राजनीति विज्ञान

स्विट्ज़रलैण्ड की अनूठी संसदीय व्यवस्था | Unique Parliamentary Government of Switzerland in Hindi

स्विट्ज़रलैण्ड की अनूठी संसदीय व्यवस्था | Unique Parliamentary Government of Switzerland in Hindi

स्विट्ज़रलैण्ड की अनूठी संसदीय व्यवस्था

(Unique Parliamentary Government of Switzerland)

स्विस शासन-व्यवस्था न पूरी तरह संसदीय है और न पूरी तरह अध्यक्षात्मक ही वरन् इनमें दोनों का विचित्र सम्मिश्रण है। इस अनोखी संसदीय व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:-

  1. स्विट्जरलैण्ड में प्रभुसत्ता जनता में निहित है। राज्य का प्रधान प्रत्यक्ष चुनाव के आधार पर अपना पद प्राप्त करता है। संविधान के छठे अनुच्छेद में कैंटनों को गणतन्त्री स्वरूप देने और अपनी संस्थाओं को गणतन्त्रीय ढंग पर निर्मित करने का प्रावधान है।
  2. स्विट्जरलैण्ड में लोकतन्त्रीय सिद्धान्तों का सर्वाधिक सफल प्रयोग हुआ है। शासन के प्रत्येक कार्य में जनता प्रत्यक्ष रूप से अनिवार्यतः भाग लेती है। जनता की इच्छा का निर्माण नीचे से ऊपर की ओर हुआ है। कैंटनों से अधिक महत्त्व कम्यूनों का है और संघ से अधिक महत्त्व कैंटनों का है। संविधान जनता द्वारा संशोधित किया जाता है।
  3. स्विस कार्यपालिका जो संघीय परिषद् (Federal Council) कहलाती है, बड़ी अनूठी है। यह व्यवस्थापिका के दोनों सदनों द्वारा निर्वाचित सात सदस्यों से मिलकर बनती है। इस बहुल कार्यकारिणी (Plural Executive) के सभी सदस्यों की शक्तियाँ लगभग समान हैं। अध्यक्ष भी अन्य सदस्यों के समान दर्जे का होता है। सभी सदस्य बारी-बारी से अध्यक्ष बनते हैं। स्विस कार्यपालिका इस दृष्टि से भी अनोखी है कि इसमें उत्तरदायित्व और स्थायित्व दोनों के ही गुण हैं।
  4. स्विस संसदीय व्यवस्था वस्तुतः अनेक दृष्टियों से अनुपम है। प्रथम, स्विस शासन- व्यवस्था में पूरी तरह संसदीय है और न पूरी तरह अध्यक्षात्मक ही। शासन का प्रमुख (President) राजा भी है और प्रधानमन्त्री भी तथा नाममात्र का शासन-प्रमुख भी है और वास्तविक शासन प्रमुख भी। दूसरे, स्विस कार्यपालिका संसद में से ली जाती है, संसदीय कार्यवाही में भाग लेती है तथा संसद के प्रति उत्तरदायी भी होती है। किन्तु संसद के अविश्वास के फलस्वरूप उसे त्यागपत्र नहीं देना पड़ता। तीसरे, स्थायित्व की दृष्टि से स्विस शासन यद्यपि अध्यक्षात्मक है, किन्तु उसमें शक्तियों का पृथक्करण नहीं पाया जाता। कार्यपालिका और व्यवस्थापिका दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। चौथे, संसदीय व्यवस्था की तरह मन्त्रिगण उत्तरदायित्व एवं पारस्परिक सहयोग की भावना से काम करते हैं, किन्तु सामूहिक उत्तरदायित्व के नाम पर उन्हें अपनी आत्मा का बलिदान नहीं करना पड़ता। वे न केवल मन्त्रिमण्डल वरन् संसद् की बैठक में भी अपना स्वतन्त्र मत व्यक्त कर सकते हैं। पाँचवें, स्विस व्यवस्थापिका द्वि- सदनीय है और दोनों सदनों के अधिकार लगभग बराबर हैं।
  5. स्विट्जरलैण्ड में राजनीतिक दलों का इतना महत्त्व नहीं है जितना अन्य लोकतान्त्रिक देशों में पाया जाता है। मतदान के समय किसी दल की हारयाजीत को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाता।
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Pankaja Singh

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