शैक्षिक तकनीकी

खुले विश्वविद्यालय | इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय | मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य

खुले विश्वविद्यालय | इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय | मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य | Open University in Hindi | Indira Gandhi National Open University in Hindi | Objectives of Open University in Hindi

खुले विद्यालय/विश्वविद्यालय (मुक्त शिक्षा प्रणाली)

(Open School/University) (Open Education System)-

दूर शिक्षा में मुक्त शिक्षा प्रणाली या खुले विद्यालय/विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण स्थान हैं। वर्तमान समय में विद्यालयी व्यवस्था से लेकर विश्वविद्यालयी व्यवस्था तक यह प्रणाली संचालित है। अतएव विद्यालीय एवं विश्वविद्यालयी सीमा से बाहर निकलकर इस नवीन प्रणाली के लिए केवल शब्दावली मुक्त शिक्षा प्रणाली (Open Education System) प्रयुक्त करना अत्यन्त समीचीन प्रतीत हो रही है। इसलिए हम इसे, इसी नाम से प्रकट करेंगे।

मुक्त शिक्षा प्रणाली इस मान्यता पर आधारित है कि- “विद्यार्थियों को किसी स्थान पर रहते हुए तथा उसके परिवार की सहायतार्थ उनके द्वारा किये जा रहे जीवन-यापन के कार्य में विघ्न या बाधा उत्पन्न किये शैक्षिक उपाधियाँ कम से कम खर्च में उपलब्ध कराना, निजी स्तर पर अध्ययन को उदारता पूर्वक प्रोत्साहन देना, तभी सभी व्यक्तियों को निजी अध्ययन द्वारा स्वयंपाठी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा देने हेतु अनुमति प्रदान करना है।” इस प्रकार स्पष्ट है कि मुक्त शिक्षा प्रणाली में शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश लेने वाले छात्रों को प्रवेश, कक्षा-कक्ष में उपस्थित, समय-सारिणी एवं अन्य अधिगम बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता, प्रत्युत इस शिक्षा प्रणाली से सम्बद्ध शिक्षा संस्थाओं में पूरी पारदर्शिता, स्वतन्त्रता, खुलापन एवं मुक्तता होती है। विद्यार्थियों का काम केवल फीस जमा करके प्रवेश लेना, पाठ्य विषयों का चुनाव करना, समय पर परीक्षा देना और अपनी रुचि, गति, सामर्थ्य के अनुसार स्वयं के पास उपलब्ध समय के अनुसार पाठ्य विषयों का स्वाध्याय करना होता है।

मुक्त शिक्षा प्रणाली भारतीय आदर्श एवं दार्शनिक दृष्टिकोण से सम्पृक्त है। समानता, स्वतन्त्रता, धर्म निरपेक्षता, समाजवाद, न्याय, भ्रातृत्व की भावना से यह परिपूर्ति ही है, इसके अलावा जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त तक आजीवन ज्ञान की प्राप्ति पर भी मुक्त प्रणाली खरी उतरती है। कोई व्यक्ति किसी वर्ण, जाति, सम्प्रदाय, लिंग, उम्र का क्यों न हो, कभी भी यदि वह ज्ञान प्राप्ति की इच्छा करे तो वह इस शिक्षा प्रणाली से जुड़कर लाभ अर्जित कर सकता है। वस्तुतः मुक्त शिक्षा प्रणाली का अभ्युदय ही आजीवन ज्ञान पिपासा की तृप्ति, समय सापेक्ष परिवर्तित आवश्यकताओं की पूर्ति, शैक्षिक अवसरों की समानता की उपलब्धता, व्यक्तिकृत अधिगम, अवकाश काल के सदुपयोग, अद्यतन नवाचारों के आत्मसातीकरण एवं संवैधानिक, राष्ट्रीय सामाजिक शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हुआ है अतएव इससे जुड़कर कोई भी व्यक्ति आजीवन अद्यतन ज्ञान से विभूषित हो सकता है।

