इतिहास

अजन्ता की गुफाएं | अजन्ता की गुफाओं के मुख्य चित्र

अजन्ता की गुफाएं | अजन्ता की गुफाओं के मुख्य चित्र

अजन्ता की गुफाएं व मुख्य चित्र

अजन्ता की गुफाओं में चित्रकारी की व्याख्या करते हुए यह जान लेना अतिआवश्यक है कि सब गुफाओं में चित्र अंकित नहीं हुए हैं। प्रारंभिक गुफा संख्या 8, 12 व 13 में तो चित्रकारी बिल्कुल नहीं है। सिर्फ 16 गुफाओं में चित्रकारी प्राप्त होती है वे हैं गुफा संख्या 1,2, 4, 6, 7, 9, 10, 11, 15, 16, 17, 19, 20, 21, 22 और 26। इनमें से भी कई गुफाओं के चित्र धुंधले हो चुके हैं या नष्ट होते हुए प्रतीत हो रहे हैं। गुफा संख्या 1, 2, 9, 10, 11, 16, 17, 19 व 21 में चित्र स्पष्ट हैं व अपने समय की कला के द्योतक हैं। इन सबमें से गुफा संख्या 17 से प्राप्त चित्र, बहुत धने, स्पष्ट और विविधतापूर्ण हैं। इन चित्रित गुफाओं में गुफा संख्या 9 व 10 सबसे प्राचीन चित्रित गुफा प्रतीत होती है। इन गुफाओं के चित्रों की शैली सांची व भरहुत शैली से मिलती जुलती है। सबसे बाद की चित्रित गुफा संख्या 1 है, जो चालुक्य शासक पुलेकेशिन द्वितीय (608-642 ई०) की संरक्षता में बनी थी। अजन्ता की चित्रकारी की सूक्ष्मता पर दृष्टिपात करने के लिए एक विशेष पुस्तक की आवश्यकता है फिर भी मुख्य-मुख्य चित्रों की व्याख्या से उस चित्रकारी के आनन्द को प्राप्त किया जा सकता है।

गुफा संख्या 19

यह गुफा चैत्य के रूप में बनी है। यहाँ बौद्ध भिक्षु भगवान् बुद्ध की आराधना किया करते थे। महायान संप्रदाय से प्रभावित कलाकारों ने बुद्ध की विशालकाय मूर्ति का निर्माण किया है। इस गुफा का बाह्य भाग भी आकर्षक है। पत्थरों पर खुदाई का कार्य इतना सूक्ष्म और जटिल बन पड़ा है कि दर्शन मोह मुग्ध हो उस कलाकार की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकता है। इस गुफा में एक द्वारमण्डप है और संपूर्ण अग्रभाग सुन्दर मूर्तियों द्वारा सुसज्जित है। ये मूर्तियाँ व खुदाई उसी पहाड़ी की हैं जिससे यह गुफा काट-काट कर बनाई गई है। श्री फरगुसन का कहना है कि भारत में बौद्ध कला का यह एक पूर्ण और अद्वितीय नमूना है। चित्र भी सुन्दर बन पड़े हैं। चित्रों का मुख्य विषय बुद्ध है, जिनके कई रूप यहां अंकित किए गए हैं। छतों पर की गई चित्रकारी बहुत सुन्दर प्रतीत होती है।

