अर्थशास्त्र

मांग की आडी व तिरछी लोच | मांग की आड़ी लोच की परिभाषाएं

मांग की आडी व तिरछी लोच | मांग की आड़ी लोच की परिभाषाएं

मांग की आडी (अथवा तिरछी) लोच (Cross Elasticity Of Demand)-

मांग की ऑडी अथवा तिरछी लॉज के विचार का विकास मूर (Moore) ने अपनी पुस्तक ‘Synthetics Economics’मैं किया था किंतु इस विचार की विस्तृत व्याख्या रॉबर्ट ट्रीफिन (Robert Triffin) ने की।

अर्थ की परिभाषाएं (Meaning And Definitions)-

किन्हीं दो संबंधित वस्तुओं (Related Goods) की मात्रा और कीमत में होने वाले परिवर्तन में परस्पर संबंध होता है। एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन दूसरी वस्तु की मांग की मात्रा में परिवर्तन का कारण बन सकता है; जैसे-चाय की कीमत में परिवर्तन होने पर साधारणतया कॉफी की मांग में परिवर्तन आ जाता है तथा कार की कीमत के परिवर्तन से पेट्रोल की मांग में परिवर्तन आ जाता है। एक वस्तु की मांग की मात्रा और दूसरी वस्तु की कीमत के परिवर्तन का पारस्परिक संबंध

मांग की आड़ी लोच (Cross Elasticity of Demand) द्वारा मापा जा सकता है। मांग की आड़ी लोच किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने के फल स्वरुप, संबंधित वस्तु की मांग में होने वाले परिवर्तन की माप है।

मांग की आड़ी लोच की कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं-

  • फर्गुसन के अनुसार, “मांग की आड़ी लोच Y वस्तु की कीमत में होने वाले सापेक्ष परिवर्तन के कारण संबंधित वस्तु X किमान में होने वाला अनुपातिक परिवर्तन होता है।”
  • लिभाफस्की के अनुसार, “मांग की आड़ी लोच Yवस्तु की कीमत में परिवर्तन होने के फल स्वरुप X वस्तु की मांग में होने वाले परिवर्तन का माप है।”

eC  = वस्तु X की मांग में अनुपातिक परिवर्तन/वस्तु Y की कीमत में अनुपातिक परिवर्तन

= DX/X DPy/Py

जहां ∆X= वस्तु X की मांग में परिवर्तन

X = वस्तु X की आरंभिक भाग

∆Py = वस्तु Y की कीमत में परिवर्तन

Py = वस्तु Y की आरंभिक कीमत

तंत्र वस्तुओं की मांग की आड़ी लोच (Cross Elasticity of Demand in Independent Goods)- स्वतंत्र वस्तुओं में मांग की आड़ी लोच शून्य होती है क्योंकि स्वतंत्र वस्तुओं के संदर्भ में एक वस्तु की कीमत का प्रभाव दूसरी वस्तु की मांग पर नहीं पड़ता।

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Pankaja Singh

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