संगठनात्मक व्यवहार

मनोवृत्ति के घटक | मनोवृत्ति के स्रोत अथवा निर्माण | Components of Attitude in Hindi | Sources or Formation of Attitudes in Hindi

मनोवृत्ति के घटक | मनोवृत्ति के स्रोत अथवा निर्माण | Components of Attitude in Hindi | Sources or Formation of Attitudes in Hindi

मनोवृत्ति के घटक (Components of Attitude)-

मनोवृत्ति की रचना एक जटिल प्रकिया है। यह विचारों, भावनाओं एवं व्यवहार से जुड़ी है। दूसरे शब्दों में, मनोवृत्ति के तीन प्रमुख अंग हैं, जिनका वर्णन निम्न प्रकार है-

(1) संज्ञानात्मक घटक (Cognitive Component)- मनोवृत्ति के इस घटक में व्यक्ति स्थिति के बारे में ज्ञान प्राप्त करके यह निर्णय ले सकता है कि कोई चीज अन्य से बेहतर है। यह घटक व्यक्ति द्वारा किसी चीज का अवबोध करके उसे ‘जानने’ से सम्बन्धित है। इसके अन्तर्गत यह ‘मूल्य कथन’ (Value statement) जैसे ‘भेदभाव करना गलत है’, शामिल है। इसमें व्यक्ति का ‘बुद्धि तत्व’ विवेक सक्रिय होता है।

(2) भावनात्मक घटक (Affective Component)- इसके अन्तर्गत व्यक्ति किसी स्थिति के प्रति अपनी भावनाओं एवं संवेगों का प्रदर्शन करता है। यह भाव प्रधान घटक है जिसमें व्यक्ति अपनी मनोवृत्ति के निर्माण में मनोभावों, आदेशों, रागात्मकता, आवेगों जैसे तत्वों से निदेशित होता है इससे व्यक्ति का ‘हृदय तत्व’ प्रभावी होता है। यह घटक मनोवृत्ति का अत्यन्त महत्वपुर्ण (Crucial) भाग है।

(3) व्यवहारात्मक घटक (Behavioural Component)- मनोवृत्ति के व्यवहारात्मक घटक में व्यक्ति किसी वस्तु या मानव के प्रति एक निश्चित ढंग से व्यवहार करने का अभिप्राय रखता है (Has intentions to behave in a certain way)। उदाहरण के लिये, एक व्यक्ति कहे कि मैं इस कर्मचारी की बुरी आदतों के कारण इसके साथ काम करना पसन्द नहीं करूंगा। यह घटक मनोवृत्ति के निर्णयात्मक एवं मूल्यांकनात्मक पहलू पर बल देता है। यह एक साभिप्राय (Indented) घटक है जो यह दर्शाता है कि व्यक्ति किसी स्थिति में कैसे कार्य करने की आशा या इरादा रखता है।

मनोवृत्ति के स्रोत अथवा निर्माण

(Sources or Formation of Attitudes)

मनोवृत्तियाँ जन्मजात नहीं, वरन् अर्जित (Acquired) व सीखी हुयी होती हैं। मनोवृत्ति के निर्माण के लिये व्यक्ति अनेक स्रोतों से आधार सामग्री विचार व सूचनायें प्राप्त करता है। इनमें कुछ प्रमुख स्रोत अग्र प्रकार हैं।

(1) वैयक्तिक अनुभव (Personal Experiences)- व्यक्ति अपने दैनिक जीवन, कार्य स्थल, सामाजिक व्यवहार आदि में होने वाले अपने अच्छे-बुरे प्रत्यक्ष अनुभवों से अपनी मनोवृत्ति का निर्माण करता है। उदाहरण के लिये, यदि संगठन में व्यक्ति का कार्य ऊब से भरा व आवृत्तिमूलक है, पारिश्रमिक कम है, सुपरवाइजर का व्यवहार रूखा व पक्षपातपूर्ण है, सह-कर्मचारी सहयोगी नहीं है तो वह संस्था के प्रति नकारात्मक मनोवृत्ति का निर्माण कर लेगा।

