शिक्षाशास्त्र

सामाजिक गतिशीलता और शिक्षा | सामाजिक गतिशीलता का अर्थ | सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा | सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएं | सामाजिक गतिशीलता के प्रकार

सामाजिक गतिशीलता और शिक्षा | सामाजिक गतिशीलता का अर्थ | सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा | सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएं | सामाजिक गतिशीलता के प्रकार

सामाजिक गतिशीलता और शिक्षा

समाज में रहने वाले सदस्य समय की गति से प्रभावित होते रहते हैं और तदनुसार वे भी सचेतन प्राणी के नाते गतिशील हुआ करते हैं। समाज यदि गति विहीन हो जावे, उसमें स्थिरता आ जाये तो प्रगति और विकास सम्भव नहीं हो सकता।

सामाजिक गतिशीलता से आप क्या समझते हैं? शिक्षा किस प्रकार सामाजिक गतिशीलता को प्रभावित करती है? स्थिति में समान गतिशील होता है और प्रत्येक व्यक्ति समाज को गतिशील मगाए रखने के लिए समयानुकूल परिवर्तन के लिए प्रमाल करता है। परी ४ । कि सामाजिक परिवर्तन के लिए सामाजिक गतिशीलता एक अनिवार्य नशा । समाज के प्रत्येक व्यक्ति की अपनी संस्थिति एवं भूमिका होती है जिसके फलस्वरूप वह समाज में दिया करता, गतिवान बनता है। इस प्रकार के समाज में व्यक्ति के द्वारा गतिशील होने से पूरे समाज में जो हलचल होती है वही सामाजिक गतिशीलता का रूप धारण करती है।

सामाजिक गतिशीलता का अर्थ

सामाजिक गतिशीलता का सीधा अर्थ है समाज की गतिशीलता अथवा समाज में होने वाली गतिशीलता अर्थात् हलचल। समाज में जो भी हलचल होती है वह व्यक्तियों के द्वारा होती है। ऐसी हलचल के पीछे परिवर्तन पाए जाते हैं। इसलिए सामाजिक गतिशीलता का अर्थ हुआ समाज की परिस्थितियों के कारण लोगों में सामाजिक, व्यावसायिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक परिवर्तनों के परिणाम स्वरूप होने वाली गतिशीलता।

प्रो० सोरोकिन का विचार है कि जब एक सामाजिक स्थिति से दूसरी स्थिति में मनुष्य की क्रिया बदल जाती है अथवा मनुष्य अपनी संस्थिति (Status) से ऊपर या नीचे उठता या गिरता है और इसमें जो परिवर्तन होता है, यह संकमण सामाजिक गतिशीलता है। ऐसा संक्रमण समाज के लक्ष्य, आदर्श एवं मूल्य में भी होता है।

सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा

कुछ समाजशास्त्रियों के द्वारा सामाणिक गतिशीलता का तात्पर्य और भी अच्छी तरह स्पष्ट कर सकते हैं। नीचे ये परिभाषाएँ दी जा रही है–

(i) प्रो० विलियम सेसिल हेडरिक- “सामाणिक गतिशीलता एक व्यक्ति का एक सामाजिक समूह से दूसरे समूह में चले जाना है।”

(ii) प्रो० हैबिग्हर्स्ट और न्यूगार्टन- “सामाजिक गतिशीलता पद का अर्थ एक सामाजिक वर्ग से दूसरे सामाजिक वर्ग में चला जाना है जिसमें नए सामाजिक पद के विभिन्न तत्वों का दृढ़ीकरण अन्तर्निहित होता है, ऐसे पद के अन्तर्गत व्यवसाय, आय, मकानों के प्रकार, पास-पड़ोस, नये मित्र, और नये संगठनों की सदस्यता होती है।”

सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएँ

समाजशस्त्रियों के द्वारा सामाजिक गतिशीलता की कुछ विशेषताएँ बताई गई हैं जो निम्नलिखित हैं-

(i) व्यक्ति में परिवर्तन होना- जब वह नये विचार, नये प्रतिदर्श, नये व्यवहार, नये पद, व्यवसाय को ग्रहण करता है।

(ii) व्यक्ति और समाज में प्रगति की इच्छा होना- जिसके कारण व्यक्ति प्रयत्न करता है।

(iii) वास्तविक प्रगति होना- जो व्यक्ति के प्रयल का परिणाम होती है।

(iv) काल्पनिक और अनुमानात्मक मात्रा होना- जो प्रगति के मापने में पाई जाती है।

(v) सामाजिक गतिशीलता के कारकों की व्यवस्था व्यक्ति के द्वारा होना- क्योंकि मनुष्य ही मुख्य साधन होता है।

सामाजिक गतिशीलता के प्रकार

सामाजिक गतिशीलता का अध्ययन करने वाले समाजशास्त्रियों ने सामाजिक गतिशीलता के कई प्रकार बताये हैं जिन्हें नीचे लिखा जा रहा है।

