शिक्षाशास्त्र

जनसंख्या विस्फोट का विकास पर प्रभाव | जनसंख्या को नियन्त्रित करने के उपाय | परिवार नियोजन | भारत में परिवार नियोजन के कार्यक्रम

जनसंख्या विस्फोट का विकास पर प्रभाव | जनसंख्या को नियन्त्रित करने के उपाय | परिवार नियोजन | भारत में परिवार नियोजन के कार्यक्रम | Impact of population explosion on development in Hindi | Measures to control population in Hindi | Family planning in Hindi | family planning programs in India in Hindi

जनसंख्या विस्फोट का विकास पर प्रभाव

(1) जनाधिक्य और आर्थिक विकास- प्रो. कोलिन क्लार्क जनसंख्या वृद्धि को देश के आर्थिक विकास के लिए हानिकारक मानते हैं क्योंकि बचत का अधिकांश भाग जनसंख्या पर खर्च होने से शुद्ध राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय बहुत ही कम रह जाती है।

(2) जनसंख्या वृद्धि और पूंजी निर्माण- जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति प्राकृतिक साधनों में भी कमी हो जाती है और उत्पादकता गिरती है। ऐसी परिस्थिति में पूंजी निर्माण का कार्य एक समरूप बन जाती है।

(3) जनसंख्या वृद्धि और खाद्य समस्या- जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने पर पिछड़े एवं विकासशील राष्ट्रों में जनसंख्या की मांग के अनुरूप पूर्ति नहीं हो पाती। अतः वहां भुखमरी की समस्या पैदा होती है और विदेशों से अनाज मंगाना पड़ता है।

(4) जनसंख्या एवं मूल्य वृद्धि- जनसंख्या के बढ़ने से वस्तुओं की प्रभावपूर्ण मांग में भी वृद्धि हो जाती है किन्तु उसो मात्रा में पूर्ति न होने पर वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।

(5) जनसंख्या वृद्धि और शिक्षा- जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ पिछड़े राष्ट्रों में निरक्षरों को संख्या बढ़ने की सम्भावना रहती है।

(6) जनसंख्या वृद्धि और आवास-समस्या- जनसंख्या वृद्धि होने पर लोगों को बसाने और उनके लिए स्वास्थ्यप्रद मकानों को व्यवस्था करने की समस्या पैदा होती है।

(7) जनसंख्या वृद्धि और बेकारी- बढ़ती जनसंख्या किसी देश में बेकारी, अर्द्ध-बेकारी एवं छिपी बेकारी को जन्म देती है।

(8) जनसंख्या वृद्धि एवं जीवन स्तर- परिवार में जनसंख्या बढ़ने पर सौमित आय की ही सभी सदस्यों पर खर्च करना होता है। ऐसी स्थिति में सदस्यों के लिए भोजन, वस्त्र, शिक्षा, सुविधाएं समुचित रूप से नहीं जुटाई जा सकतीं। अतः जनसंख्या की अधिकता निम्न जीवन-स्तर के लिए उत्तरदायी है।

(9) जनसंख्या वृद्धि और गरीबी- किसी देश में आवश्यकता से अधिक मात्रा में जनसंख्या में वृद्धि होने पर गरीबी बढ़ती है। प्रत्येक देश में प्राकृतिक साधन एवं भूमि सीमित मात्रा में होते हैं जिनका उपयोग अधिक जनसंख्या के लिए करने पर प्रति व्यक्ति साधनों की उपलब्धि कम हो जाती है। इसका प्रभाव राष्ट्रीय उत्पादन एवं राष्ट्रीय तथा प्रति व्यक्ति आय पर भी पड़ता है। फलतः देश में सामान्य गरीबी बनी रहती है।

(10) जनसंख्या वृद्धि और अपराध- जब किसी देश में जनसंख्या वृद्धि तीव्र गति से होती है तो सभी के भरण-पोषण के लिए साधन जुटा पाना सम्भव नहीं होता। ऐसी दशा में देश में गरीबी, बेकारी और अपराध बढ़त है।

(11) जनसंख्या वृद्धि एवं परिवार का विघटन- परिवार में सदस्यों की संख्या बढ़ने पर नियन्त्रण की भी समस्या पैदा हो जाती है। माता-पिता परिवार के सदस्यों के भरण-पोषण की  व्यवस्था के लिए घर से बाहर अर्जन करने चले जाते हैं तो बच्चे नियन्त्रण में मनमानी‌करने लगते हैं, उनमें उच्छृंखलता पनपती है, पारिवारिक मूल्यों की अवहेलना की जाती है, सदस्यों में निराशा पैदा होती है और सत्ता कसी उपेक्षा होने लगती है। ये सभी परिस्थितियां परिवार में विघटन के लिए उत्तरदायी हैं।

(12) जनसंख्या वृद्धि और नागरिक समस्याएं- जनसंख्या वृद्धि औद्योगीकरण और नगरीकरण से सम्बन्धित अनेक समस्याओं को जन्म देती है। लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर आने लगते हैं। परिणामस्वरूप उद्योगों एवं नगरों द्वारा जनित सामाजिक समस्याएं पनपती हैं।