गुफा संख्या 17

यह गुफा चित्रकारी के दृष्टिकाण से बहुत महत्वपूर्ण है। यह गुफा ईसा से 6 शताब्दी बाद की प्रतीत होती है। फूल, पत्तियों की चित्रकारी के साथ-साथ मनुष्यों के चित्र भी अंकित किए गए हैं। ये चित्र स्तम्भों पर चित्रित किए हुए हैं। ये चित्र उत्तरी भारत के घड़वा स्तम्भों की खुदाई से मिलते-जुलते हैं। “किर्ती मुख” की चित्रकारी के रूप उत्तरी भारत में मध्यकालीन कला के रूप थे। इस गुफा में 61 चित्र अंकित हैं जिनका विस्तृत वर्णन डाक्टर बर्गेस ने अपने नोटों में लिखा है। इनमें बड़े चित्र इतने जटिल और विविध चित्रों से भरे हैं कि उनका स्पीकरण करना बहुत कठिन प्रतीत होता है। बुद्ध धर्म के प्रचार के हेतु बनाए हुए चित्रों में “बुद्ध धर्म का जीवन चक्र” चित्र बहुत स्पष्ट है। इस प्रकार के चित्र तिब्बत के लामा वर्ग बनवाकर बौद्ध धर्म का प्रचार करते थे। इस चित्र की लम्बाई 8’7″ व चौड़ाई 5’1″ है। इस चित्र की कथा पाली पुस्तकों में वर्णित राजा विजय का लंका जाना और उस पर विजय प्राप्त करना, उसके राजतिलक का दृश्य और बाद में बुद्ध धर्म का प्रचार करना है। दूसरा चित्र सीबी राजा का है जो कि अपनी आंखें एक भिखारी को अर्पित करता है। इसी गुफा में मां और बेटे का चित्र बड़ा सजीव बना है। इस चित्र द्वारा अजन्ता की चित्रकारी का माप प्रकृति के प्रेम और भक्ति का रूप स्पष्ट करती है। गुफा के अन्य भाग में शृङ्गार करती हुई एक महिला का चित्र ऐसा जान पड़ता है, मानों अभी बोल पड़ेगा। इस गुफा में एक ही कलाकार द्वारा चित्रित तीन चित्र ऐसे हैं जो सब चित्रों से भिन्न प्रतीत होते हैं। वे हैं (1) शेर और काले हिरन का शिकार, (2) हाथियों का शिकार, (3) एक हाथी जो कि राज्य दरबार का अभिवादन कर रहा है। ये चित्र छाया और प्रकाश की प्रणाली पर अंकित किये गये हैं। उनमें हल्के भूरे रंग का आभास मिलता है सिर्फ फूल, पेड़, पत्तिएं धुंधले हरे रंग की हैं। चित्रों का रेखाकरण हल्का, आसान व धुंधला है। पशुओं. घोड़े, हाथी, कुत्ते और काले हिरन के चित्र बड़े सुन्दर बने हैं।

गुफा संख्या 10

इस गुफा में प्रारंभिक चित्रकारी के अंश विस्तृत रूप में पाए गए हैं। गुफा के दांयी ओर वाली दिवार पर हाथियों के रेखा-चित्र बहुत शानदार हैं और अजन्ता की प्रणाली की सत्यता प्रगट करते हैं। बायीं ओर की दिवार पर व्यक्तियों का एक जलूस जा रहा है, जिनमें कुछ पैदल हैं, कुछ घोड़ों पर हैं, जो भिन्न-भिन्न शस्त्रों व वस्त्रों से सुसज्जित हैं, और इनके पीछे औरतों का झुण्ड चल रहा है। यह चित्र मिटसा गया है। बहुत काठेनाई से डाक्टर बर्गेस ने इस जलूस के व्यक्तियों के मुण्डों व चित्रों का संकलन किया है। एक अन्य चित्र में एक राजा अष्ट कंचुकिओं द्वारा घिरा हुआ बतलाया गया है। भिन्न-भिन्न चित्रों का स्पष्टीकरण सन्तोषजनक है और हाथ, बाजू व मुख, बाल आदि की रेखाएं बहुत सुन्दर हैं। यह गुफा भी एक चैत्य गुफा थी। भगवान् बुद्ध की आराधना का केन्द्र होने के कारण बुद्ध के अनेकों चित्र यहां मिलते हैं। स्तम्भों पर बुद्ध का सजीव रूप चित्रित किया गया है।

गुफा संख्या 9

यह गुफा सांची कला के युग की मानी जाती है। इस गुफा की चित्रकारी का रूप एक स्त्री के चित्र में है जो बैठी हुई है। उसका रूप अर्द्ध नग्न है। कटि में, हाथों में और सिर के बालों में गहने पहने हैं। हाथ जोड़कर वह किसी से दया चाहती है। यह चित्र एक सुन्दर प्लास्तर की पतली धारा पर बनाया गया था जो कि चट्टानों पर सीधा लगाया गया हो, ऐसा प्रतीत होता है।

गुफा सख्या 2

इस गुफा में चित्रों का अधिक समावेश हैं। इन चित्रों में विशेषता यह है कि चित्र किसी समूह को अंकित नहीं करते बल्कि इकाई के रूप में प्रदर्शित किए गए हैं। इन चित्रों की कोराई बहुत चतुराई के साथ की गई है और कलाकार ने चित्रों के पोज को कठिन व आकर्षक बनाने का भरपूर प्रयास किया है। एक चित्र में एक स्त्री झुककर प्राणाम करती हुई बतलाई गई है। स्त्री की पीठ और कमर की धनुषाकार आकृति और झीने वस्त्र कला के अद्भुत नमूने हैं। एक अन्य चित्र में गहनों से अलंकृत स्त्री एक टांग पर खड़ी हुई स्तम्भ का सहारा लिए हुए हैं। वह किसी की प्रतीक्षा में खड़ी प्रतीत होती है। हाथ पैरों व मुखाकृति का रेखांकित रूप अत्यन्त सुन्दर बन पड़ा है। इस गुफा में अंकित चौखटे बहुत सुन्दर और गोलाकार हैं। वे सजीव दृष्टिगोचर होते हैं। छतों पर लम्बे चौखटे भी आकर्षक हैं।

