शिक्षाशास्त्र

व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ व परिभाषा | व्यक्तिगत भिन्नताओं की प्रकृति | व्यक्तिगत भिन्नता के आधार

व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ व परिभाषा | व्यक्तिगत भिन्नताओं की प्रकृति | व्यक्तिगत भिन्नता के आधार

मनुष्य और सभी जीव में कुछ-न-कुछ विशेषता, विचित्रता अथवा भिन्नता पायी जाती है। इसीलिए दो मनुष्य या प्राणी अलग-अलग प्रवृत्ति, स्वभाव, योग्यता के होते हैं। मनुष्य की भिन्नताएँ स्पष्ट रूप से दिखायी देती हैं क्योंकि मनुष्य के अन्दर शारीरिक, मानसिक, भावात्मक गुणों की संख्या अन्य प्राणियों की अपेक्षा अधिक होती है। हरेक कक्षा में भिन्न योग्यता, रुचि, क्षमता, और उपलब्धि वाले बालक होते हैं जिन्हें शिक्षा देना पड़ता है। इन भिन्नताओं से युक्त बालकों का ‘व्यक्तित्व’ भी पाया जाता है जिसका विकास करना शिक्षा का लक्ष्य होता है। इस दृष्टि से व्यक्तिगत भिन्नता एवं व्यक्तित्व का अध्ययन शिक्षा मनोविज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है।

व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ व परिभाषा

संसार में स्त्री और पुरुष (मादा और नर) दो भिन्न व्यक्ति पाए जाते हैं। यह प्रकृति की देन है। इसके अलावा प्रत्येक स्त्री-पुरुष में अपने वर्ग के अन्य व्यक्तियों से अलग कुछ विशेष गुण, लक्षण आदि पाए जाते हैं। यहाँ तक कि एक माता-पिता से उत्पन्न जुड़वे बच्चों में भिन्नता पाई जाती है। प्रायः लोगों के शरीर की लम्बाई, बनावट, स्वास्थ्य, आदि मानसिक शक्तियाँ अभिक्षमताओं भावात्मक गुणों में काफी अन्तर दिखाई देता है। नैतिकता-चारित्रिकता, आध्यात्मिकता एवं धर्मपरायणता आदि से भी भिन्न लोगों में भिन्नता पाई जाती है। प्रत्येक व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, भावात्मक चारित्रिक अन्तर या भेद ही व्यक्तिगत भिन्नता है।

शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ होता है विद्यार्थियों के लिखने, पढ़ने एवं विषयों के ज्ञान में पाया जाने वाला अन्तर जिसमें प्रभाव स्वरूप, उनकी उपलब्धियों में अन्तर पाया जाता है। परन्तु केवल ज्ञानात्मक भिन्नता पर शिक्षा में ध्यान नहीं देते हैं, बल्कि विद्यार्थी के शारीरिक, भावात्मक, नैतिक चारित्रिक, सामाजिक सभी गुणों के अन्तर को व्यक्तिगत भिन्नता के अन्तर्गत अध्ययन करते हैं। व्यक्तिगत भिन्नता शैक्षिक दृष्टि से उन सभी क्षमताओं से सम्बन्धित होती है। जिसके कारण विद्यार्थी का व्यक्तित्व दूसरे व्यक्तित्व से भिन्न होता है।

व्यक्तिगत भिन्नताओं की परिभाषा

(i) प्रो० टायलर- शरीर के आकार और रूप, शारीरिक कार्य, गति की क्षमताओं, बुद्धि, उपलब्धि, ज्ञान, रुचियों, अभिवृत्तियों और व्यक्तित्व के लक्षणों में मापी जाने वाली भिन्नताओं को व्यक्तिगत भिन्नताओं की परिभाषा में रखा जाता है।

(ii) प्रो० स्किनर- मापन किया जाने वाला व्यक्तित्व का प्रत्येक पहलू भिन्नता का अंश होता है।

(iii) प्रो० हंसराज भाटिया- व्यक्ति के अन्दर पाए जाने वाले अन्तर लक्षणों को भिन्नताएँ कही जाती हैं।

व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ हुआ प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व में स्वाभाविक तौर पर पाया जाने वाला शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक अन्तर या भेद ।

व्यक्तिगत भिन्नताओं की प्रकृति

(क) व्यक्तिात भिन्नताएँ सर्वव्यापी होती हैं। संसार के सभी देश के लोगों में ये भिन्नताएँ पायी जाती हैं।

(ख) व्यक्तिगत भिन्नता मनुष्य के प्रत्येक गुण में पाई जाती है। भिन्नता की मात्रा भले ही अलग-अलग पाई जाती हो।

(ग) व्यक्तिगत भिन्नता प्रत्येक गुण की सभी किस्मों में पाई जाती है। जैसे काले रंग की कई किस्में होती हैं और हरेक किस्म में कुछ-न-कुछ भेद दिखाई देता है।

(घ) व्यक्तिगत भिन्नता जन्म के बाद बढ़ती पाई जाती है। जन्म के समय प्रायः सभी प्राणी एक समान दिखाई देते हैं परन्तु बाद में उनमें भिन्नता स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है।