(2) सम्बद्ध तत्त्व (Association)- व्यक्ति अपने पुराने अनुभवों, घटनाओं एवं आचरण को नये के साथ सम्बद्ध करके भी मनोवृत्ति का निर्माण करता है। यहाँ घटनाओं के साचर्य एवं संयुक्तिकरण के फलस्वरूप किसी विशिष्ट मनोवृत्ति का निर्माण हो जाता है। उदाहरण के लिये, यदि कोई नया श्रमिक अधिकांश समय किसी ऐसे पुराने श्रमिक के साथ रहता है जिसके प्रति सुपरवाइजर का सकारात्मक दृष्टिकोण है तो इस सह-सम्बन्ध एवं साहचर्य के कारण सुपरवाइजर उस नये श्रमिक के प्रति भी सकारात्मक व अच्छी मनोवृत्ति विकसित कर लेगा। यह संयुक्तिकरण का प्रभाव है।

(3) वातावरणीय अनुकूलन (Operant Conditioning)- मनोवृति के निर्माण में व्यक्ति द्वारा सीखने (Learning) की क्रिया का महत्वपूर्ण योगदान होता है। व्यक्ति अपने व्यवहार के परिणामों (Consequences of Behaviour) से बहुत कुछ सीख कर मनोवृत्तियों का निर्माण करता है। व्यक्ति किसी उद्दीपक के प्रति जो प्रतिक्रिया करता है उसके परिणामों को वह अपने भावी व्यवहार का आधार बनाता है। यदि किसी प्रतिक्रिया का परिणाम सुखद एवं लाभप्रद (Rewarding) होता है तो व्यक्ति उस प्रकार के व्यवहार को दोहराता है। किन्तु जिस प्रतिक्रिया का परिणाम अच्छा नहीं होता, वह उसकी पुनरुक्ति नहीं करता। इस प्रकार के अनुकूलन से वह विशिष्ट प्रकार की मनोवृत्ति का निर्माण करता है।

(4) सामाजिक अधिगम (Social Learning)- मनोवृत्तियाँ समाज से भी सीखी जाती हैं। व्यक्ति अपने घर-परिवार, मित्र-मण्डली, शिक्षक, अमेज, मॉडल्स, क्लब, संस्थायें आदि से निरन्तर अन्तर्व्यवहार करके अपने मन-मस्तिष्क व विचारों का निर्माण करता है। इसी प्रकार व्यक्ति अपने अड़ोस-पड़ोस, साथी कर्मचारियों आदि से सीखकर मनोवृत्ति का निर्माण करता है।

(5) संचार माध्यम (Mass Communications)- जनसंचार के विविध माध्यम जैसे रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र पत्रिकायें आदि से भी व्यक्ति विचारों को ग्रहण करके मनोवृत्ति का निर्माण करता है। इन संचार माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं से व्यक्ति या तो अपनी विद्यमान मनोवृत्तियों में परिवर्तन लाता है अथवा नयी मनोवृत्तियों का निर्माण करता है।

(6) शिक्षण संस्थायें (Educational Institutions)- व्यक्ति शिक्षा संस्थाओं एवं अपने नियमित अध्ययन से भी अनेक सूचनायें, विचार, मत-सम्मतियाँ आदि ग्रहण करके दृष्टिकोण का निर्माण करता है।

(7) संगठनात्मक घटक (Organisational Factors)- एक व्यक्ति जिस संस्था में कार्य करता है, वहाँ का कार्य वातावरण, नीतियाँ, व्यवहार, अनौपचारिक समूह, श्रम संघ, प्रबन्धकीय दृष्टिकोण, कर्मचारी सोच आदि कई घटक व्यक्ति की मनोवृत्ति के निर्माण पर प्रभाव डालते हैं। इनसे प्रेरित होकर वह अपनी अभिवृत्ति बनाता है।

(8) आर्थिक घटक (Economic Factors)- समाज में प्रचलित आर्थिक दशायें जैसे मूल्य स्तर, बचत व विनियोग सम्बन्धी नीतियाँ, आर्थिक संकट, वित्तीय स्थिति, देश में उत्पादन, उपभोग व आय का स्तर आदि घटक भी मनोवृत्ति के निर्माण एवं परिवर्तन पर प्रभाव डालते हैं।

(9) राजनीतिक समाज (Political Society)- राजनीति मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजनीतिक दलों की क्रियायें, विचारधारायें, राजनीतिक स्थायित्व, दबाव समूह, विचार मंच, नेतृत्व, हित समूह आदि घटक भी व्यक्ति की मनोवृत्ति को दिशा देते हैं।

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