समाज शास्‍त्र

अनुसूचित जातियों का कल्याण | अनुसूचित जाति के प्रति मुख्य सरकारी नीतियाँ | अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं गैर सरकारी प्रयत्न | अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं सरकारी प्रयत्न

अनुसूचित जातियों का कल्याण | अनुसूचित जाति के प्रति मुख्य सरकारी नीतियाँ | अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं गैर सरकारी प्रयत्न | अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं सरकारी प्रयत्न

अनुसूचित जातियों का कल्याण

(Welfare of Scheduled Castes)

अस्पृश्यता भारतीय समाज के सम्मुख एक गम्भीर समस्या है। आज ऐसे लोग की संख्या काफी है जो अस्पृश्यता को हिन्दू समाज का सबसे बड़ा कलंक मानते हैं। वर्तमान में ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जो अस्पृश्यता में विश्वास नहीं करते हैं। अस्पृश्यों के प्रति लोगों की मनोवृत्तियों में परिवर्तन आया है तो कुछ के व्यवहारों में। इस बीसवीं शताब्दी में अस्पृश्यता को दूर करने एवं अनुसूचित जातियों के कल्याण की दृष्टि से अनेक ऐच्छिक संगठन (Voluntary Organization) कार्य कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख अनलिखित हैं – (1) अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ, दिल्ली, (2) भारतीय दलित वर्ग लीग, देहली, (3) ईश्वर-सरन आश्रम, इलाहाबाद, (4) भारतीय रेडक्रास सोसायटी, देहली, (5) हिन्दू मेहतर सेवक संघ, देहली और (6) रामकृष्ण मिशन इन स्वैच्छिक संगठनों के अतिरिक्त सरकार ने कानूनी एवं सामाजिक तौर से अस्पृश्यों की स्थिति में सुधार लाने के लिए काफी प्रयत्न किये हैं। अस्पृश्यता निवारण एवं अनुसूचित जातियों की स्थिति उन्नत करने हेतु यहाँ। (1) सुधार आन्दोलन हुए और (2) सरकारी प्रयत्न हुए।

सुधार आन्दोलन या गैर सरकारी प्रयत्न

(Reform Movement or Non-Government Efforts)

अस्पृश्यता की समस्या के निवारण के लिए समय-समय पर अनेक सन्तों एवं समाज सुधारकों के द्वारा प्रयत्न किये गये। इस दिशा में चैतन्य, कबीर, नानक, नामदेव, तुकाराम आदि के प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। आधुनिक काल में राजा राममोहन राय, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द एवं दयानन्द सरस्वती, श्रीमती एनी बीसेण्ट, डॉ. अम्बेडकर तथा महात्मा गाँधी आदि ने अस्पृश्यता की समस्या को हल करने एवं अनुसूचित जातियों की प्रगति के लिए काफी प्रयास किए।

सरकारी प्रयत्न

(Efforts by the Government)

सरकारी नीतियों और प्रयत्नों के फलस्वरूप ही अस्पृश्य जातियों की अनेक निर्योग्यतायें एवं पिछड़ापन दूर होता जा रहा है। महात्मा गाँधी ने कहा था कि, “मैं ऐसे भारत का निर्माण करना चाहता हूँ जिसमें गरीब भी यह समझें कि यह मेरा देश है और इसके बनाने में मेरी भी राय कम नहीं होगी, ऐसा भारत जिसमें सम्प्रदाय पूरी तरह घुल-मिलकर रहेंगे।” इस आदर्श को ध्यान में रखकर स्वतन्त्र भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों के लिये विशेष संरक्षण की व्यवस्था की गयी। सरकार के द्वारा अस्पृश्यता की समस्या के समाधान करने एवं अनुसूचित जातियों के कल्याण की दृष्टि से किये गये प्रमुख प्रयत्न निम्नलिखित हैं .