गुफा संख्या 1

चित्रकारी व स्थापत्य कला का समन्वय जितना. इस गुफा में हुआ उतना अन्य किसी गुफा में नहीं हुआ। इस गुफा के स्तंभ 7 वीं शताब्दी के हैं। उनकी खुदाई और बाह्यगरिमा व स्थूलता का भव्य रूप कलाकारों की विशेषता को स्पष्ट करता है। इस गुफा की चित्रकारी का विषय भिन्न-भिन्न है। धार्मिक, राजनैतिक, रोमान्टिक व अन्य प्रकार के चित्रों का समावेश इस गुफा में किया गया है। एक स्तम्भ पर छोटी-सी चित्रकारी बहुत आकर्षक है। इल चित्र में दो बैल लड़ते हुए बतलाए गए हैं। बैलों के चित्रों की व्याख्या इस सुढंग की, की गई है मानों चित्रकार पशुओं के शास्त्र का ज्ञाता हो। इस गुफा की छतों पर केन्द्रीय चौखटे में दो प्रेमियों का चित्र जिस सुन्दरता से बन पड़ा है उससे उस चौखटे की कलात्मक क्रियता में जान आ गई है। छतो के चौखटों में अन्य चित्र भी हैं। एक चित्र में फलों, फूलों, पत्तों का रूप दिखाया गया है। दूसरे चित्र में मस्त और खिलवाड़ करता हाथी अंकित है। एक अन्य चित्र में फूलों के गन्ध में मस्त पक्षी विभोर में लीन है और युद्ध से भागता हुआ बैल का चित्र एक अन्य चित्रकारी का नमूना है। मंत्रणा करते हुए या गप्पें लगाते हुए दो व्यक्तियों का चित्र भी केन्द्रीय चौखट को सुशोभित कर रहा है। इस कला की प्रशंसा करते हुए ग्रिफिथ साहब का कहना है कि गुफा संख्या 1 के चित्र, अजन्ता की चित्रकारी के अद्वितीय नमूने हैं और कलाकारों के इस कला पर पूर्ण अधिकार को व्यक्त करते हैं। इस चित्रकारी के विषय भिन्न हैं, सूक्ष्म से सूक्ष्म बातों की व्याख्या है, अतः पुनरावृत्ति का भय नहीं है, कल्पना खुल के काम में ली गई है। प्रकृति के साधारण तत्वों को भी अलंकृत किया गया है।

प्रकृति व मनुष्यों के समन्वय के चित्रों का जो दृश्य अंकित हैं वह अत्यन्त आकर्षक है। कुछ चित्र फारसी कपड़ों में सुसज्जित हैं, फारसी साफे, कोट व धारीदार मोजे बनाए गए हैं। नृत्य करते हुए, संगीत में लय, शराब पीते हुए व्यक्तियों के दृश्य या हास्य करते हुए चित्र, इस कला के अद्भुत नमूने हैं। कमल के फूलों के साथ पशुओं के चित्र, हाथी, बैल, बन्दर पक्षी आदि के चित्र हैं। कुछ कमल पूर्ण तो, कुछ अधखिले और कुछ कमल कली के रूप में ही हैं। लाल, सफेद, गुलाबी रंगों की मस्ती इन कमल के फूलों की सुन्दरता को चमका देती है। आम, सेब, बेल, नींबू आदि फलों के चित्र भी दिखाई पड़ते हैं। इन चौखटों में जो अलंकार हैं वे काले या लाल आधारों पर रंगे गए हैं। चौखटों में पहले आधार रंग भर दिया जाता था, फिर सफेद रंग से अलंकृत किए जाते थे। सफेद पर पतले पारदर्शक रंगों से उनका विस्तार किया जाता था।

इस गुफा में भित्तिचित्रों में बुद्ध का प्रलोभन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यशोधरा का चित्र बड़ा ही आकर्षक है। इसी गुफा में फारस के राजदूत का स्वागत बतलाया गया है। फारसी टोपी के द्वारा इस चित्र का आशय फारस से संबंधित माना जा सकता है। फारस के राजदूत का भारतीय राज्य दरबार में आना इस चित्र की आधार कथा है। एक अन्य चित्र जो फारस के जीवन से संबंधित है वह छत की चित्रकारी में से प्राप्त किया जा सकता है। इस चित्र में एक विदेशी शासक अपनी रानी के साथ बैठा हुआ है। दो नौकर हाथों में तश्तरी लिए हुए, जिनमें फल हैं, जमीन पर बैठे हुए हैं। दो कंचुकियें दाए बाएं खड़ी है। एक के हाथ में सुराही है। शासक हाथ में प्याला लिए कुछ पीने की प्रतीक्षा में है। श्री फरगुसन का कहना है कि यह विदेशी शासक फारस का बादशाह खुसरो और रानी शीरीन का चित्र है।

