विपणन प्रबन्ध

जनसम्पर्क की भूमिका | जनसम्पर्क का महत्व | Role or importance of Public Relations in Hindi

जनसम्पर्क की भूमिका | जनसम्पर्क का महत्व | Role or importance of Public Relations in Hindi

जनसम्पर्क की भूमिका या महत्व

(Role or importance of Public Relations)

जन सम्पर्क के बढ़ते महत्व तथा भूमिका की विवेचना निम्न शीर्षको के अन्तर्गत की जा सकती है –

  1. विभिन्न जन-समूहों से सम्पर्क स्थापित करना- व्यावसायिक संगठन में जनसम्पर्क कार्य का सर्वाधिक महत्व विभिन्न जन-समूहों से सम्पर्क स्थापित करने में है। व्यावसायिक संगठन का जन सम्पर्क विभाग ग्राहक संघों, श्रम संघों, व्यापार संघों, नागरिक संघों आदि से सम्पर्क स्थापित कर उनके विचारों तथा समस्याओं को जान सकता है, उनके प्रश्नों, शंकाओं एवं समस्याओं का समाधान कर सकता है। इसके साथ ही यह विभाग उनको संस्था के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा सकता है। इस प्रकार इन सभी समूहों के साथ द्विमार्गी संचार व्यवस्था स्थापित करके व्यावसायिक संगठन उन समूहों के साथ निकटतम सम्बन्ध स्थापित करने में सफल हो जाता है।
  2. उपभोक्ता को सूचित करना तथा शिक्षित करना- व्यावसायिक संगठन का जन सम्पर्क विभाग सभी उपभोक्ताओं या ग्राहकों को अपनी संस्था, उत्पादों, विक्रय संवर्द्धन योजनाओं आदि की जानकारी देता है। इसके अतिरिक्त वह अपने ग्राहकों को अपने उत्पादों के उपयोग की विधि, उत्पादों के प्रभावों आदि की जानकारी देकर उन्हें शिक्षित भी करता है।
  3. ग्राहकों की शिकायतों तथा समस्याओं का तत्काल निवारण करना- प्रत्येक व्यावसायिक संगठन की सफलता ग्राहकों की संतुष्टि पर टिकी होती है। अतः प्रत्येक व्यावसायिक संगठन ग्राहकों की शिकायतों एवं समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाकर उन्हें संतुष्ट करना चाहता है। इस कार्य में संस्था का जन सम्पर्क विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान दे सकता है तथा उन्हें संतुष्ट कर सकता है।
  4. संगठन के कार्यों एवं नीतियों के प्रभावों का मूल्यांकन करना- प्रत्येक व्यावसायिक संगठन अपनी नीतियों तथा कार्यों के प्रभावों का निरन्तर मूल्यांकन करके अपनी सफलता को सुनिश्चित कर सकता है। किन्तु इसके मूल्यांकन के लिए प्रभावकारी जन सम्पर्क होना आवश्यक है। जन सम्पर्क विभाग अपने संगठन की नीतियों एवं कार्यों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण आदि प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कर सकता है। इस अध्ययन के परिणामों के अनुसार ही यह विभाग अपने उच्च अधिकारियों को अपनी नीतियों एवं कार्यों में आवश्यक समायोजन एवं परिवर्तन करने का सुझाव दे सकता है।
  5. संस्था के कर्मचारियों को विनम्र व्यवहार का प्रशिक्षण देना- व्यावसायिक संगठन में जन सम्पर्क विभाग का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि यह विभाग न केवल स्वंय ही बाह्य व्यक्तियों या पक्षकारों के साथ बहुत ही विनम्र व्यवहार करता है, बल्कि यह संस्था के अन्य विभागों के कर्मचारियों को आगन्तुकों से बातचीत करने, उनसे टेलीफोन पर बातचीत करने, उनके साथ मित्रवत् सम्बन्ध स्थापित करने, व्यवहार में विनम्रता रखने तथा उनमें सहयोगपूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षण देता है। इससे सम्पूर्ण संस्था की ख्याति बढ़ती है और संस्था निरन्तर सफल होती जाती है।
