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दृष्टान्त कौशल | छात्र सहभागिता कौशल | छात्र सहभागी कौशल के घटक

दृष्टान्त कौशल | छात्र सहभागिता कौशल | छात्र सहभागी कौशल के घटक | Illustration Skills in Hindi | Student Engagement Skills in Hindi | Components of student participatory skills in Hindi

दृष्टान्त कौशल (Skill of Illustrating With Examples):

जब शिक्षण प्रक्रिया में सिद्धान्त, नियम या प्रत्ययों को शिक्षक व्याख्यान के द्वारा स्पष्ट नहीं कर पाते तब वह कई बार चित्रों, स्पष्टीकरणों तथा उदाहरणों का सहारा लेकर उन्हें स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं। दृष्टान्तों तथा उदाहरणों के माध्यम से शिक्षक नवीन, जटिल व अमूर्त ज्ञान को सरलता से छात्रों तक पहुंचा देता है।

दृष्टान्त कौशल के माध्यम से शिक्षक जटिल सम्प्रत्ययों तथा अमूर्त ज्ञान को सरल, सहज तथा बोधगम्य बना देता है। इसके प्रयोग हेतु शिक्षक को विभित्र सम्प्रत्यय, सिद्धान्त या नियम आदि को समझाने के लिये पहले से ही समुचित उदाहरणों तथा दृष्टान्तों का चयन कर लेना चाहिये। फिर उन उदाहरणों एवं दृष्टान्तों को कक्षा में प्रभावशाली विधि से कक्षा के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। फिर इन उदाहरणों तथा दृष्टान्तों के माध्यम से शिक्षण के सम्प्रत्यय एवं सिद्धान्त आदि के साथ सम्बन्ध प्रदर्शित करते हुये बोधगम्य बनाने का प्रयास करना चाहिये। यथासम्भव उदाहरण एवं दृष्टान्त सरल व सहज होने चाहिये तथा उनका सम्बन्ध प्रत्यक्ष रूप से विषय-वस्तु से दिग्दर्शित कराया जाना चाहिए।

दृष्टान्त या उदाहरणों के प्रकार

  1. अशाब्दिक (Non-Verbal)
  • वास्तविक उदाहरण
  • मॉडल तथा चित्र
  • मानचित्र व रेखाचित्र
  • प्रायोगिक प्रर्दशन
  1. शाब्दिक (Verbal
  • कहानी कथन
  • घटना का वर्णन
  • चुटकुले
  • कविता
  • लेख

दृष्टान्त कौशल के घटक (Components) – 1. उदाहरणों की सार्थकता। 2. उदाहरणों की सरलता। 3. उदाहरणों की रोचकता। 4. आगमन उपागम का प्रयोग। 5.प्रयोग 6. छात्रों से उसी प्रकार के अन्य उदाहरणों का प्रस्तुतीकरण

दृष्टान्त कौशत के मापन हेतु अनुसूची एवं रेटिंग स्केल का प्रारूप नीचे दिया जा रहा है-

व्यवहार घटक

(Components Behaviour)

  1. उदाहरणों की सार्थकता।
  2. उदाहरणों की रोचकता।
  3. उदाहरणों की सरलता।
  4. आगमन उपागम का प्रयोग।
  5. निगमन उपागम का प्रयोग।
  6. छात्रों द्वारा उसी प्रकार के अन्य उदाहरणों का प्रस्तुतीकरण
छात्र सहभागिता कौशल (Skill of Increasing Pupil Participation) :

शिक्षण की प्रक्रिया शिक्षक एवं शिक्षार्थी के मध्य घटित होती हैं। शिक्षक और शिक्षार्थी की पारम्परिक आदान-प्रदान, क्रिया-प्रतिक्रिया एंव आपसी सहयोग से ही शिक्षण की प्रक्रिया सुचारु रूप से प्रभाववर्धक ढंग से सम्पादित होती है। इसी कारण प्रत्येक शिक्षक शिक्षण के संचालन में अपने विद्यार्थी की अधिक से अधिक सहभागिता एवं क्रियाशीलता की अपेक्षा रखता है। अतः कहा जा सकता है कि शिक्षण में विद्यार्थियों को अधिक से अधिक क्रियाशील एवं सहभागी बनाने के लिए जिन तौर-तरीकों एवं उपायों का आश्रय लिया जाता है उसे छात्र सहभागिता कौशल के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

छात्र सहभागी कौशल के घटक

छात्रों से सामान्य प्रश्न पूछा गया

अनुशीलन हेतु शाब्दिक एवं अशाब्दिक प्रश्न पूछे गये

पुनर्बलन हेतु शाब्दिक वाक्यों का प्रयोग किया गया

पुनर्बलन हेतु अशाब्दिक वाक्यों का प्रयोग किया गया

बीच में मौन एवं विराम का प्रयोग किया गया।

छात्रों द्वारा शाब्दिक अनुक्रिया की गयी।

छात्रों द्वारा कार्य किया गया।

पर्यवेक्षक की टिप्पणी

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Pankaja Singh

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