शिक्षाशास्त्र

पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम की विषय वस्तु | subject matter of environment education curriculum in Hindi

पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम की विषय वस्तु | subject matter of environment education curriculum in Hindi

पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम की विषय वस्तु

(Subject Matter of Environment Education Curriculum)

(I) प्राथमिक शालाओं के लिये पर्यावरण शिक्षा की विषय वस्तु-

(1) खाने-पीने की वस्तुयें

(2) घर और उसमें रहने वाले लोग

(3) मिले-जुले समुदायों में हम कैसे रहते हैं ?

(4) काम करने में सहायक वस्तुयें

(5) विद्यालय और उसका आस-पड़ोस

(6) हमारे चारों ओर का विश्व

(7) यात्रा करने या लोगों से संवाद करने के हमारे साधन

(8) हम क्या-क्या सुनते और देखते हैं?

(9) हमारी भदद करने वाले लोग

(10) पृथ्वी और आकाश

(II) एक अन्य पाठ्यक्रम में निम्न घटकों को सम्मिलित किया जा सकता है-

(1) अवधारणाओं को स्थानीय पर्यावरण एवं संसाधनों से जोड़ना

(2) पर्यावरण के प्रति अनुकूल दृष्टिकोण बनाना

(5) अपने पर्यावरण में आसानी से उपलब्ध होने वाले पदार्थों को लेकर नए-नए प्रयोग व प्रदर्शन करना तथा उन पर विचार विमर्श करना।

(4) समुदाय के भिन्न-भिन्न लोगों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध रखना।

(III) स्तर के अनुसार विस्तार की संभावनायें-

एक ही बिन्दु को भिन्न-भिन्न स्तरों पर आवश्यक विस्तार के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। बच्चों की समझ, उनकी उपलब्धि के स्तर और परिवेश को संपर्कता ऐसे घटक हैं जो विस्तार की सीमा को सुनिश्चित करते हैं।

उदाहरण के तौर पर विवेच्य बिंदु है जनसंख्या एवं पर्यावरण इसके लिये-

पहली व दूसरी कक्षा- जनसंख्या और पर्यावरण की सामान्य जानकारी देना पर्याप्त है।

तीसरी और चौथी कक्षा- जनसंख्या घटने-बढ़ने या स्थिर रहने के पीछे पर्यावरण की विशेष भूमिका।

पांचवी और छठी कक्षामानव द्वारा किए गये उत्पादन और उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले गुणात्मक प्रभाव, वनों की कटाई के दुष्परिणाम इत्यादि।

(IV) हैरिस और म्यूरिंग (1972) के अनुसार प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा का पाठ्यक्रम-

7-8 वर्ष आयु वर्ग- मेरा घर, गली में मिलने वाले लोग, विद्यालय और उसकी स्थिति ।

8-9 वर्ष आयु वर्ग- भोजन, पानी और हवा, पास के मंदिर/मस्जिद/गिरजाघर की यात्रा, हमारे गांव के अन्य समुदाय।

9-10 वर्ष आयु वर्ग- गांव से जाने वाली सड़क, नदी, घाटी और विद्यालय क्षेत्र की जानकारी।

10-11 वर्ष आयु वर्ग- स्थानीय झील, हमारा गांव आदि ।

पहले वर्ष में अध्यापन विधि- बातचीत, प्रयोग, तथ्यात्मक अभिलेख, नक्शे,टेप-रिकार्डर और काल्पनिक लेखन अथवा संकलन।

दूसरे से चौथे वर्ष में अध्यापन विधि- इसके अतिरिक्त वर्गीकरण, संदर्भ पुस्तकों का पठन, गणना, पत्रलेखन व प्रदर्शन को जोड़ा जा सकता है।

पर्यावरण शिक्षा में सैद्धांतिक पक्ष की अपेक्षा प्रायोगिक पक्ष अधिक प्रबल है। इसे पढ़ाते समय अध्यापक यदि खेलकूद, शिविर, देशाटन, परिभ्रमण, प्रायोजना तथा शैक्षिक सहायक सामग्री आदि के प्रयोग पर जोर दें, तो यह विषय अधिक आसानी से हृदयंगम हो सकता है।

(V) उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पाठ्यक्रम-

वर्तमान समय में कक्षा-1 तथा कक्षा-2 में पर्यावरण अध्ययन एकीकृत अध्ययन के रूप में रखा गया है। कक्षा 3 व 4 में पर्यावरण अध्ययन (प्राकृतिक) तथा पर्यावरण अध्ययन (सामाजिक) दो खण्डों में बांटा गया है। कक्षा-1 से 5 तक के पाठ्यक्रम में पर्यावरण का सामान्य परिचय तथा क्षेत्र धरातल, जल, वायु, प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक पर्यावरण, गांव, जनपद, तहसील, प्रदूषण इत्यादि।

अतः प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के निम्न सामान्य उद्देश्य निर्धारित किये गये हैं-

(1) बालक-बालिकाओं में अवलोकन एवं अन्वेषण द्वारा प्रकृति तथा मानव में परस्पर निर्भरता को समझना तथा संबंधित क्षमता का विकास करना।

(2) बालक-बालिका अपने पर्यावरण को जीव जगत का अभिन्न अंग मानते हुये उसकी प्रशंसा कर सकें, इस स्तर पर प्रशिक्षण हेतु निम्न विधियों का उपयोग किया जा रहा है या किया सकता है।

(3) बालकों में अपनी शारीरिक क्रियाओं को समझने की क्षमताओं विकास करना।

(i) प्रेक्षण तथा अबलोकन, (ii) प्रायोगिक कार्य, (iii) योग प्रदर्शन, (iv) सृजनात्मक कौशल ।

(VI) राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान परिषद (NCERT) का पाठ्यक्रम-

वर्तमान समय में प्राथमिक विद्यालयों के लिए NCERT द्वारा पुस्तकें तैयार करते समय पर्यावरण शिक्षा की इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए पुस्तकीय ज्ञान की आवश्यकता नहीं समझी गई तथा उन्हें व्यवहारिक ज्ञान की ओर आकृष्ट करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। तीसरे से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए परिवेश अध्ययन अन्वेषण भाग 1 से 3 तक प्रकाशित किया गया है। इन पुस्तकों में परिवेश स्रोतों के माध्यम से विज्ञान का ज्ञान अर्जित करने के लिए अधिगम क्रियाएं दी गई हैं। उच्च प्राथमिक स्तर की पाठ्य पुस्तकों में प्रत्येक प्रकरण छह भागों मैं विभक्त किया गया है- (1) अवलोकन (2) प्रश्न (3) आओ पता लगाएँ (4) क्रियाएँ (5) हमने क्या सीखा (6) सीखा गया ज्ञान कितना सार्थक है।

(VII) जन सामान्य के लिए पर्यावरण शिक्षा की विषय वस्तु निम्नानुसार प्रस्तावित है

(1) पर्यावरण के विभिन्न घटकों की जानकारी, (2) पर्यावरण एवं मानव संबंधों का आधारभूत ज्ञान, (3) जैव मंडल में ऊर्जा का प्रवाह, (4) ऊर्जा के विभिन्न प्रकार एवं अनुप्रयोग, (5) जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं का ज्ञान, (6) जैविक साधनों का उपयोग, (7) पर्यावरण एवं स्वास्थ्य।

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Pankaja Singh

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