  6. परिवर्तनों की जानकारी करना- आधुनिक व्यावसायिक जगत का एक ही आधारभूत लक्षण है कि इसमें निरन्तर परिवर्तन होते हैं। प्रत्येक व्यावसायिक संगठन को इन परिवर्तनों के प्रति सजग रहना होता है। साथ ही उनके अनुरूप ही अपनी नीतियों, कार्यों, उत्पादों तथा बाजार व्यूह रचना में परिवर्तन करना पड़ता है। इसमें जन सम्पर्क विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बाजार में प्रति क्षण होने वाले परिवर्तनों की यथा समय सूचना एकत्र करता रहता है और सम्बन्धित विभाग को उपलब्ध कराता है।
  7. संस्था की ख्याति का निर्माण करना- व्यावसायिक संगठनों की ख्याति के निर्माण में जन सम्पर्क विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह विभाग समय-समय पर संस्था की प्रगति, विक्रय शुद्धि, बहुराष्ट्रीय अनुबंधों, नये संयंत्रों की स्थापना, संयंत्रों का विस्तार एवं आधुनिकीकरण आदि से सम्बन्धित सूचनाएँ देकर संस्था की ख्याति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  8. उत्पादों की आपूर्ति में कमी के कारणों को स्पष्ट करना- कभी-कभी संस्था के उत्पादों की आपूर्ति मांग की तुलना में कम हो जाती है। ऐसा कई कारणों से हो जाता है। किन्तु जन सम्पर्क विभाग विज्ञप्तियों, समाचारों आदि के माध्यमों से ग्राहकों को वस्तुस्थिति समझा सकते हैं तथा संस्था की ख्याति पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को टाल सकते हैं।
  9. संस्था के विचारों के लिए समर्थन जुटाना- जन सम्पर्क विभाग तब बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जब किसी संस्था को अपने किसी विचार के लिए समर्थन जुटाना हो। उदाहरणार्थ, यदि कोई संस्था किसी सरकारी नीति अथवा कानून का विरोध करती है तो जन सम्पर्क विभाग उसके सम्बन्ध में प्रेस विज्ञप्तियाँ प्रसारित कर सकता है, समाचार पत्र सम्पादकों के नाम पत्र लिख सकता है, प्रेस कान्फ्रेन्स बुलवा सकता है। इससे संस्था के विचार सभी सम्बन्धित वर्गों तक पहुँच जाते हैं और संस्था अपने विचार के लिए उन सभी का समर्थन जुटाने में सफल हो सकती है।
  10. उत्पादों का प्रसार करना – जन सम्पर्क विभाग संस्था के उत्पादों का प्रचार करने में भी महत्वपूर्ण रूप से योगदान देता है। उत्पाद में हुए परिवर्तनों, उत्पादों के शोध परिणामों, उत्पादों के लिए नये डीलरों की नियुक्ति आदि की सूचना देकर जन सम्पर्क विभाग उत्पादों का प्रचार प्रसार रोकने में योगदान देता रहता है।
  11. संगठन में परिवर्तनों की जानकारी देना- प्रत्येक व्यावसायिक संगठन में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होते रहते हैं कभी उत्पादों में, कभी सेवाओं, तो कभी उच्च प्रबन्धकों में संस्था का जन सम्पर्क विभाग इन सभी की जन समुदाय को जानकारी भी दे देता है तथा संस्था को भी जन चर्चा में बनाये रखने में भी महत्वपूर्ण रूप से योगदान देता है।
  12. कर्मचारियों के साथ द्विमार्गी संचार व्यवस्था स्थापित करना- अच्छे जन सम्पर्क से संस्था के प्रबन्धकों तथा कर्मचारियों के बीच सदैव द्विमार्गी संचार व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे संस्था के कर्मचारियों की शिकायतों, समस्याओं, शंकाओं आदि की समुचित जानकारी उच्च प्रबन्धकों को होती रहती है तथा उनका समाधान भी यथा समय होता रहता है। इसी प्रकार संस्था की नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों, नियमों आदि में हुए परिवर्तनों की जानकारी भी कर्मचारियों को यथा समय होती रहती है। इससे कर्मचारियों में भ्रम एवं शंका उत्पन्न नहीं होती है। तथा संगठन में आपसी विश्वास का वातावरण निर्मित होता है।
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Pankaja Singh

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