(1) शिक्षा सम्बन्धी सुविधायें (Educational Facilities) – अन्य लोगों के समान स्तर पर लाने और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने में सहायता करने के उद्देश्य से अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए शिक्षा का विशेष प्रबन्ध किया गया। देश की सभी सरकारी शिक्षण संस्थाओं में अनुसूचित जातियों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गयी। सन् 1944-45 से अस्पृश्य जातियों के छात्रों को छात्रवृत्तियां देने की योजना प्रारम्भ की गयी। इनके लिए पृथक् छात्रावासों की व्यवस्था भी की गयी है। बुक बैंक के माध्यम से इनके छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तके उपलब्ध करायी जाती हैं।

(2) सरकारी नौकरियाँ में प्रतिनिधित्व (Representation in Government Services) – अनुसूचित जातियों के लोगों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने, अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करने तथा उच्च जाति के लोगों के सम्पर्क में आने को प्रात्साहित करने के लिए सरकारी नौकरियों में स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। खुली प्रतियोगिता द्वारा अखिल भारतीय आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों में इनके लिए 15 प्रतिशत स्थान सुरक्षित रखे गये हैं।

(3) संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions) – संविधान में अनेक ऐसे प्रावधान रखे गये हैं जिनके द्वारा अस्पृश्यता निवारण एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण की ओर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है।

(4) आर्थिक उन्नति हेतु प्रयास (Efforts of Economic Progress) – अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों को आर्थिक उन्नति के अवसर प्रदान करने हेतु सरकार ने उन्हें विशेष सुविधा देन का प्रयास किया है। कृषि कार्यों में लगे हुए अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों में से भूमिहीन मजदूरों के रूप में कार्य करने वाले लोगों को भूमि बांटी गयी है।

(5) विधान मण्डलों एवं पंचायतों में प्रतिनिधित्व (Representation in Legislative Assembly and Panchayats) – संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए उनकी संख्या के अनुपात में राज्यों की विधानसभाओं तथा पंचायतों में स्थान सुरक्षित रखे गये हैं। पहले ये स्थान संविधान के लागू होने के 20 वर्ष तक के लिए सुरक्षित रखे गये, किन्तु समय-समय पर इसकी अवधि बढ़ायी गयी और अब यह अवधि सन् 2000 है।

(6) कल्याण एवं सलाहकार संगठन (Welfare and Advisor Organization)-  केन्द्र एवं राज्यों ने अनुसूचित जातियों कल्याण को ध्यान में रखकर पृथक् मन्त्रालय भी स्थापित किये गये हैं।

(7) अन्य कल्याण योजनाएँ (Other Welfare Schemes) – अनुसूचित जातियों एक लोगों के स्वास्थ्य सुधार तथा आवास पर भी सरकार के द्वारा काफी धनराशि खर्च की जाती है। इन लोगों को मकान बनाने के लिए मुफ्त या नाममात्र के ब्याज पर ऋण के रूप में सहायता दी जाती है। इन लोगों को चिकित्सा सम्बन्धी सुविधाएं प्रदान करने और इनके स्वास्थ्य सुधार हेतु अस्पतालों, पीने के स्वच्छ पानी, बच्चों तथा प्रसूताओं के लिए कल्याण केन्द्रों और अस्पतालों तथा मोटर गाड़ियों की व्यवस्था की गयी है।

पंचवर्षीय योजनायें- सातवीं पंचवर्षीय योजनाओं में अनुसूचित जातियों के कल्याण पर करोड़ों-अरबों रुपया खर्च किया गया। वर्तमान में अनुसूचित जातियों के विकास एवं कल्याण हेतु विभिन्न राज्यों में ‘अनुसूचित जाति विकास निगम’ (Scheduled Caste Development | Corporation) बनाये गये हैं जो अनुसूचित जातियों के परिवारों एवं वित्तीय संस्थाओं के बीच सम्बन्ध स्थापित कराने में उन्हें आर्थिक साधन उपलब्ध कराने में योग देते हैं।

उपरोक्त सभी प्रावधानों एवं सुविधाओं का लाभ देश की अनुसूचित जातियों को मिला है| और उनकी सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति में सुधार हुआ और हो रहा है।

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