मुक्त शिक्षा प्रणाली में जेली-फिश बाउल (Jelly-Fish boul) जैसा खुलापन होता है जेली फिश एक प्रकार की मछली है, जो देखने में जेली या गुरब्बे के समान होती है। इसमें इतना खुलापन होता है कि इस आकृति विहीन, आकार विहीन मछली को जिस भी पात्र में रख दिया जाता  है वह उसी का रूप और आकार ले लेती है। चूंकि यह एक जीवधारी प्राणी है जिसका सब कुछ व्यवस्थित ढंग से संचालित होता रहता है, किन्तु आकार-प्रकार कुछ नहीं होता, पूरी तरह खुलापन युक्त होती है। इसको सबसे छोटे बर्तन कटोरी में रख देने पर भी उसमें समायोजित हो जाती है। इसी प्रकार मुक्त शिक्षा प्रणाली भी खुलापन युक्त होती है। छोटे बच्चों से लेकर प्रौढ़ों तक को यह अपनी शैक्षिक व्यवस्था में समायोजित कर लेती है। इसका भी आकार प्रकार, स्थान, समय, मानक, विचार, शिक्षण विधि, योग्यता आदि कुछ निश्चित नहीं होता सभी कुछ खुलापन लिये होता है, सभी के लिए फिट बैठता है यह बच्चों के लिए भी फिट बैठता है। चूँकि जेली फिश सबसे छोटे बर्तन कटोरी में फिट होकर उसका रूप धारण कर सकती है तो मुक्त शिक्षा प्रणाली भी छोटे बच्चों की शिक्षा में फिट हो सकती है, इसी प्रकार ‘जेली-फिश बाउल (Jelly-Fish-Bowl) से मुक्त शिक्षा प्रणाली की उपमा दी जाती है।

मुक्त शिक्षा प्रणाली के अन्तर्गत दो प्रकार शिक्षा संस्थाएं विद्यमान है। एक शिक्षा संस्था माध्यमिक शिक्षा से सम्बन्धित है तो दूसरा उच्च शिक्षा से। ये शिक्षा संस्थाएँ क्रमशः खुला विद्यालय एवं खुला विश्वविद्यालय या मुक्त विद्यालय एवं मुक्त विश्वविद्यालय नाम से संचालित हैं। इनका विस्तृत विवरण निम्नवत् दिया जा सकता है-

खुला विद्यालय या मुक्त विद्यालय (Open School)-  दूर शिक्षा में माध्यमिक स्तर पर यह संकल्पना 1965 ई० में पत्राचार कार्यक्रम केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की अनुशंसाओं के आधार पर चालू किया गया। मध्य प्रदेश सरकार ने भी 1965 में ही माध्यमिक स्तर पर पत्राचार पाठ्यक्रम का संचालन कर विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से पढ़ने को मंजूरी प्रदान की। दिल्ली में 1968 ई० में पत्राचार विद्यालय की स्थापना की गयी। उ0प्र0 सरकार द्वारा शासनादेश शिक्षा (7)/अनुभाग सं० मा0/4747/15-71 (64)/8 दिनांक 17-9-1980 के अन्तर्गत माध्यमिक शिक्षा परिषद के अन्तर्गत पत्राचार शिक्षा संस्थान की स्थापना की गयी। भारत में पहला मुक्त विद्यालय 1979 ई0 में दिल्ली के माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ देने वाले विद्यार्थियों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु किया गया। 1981 में इसका पहला शैक्षिक सत्र प्रारम्भ हुआ। भारत में खुले विद्यालय माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए इच्छुक बालकों के लिए मुहैय्या कराके शिक्षा के सार्वभौमिक की संकल्पना को पूर्ण कराने में वर्तमान समय में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में ऐसे विद्यालयों के विकास को पर्याप्त प्रोत्साहन दिये जाने का संकल्प लिया गया है।

