विपणन प्रबन्ध

हरित विपणन की अवधारणा से आशय | हरित विणन की प्रकृति और क्षेत्र | Meaning of Green Marketing Concept in Hindi | Nature and Scope of Green Marketing in Hindi

हरित विपणन की अवधारणा से आशय | हरित विणन की प्रकृति और क्षेत्र | Meaning of Green Marketing Concept in Hindi | Nature and Scope of Green Marketing in Hindi

हरित विपणन की अवधारणा से आशय

(Meaning of Green Marketing Concept)

‘हरित विपणन’ की अवधारणा एक सात्विक विचार है, जिसका अवलम्बन ही संसार में विज्ञान और आध्यात्मिकता भौतिकवाद और उपभोगवाद, व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा और व्यावसायिक साहचर्य, आसुरी सभ्यता और देव-संस्कृति, प्राकृतिक और मानवीय पर्यावरण आदि के मध्य मंगलकारी सामंजस्य स्थापित कर सकता है तथा ऐसे सामंजस्य का अनुरक्षण सम्वर्द्धन कर सकता है। सम्पूर्ण संसार में आज एक भी राष्ट्र ऐसा नहीं है जिसका प्राकृतिक पर्यावरण असंतुलित न हो। पर्यावरण प्रदूषण की विभीषका ने मनुष्य जाति का ही नहीं अपितु अन्य प्राणियों का भी जीवन स्वास्थ्य, संतोष, शांति, विश्राम और आन्तरिक विकास की दृष्टि से प्रतिकूल बना दिया है। हर प्राणी जीवन की सार्थकता के यथार्थबोध से परे हो गया है। वैज्ञानिक प्रगति ने विपणन के क्षेत्र में नवाचारों को इतना व्यापक आकार एवं परिमाण दे दिया है कि एक ओर प्रतिस्पर्द्धा कण्ठछेदी बन गयी है और दूसरी ओर, उत्पाद-अप्रचलन, उत्पाद विभेदीकरण, अभिनव पैकेजिंग चमत्कारी विज्ञापन शैलियाँ आदि ईश्वर-प्रदत्त संसाधनों की बरबादी का बुनियादी कारण बनने लगे हैं। कुल मिलाकर उपभोक्ताओं का जीवन हर पहले से असुरक्षित हो रहा है, प्राकृतिक साधन नष्ट हो रहे हैं। सृष्टि का संतुलन बिगड़ रहा है, केवल कुछेक राष्ट्रों व जातियों का अखिल विश्व के संसाधनों पर एकाधिकार बढ़ रहा है, और ‘उत्तम जीवन’ की उपलब्धि अवरुद्ध हो रही है। इन जटिल दशाओं से छुटकारा दिलाने हेतु पर्यावरणवादियों ने एक आन्दोलन प्रारम्भ किया, जिसके प्रभाव के परिणामस्वरूप ‘हरित विपणन’ अवधारणा ने जन्म लिया है।

‘हरित विपणन’ अवधारणा विपणन क्षेत्र में प्रबन्धकों को विपणन के ऐसे तौर-तरीकों, नीतियों, कार्यक्रमों, उत्पाद-सेवाओं, शैलियों, लक्ष्यों, निर्णयों को अपनाने पर बल देने वाला चिन्तन है, जिनसे पर्यावरण का न केवल अनुकूल संरक्षण हो, अपितु संवर्द्धन भी हो ताकि हर प्राणी प्रकृति के उपहारों से निर्वाध लाभान्वित होता रह सके और समग्र जीवन- चेतना ऊर्ध्वगामी बन सके। अन्य शब्दों में, ‘हरित विपणन’ विपणन प्रबन्धन की वह नूतन विकास मान अवधारणा है जो विपणन के जरिये जीवन की गुणवत्ता के लक्ष्य की पूर्ति से सम्बन्ध रखती है। संक्षेप में ‘हरित विपणन’ पर्यावरण स्वच्छता और प्रदूषण नियन्त्रण का लक्ष्योन्मुखी अवधारणा है जो जीवन की गुणवत्ता को विपणन क्रियाकलापों के जरिये सुनिश्चित करने की उत्कृष्ट कामना से परिपूर्ण है। ‘हरित विपणन’ को ‘नव-उपभोक्तावाद’ या उपभोक्ता- अधिकार तथा ‘आधुनिक पर्यावरणवाद’ भी कहा गया है।

हरित विणन की प्रकृति और क्षेत्र

(Nature and Scope of Green Marketing)

‘हरित विपणन’ का क्षेत्र अधिक व्यापक है, जिसके अन्तर्गत निम्न को शामिल किया जाता है –

