अर्थशास्त्र

उदासीनता वक्र की विशेषताएं | तटस्थता वक्र की विवेचना

उदासीनता वक्र की विशेषताएं | तटस्थता वक्र की विवेचना | Features of Indifference Curve in Hindi | Interpretation of indifference curve in Hindi

तटस्थता वक्र की विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  1. तटस्थता वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर गिरता है

तटस्थता वक्र की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बाएं से दाएं नीचे की ओर झुका हुआ होता है और इसकी ढाल ऋण आत्मक होती है। क्योंकि उपभोक्ता एक वस्तु की मात्रा का प्रयोग बढ़ाता है तो दूसरी वस्तु की मात्रा का त्याग करता है। तभी उसकी संतुष्टि पहले के स्तर पर रहती है। जैसा कि संलग्न चित्र में दर्शाया गया है। तटस्थता वक्र की विशेषता से या प्रकट होता है। की तटस्थता वक्र ना लंबवत हो सकता है न क्षैतिज और न ही ऊपर उठता हुआ हो सकता है नीचे इस बात की व्याख्या की जा रही है।

  • तटस्थता वक्र लंबवत नहीं हो सकतातटस्थता वक्र लंबवत अर्थात Y-axis के समांतर एक खड़ी रेखा की आकृति का नहीं हो सकता जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है क्योंकि संलग्न चित्र में स्थित वस्तुओं के दो संयोग A और B संतुष्टि में समान नहीं हो सकते क्योंकि संयोग B मैं जब Y वस्तु की मात्रा बढ़ रही है लेकिन X वस्तु की मात्रा पूर्ववत है। जबकि तटस्थता वक्र में सभी संयोगों से समान संतुष्टि प्राप्त होने के कारण एक वस्तु की मात्रा में वृद्धि होने के लिए दूसरी वस्तु की मात्रा कम करनी पड़ती है, किंतु संलग्न चित्र में ऐसा नहीं किया जा रहा है।

  • तटस्थता वक्र क्षैतीज नहीं हो सकता- तटस्थता वक्र क्षैतिज भी नहीं हो सकता जैसा कि संलग्न चित्र में दर्शाया गया है-

संलग्न चित्र में दिखाए गए तटस्थता वक्र पर स्थित दोनों संतुष्टि मैं सामान नहीं हो सकते क्योंकि B मैं X वस्तु की मात्रा बढ़ाई जाने पर भी Y वस्तु की मात्रा का त्याग नहीं किया जा सकता रहा है। Y वस्तु की मात्रा पूर्ववत है।

  • तटस्थता वक्र ऊपर उठती हुई रेखा नहीं हो सकतीजैसा कि संलग्न चित्र दर्शाया गया है क्योंकि सीधी रेखा वाले तटस्थता वक्र पर स्थित दोनों संयोग A व B संतुष्टि भिन्न है, संयोग B मैं दोनों वस्तुओं की मात्रा में वृद्धि हुई है।

अतः यह संतुष्टि में संयोग A के समान नहीं हो सकता।

  1. तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर होता है-

तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर होता हाय जैसा कि संलग्न चित्र में दर्शाया गया है। इसका मुख्य कारण प्रतिस्थापन की घटती हुई सीमांत दर है जिसका अर्थ है एक वस्तु की मात्रा में वृद्धि करने के लिए दूसरी वस्तु की त्याग की जाने वाली मात्रा घटती जाती है, जैसे-चित्र में उपभोक्ता X वास्तु की मात्रा में प्रति इकाई वृद्धि करने के लिए वस्तु की मात्रा का त्याग कर रहा है किंतु Y वास्तु की त्याग की जाने वाली मात्रा घटती जाती है। चित्र में, संयोग A से B पर आने के लिए उपभोक्ता X वस्तु की एक इकाई बढ़ाता है जिसके लिए वह Y वास्तु की 3 इकाइयों का त्याग करता है। इसी प्रकार संयोग C में X वास्तु की एक और इकाई का प्रयोग बढ़ाने पर Y वास्तु की 1 इकाई का और संयोग D में, Y वस्तु की 5 अर्थात आदि कई का त्याग करता है। अर्थात Y वस्तु की सर्वप्रथम 3 इकाइयों का,  फिर 2 का, 1 इकाई का और अंत मैं आधी अर्थात-5 इकाई का त्याग करता है। यही घटती सीमांत प्रतिस्थापन किधर है।

  1. तटस्थता वक्र एक दूसरे को नहीं काट सकते-

दो तटस्थता वक्र एक- दूसरे को नहीं काट सकते हैं जैसा आगे आए चित्र में दर्शाया गया है। प्रत्येक तटस्थता वक्र अलग-अलग संतुष्टि के स्तर को दर्शाता है। अतः एक- दूसरे को नहीं काट सकते। आगे दिए गए चित्र से इसे स्पष्ट किया जा सकता है। चित्र में दो तटस्थता वक्र IC1 और IC2 एक- दूसरे को बिंदु P पर काटते हैं। IC1 वक्र पर स्थित p तथा P1 बिंदु समान संतुष्टि को प्रकट कर रहे हैं। अर्थात संतुष्टि की दृष्टि से बिंदु P= बिंदु P1। इसी प्रकार IC2 वक्र पर स्थित बिंदु P=बिंदु P2। इस प्रकार यदि P=P1 और P=P2 तो P1=P2 के होना चाहिए। परंतु ऐसा संभव नहीं है। क्योंकि P1 और P2 बिंदु पर X वस्तु की मात्रा में समान है अर्थात OQ1 है किंतु Y वस्तु की मात्रा दोनों में भिन्न है, P1 पर Y वस्तु की ON1 है और P2 मैंON2 है। अतः P1  तथा P2 बिंदु पर Y वस्तु की मात्रा बराबर ना होने के कारण यह दोनों संतुष्टि में समान नहीं हो सकते । अतः तटस्थता वक्र एक- दूसरे को नहीं काट सकते।

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