अनुसंधान क्रियाविधि

शोधकर्ता | शोधकर्ता के गुण | शोधकर्त्ता से आशय

शोधकर्ता | शोधकर्ता के गुण | शोधकर्त्ता से आशय | researcher in Hindi | Researcher’s Qualities in Hindi | meaning of researcher in Hindi

शोधकर्ता

(Researcher)

शोध करने वाले को शोधकर्ता, गवेषक, अनुसंधाता आदि कहते हैं। इसे केवल लेखक अथवा केवल इतिहासकार कहना भूल होगी। इतिहासकार जब केवल इतिहास लिखता है, तो वह दूसरी बात होती है और जब वह इतिहास में किसी तरह की खोज करके लिखता है, तो, अर्थ दूसरा होता है। इसी आधार पर हम ग्रंथ और शोधग्रंथ के अन्तर करते हैं। रचना के आधार पर ही हम निश्चित कर पाते हैं कि रचनाकार, साहित्यकार, इतिहासकार, कल्पनाकार, शोधकर्ता आदि में क्या अन्तर है? अतः शोधकर्ता को सबसे अलग समझने के लिए हमें रचनाकार के विविध स्वरूपों से परिचित होना आवश्यक है।

शोधकर्ता के रूप में एक रचनाकार नवीन तथ्यों की खोज करता है, उपलब्ध तथ्यों की नवीन व्याख्या करता है और सिद्धान्तों के परिवेश में तथ्यों का निरूपण करता है। इसका कार्य कठिन किन्तु सराहनीय होता है।

साहित्यकार के रूप में एक रचनाकार जब हमारे सामने उपस्थित होता है तो हम उसमें भावना एवं कल्पना की प्रधानता पाते हैं। यह रचनाकार कहानी, उपन्यास आदि अधिक लिखता है।

संकलनकर्त्ता के रूप में एक रचनाकार अपने लेखन-विषय से सम्बद्ध तथ्यों अथवा ऐतिहासिक स्रोतों को एकत्र अथवा संकलित कर उसे व्यवस्थित रूप में प्रकाशित करता है। इसमें वह पुराने ग्रंथों, प्रकाशित-दुर्लभ संदर्भग्रन्थों-पांडुलिपियों को नया स्वरूप प्रदान करता है। कुछ लोग दूसरों को प्राचीन अथवा नयी अप्रकाशित रचनाओं की चोरी करके उसको प्रकाशित किया करते हैं। इन्हें चोर-जालसाज रचनाकार कहते हैं।

इस प्रकार रचनाकार का स्वरूप एक आलोचक-समालोचक, एक टीकाकार, व्याख्याकार, एक अनुवादक-भाष्यकार एक सम्पादक, एक पत्रकार और परीक्षक विश्लेषक का भी होता है।

शोधकर्ता के गुण (Qualities of Researcher)

शोधकर्ता में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है-

(1) शोधकर्ता को कठोर परिश्रमी, अध्यवसायी, धैर्यवान्, विषयानुरागी और बुद्धिमान्, होना चाहिए।

(2) यह शोधकार्य के विधि-विधानों को ठीक से जानता, समझता व प्रतिपादित कर सकता है।

(3) नवीन तथ्यों की खोज, उपलब्ध तथ्यों की नवीन व्याख्या तथा सिद्धान्तों के परिवेष में तथ्यों के निरूपण में दक्ष हो।

(4) इतिहास के अध्ययन में वैज्ञानिक विधाओं का प्रयोग करने की उसमें अद्भुत क्षमता होनी चाहिये, यथा-तथ्यों का संकलन व्याख्या, विश्लेषण, निष्कर्ष आदि कार्यों की जानकारी होनी चाहिये।

(5) शोधक समाज तथा उसकी आवश्यकता को ठीक से समझ सकता हो।

(6) इतिहास को एक विज्ञान के विषय के रूप में जानने व मानने वाला होना चाहिये।

(7) यथार्थ एवं अयथार्थ तथ्यों के अन्तर को समझ सकने की क्षमता वाला हो।

(8) एक साथ वह किसी एक ही विषय का चयन शोध कार्य के लिये कर चुका हो।

(9) शोधकर्ता में साहित्यिक गुण भी होने चाहिये।

(10) शोधकर्ता में व्यक्तिगत बौद्धिक परिपक्वता होनी चाहिये। इसके अभाव में शोध- विषय का चयन, ग्रन्थों की सूची, तथ्यों का संकलन, उनकी व्याख्या, विश्लेषण मूल्याकंन तथा यथोचित निष्कर्ष की प्राप्ति असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य प्रतीत होती है।

(11) अपने कथन की अभिव्यक्ति के समय पूर्वाग्रहरहित, प्रभावरहित, स्वाधीन, स्पष्ट तथा सत्य वक्ता एवं आलोचक हो, साथ ही निष्पक्ष न्यायकर्ता के गुण वाला हो तथा गलत विचारों खण्डन करने में निर्भीक हो।

(12) अपनी कथा की पुनःरचना परिवर्तित दृष्टिकोण के अनुसार समसामयिक सामाजिक आवश्यकता के अनुसार कराने में समर्थ हों।

(13) कुछ ही तथ्यों के आधार पर शीघ्रता में कोई उल्टा-सीधा निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिये, अपितु अंतिम निष्कर्ष की प्रस्तुति के पूर्व उसकी सत्यता के विषय में आश्वस्त हो लेना चाहिए।

(14) तथ्यों तथा स्रोतों की यथार्थता को सिद्ध करने के लिये उसे आलोचना पद्धति का ज्ञान होना चाहिये।

(15) उसे ऐतिहासिक स्रोतों की मौलिकता की जाँच कर लेनी चाहिये तथा स्रोतों के लेखकों के विषय में भी पूरी जानकारी होनी चाहिये तथा लेखक व स्रोतों के बारे में उसे स्पष्ट जानकारी होनी चाहिये।

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Pankaja Singh

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