विपणन प्रबन्ध

यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर | यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर के विभिन्न भाग | URL-Uniform Resource Locator in Hindi

यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर | यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर के विभिन्न भाग | URL-Uniform Resource Locator in Hindi

Table of Contents

यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर

(URL-Uniform Resource Locator)

इंटरनेट पर किसी सर्वर या सेवा के नाम को व्यक्त करने वाला एक अद्वितीय पता (Unique Address) यूआरएल (URL) कहलाता है। यह यूआरएल ही इंटरनेट पर किसी सेवा, संस्था या सर्वर के ठिकाने को खोजने का साधन होता है। जैसे- http://www.yahoo.com एक यूआरएल है। URL के सिन्टैक्स में निम्नलिखित भाग होते हैं –

  1. टी०सी०पी०/आई0पी0 (TCP/IP) – TCP/IP प्रोटोकॉल्स का ऐसा समूह है जो नेटवर्क में उपिस्थत संसाधनों (Resources) का साझा (Share) करने के लिए कम्प्यूटरों में सामंजस्य स्थापित करता है। अनेक नेटवर्कों के सामंजस्य की समस्या को दूर करने के लिए सन् 1974 में केर्फ (Cerf) और काहन (Cahn) ने TCP/IP मॉडल और प्रोटोकॉल का आविष्कार किया TCP/IP विशेष रूप से अन्तर नेटवर्कों (Internet networks) पर अच्छे संवाद (Communication) के लिए विकसित किया गया था। यह एक महत्वपूर्ण आविष्कार था क्योंकि आज तक भी इंटरनेट में TCP/IP की विशेष भूमिका बनी हुई है।

TCP/IP में दो प्रोटोकॉल होते हैं-

(अ) TCP (Transmission Control Protocol) – यह एक नेटवर्क के कम्प्यूटर से भेजे गये संदेशों को डाटाग्राम्स (Datagrams) में विभक्त करता है और प्राप्तकर्त्ता कम्प्यूटर में विभक्त डाटाग्राम्स को पुनर्गठित (reassembling) करके संदेश का रूप देता है। TCP डाटाग्राम्स का IP से आदान-प्रदान करता है।

(ब) IP (Internal Protocol) – यह TCP से प्राप्त संदेशों के डाटाग्राम्स (Datagrams) को प्राप्त करता है और डाटाग्राम्स में उपस्थित प्राप्तकर्ता (Receiver) कम्प्यूटर के पते (Address) का नेटवर्क में पता लगता है तथा प्रेषित कर देता है। इंटरनेट पर इस प्रकार के कम्प्यूटर पते को “IP एड्रेस’ कहते हैं।

  1. हाइपरटैक्स्ट (Hypertext)- यह एक सूचना प्रस्तुत करने की ऐसी प्रणाली है जिसमें टैक्सट, इमेज (चित्र), ध्वनि और क्रियाएँ परस्पर लिंक (जुड़े हुए) रहते हैं जिससे लेख को लगातार पढ़े बिना, इच्छित बिन्दु विशेष (Topic) का विवरण माउस क्लिक से प्राप्त किया जा सके। पुस्तक में छपे लेख से भिन्न, हाइपरटैक्स्ट युक्त लेखक में लेखक, अतिरिक्त जानकारी युक्त शब्दों को स्क्रीन पर उभरा हुआ या रंगीन प्रदर्शित करता है और उन्हें अतिरिक्त जानकारी युक्त फाइल या पेज से लिंक करके रखता है, जिससे पाठक द्वारा क्लिक करने पर लिंक (जुड़ी हुई) सामग्री स्क्रीन पर प्रस्तुत हो जाए। इस प्रकार हाइपर टैक्स्ट एक अरेखिक (Non-linear) पठन सामग्री है जिसे पुस्तक के समान पढ़ने के अलावा इच्छानुसार मध्य में भी अतिरिक्त सूचना प्राप्त की जा सकती है।

हाइपरटैक्स्ट की सहायता से एक वेब पेज या वेब साइट को अनेक पेजों से या दुनिया की किसी भी वेब साइट से जोड़ा जा सकता है।

  1. हाइपरलिंक (Hyperlink)- लेखक या वेब डिजाइनर वेब पेज में प्रस्तुत लेख में अतिरिक्त जानकारी युक्त शब्दों को स्क्रीन पर उभरा हुआ या रंगीन प्रदर्शित करता है, जिससे पाठक द्वारा क्लिक किये जाने पर लिंक (जुड़ी हुई) सामग्री स्क्रीन पर प्रस्तुत हो जाए, वेब पेज के ऐसे अवयव या एलीमेन्ट हाइपर लिंक कहलाते हैं। हाइपर लिंक को लेखक अतिरिक्त जानकारी युक्त फाइल या पेज से लिंक करके रखता है। हाइपर लिंक तीन प्रकार के होते हैं-

(अ) टैक्स्ट हाइपरलिंक (Text Hyperlink)

(ब) इमेज हाइपरलिंक (Image Hyperlink)

(स) इमेज मैप (Image Map)

विपणन प्रबन्ध – महत्वपूर्ण लिंक

Disclaimer: e-gyan-vigyan.com केवल शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए बनाई गयी है। हम सिर्फ Internet पर पहले से उपलब्ध Link और Material provide करते है। यदि किसी भी तरह यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है तो Please हमे Mail करे- vigyanegyan@gmail.com

About the author

Pankaja Singh

Leave a Comment

error: Content is protected !!