस पर केवल विज्ञापन या व्यक्तिगत विक्रय का विशेष महत्व नहीं होगा। वह स्वंय उत्पाद के विकल्पों या वैकल्पिक ब्राण्डों को देखेगा-परखेगा। वह उस उत्पाद के बारे में अनेक स्रोतों से जानकारी एकत्र करेगा। वह स्वंय विपणनकर्त्ताओं को ढूंढ़ेगा। तब कहीं जाकर उस उत्पाद को खरीदेगा। अतः ग्राहक के जीवन में उत्पाद का महत्व संस्था के संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करेगा।
  7. ग्राहक तक पहुँचने की सम्भावना (Possibility of Accessibility to Customer) – विपणनकर्ता की ग्राहक तक पहुँचने की सम्भावना भी संवर्द्धन मिश्रण को प्रभावित करती है। कुछ ग्राहकों तक कोई भी विपणनकर्त्ता आसानी से जब चाहे पहुँच जाता है। ऐसे ग्राहों के लिए संवर्द्धन मिश्रण एक विशिष्ट प्रकार का होगा। इसमें विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन, व्यक्तिगत विक्रय द्वारा विक्रय आदि किसी भी साधन को संवर्द्धन मिश्रण में आसानी से सम्मिलित किया जा सकता है। किन्तु कुछ ग्राहक ऐसे होते हैं जिन तक पहुँचना बहुत ही कठिन होता है। ऐसे ग्राहकों में बड़े राजकीय अधिकारी, बड़े राजनेता, बड़े व्यावसायिक प्रबन्धक, प्रतिष्ठित डॉक्टर आदि आते हैं।

ऐसे ग्राहकों के लिए संवर्द्धन मिश्रण कुछ भिन्न प्रकार का ही तैयार करना पड़ता है। इस मिश्रण में व्यापारिक एवं पेशेवर पत्र-पत्रिकाएँ, इन्टरनेट, ई-मेल, व्यक्तिगत साक्षात्कार, व्यापारिक प्रदर्शनियाँ एवं मेले द्वारा विज्ञापन, सूचीपत्र आदि का महत्व बढ़ जाता है।

विपणन प्रबन्ध – महत्वपूर्ण लिंक

Disclaimer: e-gyan-vigyan.com केवल शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए बनाई गयी है। हम सिर्फ Internet पर पहले से उपलब्ध Link और Material provide करते है। यदि किसी भी तरह यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है तो Please हमे Mail करे- vigyanegyan@gmail.com

About the author

Pankaja Singh

Leave a Comment

error: Content is protected !!