शैक्षिक तकनीकी

शैक्षिक तकनीकी की शाखाएँ | शैक्षिक तकनीकी का महत्व | Branches of Educational Technology  in Hindi | Importance of Educational Technology in Hindi

शैक्षिक तकनीकी की शाखाएँ | शैक्षिक तकनीकी का महत्व | Branches of Educational Technology  in Hindi | Importance of Educational Technology in Hindi

शैक्षिक तकनीकी की शाखाएँ (Branches of Educational Technology)-

पी. डी. मिचेल (1977) ने शैक्षिक तकनीकी का बहुपक्षीय अवधारण मानते हुए इसकी पाँच शाखाएँ  निर्धारित किया है। जो निम्नलिखित है-

(i) शैक्षिक मनो तकनीकी- शैक्षिक तकनीकी की इस शाखा का सम्बन्ध शिक्षार्थी की इद्रिया संवेदनाओं को विकसित करने से है। यह कार्य प्रत्यक्ष अथवा प्रतीकात्मक तरीके से किया जा सकता है। इसके लिए शाब्दिक दृश्य-श्रव्य साधनों की भी मदद ली जाती है। इस सब साधनों का प्रयोग करके छात्र की मानसिक प्रक्रियाओं तथा व्यवहार में परिवर्तन को जाना जा सकता है। अतएव मानसिक प्रक्रियाओं को जानने समाझने हेतु प्रयुक्त साधनों को क्रियाविधि का ज्ञान मनो तकनीकी में किया जाता है।

(ii) शैक्षिक सूचना और सम्प्रेषण तकनीकी- शैक्षिक तकनीकी इस शाखा में शैक्षिक सामग्री और सम्प्रेषण का खाका तैयार करने तथा उसको बनाने व मूल्यांकन के लिए सूचना एकत्रित करने के लिए साधनों एवं सूचना यंत्रों की क्रियाविधि को जाना और समझा जाता है।

(iii) शैक्षिक प्रबन्ध तकनीकी- शैक्षिक तकनीकी की इस शाखा का सम्बन्ध शैक्षिक संसाधनों का प्रबन्ध है। इसमें उन समस्याओं की प्रक्रियाओं का समाधान खोजने का प्रयास किया जाता है। जिसके द्वारा शैक्षिक परिणाम प्राप्त करने के लिए संसाधनों की व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जाता है इसमें योजना, वजट अनुसंधान आदि की क्रियाविधि शामिल होता है।

(iv) शैक्षिक योजना तकनीकी- शैक्षिक तकनीकी के इस रूप का सम्बन्ध शैक्षिक पद्धति निर्माण, संचालन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन से सम्बन्धित क्रियाविधियों से होता है।

(v) शैक्षिक योजना तकनीकी- शैक्षिक तकनीकी की यह शाखा में तकनीकी के अनुप्रयोग की क्रियाविधि, व्यवस्था बनोन से सम्बन्धि होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति। 1986 में इसी शाखा पर विशेष रूप से कार्य किया जा रहा है। वस्तुतः शैक्षिक तकनीकी का जो स्वरूप विद्यमान है वह बहुत हद तक शैक्षिक योजना तकनीकी पर आधारित हैं नीपा, नापक संस्था में महत्पर्ण शोध कायर में संलग्न है।

