अर्थशास्त्र

सार्वजनिक आगम का अर्थ | सार्वजनिक आगम की परिभाषा | सार्वजनिक आगम के विभिन्न स्रोत

सार्वजनिक आगम का अर्थ | सार्वजनिक आगम की परिभाषा | सार्वजनिक आगम के विभिन्न स्रोत

सार्वजनिक आगम का अर्थ-

साधरण बोलचाल की भाषा में सार्वजनिक आगम से तात्पर्य सरकार के उन सभी स्रोतों से है जिनसे सरकार को आय प्राप्त होती है। डॉ० डाल्टन ने सार्वजनिक आगम के संकुचित एवं व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किये हैं-

“संकुचित अर्थ में लोक आगम वह है जिन प्राप्तियों को वसूलने के बाद उन्हें लौटाया न जाये, जैसे- कर, शुल्क, दण्ड, उपहार आदि।”

“व्यापक अर्थ में सामाजिक आगम वह है जिसमें सरकार को विभिन्न प्रकार की प्राप्तियाँ मिलती हैं। जैसे- कर, ऋण, सार्वजनिक उपक्रमों से आय, सेवाओं से आय, दण्ड, लगान, शुल्क आदि।” सार्वजनिक आगम का अध्ययन करते समय इसका संकुचित अर्थ ही प्रयोग किया जाता है।

परिभाषा-

सार्वजनिक आय की परिभाषा निम्नलिखित है—

डाल्टन के अनुसार- “सार्वजनिक आय का संकुचित एवं व्यापक अर्थों में प्रयोग किया जाता है। व्यापक अर्थ में समस्त प्रकार की आय तथा प्राप्तियों को सम्मिलित किया जाता है, जिसे प्रायः आगम के नाम से जानते हैं। संकुचित अर्थ में केवल वे प्राप्तियाँ सम्मिलित की जाती हैं जो आय के साधारण विचार में सम्मिलित हैं।”

सार्वजनिक आगम के विभिन्न स्रोत-

यद्यपि लोक-आगम के वर्गीकरण से मूलतः दो प्रकार के आगम स्रोत विश्लेषित हुए हैं, जिन्हें कर व गैर कर आगम के रूप में समझना चाहिए। किन्तु उपर्युक्त सारणी में सार्वजनिक आगम को मुख्यतः तीन वर्ग (1) प्रत्यक्ष आगम (2) व्युत्पादित आगम (3) अनुमान जनक आगम के रूप में प्रस्तुत हुए हैं।

अध्ययन की सरलता के लिए इन्हें निम्न प्रकार वर्णित किया जा सकता है-

कर व गैर कर आगम-

लोक-आगम के सभी स्रोतों को निम्न प्रकार विश्लेषित करना उपयोगी होगा (A) कर आगम (B) गैर कर आगम (C) अन्य।

(A) कर आगम-

अर्थशास्त्रियों ने सार्वजनिक, आगम के विभिन्न स्रोतों में कर आगम को मूल स्रोत कहकर सम्बोधित किया है, इसको संकुचित अर्थ में केवल करों तक सीमित किया जाता है, किन्तु विस्तृत अर्थ में कर आगम के अन्तर्गत न कवेल करों बल्कि शुल्क, दण्ड, जुर्माना, विषेष निर्धारण आदि को सम्मिलित करके इसे भी व्युत्पादित आगम कह सकते हैं। कर आदम की मुख्य मदें निम्नलिखित हैं- (i) कर (ii) प्रशासनिक आगम- फीस व शुल्क, लाइसेन्स फीस, जुर्माना अथवा दण्ड (iii) विशेष निर्धारण।

(i) कर- राजस्व में सरकार के आगम का मूल स्रोत ‘कर’ हैं, जिन्हें सरकार ‘सार्वजनिक आगम’ का अति महत्त्वपूर्ण एवं संकट के समय आगम की गारन्टी समझती है। इसीलिए ‘कर’ सरकार की एक अनिवार्यता है। इसीलिए सार्वजनिक आगम का प्रश्न उठते ही सामान्यतः लोग करों को सरकार के आगम का मुख्य स्रोत बतलाते हैं।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो० प्लैहन ने कहा है, “कर एक अनिवार्य अंशदान है जो धन के रूप में लोगों से वसूल किया जाता है जिसे राज्य के निवासियों को सामान्य लाभ पहुँचाने हेतु व्यय किया जाता है।”

प्रो० टेलर ने ‘कर-आगम’ को सरल शब्दों में निम्न प्रकार कहा है- “कर वे अनिवार्य भुगतान है जिसके बदले में कर दाता को कोई प्रत्यक्ष लाभ की आशा किये बगैर चुकाना पड़ता है।”

