अनुसंधान क्रियाविधि

अनुसंधान समस्या का चयन करते समय ध्यान देने योग्य बातें | अनुसंधान-समस्या के चयन के मौलिक अधिकारों का विवरण

अनुसंधान समस्या का चयन करते समय ध्यान देने योग्य बातें | अनुसंधान-समस्या के चयन के मौलिक अधिकारों का विवरण | Things to keep in mind while choosing a research problem in Hindi | Statement of Fundamental Rights to Choose a Research Problem in Hindi

अनुसंधान समस्या का चयन करते समय ध्यान देने योग्य बातें-

(Points of Selection of Research Problem)

समस्या का चयन सम्पूर्ण अनुसंधान कार्य की आधारशिला है, इसलिये इस कार्य को अत्यन्त सतर्कता से करना चाहिये। समस्या के चयन से सम्बन्धित निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिये-

(1) शोधकर्त्ता या अनुसंधानकर्त्ता की अभिरुचि- शोधकर्त्ता को उसी विषय का चयन करना चाहिये जिसमें उसे विशेष अभिरूचि और लगाव हो।

(2) अनुसंधानकर्त्ता की आवश्यक योग्यता- अनुसंधानकर्त्ता में अनुसंधान कार्य हेतु आवश्यक योग्यता का होना आवश्यक है अन्यथा समस्या-चयन में त्रुटि हो सकती है।

(3) समस्या का प्रारम्भिक ज्ञान- पार्क के मत में, “अनुसंधान के विषय के सन्दर्भ में अनुसंधानकर्ता के लिये प्रारम्भिक ज्ञान उतना ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है जितना कि किसी चिकित्सक के लिये रोगी की शारीरिक परिस्थितियों का ज्ञान।” प्रारम्भिक ज्ञान के अभाव में उपयुक्त समस्या का चयन सम्भव नहीं होगा।

(4) समय और धन के व्यय का ज्ञान- अनुसंधान कार्य की पृष्ठभूमि तैयार करते समय ही इस बात का अनुमान कर लेना आवश्यक होता है कि इस कार्य में कितना समय और धन व्यय होगा।

(5) सम्भावित कठिनाइयों का अनुमान- अनुसंधान कार्य प्रारम्भ होने से पूर्व उसमें आने वाली सम्भावित कठिनाइयों का अनुमान आवश्यक होता है जिससे श्रम, समय और धन की बचत होती है।

(6) परिभाषित इकाइयाँ- यंग के अनुसार, “स्पष्ट रूप से परिभाषित इकाइयाँ यथार्थ अवलोकन एवं तुलना में सहायक होती हैं।” इकाइयों के स्पष्ट न होने की स्थिति में अनुसंधानकर्ता सामग्री एकत्र करने में उपयुक्त और अनुपयुक्त का अन्तर नहीं कर पायेगा।

(7) नयी समस्या का चयन- जहाँ तक हो सके किसी नयी समस्या का ही चयन करना चाहिये जिससे अनुसंधान की रोचकता बनी रहती है।

(8) उपयोगी समस्या का चयन- समस्या की उपयोगिता का भी ध्यान रखना जरूरी है अन्यथा अनुसंधान का उद्देश्य ही व्यर्थ हो जाता है।

(9) उपयुक्त पद्धति- अनुसंधानकर्ता को विषय के अनुरूप अध्ययन की विधि का चयन करना चाहिये। उपयुक्त पद्धति द्वारा ही वैज्ञानिक अनुसंधान सम्पन्न हो सकता है।

(10) विश्वसनीय तथ्यों पर आधारित- ऐसी समस्या का ही चयन करना चाहिये जो विश्वसनीय तथ्यों पर आधारित हो और असंदिग्ध हो।

(11) क्षेत्र निर्धारण में सावधानी- समस्या के क्षेत्र का निर्धारण करने में सावधानी से काम लेना चाहिये। इसका क्षेत्र न तो संकुचित होना चाहिये और न ही अत्यन्त विस्तृत। पहली स्थिति में अनुसंधान की उपयोगिता व्यर्थ हो जाती है और दूसरी में अनुसंधान कार्य अपव्यय का कारण बनता है।

(12) तथ्य एवं स्रोतों का ज्ञान- समस्या या विशेष से सम्बन्धित तथ्यों और उनके स्रोतों का ज्ञान नितांत आवश्यक है।

बी.एस.पामर के शब्दों में,” कभी-कभी तथ्यों के स्रोतों तक न पहुँच पाने के कारण अनुसंधान-कार्य बीच में ही रोक देना पड़ता है या अध्ययन का कोई महत्वपूर्ण पक्ष अछूता ही रह जाता है।” अतः अनुसंधान को पूरा करने के लिये तथ्यों और स्रोतों की पर्याप्त जानकारी आवश्यक होती है।

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Pankaja Singh

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