शैक्षिक तकनीकी

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह | उच्च शिक्षा दूरदर्शन | कक्षा शिक्षण में दूरदर्शन का प्रयोग

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह | उच्च शिक्षा दूरदर्शन | कक्षा शिक्षण में दूरदर्शन का प्रयोग | Indian National Satellite in Hindi | Higher Education Doordarshan in Hindi | Use of television in classroom teaching in Hindi

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह

(Indian National Satellite (INSAT)

एक की सफलता से प्रेरित होकर, भारत सरकार ने दूरदर्शन को शैक्षित दृष्टि से अधिक से अधिक उपयोगी बनाने के लिए कार्य योजनाएँ प्रारम्भ की। (INSAT) की श्रृंखला प्रारम्भ हुई। भारत का पहला उपग्रह INSAT-IA जो कि सन् 1982 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया, सफल नहीं हुआ, लेकिन 30 अगस्त सन् 1983 INSAT-IB अंतरिक्ष में स्थाजित (Launched) किया गया जो अत्यधिक सफल हुआ, क्योंकि साथ में उच्च शक्ति और निम्नशक्ति वाले ट्रासमीटर (High Power & Low Power Transition) (HPTR & LPTR) भी लगाए गए। धन की शिक्षा योजना अक्टूबर सन् 1983 में प्रारम्भ हुई, जिसमें 5 वर्ष से 11 वर्ष आयु वर्ग के बालक- बालिकाओं के लिए शैक्षिक दूरदर्शन कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू हुआ।

प्रारम्भ में प्रसारण कार्यक्रम छः राज्यों के ग्राम-समूहों (Clusters of Village) में चलाया गया ये राज्य थे आन्ध्र प्रदेश, बिहार, गुजराज, महाराष्ट्र उड़ीसा और उत्तर प्रदेश, जिन्हें INSAT स्टेंट के नाम से जाना गया (सन् 1987) में इन छः राज्यों में पूर्ण रूप से प्रसारण का विस्तार गया साथ ही सभी हिन्दी भाषी राज्यों INSAT-HPTS और इऊए की सहायता से शैक्षिक दूरदर्शनश्रका प्रसारण सम्भव हो गया ।

वर्तमान समय में शैक्षिक दूरदर्शन (ETV) कार्यक्रम, विभिन्न भाषाओं में प्रसारित किए जा रहे हैं, जैसे कि हिन्दी, गुजराती, मराठी, उड़िया तथा तेलुगू आदि INSAT-1B की सहायता से आज दूरदर्शन विद्यालयीय शिक्षा (School Education) विश्वविद्यालयीय-शिक्षा (University education), कृषि शिक्षा (Agricultural Education), प्रौढ़ शिक्षा (Education Education) प्रौढ़ शिक्षा (Adult Education) आदि से सम्बन्धित कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहा है। भारतवर्ष के करीब 5 करोड़ (500 million) लोग इन कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं।

कार्यक्रमों के निर्माण में अनेक संस्थाएँ कार्यरत हैं। जैसे कि विद्यालयीय शिक्षा कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) विश्वविद्यालयीय शिक्षा कार्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) तथा मुक्ता शिक्षा कार्यक्रमों के लिए इन्दिरा गांधीक्षराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) दिल्ली आदि।

उच्च शिक्षा दूरदर्शन

(High Educational: HETV)

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने दूरदर्शन में उपलब्ध समय सीमा के अंतर्गत कंट्री वाइड क्लासरूम (Countrywide Classroom) कार्यक्रम, उच्च शिक्षा के लिए प्रसारित करने की पहल की जिसके द्वारा देश के सुदूर (remote) तथा पिछड़े क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का प्रसार हुआ हैं। वर्तमान समय में आयोग सात शैक्षिक माध्यम अनुसंधान केन्द्रों (Educational Media Research Centre : EMRCS) तथा दस श्रव्य-दृश्य अनुसंधान केन्द्रों (Audio Visual Research Centres: AVRCS) को, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण तथा सॉफ्टवेयर के निर्माण में सहायता प्रदान कर रहा है। शैक्षिक सम्प्रेषण निकाय (Consortium for Education Communication: CEC, EMRCS) तथा AVRCS के माध्यम (Media) सम्बन्धी क्रिया-कलापों को चलाते रहने में उनका विकास करने तथा नई-नई उच्चस्तरीय तकनीकी को खोजन के लिए एक संस्थागत रूपरेखा याक्षढाँचा (Institutional Framework) प्रदान करता है। CEC आज के वर्ममान मुद्दों (Issue) जैसेक्षकि पर्यावरण प्रदूषण, सुक्षित जल, जनसंख्या AIDS के प्रति संचेतना पर आधारित कार्यक्रमों का निर्माण कर रहा है।

देश के शैक्षिक धरातल पर दूरस्थ शिक्षा एक महत्वपूर्ण वास्तविकता है। मुक्त शिक्षा व्यवस्था का प्रथम उद्देश्य उच्च शिक्षा का प्रसार करना है। और इसकी सफलता, बहु माध्यम प्रशिक्षण तथा दूरदर्शन द्वारा प्रसारित तथा टेलीकास्ट कार्यक्रमों की गुणवत्ता तथा उपलब्धता पर निर्भर करती है। दूरदर्शन, मई सन् 1991 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (Indira Gandhi National Open University: IGNOU) के कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहा है। ‘इग्नू शैक्षिक दूरदर्श’ (IGNOU-ETV) उच्च शिक्षा सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। दूरदर्शन पर ‘ज्ञान दर्शन’ चैनल (D. D Gyan Darshan) एक शैक्षिक चैनल है, जो चौबीस घण्टे शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण करता है। प्राइवेट टेलीविजन नेटवकों की प्रतिस्पर्धा में दूरदर्शन ने भी 26 जनवरी, 2002 को डी. डी. भारती (D. D. Bharti) नाम के सैटेलाइट चैनल का शुभारम्भ किया है।