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (National Open School-NOS)-1979 ई. में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सी.वी.एस.ई.) जिस खुले/मुक्त विद्यालय की स्थापना दिल्ली में की थी उसी को एक स्वतंत्र निकाय (सोसाइटी) का रूप देते हुए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 1989 को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (National Open School) के रूप में मान्यता प्रदान किया। अब यह विद्यालय स्वयं परीक्षाओं का संचालन, पाठ्यक्रम निर्धारित एवं मूल्यांकन तथा उपाधियों एवं प्रमाणपत्रों की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा और अधिगमकर्ता समूह की आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु कार्य करने को अंजाम देगा। इस विद्यालय की स्थापना का उद्देश्य वंचित वर्गों, दलित, ग्रामीण, युवकों, युवतियों अल्पसंख्यकों, विकलांगों के साथ-साथ किसी कारणवश माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ देने वाले विद्यार्थियों, कार्यरत श्रमिकों की शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। झुग्गी- झोपड़ियों, मलीन-बस्तियों में रहने वाले बालक-बालिकाओं को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करना अब आसान हो गया है। इससे शिक्षा के सर्वव्यापीकरण, समाज मूलक समाज की स्थापना, शैक्षिक अवसरों की उपलब्धता, शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों की आवश्यकता पूर्ति करने का सपना साकार होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय अपनी व्यवस्था को इस प्रकार बनाने की दिशा में प्रयत्नशील है कि वह परम्परागत औपचारिक माध्यमिक शिक्षा के समानान्तर एक वैकल्पिक एवं सम्पूरक व्यवस्था के रूप में सुदृढ़ हो सके। इसके लिए वह विस्तारवादी नीति को अंजाम दे रहा है। वर्तमान समय में इसके राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों अध्ययन केन्द्र संचालित है। इसमें सैद्धान्तिक, व्यावसायिक विषयों से सम्बन्धित अनेकों विषयों का संचालन किया जा रहा है। इसमें अधिगमकर्ता अपनी रुचि, आवश्यकता के अनुरूप स्वतंत्र ढंग से विषयों का चुनाव करके पढ़ सकते हैं। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय की प्रेरणा से पंजाब, आन्ध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में भी राज्य स्तरीय मुक्त विद्यालय स्थापित किया जा चुका है, नावी पंचवर्षीय योजना में पन्द्रह अन्य राज्यों मे मुक्त विद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए धन भी आवंटित किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1992) में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने तथा देश के सभी भागों में माध्यमिक स्तर पर मुक्त अधिगम ससुविधाओं का क्रमबद्ध रूप से विस्तार करने का जो संकल्प लिया गया है वह शीघ्रातिशीघ्र पूरा होने वाला है। यह माध्यमिक शिक्षा के स्तरोत्रयन एवं गुणात्मक उन्नति में दूरगामी परिणाम लायेगा, ऐसी आशा है।

मुक्त विश्वविद्यालय (Open University)- जी. पार्थ सारथी समिति (1974) के सुझावानुसार, भारत में खुले विश्वविद्यालयों की स्थापना की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट हुआ। इस समिति के पूर्व 1970 में शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में ‘मुक्त शिक्षा प्रणाली’ पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता वी. के. आर. वी. राव ने की थी। इसमें राव महोदय ने जोर देकर कहा था कि- “इस परिस्थिति में जहाँ उच्च शिक्षा स्तर पर प्रवेश का विस्फोट बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है और जन-धन के संसाधन, अत्यन्त सीमित है, इसका एक स्पष्ट समाधान मुक्त विश्वविद्यालय है। इसमें उच्च शिक्षा अंशकालीन या पूर्णकालीन शिक्षा की व्यवस्था हो। इससे पूर्णकालिक उच्च शिक्षा संस्थानों पर होने वाली भारी व्ययों में कटौती होगी और प्रति विद्यार्थी होने वाला आवर्तक व्यय भी घटेगा। अतएव भारत सरकार को जल्द से जल्द संसद से कानून बनाकर मुक्त विश्वविद्यालयों की स्थापना करनी चाहिये। इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण देश होना चाहिए।” पार्थसारथी समिति ने भी इसी तथ्य की पुष्टि की। अन्ततः भारत सरकार ने 1982 में पुनः माधुरी शाह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इस समिति ने भी मुक्त विश्वविद्यालयों की स्थापना बिना किसी बिलम्ब के करने पर बल दिया। इस समिति के सुझावानुसार आन्ध्र प्रदेश सरकार ने सर्वप्रथम अपने राज्य में 1982 में आन्ध्र प्रदेश मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की। इस समय वहाँ के मुख्यमंत्री वेंकटरमन थे। कालान्तर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जब मसौदा तैयार किया जा रहा था, तभी युवा प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी ने 20 सितम्बर 1985 को संसद में कानून बनाकर इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की। इस प्रकार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय की स्थापना का स्वप्न साकार हुआ।