शैक्षिक तकनीकी का महत्व (Importance of Educational Technology)-

वर्तमान युग में शैक्षिक व्यवस्था को समय सपेक्षा एंव अद्यतन बनाने में शैक्षिक तकनीकी का असीम महत्व हैं इसके कअन सदी में शिक्षा को नवीन हुआ है। शैक्षिक तकनीकी शिक्षा गिरते हुए स्तरों एवं मानकों में गुणात्मक में गुणात्मक उन्नयन का कार्य किया जाता है। दूरस्थ शिक्षा पत्राचार शिक्षा, मुक्त विद्यालय/ विश्वाविद्यालयों को सफलता का आधार स्तम्भ शैक्षिक तकनीकी ही है। शिक्षण अधिगम व्यवस्था को पापिर्वान मान्यताओं के अनुकूल बनाने तथा गणुता-बर्धन तकनीकी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। एकीकृत पाठ्यचार्य एवं अन्तररानुशासलिक उपागम को व्यवस्थित उपागम के व्यवस्थित स्वरूप प्रदन करने तथा इसमें व्यावहारिकता द्वारा कितना अधिगम किया गया है। इसकी जानकारी प्राप्त करने तथ छात्रों को प्रबलित करने में भी तकनीकी की अत्यधिक उपयोगिमा है। शिक्षकों को इससे नवीन वधाओं की जानकारी मिल रही है। जिसके सदुपयोग द्वारा वे कम समय व कम श्रम में अधिक प्रभावात्मक शिक्षण देने में समर्थ हो रहे है। अतः कहा जा सकता है। कि इक्कीसवीं सदी में शैक्षिक तकनीकी शिक्षा को नवीन आयामों से सम्पृक्त करने वाली शैक्षिक प्रवृत्ति है। इसके प्रमुख उपयोगिता एवं महत्व को व्यवस्थित रूप में निम्नवत् उद्घाटित किय जा सकता है।

(1) शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकास- शैक्षिक तकनीकी के शिक्षा में अनुप्रयोग से शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों को वैज्ञानिक विधाओं एवं अविष्कारों को जानने-समझने संचालन करने तथा प्रयोग करने की कार्यकारी पहलुओं की जानकारी सुलभ हुई है। इसके इस्तेमाल से उन्हें विविध विषयों में हुए नवीन शोधों की जानकारी होती है। जिसका इस्तेमाल कर वे समसामयिक दृष्टि से सामाजिक एवं शैक्षिक समायोजन करके विकास पथ का वरण करने में समर्थ होते हैं। नवीन शिक्षण विधियों के प्रयोग से छात्रों को क्लिष्ट, जटिल, विषय वस्तु को सरला से सीखने में भी सहायता देने का कार्य शिक्षण तकनीकी करता है।

(2) शिक्षण के लिए उपयोगी- एक शिक्षक की सफता उसकी प्रभावकारी शिक्षणक पर निर्भश्र करता है। केवल सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त करने लेने से कोई भी शिक्षक प्रभवोत्पादक शिक्षण नहीं दे सकता है, इसीलिए शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। इसमें शैक्षिक तकनीकी का ज्ञान छात्राध्यापकों को अनिवार्य रूप से दी जाती है। जिसके अनुप्रयोग से वे अपने शिक्षण को व्यावहारिक ढंग से प्रकट कर छात्रों के लिए प्रभावकारी शिक्षक के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं।

(3) सभी को शिक्षा की सुलभता में उपयोगी- भारतीय संविधान की धारा 45 में 14 वर्ष की आयु तक सभी बालिका एवं बालक की शिक्षा की सर्वसुलीभता की जिम्मेदारी राज्य को साँपी गयी है। इस जिम्मेदारी की पूर्ति में शैक्षिक तकनीकी का अत्यधिक महत्व है। जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में कहा भी गयी है। कि-“शैक्षिक तकनीकी की सहायता से दूर रदाज के क्षेत्रों तक शिक्षा का प्रसार किया जा सकता है।” आज इसका प्रयोग दूरस्थ शिक्षा पत्राचार शिक्षा, मुक्त विद्यालयों/विश्वविालयों में करके असंख्या लोंगों में शिक्षा की अलख जगायी जा रही है। दूरदर्शन, रेडियो के द्वारा ज्ञान दर्शन एवं ज्ञानवाणी कार्यक्रमोंसे विषयगत तथ्यों की जानकारी विद्यार्थियों की दी जा रही है। इसके अतिरिक्त निरक्षरता को दूर करने तथा अभिभावकों में शिक्षा की महत्त तथा अपने पाल्यों को विद्यालय भेजने हेतु जागरूकता का प्रचार-प्रसार तकनीकी माध्यमों द्वारा किया जा रहा है।

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Pankaja Singh

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