शैक्षिक तकनीकी

शैक्षिक दूरदर्शन | भारतवर्ष में शैक्षिक दूरदर्शन | Educational Television in Hindi | Educational Television in India in Hindi

शैक्षिक दूरदर्शन | भारतवर्ष में शैक्षिक दूरदर्शन | Educational Television in Hindi | Educational Television in India in Hindi

शैक्षिक दूरदर्शन (Educational Television)-

इसे बीसवीं शताब्दी की सर्वोत्कृष्ट वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा सकती है, सकती है, जिसका शैक्षिक प्रयोग सन् 1950 से ही कतिपय विकसित देशों में होता रहा है। यद्यपि दूरदर्शन कार्यक्रम व्यापारिक व मनोरंजन की दृष्टि से ही प्रसारित होते रहे हैं और दर्शकों की अभिरूचि को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया, लेकिन सन् 1960 के दशक में मनोरंजन कार्यक्रमों के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों का समन्वय प्रारम्भ हो गया। यूरोप आदि देशों में दूरदर्शन कार्यक्रमों के निर्माण का दायित्व ‘राष्ट्रीय प्रसारण संस्थानों’ के हाथों में होते हुए भी शैक्षिक कार्यक्रम बहुप्रचलित नहीं थे और न ही उनका अध्यापकों द्वारा प्रयोग आवश्यक और अपेक्षित माना गया। ग्रेट ब्रिटेन में बी. बी. सी. तथा अन्य दूरदर्शन चैनलों ने विद्यालयीय शिक्षा के लिए कार्यक्रमों का निर्माण कर प्रशंसनीय कार्य किया, कार्यक्रम तकनीकी दृष्टि से उच्चस्तरीय थे। इंग्लैण्ड में संसाधन, सहजता से उपलब्ध होने के कारण इसका शैक्षिक प्रयोग केवल माध्यमिक विद्यालयों में ही नहीं बल्कि प्राथमिक व नर्सरी स्तर पर भी प्रभावशाली ढंग से होता रहा है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका तथा अन्य विकसित देशों में शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर शिक्षण सहायक सामग्री तथा शिक्षण माध्याम के रूप में दूरदर्शन का सफल प्रयोग होता रहा है, शिक्षकों ने भी इस का अभिग्रहण प्रसन्नतापूर्वक किया है।

विकासशील देशों में परिस्थितियाँ भिन्न हैं, शिक्षा पर होने वाले व्यय में दूरदर्शन अतिरिक्त भार स्वरूप माना जाता है। क्योंकि पिछले दशकों में दूरदर्शन के शैक्षिक प्रयोग से शिक्षा को सार्थक गुणात्मक या संख्यात्मक लाभ नहीं मिल सका है। बीसवीं सदी के अंतिम दशक में सूचना क्रांति के फलस्वरूप दूरदर्शन शिक्षा का लोकप्रिय माध्यम अवश्य बन गया हैं, तथा दूरस्थ शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा व औपचारिकेतर शिक्षा का यह महत्वपूर्ण और मूल्यवान माध्यम सिद्ध हुआ है।

भारतवर्ष में शैक्षिक दूरदर्शन

(Educational Television in India)

भारतवर्ष में मूलरूप से दूरदर्शन का आविर्भाव अर्थात् जन्य शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हीं हुआ। दूरदर्शन के प्रयोग का उद्देश्य प्रारम्भ में शैक्षिक ही रहा। 1956 में यूनेस्को (UNESCO) की आमसभा दिल्ली में हुई जिसमें यह निश्चित किया गया कि भारत में इस की स्थापना का उद्देश्य शैक्षिक और सामुदायिक विकास ही होगा, फलस्वरूप भारतवर्ष में प्रथम प्रयोगात्मक दूरदर्शन सेवा का उद्घाटन दिल्ली में सन् 1959 में हुआ। सन् 1960-61 में ‘समाज शिक्षा कार्यक्रमों की श्रृंखला तथा पाठ्यक्रम आधारित ‘स्कूल टेलीविजन प्रोग्राम दिल्ली में प्रयोगात्मक रूप से प्रारम्भ किए गए। यह कार्य आल इंडिया रेडियो फोर्ड फाउन्डेशन (Ford- Foundation) तथा दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के सहयोग से प्रारम्भ हुआ। अनेक विद्यालयों में टेलीविजन सेट लगाए गए, शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों के लिए वर्कशाप (Workshop) का आयोजन किया गया। दूरदर्शन द्वारा प्रसारित विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम तथा विद्यालयों के कक्षा शिक्षण में समन्वय स्थापित स्थापित करने का प्रयास किया गया। समय के साथ-साथ दूरदर्शन (T.V. Set) युक्त विद्यालयों की संख्या बढ़ती गयी और अनेक कमियों के होते हुए भी, दूरदर्शन के शैक्षिक कार्यक्रमों की उपादेयता में कमी नहीं आयी और शैक्षिक दूरदर्शन का लाभ क्षेत्र बढ़ता गया। सन् 1965 से दिल्ली में नियमित दूरदर्शन सेवा शुरू हुई और सन् 1972 से शिक्षा तकनीकी कार्यक्रम के प्रारम्भ के साथ-साथ इस का प्रसार प्रारम्भ हो गया।

विद्यालयों में इसका प्रयोग करने के पीछे आशय यही था कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को वे अनुभव और सुविधाएँ प्रदान की जायँ, जिन्हें विद्यालय प्रदान करने में असक्षाम है। इस के प्रयोग का उद्देश्य ही यही रहा है कि पाठ्यक्रम और यथार्थ अनुभवों के बीच अंतर को कम करेगा, अधिक-से-अधिक सीखने के अवसर (Learning Opportunities) प्रदान करेगा तथा शिक्षण- अधिगम प्रक्रिया को अधिक-से-अधिक प्रभावी बनाएगा।

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Pankaja Singh

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