इस प्रकार ‘कर’ जो सरकार के मुख्य आगम स्रोत हैं, उन्हें दो रूपों में विश्लेषित किया गया है वे रूप प्रत्यक्ष कर व अप्रत्यक्ष कर हैं। प्रत्यक्ष करों में जहाँ आय कर, सम्पत्ति कर व मृत्यु कर सम्मिलित होता है वहीं अप्रत्यक्ष करों में उत्पादन कर, व्यापार कर (सैल्स टैक्स), मनोरंजन कर, सीमा शुल्क, आयात व निर्यात शुल्क आदि समझा जाता है।

(ii) प्रशासनिक आगम- सार्वजनिक आगम में करों के अतिरिक्त अन्य प्रकार की वसूली जैसे- फीस, जुर्माना, दण्ड, लाइसेंस फीस आदि को प्रशासनिक आगम के नाम से सम्बोधित किया जाता है क्योंकि ऐसी आगम सरकार के प्रशासनिक कार्यों से प्राप्त होती है, संक्षिप्त विवरण निम्न है-

() फीस या शुल्क सार्वजनिक आगम में फीस या शुल्क का प्रमुख स्थान है। 301 ऐसा अनिवार्य भुगतान है जो सरकार द्वारा प्रदत्त किसी विशेष लाभ के बदले, आंशिक या पूर्ण लागत के बराबर व्यक्ति अथवा संस्था से वसूल की जाती है। इसलिए फीस अथवा शुल्क विशेष लाभ की लागत है जो किसी व्यावसायिक सेवा का भुगतान नहीं अपितु प्रशासनिक सेवाओं का भुगतान है।

शुल्क की प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं-

  • फीस ‘करो’की भांति एक अनिवार्य भुगतान है।
  • फीस सेवाओं के बदले का भुगतान है।
  • फीस का भुगतान सेवा लागत का अंशदान है जैसे-स्टांप फीस।

(ब) लाइसेंस फीस- सामान्य भाष में फीस व लाइसेंस फीस के मध्य अन्तर नहीं किया जाता है, लेकिन कुछ अर्थशास्त्री लाइसेन्स फीस व सामान्य फीस में अन्तर मानते हैं, उनका मत है कि फीस अथवा शुल्क सरकार के द्वारा प्रदत्त किसी विशेष सुविधा के बदले वसूल की जाती है जबकि लाइसेंस कीस की प्रकृति भिन्न है। प्रो० लूटज का मत है कि लाइसेंस फीस उन मामलों में देय होती है जब सरकार किसी कार्य को सम्पन्न कराने हेतु कोई सुविधा नहीं देती है वरन व्यक्ति या संस्था को कार्य करने की अनुज्ञा प्रदान करती है। जैसे- व्यापार हेतु आयात लाइसन्स, निर्यात लाइसेंस, उद्योगों में प्रदूषण मुक्ति लाइसेंस, आयुध लाइसेंस इत्यादि।

(स) जुर्माना या दण्ड- सार्वजनिक आगम का प्रशासनिक कारणों से उत्पन्न स्रोत जुर्माना अथवा दण्ड है। सामान्यतः सरकार जब जनता से नियमों का उल्लन करने के बदले अर्थ दण्ड अथवा जुर्माना वसूल करती है तो ऐसी व्यवस्था को जुर्माना या दण्ड कहते हैं। जैस- बिना टिकट यात्री पर जुर्माना, न्यायालय द्वारा अर्थदण्ड वसूल करना इत्यादि।

(B) गैरकर आगम-

व्युत्पादित आगम की तुलना में गैर-कर आगम सरकार के कम महत्वपूर्ण स्रोत नहीं है, क्योंकि गैर-कर आगम वे स्रोत समझे जाते हैं, जिन्हें करों अथवा फीस, लाइन की भांति बलात् वसूल न करके सरकार के कार्यों का प्रतिफल समझा जाता है। प्रायः सरकार ऐसे आगम को सार्वजनिक क्षेत्र, सार्वजनिक उद्योगों, क्षतिपूर्ति या जब्ती तथा उपहार के रूप में प्राप्त करती है। इसलिए सरकार का ऐसा आगम उसके बाप्तविक कार्यों पर निर्भर होता है। यदि सरकार की उत्पादन एवं सेवाओं सम्बन्धी क्रियायें विकसित हैं तो निश्चय ही ऐसे आगम लाभकारी स्रोतों की श्रेणी में आते हैं। इसके विपरीत उत्पादन एवं सेवाएँ अत्यन्त न्यून हैं, तो गैर-कर आगम शून्य भी हो सकते हैं। गैर-कर आगम के मुख्य स्रोत निम्न हैं-

