शैक्षिक तकनीकी

शैक्षिक तकनीकी के उद्देश्य | शैक्षिक तकनीकी की आवश्यकता | शैक्षिक तकनीकी के लाभ तथा सीमायें

शैक्षिक तकनीकी के उद्देश्य | शैक्षिक तकनीकी की आवश्यकता | शैक्षिक तकनीकी के लाभ तथा सीमायें | Objectives of Educational Technology in Hindi | Requirement of Educational Technology in Hindi | Advantages and limitations of educational technology in Hindi

शैक्षिक तकनीकी के उद्देश्य (Objectives of Educational Technology) –

शैक्षिक तकनीकी मुख्यतः एक नवीन सम्प्रत्य है। शिक्षण एवं अधिकम को सरल, सुबोध, रूचिकर एवं सर्वग्राही बनाने में इससे बहुत मदद मिलती है। शैक्षिक तकनीकी प्राचीन शैक्षिक परम्पराओं, विधियों प्रणलियों में सुधार का मार्ग प्रशस्त करके नवीनता युक्त वैज्ञानिक आविष्कारों से ओत-प्रोत शैक्षिक परस्तराओं, विधियों एवं प्रणालियों का सूत्रपाल करती है, जिससे शैक्षिक उद्देश्यों के निर्धारण; शिक्षण विधियों के चयन एवं शैक्षिक समस्याओं के समाधन में बहुत सहायता मिलती है। शैक्षिक तकनीकी के प्रमुख उद्देश्यों निम्नवत् हैं।

  1. छात्रों को वैयक्तिक ढंग से अधिगम करने में सहायता देना।
  2. शिक्षण एवं अधिगम को व्यावहारिक एवं कार्योपयुक्त बनाना।
  3. वर्तमान शैक्षिक आवश्यकताओं की पहचान करना।
  4. शिक्षा का नियोजन, संचालन एवं मूल्यांकन करना।
  5. समय- सापेक्ष अधिगम की नवीन विधियों का सृजन करना।
  6. छात्रों की निष्पत्ति, अभिक्षमता एवं गुणों का विश्लेषण एवं पृष्ठपोषणा प्रदान करना।
  7. शिक्षा को अपव्यय से बनाना।
  8. पाठ्यवस्तु का विश्लेषण करना जिससे उससे विधि पहलुओं को क्रमबद्ध किया जा सकें।
  9. कक्षा शिक्षण की प्रभावकारिता में वृद्धि करना।

शैक्षिक तकनीकी की आवश्यकता (the need of Educational technology)-

आधुनिक समय में शिक्षा अनेक समस्याओं से प्रस्त है। शिक्षा का सार्वभौमीकरण, व्यावायिक शिक्षा  का प्रबन्ध, छात्र अशान्ति, अध्यापकों की शिक्षा के प्रति उदासीनता, नकल की बढ़ती प्रवृत्ति इसके कुछ उदाहरण हैं। इन समस्याओं के समाधान में शैक्षिाक तकनीकी महत्वपूर्ण भूमिका का निवाह करती है इस कारण इसकी शिक्षा में महती आवश्यकता है।

विद्यालयों में अध्ययन के लिए अनेक प्रकार के विद्यार्थी आते हैं उसमें से कुछ तीव्र वृद्धि के अच्छे विद्यार्थी होते हैं तो कुछ मन्द बुद्धि एवं समस्यात्मक होते हैं। इन विद्यार्थियों को उचित दिशा निर्देश देने में शैक्षिक तकनीकी की आवश्यकता पड़ती है। इससे यह जानकारी मिलती है ऐसे विद्यार्थियों को किस प्रकार देनी चाहिए।

शैक्षिक तकनीकी द्वारा संज्ञानात्मक (मानसिक एवं बौद्धिक), भावनात्मक मान्यता, दृष्टिकोण क्रियात्मक (विभिन्न) कार्य एवं कौशलों की जानकारी) कौशलों का विकास होता है। संक्षेप में शैक्षिक तकनीकी की आवश्यकता को निम्नवत प्रकट किया जा सकता है।