(i) क्षैतिजीय सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Horizontal Social Mobility कहा जाता है। इसमें समानान्तर स्तर के एक समूह से दूसरे समूह में व्यक्ति चला जाता है। क्षैतिजीय सामाजिक गतिशीलता में व्यक्ति की संस्थिति में परिवर्तन नहीं होता है। उदाहरण के लिये एक वस्तु की दूकानदारी छोड़कर व्यक्ति के दूसरी वस्तु की दूकानदारी करने में क्षैतिजीय सामाजिक गतिशीलता पाई जाती है। इसी प्रकार से कांग्रेस पार्टी छोड़कर इंदिरा कांग्रेस या जनता पार्टी में व्यक्ति के आने-जाने से क्षैतिजीय सामाजिक गतिशीलता होगी।

(ii) लम्बीय सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Vertical Social Mobility कहा जाता है। इस प्रकार की गतिशीलता में व्यक्ति की संस्थिति में परिवर्तन होता है। प्रायः इसमें नीची पदस्थिति से उच्च पदस्थिति प्राप्त की जाती है। उदाहरण के लिये अध्यापक से आई० ए० एस० की सेवा में पहुँचना, साधारण दूकानदार से कमीशन एजेन्ट हो जाना । परन्तु कुछ विद्वान ऊपर से नीचे खिसकने में भी लम्बीय सामाजिक गतिशीलता मानते हैं। उदाहरण के लिये आई० ए० एस० से पी० ए० एस० में गिरा देना, बड़े एजेन्ट से साधारण सेल्समैन बना देना, हेडक्लर्क से साधारण डिस्पैच का काम करने वाला बना देना।

(iii) ऊर्ध्वगामी या ऊर्ध्वमुखी सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Upward Social Mobility कहते हैं। यह एक प्रकार से लम्बीय सामाजिक गतिशीलता के समान होती है अन्तर केवल इतना है कि इसमें केवल ऊपर की दिशा में जाना होता है, नीचे नहीं आना पड़ता है। ऊर्ध्वगामी सामाजिक गतिशीलता होने पर व्यक्ति में कुछ विशेषताएँ आ जाती हैं जैसे व्यवहार में परिवर्तन, भाषा में परिवर्तन, रहन-सहन और निवास स्थान में परिवर्तन, अभिवृत्तियों एवं अभिव्यक्तियों में परिवर्तन, कार्य एवं कार्य-प्रणाली में परिवर्तन, उच्चस्तरीय कौशल में परिवर्तन । उदाहरण के लिये साधारण क्लर्क से जज बन जाना, अध्यापक से आई० ए० एस० आफिसर हो जाना, एम० एल० ए० से प्रधानमन्त्री या राष्ट्रपति बन जाना।

(iv) अधोगामी या अधोमुखी सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Downward Social Mobility कहते हैं। समाज के व्यापार, राजनीति, कामधंधे में नीचे की श्रेणी में आ जाना ही अधोमुखी सामाजिक, गतिशीलता होती है। इसके दो कारण हैं-(1) एक तो व्यक्ति में स्वप्रयल की क्षमता या अन्य कमी हो और (2) दूसरे समाज में गिरावट और परिवर्तन होने लगे। पदच्युति इसकी प्रमुख विशेषता होती है। उदाहरण के लिये राजाओं के राज्य भारत सरकार ने ले लिया तो राजे-महाराजे साधारण नागरिक बन गये। किसी ने होटल खोला, किसी ने मोटर एजेन्सी ले लिया या किसी ने सिनेमा खोल लिया। जमींदारी के तोड़ देने से जमींदारों के लड़के इधर-उधर घूमने वाले हो गये, उनके मान-सम्मान एवं आर्थिक स्थिति में गिरावट हो गई है।

(v) प्रदत्त सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Sponsored Social Mobility कहते हैं। इसमें किसी एक व्यक्ति को सहायता देकर दूसरे व्यक्ति को समाज में उच्च पद पर रखा जाता है। एक के द्वारा दूसरे को ऊँचा पद देने से इसे प्रदत्त सामाजिक गतिशीलता कहते हैं। ऐसी पदोन्नति में व्यक्ति का निजी कार्य, गुण, चाटुकारी, पक्षपात आदि कारण होते हैं। उदाहरण के लिये साधारण क्लर्क से रजिस्ट्रार को पी० ए० बना लेना, लेक्चरर से प्रोवाइसचान्सलर बना लेना, साधारण छात्र को अच्छी छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा के लिये विदेश भेजना।

(vi) संघर्ष सामाजिक गतिशीलता- अंग्रेजी में इसे Contest Social Mobility कहा जाता है। इसमें बिना किसी की सहायता से स्वयं एक व्यक्ति अपने आप संघर्ष करके ऊँचा उठता है। उदाहरण के लिये विभागीय परीक्षाएँ पास करके साधारण क्लर्क आफिस सुपरिन्टेन्डेण्ट और सेक्सन आफिसर तक हो जाते हैं। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील अपने प्रयास से जज बन जाते हैं। साधारण अध्यापक प्रिसिंपल पद के लिये प्रयत्न करके प्रिसिंपल बन जाता है।

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Pankaja Singh

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