(i) सार्वजनिक उपक्रमों से आगम- सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों को स्थापित करके उत्पादन वृद्धि के अनवरत प्रयत्न किये हैं। फलतः विविध सार्वजनिक उपक्रम एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित हो चुके हैं। इन उपक्रमों से उत्पादित माल को विक्रय करने के बाद जो आय प्राप्त होती है, वह सार्वजनिक आगम या लोक-आगम होती है। इसमें सेवाएँ भी सम्मिलित की जाती हैं, इसीलिए वस्तुओं एवं सेवाओं के विक्रय मूल्य से जो आय प्राप्त होती है, उसे सार्वजनिक उपक्रमों से आगम अथवा मूल्य-आगम भी कहकर सम्बोधित करते हैं। जैसे- सार्वजनिक उपक्रम, आयुध निर्माणियाँ, लोहे एवं इस्पात, भारी इंजीनियरिंग सेवाओं में- रेलवे, सड़क परिवहन, डाक तार सेवा, दूर संचार सेवा बैंकिंग सेवा आदि से आय आदि।

(ii) सरकारी संपत्ति से आगम जब सरकार स्व-सम्पत्ति जैसे- भूमि, भवन, वन आदि से लगान वसूल करती है तो सार्वजनिक आगम में वृद्धि होती है, ऐसे आगम को सरकारी सम्पत्ति (सार्वजनिक क्षेत्र) से आगम कहते हैं। अर्थशास्त्र में ऐसे आगम को विस्तृत रूप में निम्न प्रकार वर्णित कर सकते हैं- सरकारी सम्पत्ति जैसे- भूमि पर लगान, वह भूमि चाहे कृषकों की भूस्वामित्व सम्बन्धी हो अथवा सरकारी भूमि जिसे किराये पर दिया गया हो। सामूहिक अथवा सहकारी खेती की भूमि भी इस श्रेणी में आती है। इसी प्रकार भवन के रूप में सरकारी उद्योगों के भवन, सरकारी बस्तियाँ, श्रमिक बस्तियों आदि पर किराया वसूल किया जाता है। इतना ही नहीं, वनों पर भी लगान देय होता है, यदि पशुओं को चराने की छूट वनों में दी जा रही है तो इसके बदले सरकार किराया वसूलती है, वनों की भूमि पर लगान की प्रक्रिया अभी सामान्य प्रचलन में नहीं है

(iii) क्षतिपूर्ति या जब्ती सार्वजनिक आगम में गैर-कर आगम स्रोत के रूप में क्षतिपूर्ति अथवा जब्जी भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आगम है। ऐसा आगम सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्ति संस्था से वसूल किया जाता है। इसी प्रकार जब्दी सरकारी आगम का वह स्रोत है जब सरकार गैर कानूनी तौर पर अनधिकृत रूप में सोना अथवा धन (काला धन) रखने वाले व्यक्ति अथवा संस्था से समग्र सोना अथवा धन जन्त कर लिया जाता है तो ऐसे आगम को क्षतिपूर्ति अथवा जब्दी से प्राप्त आगम कहा जाता है।

(iv) अनुदान- साधरण बोलचाल की भाषा में उपहार या अनुदान समानार्थक समझे जाते हैं, किन्तु अनुदान की प्रकृति में उपहारों से आशिक मित्रता है। क्योंकि संघीय वित्त व्यवस्था में जब केन्द्र सरकार- राज्य सरकारों को कुछ विशिष्ट कार्यों अथवा सेवाओं के लिए अनुदान प्रदान करती है तो इसे एक सरकार द्वारा अन्य सरकारों को प्रदत्त आर्थिक सहायता कहते हैं। वर्तमान युग में विकसित देश अल्प विकसित या विकासशील देशों को ऐसी आर्थिक सहायता (अनुदान) प्रदान कर रहे हैं जैसे- विकास कार्यों हेतु अनुदान, सैन्य सहायता हेतु अनुदान आदि।

(V) उपहार- सार्वजनिक आगम में उपहार एक प्रमुख गैर-कर प्रधान है, जो स्वेच्छा से  व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा सरकार को उपहार के रूप में प्राप्त होता है। प्रायः लोग देश को आर्थिक संकट, युद्ध की अवस्था अथवा आपातकाल में ऐसे उपहार प्रदान करते हैं। अन्य शब्दों में इसे ‘दान भी कहते हैं। यह प्रत्यक्ष रूप में सरकार की आगम में सम्मिलित होते हैं। भारतवर्ष में वर्ष 1962 में चीन युद्ध, 1965 पाक युद्ध के समय में ऐसे दान दिये गये। इसी प्रकार उत्तर काशी में भीषण भूकम्प के समय जनता ने सरकार को दान दिया। कुछ भारतीयों को विदेशों में उपहार राशि प्राप्त होती है जो  उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए दी जाती है, इसी प्रकार एक देश भी दूसरे देश को उपहार प्रदान करते हैं।

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Pankaja Singh

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