  1. पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन की बलवती इच्छा – ‘हरित विपणन’ विपणन क्षेत्र की एक ऐसी अवधारणा है जो पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन की बलवती इच्छा से अनुप्रेरित है। उपभोक्तावाद, उपभोक्ता संरक्षण एवं पर्यावरणवाद जैसी प्रवृत्तियों से हरित विपणन अवधारणा गहरे तक जुड़ी है।
  2. सामाजिक दायित्व- हरित विपणन में सामाजिक दायित्व, नैतिकता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुकूलतम प्रयोग, व्यावसायिक लाभार्जन के लक्ष्य, बेहतर जीवन की आकांक्षाएँ आदि भी प्रबल स्थान बनाये हुए हैं।
  3. उपभोक्ता संरक्षण- हरित विपणन उपभोक्ताओं के अधिकारों के सशक्तिकरण से सम्बन्ध रखता है ताकि उपभोक्ताओं को कोई हानि न हो। उपभोक्ता संरक्षण एवं उपभोक्तावाद सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों, स्वायत्तशासी, अर्द्ध सरकारी संगठनों एवं अभिकरणों को उपभोक्ता अधिकारों व हितों की सुरक्षा करने हेतु अधिकाधिक शक्तियाँ देने से भी सम्बन्ध रखता है।
  4. जीवन की गुणवत्ता से सम्बन्ध- हरित विपणन न केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों व हितों के संरक्षण-संवर्द्धन के प्रति विपणन प्रबन्धकों को जागरूक बनाता है, अपितु उन्हें जीवन की गुणवत्ता को व्यावहारिक धरातल पर उपलब्ध कराने की बात भी कहता है। इस दृष्टि से हरित विपणन व्यापक विचार है। जीवन की गुणवत्ता से आशय उपभोक्ता उत्पादों, सेवाओं की मात्रा तथा किस्म से ही नहीं बल्कि पर्यावरण की किस्म से भी है।
  5. पर्यावरणात्मक लागत- हरित विपणन अवधारणा के समर्थक चाहते हैं कि पर्यावरणात्मक लागत को भी उत्पादाकों और उपभोक्ताओं के निर्णय में सम्मिलित किया जाना चाहिए। विभिन्न प्रकार के वस्तुओं के क्रय-विक्रय पर इसका भी प्रभाव पड़ता है।
  6. यह अवधारणा पर्यावरणवाद से अधिक व्यापक- हरित विपणन अवधारणा यद्यपि पर्यावरणवादियों की पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जागरूकता से उत्पन्न हुई है, फिर भी यह अवधारणा पर्यावरणवाद से अधिक व्यापक है। ‘पर्यावरणवाद’ पर्यावरण की स्वच्छता और संरक्षण-संवर्द्धन से जुड़ा हुआ है तथा अपना कार्य-क्षेत्र भी वहीं तक सीमित मानता है। किन्तु हरित विपणन अवधारणा पर्यावरणवाद की मूल धारणा को विपणन क्रियाकलापों में बुनियादी स्थान देने के साथ-साथ उपभोग, उत्पादन लागतों, सांस्कृतिक मूल्यों, प्रौद्योगिकी लाभों को विश्व मानव समाज तक पहुँचाने के दायित्वों, नैतिक व कानूनी मानदण्डों आदि कई पारस्परिक कारण-कारकों को भी समायोजित करने के महत्वपूर्ण दायित्व से सम्बन्ध रखती है।
  7. विपणन और उपयोग की समर्थक अवधारणा- ‘हरित विपणन’ अवधारणा विपणन और उपभोग की सार्थक अवधारणा है जो व्यक्तियों और संगठनों को पर्यावरण के प्रति भी सचेष्ट कर संवेदनशील बनाये रखने का कार्य करती है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि हरित विपणन की प्रकृति से यह निष्कर्ष निकलता है कि हरित विपणन के कार्यक्षेत्र में समूचा अपशिष्ट प्रबन्धन स्वतः ही सम्मिलित हो जाता है। दुरुपयोग एवं बर्बादी की रोकथाम का प्रबन्ध मोटे तौर पर हरित विपणन के कार्यक्षेत्र में जिन तीन कार्य व्यवहारों को शामिल करता है वे इस प्रकार हैं- (1) न्यूनीकरण (Reducing) (2) पुनर्ठपयोगी (Re-using) (3) अपशिष्ट पुनर्चक्रण (Recycling Waste ) । हरित विपणन के कार्यक्षेत्र के ये व्यवहार व्यापक रूप से उत्पादन निर्णयों, उत्पाद पंक्ति एवं उत्पाद सम्मिश्रण निर्णयों, उत्पाद विकास निर्णयों, उत्पाद जीवन चक्र निर्णयों, उत्पाद विभेदीकरण निर्णयों, उत्पाद विविधीकरण निर्णयों, उत्पाद नवाचारों एवं उत्पाद अप्रचलनता निर्णयों, विपणन संवर्द्धन निर्णयों, पैकेजिंग निर्णयों, आदि को तथा उनसे जुड़ी कार्यशैलियों व रीति नीतियों को इस दृष्टि से परस्पर समायोजित करते हैं कि पर्यावरण संतुलन व स्वच्छता बनी रह सके, उपभोग व उत्पादन उपभोक्ता की जरूरतों को पूरा कर सके और जीवन की गुणवत्ता व्यावहारिक रूप ले सके।

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Pankaja Singh

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