मानव संसाधन प्रबंधन

भारत में प्रबन्धकीय प्रशिक्षण हेतु किये गये प्रयास | Efforts made in India for Managerial Training in Hindi

भारत में प्रबन्धकीय प्रशिक्षण हेतु किये गये प्रयास | Efforts made in India for Managerial Training in Hindi

भारत में प्रबन्धकीय प्रशिक्षण हेतु किये गये प्रयास

(Efforts made in India for Managerial Training)

वर्ष 1947 से पूर्व भारत में प्रवन्धकीय प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था नहीं थी क्योंकि देश में औद्योगिक विकास लगभग नहीं के बराबर था। इसके स्वतन्त्र होने के बाद भारत ने औद्योगिक विकास एवं संवृद्धि पर जोर दिया। पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माताओं का विचार था कि देश का औद्योगिक विकास ही एकमात्र उपाय है जो देश को आत्मनिर्भर बना सकता है। इसलिए नियोजित विकास को अपनाया गया था। प्रथम पंचवर्षीय योजना में औद्योगिक विकास पर जोर दिया गया था। इससे उद्योगों में सफल प्रबन्ध एवं प्रशासन हेतु पेशेवर प्रबन्धकों की आवश्यकता हुई। अच्छे एवं प्रभावी प्रबन्धकों के निर्माण हेतु निम्नलिखित उपाय किये गये हैं.

  1. उचित भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना (Establishment of Al India Council for Technical Education AICTE)- वर्ष 1949 में भारत सरकार ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रशासन हेतु एक उप-समिति का गठन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की सिफारिश पर दिया गया था। इस उप-समिति ने अपनी रिपोर्ट जून 1953 में पेश की जिसमें निम्नलिखित सिफारिशें की गयी थीं

(i) अखिल भारतीय प्रबन्ध संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए।

(ii) प्रशासकीय कर्मचारी कालेज को स्थापित किया जाये।

(iii) राष्ट्रीय प्रबन्ध संस्थान स्थापित किया जाना चाहिए।

वर्ष 1953 में भारत सरकार ने ऑल इण्डिया बोर्ड ऑफ टेक्नीकल स्टडीज इन मैनेजमेन्ट की स्थापना की। इसमें विभिन्न उद्योगों, व्यावसायिक संस्थापना, पेशेवर संगठनों, तकनीकी संस्थाओं विश्वविद्यालयों एवं सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे। यह बोर्ड प्रबन्धकीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था करने हेतु उत्तरदायी है।

  1. अखिल भारतीय प्रबन्धकीय संस्थान (All India Management Institution) – भारत सरकार ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय तथा प्रौद्योगिकी संस्थान, मेनचेस्टर से स्म्वद्ध भारतीय प्रबन्ध संस्थान, अहमदाबाद, बंगलौर, कोलकाता एवं लखनऊ में स्थापित किये। इन संस्थानों की स्थापना अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की सिफारिश से की गयी थी। इन संस्थानों द्वारा शैक्षणिक प्रशिक्षण तथा शोध सुविधाएँ दी जाती है। ये संस्थान उद्योगों एवं व्यवसायों को प्रशिक्षित प्रबन्धक उपलब्ध कराते हैं।
  2. विशिष्ट पक्षों पर शैक्षिक एवं प्रशिक्षण हेतु विभिन्न संस्थान (Various Institutions for the Education and Training on Specific Institution) – कुछ विशेष पक्षों के सम्बन्ध में प्रशिक्षण एवं शिक्षण हेतु संस्थानों को स्थापित किया गया-

(i) भारतीय चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट संस्थान, नई दिल्ली,

(ii) भारतीय कम्पनी सचिव, नई दिल्ली,

(iii) लागत एवं कार्य लेखाकार संस्थान, कोलकाता,

(iv) भारतीय सेविवर्गीय प्रबन्ध संस्थान, कोलकाता,

(v) टैक्सटाइल शोध संघ, अहमदाबाद,

(vi) उत्पादन अभियन्त्रण संस्थान, मुम्बई आदि।

  1. विश्वविद्यालय एवं कालेजों में प्रबन्धकीय शिक्षा (Managerial Education and Training in Universities and Colleges)- बहुत से कालेज एवं विश्वविद्यालय प्रबन्धकीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। व्यवसाय प्रशासन एवं प्रबन्ध विभागों को विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में स्थापित किया गया है।
  2. परास्नातका प्रशिक्षण संस्थान (Post Graduate Training Institution) – भारत सरकार ने निम्नलिखित संस्थानों में औद्योगिक प्रवन्ध एवं औद्योगिक अभियन्त्रण की शिक्षा एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की है.

(i) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर,

(ii) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानुपर,

(iii) भारतीय व्यवसाय प्रवन्ध संस्थान, अहमदाबाद,

(iv) भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर,

(v) मोतीलाल नेहरू शोध एवं व्यवसाय प्रबन्ध संस्थान, इलाहाबाद,

(vi) प्रबन्ध संस्थान, लखनऊ,

(vii) बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, पिलानी,

(viii) विक्टोरिया जुबली तकनीकी संस्थान, मुम्बई

  1. औद्योगिक प्रबन्ध बोर्ड (Industrial Management Board) – भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय में वर्ष 1957 में औद्योगिक प्रबन्ध बोर्ड की स्थापना की गयी थी।
  2. लघु उद्योग संगठन की स्थापना (Establishment of Small Industries Organisation) – लघु उद्योग संगठन लघु स्तरीय उद्योगों के प्रबन्ध एवं प्रशासन हेतु प्रबन्धकीय प्रशिक्षण देता है।
  3. राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (National Productivity Council) – राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद ने प्रबन्धकीय प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों को प्रारम्भ करने, विकसित करने एवं सामंजस्य लाने में योगदान किया है।
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Pankaja Singh

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