समीक्षा

अजन्ता के चित्रों की समीक्षात्मक व्याख्या यदि की जाय तो यह चित्रकारी विश्व की प्रमुख चित्रकारियों में विशेष स्थान प्राप्त करती है । अजन्ता की चित्रकारी सिर्फ कलात्मक भावों का चित्रण ही नहीं करती, बल्कि व्यावहारिक जीवन की प्रेरणा को उत्साहित करती है। सुन्दरता और पूर्णता का रूप तो अन्य चित्र भी हो सकते हैं पर जो सात्विक विश्वासों के आधार पर यह चित्रकारी की गई वह इसकी मौलिकता है। “कुछ स्पष्टता सीमित होते हुए भी, श्री ग्रीफिथ लिखते हैं-मुझे अजन्ता के चित्र हर रूप में सुन्दर लगे हैं, वे इतने पूर्ण, रेखांकित रूप में इतने विविध, परम्परा की गतियों में व क्रिया में इतने दृढ़ व अनुकूल और रंग में इतने सुन्दर हैं कि मैं उनको विश्व के सर्वश्रेष्ठ चित्रों की गिनती में रखने का साहस करता हूँ।” इटली और चीन की चित्रकारी के समान कहीं-कहीं उनसे भी अद्वितीय, अजन्ता के चित्र बन पाये हैं। अजन्ता में दर्शक को संसार की एक व्यापक झांकी मिलती है। अजन्ता का कलाकार मध्ययुग के यूरोपीय कलाकारों की तरह कट्टर नहीं था । स्त्री शरीर के पूर्ण सौन्दर्य के चित्रण में उसकी तूलिका कुंठित नहीं हुई थी। अजन्ता के चित्रकारों ने पेड़, पौधों और जीव जन्तुओं का चित्रण भी बड़े प्रेम से किया है। कमल के फूल को तो हर अवस्था में कली से लेकर उत्फुल्ल रूप में बनाया गया है। पत्तियों, कीटों और जंगली जानवरों के चित्र पूरी स्वाभाविकता से अंकित है। भगवान् बुद्ध को भी एकान्त में तपस्या करते नहीं वरन् संसार के नित्य के व्यापार के बीच विचरते चित्रों में दिखाया गया है। चित्रों में मकानों, वेशभूषाओं, आभूषणों, बर्तनों और घर के सामानों आदि का चित्रण है जो अत्यन्त स्पष्ट है। अजन्ता के चित्रों से ज्ञात होता है कि इनके कलाकारों को मनुष्य और प्रकृति के सूक्ष्म अंग प्रत्यंगों का कितना गहन अध्ययन था। उन्होंने जीवन और साधारण व्यापारों को सुन्दरता प्रदान कर दी थी। मां का दूध पीते हुए बच्चे, खेलते हुए शिशु, आमोद-प्रमोद में लीन युवक, रोग और शोक से विरक्त, तपस्या में लीन संन्यासी, ज्ञान प्राप्ति के बाद विश्व कल्याण की ओर अग्रसर बुद्ध, इस प्रकार के जीवन का एक पूर्ण दर्शन इन चित्रों में है जो बौद्ध धर्म के साथ-साथ अन्य देशों में भी फैला।

भारत की तत्कालीन व भावी चित्रकला की प्रेरणा बनकर अजन्ता का कलाक्षेत्र व्यापक बन गया है। बाघ गुफाओं में जिसका निर्माण गुत्तकाल में हुआ था, अजन्ता की विशेषताएँ-रंग, तूलिका का घुमाव, भीतिचित्र आदि पाई गई हैं। भिन्नता तो सिर्फ इतनी ही है कि जहां अजन्ता सामंती युग और प्रभाव से मुक्त नहीं है वहां बाघ जनवादी प्रभाव का अन्यतम मिश्रण है। बाघ के चित्रों में जीवन की दैनिक घटना है। अजन्ता के चित्र परम धार्मिक हैं तो बाघ के जीवन चित्र मानव जीवन से संबंधित हैं। कन्हीरी की गुफाओं (निर्माण काल 9वीं शताब्दी) में भी अजन्ता का प्रभाव स्पष्ट मालूम होता है। कन्हीरी की गुफाओं में बाघ अंक पद्धति है। बाघ में जीवन की प्रगति का रूप होने पर भी अजन्ता से सामंजस्य नहीं कर पाई है। यों तो बाध की अंकन पद्धति अजन्ता से साम्य रखती है, परन्तु यहा के कलाकार दीर्घ-दर्शी न थे।

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Pankaja Singh

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