शिक्षाशास्त्र

नवाचार लागू करने में कठिनाइयाँ | नवाचार के प्रकार

नवाचार लागू करने में कठिनाइयाँ | नवाचार के प्रकार | Difficulties in implementing innovation in Hindi | Types of innovation in Hindi

नवाचार लागू करने में कठिनाइयाँ

(Difficulties in implementing Innovation programmes)

  1. नवाचार एवं शैक्षिक तकनीकी द्वारा प्रस्तावित शैक्षिक योजनाओं का कार्यान्वयन व्यय साध्य है। इनमें प्रयुक्त किये जाने वाले नये-नये उपकरणों का मूल्य इतना अधिक है कि अधिकांश विद्यालय इसे खरीद नहीं सकते। सरकार के पास भी इतना धन नहीं है कि इन योजनाओं को लागू करने के लिए अपेक्षित धनराशि अनुदान के रूप में दे सके।
  2. प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं विशेषकों का सर्वथा अभाव- यदि कुछ विद्यालयों में इन विशेष उपकरणों की व्यवस्था हो भी जाये तो इनकी सम्यक् रूप से प्रयोग करने वाले शिक्षकों का इस देश में अभाव है।
  3. बढ़ती हुई जनसंख्या- सरकार इस देश के 85 करोड़ लोगों की रोटी-कपड़ा-मकान की समस्याओं को ही हल करने में असफल हो रही है। परम्परागत विद्यालयों की दशा दपनीय हो रही है। शिक्षा का विस्तार तो कागज पर हो जाता है किन्तु न तो इन विद्यालयों हेतु इमारतें हैं, न प्रशिक्षित अध्यापक और न ही सहायक शिक्षण सामग्री। ऐसी परिस्थितियों में नये-नये कीमती उपकरणों, विशेष प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापकों एवं नवाचार में अपेकि संचार और प्रेषण माध्यमों की व्यवस्था सरकार के लिये असंभव प्रतीत होती है। नयी शिक्षा नीति द्वारा प्रस्तावित शैक्षिक कार्यक्रमों में वर्तमान परिस्थितियों में हम उन्हीं कार्यक्रमों को संचालित कर सकते हैं जिनमें डाक सेवाओं, रेडियो एवं दूरदर्शन का प्रयोग होता है। पत्राचार पाठ्यक्रम, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम एवं टेलीविजन द्वारा शिक्षण एवं अनुदेशन के कार्यक्रम ही इस समय लागू हो रहे हैं किन्तु इसके पक्षलिये भी डाक सेवा का विस्तार दूर-दराज के गाँवों तक तथा अधिकाधिक रेडियो और टेलीविजन प्रसारण केन्द्रों की व्यवस्था की भी आवश्यकता है।

साथ ही साथ यह भी आवश्यक है कि शिक्षक प्रशिक्षक संसाधनों में इन कार्यक्रमों हेतु विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाये। इनसे स्थानों में इन उपकरणों एवं तकनीकी की पूरी जानकारी एवं उन्हें संचालित करने में कुशलतम हेतु विशेष प्रबंध किया जाना चाहिये।

यह सब तभी संभव है जब केन्द्र और प्रान्त में शिक्षा बजट पर अधिक व्यय का प्रावधान किया जाय।

नवाचार के प्रकार (Types)

नवाचार प्रमुखता दो प्रकार का होता है-

(1) सामाजिक अन्तः क्रियात्मक नवाचार (Social Interaction Type of Innovation) – चूंकि विद्यालय के छात्र विभिन्न सामाजिक परिवेश से होकर आते हैं तथा अध्यापक के समक्षय भी वही परिस्थिति होती है। अतः कोई भी विधि समय, प्रविधि, तकनीकी अथवा परिवर्तन को करते समय उक्त चीजों को ध्यान में रखना ही इस प्रकार को नवाचार कहा जाता है।

(2) समस्या समाधान सम्बन्धी नवाचार (Problem Solving Type)- समाज के लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु समस्याओं का समाधान करने के लिये प्रयास करते हैं। फलस्वरूप ये नवाचार को चयनित करके उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। वह इस श्रेणी में आता है।

नवाचार की प्रक्रिया या अवस्थायें

(The Process or Stages of Innovation)

रोजर महोदय ने इसमें प्रमुख पाँच प्रक्रिया बतायी है-

(1) जानकारी (Awareness)

(2) रुचि (Interest)

(3) परीक्षण (Trial)

(4) मूल्यांकन (Evaluation)

(5) ग्रहण करना (Adaption)

परिवर्तन का स्वरूप

(Nature of Change)

परिवर्तन के प्रमुख तीन स्वरूप बताये गये हैं-

(1) विकासवादी परिवर्तन (Evolutionary Change) – इस प्रकार का परिवर्तन परिवार, समाज एवं अन्य क्षेत्रों में बराबर चलता रहता है, किन्तु उसका अन्त नहीं होता जैसे एक परिवार में किसी बच्चे को यदि आप सात वर्ष के अन्तराल के बाद देखेंगे तो उसे पहचानने में आपको कठिनाई होगी। अतः स्पष्ट हो जाता है बच्चे में विकास के साथ परिवर्तन होता रहता है। इसकी तुलना एक ऊपर पर जाती रेखा से कर सकते हैं।

(2) सन्तुलनात्मक परिवर्तन (Homeostatic Change)- मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति हेतु मानसिक तनाव का सामना करता है और जब उसकी पूर्ति हो जाती है तो तनाव समाप्त हो जाता है जो इसके अन्तर्गत आता है।

(3) नवगत्यात्मक परिवर्तन (Normoblastic Change)- यह परिवर्तन सचेतन अवस्था में होता है तथा योजनाबद्ध तरीके से होता है जिसकी अनुभूति तथा प्रभाव बराबर दिखायी पड़ता है।

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Pankaja Singh

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