(13) जनसंख्या वृद्धि और राजनीति- जनसंख्या वृद्धि युद्ध साम्राज्यवाद, क्रान्ति, पूंजीवाद, आदि के लिए भी उत्तरदायी है। अधिकाक जनसंख्या प्रशासकों के सामने प्रशासनिक समस्याएं पैदा कर देती हैं।

जनसंख्या को नियन्त्रित करने के उपाय

(1) विवाह की आयु में वृद्धि – जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बाल विवाह पर कठोर नियन्त्रण लगा दिया जाय तथा कानूनी रूप से विवाह को आयु बढ़ाकर लड़कियों की 21 वर्ष एवं लड़कों की 24 वर्ष कर दो जाय।

(2) शिक्षा प्रसार- अज्ञानता और गरीबी भी अधिक जनसंख्या के लिए उत्तरदायी है। शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ परिवार का आकार भी छोटा होगा क्योंकि शिक्षित दम्पत्ति छोटे परिवारों के लाभों को ध्यान में रखते हुए स्वयं ही परिवार नियोजन हेतु साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

(3) गर्भपात – बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए गर्भपात के नियमों को और अधिक उदार बनाया जाय।

(4) संयम- जो लोग आत्म-संयम में विश्वास रखते हैं, वे जनसंख्या नियन्त्रण के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करने एवं आत्म-संयम रखने की सलाह देते हैं।

(5) मनोरंजन- मनोरंजन के साधनों में वृद्धि करके उन्हें सस्ते दर पर लोगों को उपलब्ध कराया जाय। ऐसा होने पर यौन सम्बन्धी आनन्द को ही मनोरंजन का एकमात्र साधन नहीं समझा जायेगा।

(6) भूमि व्यवस्था में सुधार- कई विद्वानों का विश्वास है कि यदि हमारी भूमि- व्यवस्था में सुधार हो जाय तो जनसंख्या समस्या बहुत कुछ सीमा तक हल हो जायेगी। भूमि की चकबन्दी और उचित वितरण तथा कृषि में वैज्ञानिक साधनों का प्रयोग आदि इस समस्या को हल करने में बहुत कुछ योग दे सकते हैं।

(7) औद्योगीकरण- कुछ विद्वानों ने औद्योगोकरण को जनसंख्या समस्या की रामबाण दवा माना है। भारत में औद्योगीकरण का क्षेत्र विस्तृत है और काफी जनसंख्या इसमें खप सकेगी।

(8) परिवार नियोजन- जनसंख्या नियन्त्रण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विधि परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग है। नियोजित परिवार के लिए कम सन्तानें और एक निश्चित अवधि के पश्चात् सन्तानें होना अच्छा माना गया है। परिवार नियोजन के अन्तर्गत अवांछित गर्भ को रोकने, वन्ध्याकरण करने, सुरक्षित काल (Safe period) का उपयोग करने एवं दवाओं, लूप, सनिरोध तथा जैली आदि के प्रयोग की सलाह दी जाती है। हम यहां परिवार नियोजन पर पृथक् से विचार करेंगे।

परिवार नियोजन (कल्याण)

बढ़ती हुई जनसंख्या को रोकने के लिए परिवार नियोजन जिसे आजकल परिवार कल्याण का नाम दिया गया है. ही एकमात्र कारगर साधन है जो बढ़ती जनसंख्या की समस्या को हल कर पायेगा। परिवार नियोजन का उद्देश्य गर्भ निरोधक साधनों का प्रचार एवं प्रसार करके जनता को उनका ज्ञान करवाना है जिससे कि विवाहित दम्पत्ति वांछित सन्तानों को हो जन्म दे सके तथा एक सुनियोजित एवं नियन्त्रित परिवार की रचना की जा सके। परिवार नियोजन कार्यक्रम मुख्य लक्ष्य देश में अनुकूलतम जनसंख्या (Optimum population) के स्तर को बनाये रखना है। अनुकूलतम जनसंख्या स्तर वह है जो देश में अधिकतम उत्पादन, उच्च जोवन-स्तर, राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुरक्षा, पर्याप्त स्वतन्त्रता और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राप्त करने में सहायता देता है।

परिवार नियोजन के द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिए अनेक साधन अपनाये गये हैं जिनका उद्देश्य गर्भ-निरोध और गर्भपात है। इसमें से प्रमुख निम्न हैं-

(1) मौखिक गर्भ निरोधक गोलियां- इन्हें महीने में 20 दिन सेवन करना पड़ता है। भारत में इनकी कीमत अधिक होने तथा ग्रामीणों द्वारा इसे नियमित रूप से सेवन न कर पाने एवं गोलियों के अनुचित प्रभाव के कारण इनका प्रचलन अधिक नहीं हो पाया है।

(2) लूप- इसका उपयोग स्त्रियों के लिए किया जाता है।

(3) निरोध- ये पुरुषों के लिए सस्ते दामों और व्यापक मात्रा में प्रयोग के लिए उपलब्ध कराये गये हैं।

(4) कृत्रिम तरीके जैसे क्रीम, जैली, फेनिल गोलियां आदि।

(5) बन्ध्याकरण ऑपरेशन।

(6) यौन-शिक्षा देकर।

(7) परिवार नियोजन सम्बन्धी ज्ञान के प्रसार द्वारा।

(8) गर्भपात।

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Pankaja Singh

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