(ङ) व्यक्तिगत भिन्नता का मूल स्रोत आनुवंशिकता है। विशेषकर मनुष्य में पर्यावरण की भिन्नता के बाद यक्तिगत भिन्नता में वृद्धि होती है।

(च) व्यक्तिगत भिन्नता मनुष्यों के लक्षणों के संगठन में भी पाई जाती है। इससे व्यक्तित्व की भिन्नता पाई जाती है।

(छ) व्यक्तिगत भिन्नता का अनुपात सदैव बदलता रहता है। इसलिए दो मनुष्यों के बीच पाई जाने वाली भिन्नता हमेशा एक समान नहीं रहती है।

(ज) व्यक्तिगत भिन्नता से व्यक्ति के व्यवहार में भी परिवर्तन होता रहता है और तदनुरूप उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता रहता है।

व्यक्तिगत भिन्नता के विस्तार

व्यक्तिगत भिन्नता के दो रूप हैं-

(अ) आन्तरिक व्यक्तिगत भिन्नताएँ।

(ब) अन्तर-वैयक्तिक भिन्नताएँ।

(अ) आन्तरिक व्यक्तिगत भिन्नता का तात्पर्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर जो गुण पाये जाते हैं वे समान रूप एवं मात्रा में नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति चित्रकार है तो यह जरूरी नहीं कि वह यांत्रिक भी हो।

आन्तरिक व्यक्तिगत भिन्नताएँ बौद्धिक और भावात्मक होती है। इसका तात्पर्य यह है कि बुद्धि में तेज व्यक्ति भावुक नहीं होता। भावुक व्यक्ति में मानसिक अस्थिरता पाई जाती है। विभिन्न व्यक्तित्व परीक्षण इसे बताते हैं। यांत्रिकी चिकित्सा, वकालत जैसे क्षेत्र में बुद्धि की मात्रा अधिक होनी चाहिए। परन्तु इन व्यक्तियों में वैयक्तिक भिन्नता मिलती है।

(ब) अन्तर वैयक्तिक भिन्नता व्यक्तियों की परस्पर भिन्नता को कहते हैं जिससे समूह के सभी व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए सभी भारतीय एक प्रकार के नहीं हैं और न तो सभी अमरीकन ही एक प्रकार के हैं।

व्यक्तिगत भिन्नता के आधार

व्यक्तिगत भिन्नता के निम्न आधार हैं-

(अ) शारीरिक रचना का आधार-शरीर की रचना के आधार पर हम व्यक्तिगत भिन्नता निश्चित करते हैं। रचना की दृष्टि से नाटे, लम्चे, मोटे, पतले आदि व्यक्ति होते हैं रंग-रूप में भी व्यक्तिगत भिन्नता पाई जाती है।

(आ) मानसिक योग्यताओं का आधार- बुद्धि, अभिक्षमता, उपलब्धि परीक्षणों से ज्ञात हुआ कि व्यक्तियों में काफी अन्तर पाया जाता है। कोई निम्न बुद्धि का, कोई तीव्र बुद्धि का, अधिकतर सामान्य बुद्धि के, कुछ शिल्पी, कुछ दार्शनिक या वैज्ञानिक होते हैं।

(इ) रुचि का आधार- पढ़ने-लिखने, खाने-पीने, वस्त्र-आभूषण पहनने, खेल-कूद आदि में लोग भिन्न रुचि रखते हैं।

(ई) अधिगमन का आधार- सीखने की क्षमता के आधार पर व्यक्तिगत भिन्नता पाई जाती है। कोई जल्दी सीखता है, तो दूसरा देर में ।

(उ) व्यक्तित्व के लक्षणों का आधार- व्यक्तित्व लक्षणों के आधार पर कोई रूढ़िवादी विचार का, कोई ईमानदार, कोई प्रसारक, कोई परिश्रमी, कोई सामाजिक, कोई अन्तर्मुखी व्यक्तित्व वाला कहा जाता है।

(ऊ) अभिक्षमता और निष्पत्ति का आधार- कोई संगीतज्ञ, कोई वैज्ञानिक कोई अधिक, कोई कम बुद्धि वाला होता है।

(ए) स्वभाव का आधार- कुछ लोग प्रसन्न-चित्त, कुछ क्रोधी, चिड़चिड़े या लड़ाकू स्वभाव के होते हैं।

(ऐ) विशिष्ट योग्यताओं और अयोग्यताओं का आधार- एक बालक सभी विषयों में अच्छा होते हुए भी भाषा में कमजोर होता है। इसके विपरीत दूसरा बालक गणित में तेज होता हुआ भी कला में कमजोर पाया जाता है।

व्यक्तिगत भिन्नताओं के क्षेत्र इसके निम्नलिखित क्षेत्र हैं-

(1) शारीरिक अंगों व स्वास्थ्य से सम्बन्धित क्षेत्र

(2) बुद्धि व योग्यताओं से सम्बन्धित क्षेत्र

(3) रुचि व स्वभाव से सम्बन्धित क्षेत्र

(4) क्रिया कौशल, अभिक्षमता तथा निष्पादन से सम्बन्धित क्षेत्र

(5) सीखने से सम्बन्धित क्षेत्र

(6) व्यत्तित्व से सम्बन्धित क्षेत्र।

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Pankaja Singh

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