‘देरस्य शिक्षा’ के क्षेत्र में द्वि-मार्गी टेलीफोन (Two Way Telephone) टेलीकॉन्फेंसिंग (Teleconferencing) के साथ-साथ अंतर्क्रियावाद दूरदर्शन (Interactive Television) ने भी सम्भावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। अन्य देशों की भांति भारतवर्ष में भी कई टॉकबैक (talk back) तथा अंतर्क्रियात्मक प्रयोगों (Interactive Experiments) का संचालन हुआ है, जैसे-

  1. इसरों-यू.जी.सी. नेशलन टाकबैक एक्सपेरिमेण्ट (1991)

(ISRO-UGC National Talkback Experiment (1991)

  1. इण्डो-यू. एस. सब कमीशन प्रयोजेक्ट क्लास रूम 2000 + (1993)

(INDO-US Sub-Commission Project -room 2000 + (1993)

  1. सी. ई. सी.-इसरो यू. झी. शी. इग्नू टेलीकॉन्फ्रेंसिंग (1994)

(CEC- ISRO-UGC- IGNOU Teleconferencing (1994)

  1. एन. सी. ई. आर टी. टेलीस्पाट एक्सपेरिमेण्ट (1996)

(NCERT Tele-spot Experiment (1996)

इनके अतिरिक्त भारत सरकार ने सेवारत प्राइमरी शिक्षकों के शिक्षण के लिए यूनेस्को और इण्टरनेशनल टेली कम्यूनिकेशन यूनियन (ITU) की सहायता से अंतर्क्रियात्मक दूरदर्शन का प्रयोग किया है।

उपर्युक्त आँकड़े ETV के प्रयोग और विकास की दिशा को इंगित करते हैं, लेकिन अभी भी अधिकतर पारम्परिक विश्वविद्यालयों तथा मुक्त विश्वविद्यालयों में मुद्रित सामग्री और माध्यम (Printed Media) से ही कार्य हो रहा है।

कक्षा शिक्षण में दूरदर्शन का प्रयोग

(Use of Television in Class Room Teaching)

कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त शैक्षिक दूरदर्शन कार्यक्रमों के अन्तर्गत पाठ्यक्रम से सम्बन्धित, नियोजित तथा क्रमबद्ध दूरदर्शन कार्यक्रमों की श्रंखला होती है। शैक्षिक दूरदर्शन कार्यक्रम क्लोज्ड सरकिट दूरदर्शन (CCTV) पर उपलब्ध होते हैं, उपयोगिता के आधार पर इन्हें निम्न प्रकार से वर्गीकृत कियाक जा सकता है-

  1. पूरी तरह दूरदर्शन शिक्षण (Total Television Teaching)- दूरदर्शन कार्यक्रम के द्वारा ही पूरा कक्षा शिक्षण होता है। शिक्षक दूरदर्शन द्वारा प्रदान किए गए ज्ञान व सूचनाओं के आधार पर कक्षा का संचालन करता है। तथा विद्यार्थियों की समस्या का समाधान करता है।
  2. शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में (As a Teaching Aid)- शिक्षक दुरदर्शन द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों को सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग करता है। विज्ञान, तकनीकी आदि की कक्षाओं में सहायक सामग्री के रूप में दूरदर्शन कार्यक्रमों का प्रयोग करता है।
  3. 3. मुख्य शिक्षण सामग्री के रूप में (As a Major Teaching Resource) – शिक्षक पाठ को पढ़ाने में दूरदर्शन कार्यक्रम को मुख्य स्थान देता है लेकिन अपने शिक्षण के द्वारा पाठ्यवस्तु को विद्यार्थियों तक पहुँचाने में पुनर्बलन प्रदान करता है।
  4. पुरक दूरदर्शन शिक्षण (Supplemented Television Teaching) – कक्षा शिक्षण में पाठ्यवस्तु के अंतर्गत कुछ स्थानों में स्पष्टता नहीं आ पाती, शिक्षक अपने व्यख्यान या अन्य शिक्षण विधियों के द्वारा विद्यार्थियों को स्पष्ट करने में असक्षम होता है, ऐसी स्थिति में दूरदर्शन कार्याक्रम, पूरक शिक्षण का कार्य करते हैं।

निष्कर्ष रूप में यही परिलक्षित होता है। कि शैक्षिक दूरदर्शन, शिक्षण की अन्य दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्रियों से भिन्न है। इसका विषय विस्तृत है और यह सामूहिक माध्यम के रूप में अत्यन्त महत्वपूर्ण है। कक्षा शिक्षण में दूरदर्शन का प्रभावशाली उपयोग करने के लिए आवश्यक है कि, शैक्षिक नियोजक (Educational Planners), विशेषज्ञ (Experts), शिक्षक, दूरदर्शन के संचालक तथा दूरदर्शन कार्यक्रमों के निर्मातओं की सम्मिलित शक्तियों का सकारात्मक प्रयोग हो। शैक्षिक दूरदर्शन एक महंगा माध्यम अवश्य है, नेकिन उपयुक्त नियोजन व उचित ताल-मेल के द्वारा इसे एक लाभकारी व बर्दाश्त करने योग्य साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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Pankaja Singh

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