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (Indira Gandhi National Open University- IGNOU)- संसद द्वारा 20 सितम्बर 1985 को मंजूरी मिलने के बाद इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय को ‘इग्नू’ नामक संक्षिप्त (IGNOU) नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। इग्नू की स्थापना के मुख्य उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि विश्वविद्यालय का यह उद्देश्य है कि अपने विविध साधनों द्वारा उच्च अधिगम और ज्ञान को प्रदान करना, दूरसंचार तकनीकी का प्रयोग करते हुए, आबादी के एक बड़े हिस्से को उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान करना तथा शिक्षा को सामाजिक उत्थान हेतु प्रयोग करना। “इग्नू (IGNOU) के प्रथम कुलपति प्रो0 जी0 राम रेड्डी नियुक्त किये गये। भारत में प्रो0 राम रेड्डी महोदय को मुक्त शिक्षा का जन्मदाता भी माना जाता है। उन्होंने इस सम्बन्ध में अनेकों पुस्तकों की रचना भी की है। “ओपेन एजूकेशन सिस्टम इन इण्डिया” इसकी प्रसिद्ध कृति है। मुक्त विद्यालय की विशेषताओं को उन्होंने इस प्रकार व्यक्त किया है।”

“मुक्त विश्वविद्यालय एक मुक्त विद्यालय (सोसाइटी) है। यह पाठ्यक्रम का निर्माण आदि करने में पूरी तरह स्वतंत्र है। इसमें अनुदेशात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये बहुमाध्यम उपागम (Multi-media Approach) का प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रवेश की योग्यता लचीली एवं नमनीय होती है। सभी विद्यार्थियों को एक समान शिक्षा व्यवस्था प्राप्त होती है। इसमें प्रवेश लेकर कोई भी व्यक्ति अपनी रुचि, गति, सामर्थ्य एवं समय के अनुरूप अध्ययन कर सकता है।” अतएव स्पष्ट है कि इग्नू (IGNOU) की पूरी शैक्षिक व्यवस्था आधुनिक नवाचारों में तकनीकी पर आधारित है। अध्ययन सामग्रियों के मुद्रण, सम्पर्क कक्षाएँ, सतत आन्तरिक मूल्यांकन, दृश्य-श्रव्य सहायक, अद्यतन तकनीकी एवं बहु माध्यम संचार को अपनाकर इग्नू अपनी समस्त शैक्षिक गतिविधियों को वंचित वर्गों, पिछड़े दलित वर्ग के व्यक्तियों, महिलाओं तक पहुँचाने का अभीष्ट कार्य करता है। इसकी कार्यप्रणाली को आगे प्रकट किया जा रहा है।

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य (Objective of Open University)-

मुक्त विश्वविद्यालय के मुख्य उद्देश्य हैं-

(i) उच्च शिक्षा को अधिकाधिक जन सुलभ बनाना और औपचारिक विश्वविद्यालयी उच्च शिक्षा के अवरोधों को समाप्त करना।

(ii) वंचित वर्गों, कार्यरत व्यक्तियों, महिलाओं तक उच्च शिक्षा की पहुँच निश्चित करना।

(iii) परम्परागत विश्वविद्यालयों में प्रवेशार्थी छात्रों के बोझ को कम करते हुए उनके गुणात्मक विकास में योगदान देना।

(iv) जनसंचार एवं शैक्षिक तकनीकी माध्यमों का प्रयोग करके उच्च शिक्षा जनसमूह के घर तक पहुँचाना।

(v) कम खर्च में उच्च शिक्षा का प्रसार करना और छात्रों को स्वावलम्बी बनाना।

(vi) प्रौढ़ शिक्षा सतत् शिक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में योगदान देना।

(vii) जनमानस को व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशलों से सम्बन्धित सुविधाएँ प्रदान करना ।

(viii) व्यक्ति के समन्वित व्यक्तित्व का विकास करना।

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Pankaja Singh

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