अनुसंधान क्रियाविधि

संकेतीकरण का अर्थ | संकेतीकरण की विशेषतायें | संकेतीकरण के उद्देश्य | संकेतीकरण के प्रमुख चरण | संकेतीकरण के स्तर

संकेतीकरण का अर्थ | संकेतीकरण की विशेषतायें | संकेतीकरण के उद्देश्य | संकेतीकरण के प्रमुख चरण | संकेतीकरण के स्तर | Meaning of Coding in Hindi | Coding Features in Hindi | Objectives of Coding in Hindi | Major Stages of Coding in Hindi | Coding level in Hindi

संकेतीकरण का अर्थ (Coding)

संकेतीकरण का आशय किसी पूर्व-निर्धारित वर्ग के अन्तर्गत प्राप्त उत्तर को आंकिक या संख्यात्मक संकेत निर्धारित करना होता है। दूसरे शब्दों में, संकेतीकरण को ऐसी वर्गीकरण प्रक्रिया माना जा सकता है जो इसके पश्चात् होने वली सारणीयन के लिये आवश्यक होता है। संकेतीकरण द्वारा मूल या प्राकृतिक संमकों को संकेतों में परिवर्तित कर दिया जाता है जिनका सारणीयन और गणन किया जा सकता है। इसका प्रमुख लाभ यह है कि इससे समंकों का सारणीयन और गणन अधिक विस्तृत रूप से सम्भव हो पाता है। समंकों की अधिक मात्रा होने पर इसका उपयोग अनिवार्य है। समंकों की कम मात्रा होने पर भी इसके प्रयोग से और सुगमता हो जाती है। संकेतीकरण के इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि यह ऐसी क्रिया है जिसके माध्यम से समंक के प्रत्येक पद को एक संकेतिक प्रतीक या अंक प्रदान करके उसे उसकी प्रकृति को एक श्रेणी में रख देते हैं।

संकेतीकरण एक ऐसी क्रिया विधि है जिसके द्वारा दत्त वर्गों में संगठित किये जाते हैं और प्रत्येक पद को उस वर्ग के अनुसार, जिसमें वह उपस्थित है, एक संख्या या प्रतीक प्रदान करते हैं।

– गुडे एवं हाट

संकेतीकरण की विशेषतायें

(Features of Coding)

(1) प्रतीक या संकेत- इसमें प्रत्येक पद के लिये वर्ग तथा श्रेणी के अनुसार प्रतीक या संकेत निर्धारित किया जाता है।

(2) श्रेणीबद्धता- यह समंकों को वर्गों और श्रेणियों में संगठित करने की क्रिया विधि है।

(3) श्रेणीकरण- इसकी मुख्य विशेषता श्रेणीकरण की हैं.

(4) सारणीयन- इसके द्वारा अपरिष्कृत समंकों को प्रतीकों में परिवर्तित कर उनका सारणीयन और गणन करते हैं।

संकेतीकरण के उद्देश्य (Objects of Coding) :

मोजर और काल्टन ने इसके उद्देश्यों के संदर्भ में कहा है, कि “सर्वेक्षणों में संकेतीकरण का उद्देश्य किसी प्रश्न के उत्तरों को अर्थपूर्ण श्रेणियों में वर्गीकृत करना है ताकि उनके आवश्यक प्रतिमान प्रकट किये जा सकें।”

संकेतीकरण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

(1) तर्कपूर्ण व्यवस्था- समंकों की तर्कपूर्ण व्यवस्था करके उन्हें सुगमता से समझने के लायक बनाना।

(2) सारणीयन को उपयोगी बनाना- सारणीयन तथा गणन-क्रिया को सरल और संक्षिपत करके उसे उपयोगी बनाना।

(3) श्रेणीयन- समंकों के श्रेणीयन को सम्भव करना।

(4) निर्वचन का विस्तार-समंक सामग्री को अधिक विस्तृत या व्यापक विश्लेषण और निर्वचन योग्य बनाना।

संकेतीकरण के प्रमुख चरण (Main Stages of Coding) :

मोजर और काल्टन के मत में संकेतीकरण प्रक्रिया में प्रयः दो प्रमुख चरण हैं-

(1) संकेतीकरण का ढाँचा (Coding Frame)

(2) उत्तरों का संकेतीकरण (Coding of Answers)

संकेतीकरण के स्तर (Levels of Coding) :

अनुसंधान तथा सर्वेक्षण में निम्न तीन  स्तरों पर संकेतीकरण का प्रयोग किया जा सकता है-

(1) सूचना प्रदान करते समय उत्तरदाताओं द्वारा।

(2) सूचना प्रदान करते समय साक्षात्कारकर्ता द्वारा।

(3) कार्यालयों में सांकेतकों (Codes) द्वारा।

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Pankaja Singh

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