(i) शिक्षा एवं शिक्षण को व्यावहारिक रूप देने के लिए।

(ii) छात्रों को अपनी रूचि, गति सामर्थ्य के अनुसार अधिगम करने के लिए।

(iii) शिक्षण वस्तु का विश्लेषण करके क्रमिक रूप में व्यवस्थित करने के लिए।

(iv) शिक्षण एवं धगम की गुणतत्ता में वृद्धि के लिए।

(v) छात्रों की निष्पत्ति का मूल्यांकन करने के लिए।

(vi) शिक्षण एवं अधिगम में वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग के लिए।

शैक्षिक तकनीकी से लाभ (Advantages of Educational Technology) –

शैक्षिक तकनीकी तकनीकी के लाभ निम्नलिखित-

  1. शैक्षिक तकनीकी शिक्षक को पाठ प्रस्तुतीकरण को प्रभावशाली बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  2. शैक्षिक तकनीकी छोटे तथा बड़े समूह में एंव व्यक्तिम स्तर पर भी, शिक्षण एवं अधिगम सम्बन्धी उद्यीपन तथा अनुकिया प्रदान करके शिक्षक की गुणात्मक योग्यता का विस्तार करती है।
  3. शैक्षिक तकनीकी शिक्षण कार्य को उद्देश्य केन्द्रित बनाने में तथा छात्र केन्द्रित रखने में सहायता एवं प्रभावशाली निर्देशन प्रदान करती है।
  4. शैक्षिक तकनीकी शिक्षण प्रक्रिया को सरल, सुगम तथा रोचक बनाते हुए छात्रों के ज्ञान एवं अनुभव की वृद्धि में सहायक होती है।
  5. शैक्षिक तकनीकी शिक्षण में विविधता लाने के लिए विभिन्न विधाओं एवं साधनों का प्रयोग करती है। और छात्रों की कक्षा कार्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती है।

शैक्षिक तकनीकी की सीमाएं

(Limitations of educational technology)

शैक्षिक तकनीकी शिक्षा में आज बहुत लोकप्रिय हो रही है, वहीं इसकी कुछ सीमायें भी हैं। ये सीमायें नीयें विन्दुवार दी जा रही है-

  1. शैक्षिक तकनीकी ने ज्ञानात्मक पक्ष के विकास में अभूतपूर्ण योगदान किया है। परन्तु भावात्मक एवं संवोगात्मक क्षेत्र संवेगात्मक क्षेत्र में इसका योगदान अत्यन्त सीमित है। भावात्मक पक्ष का विकास केवल शिक्षकों के द्वारा ही सम्भव है।
  2. शैक्षिक तकनीकी के प्रयोग के लिये प्रारम्भ में बड़ा संख्या में धनराशि की आवश्यकता होती है। इसमें अनेक प्रकार की सामग्री खरीदनी पड़ती है, विभिन्न प्रकार के प्रबन्ध करने होते हैं, फलस्वरूप प्रारम्भिक व्यय की धनराशि काफी ज्यादा हो जाती है, जिसके लिये अनेक दिक्कजे आती है। यद्यपि बाद में यह सारा व्यय छात्रों की बड़ी संख्या में शिक्षित करने को देखने हुये अपेक्षाकृत कम ही होता है। यह तथ्य अनेक मूल्य-विश्लेषण के अध्ययनों से स्पष्ट है।
  3. शैक्षिक तकनीकी के प्रयोग के लिए विशेष प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था अति आवश्यक है। इस प्रशिक्षण के बिना। शिक्षक कम्प्यूटर, इन्टरनेट आति का सही लाभ नहीं प्राप्त कर सकता है।
  4. शैक्षिक तकनीकी के द्वारा सभी प्रकार की शैक्षिक समस्याओं का समाधान सम्भव नहीं है। मुख्यत शैक्षिक तकनीकी शिक्षण एवं अनुदेशन प्रणाली के विकास में ज्यादा उपयोगी।
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Pankaja Singh

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