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प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद | प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद की आवश्यकता

प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद | प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद की आवश्यकता

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प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद

भारत की अनेक भाषाओं-तमिल, तेलुग, बंगला, पंजाबी, मराठी इत्यादि के साहित्य के अनुवाद ने हिन्दी को समृद्ध ही नहीं किया उसकी प्रयोजशीलता को प्रभावित किया है। बंगाल के श्रेष्ठ साहित्यकारों ने रवीन्द्रनाथ टैगोर, शरतचन्द्र, बंकिमचन्द्र, विमल मित्र इत्यादि अनेक लेखकों के साहित्य को बहुत प्रभावित किया है। इन सभी भाषाओं के लेखकों का प्रभाव पड़ता रहा है। उर्दू साहित्य के प्रमुख रचनाकार प्रेमचन्द्र रहे हैं एवं उनकी रचनाओं से समस्त जगत परिचित हैं। देवकी नंदन खत्री के उपन्यासों को पढ़ने के लिए हजारों लोगों ने हिन्दी सीखी एवं प्रयोग किया। समय-समय पर रचित साहित्य का प्रभाव पड़ता रहा।

प्रशासन में अनुवाद के कारण हिन्दी की प्रयोजनता में वृद्धि हुई जैसा कि हम कह आये हैं सर्वप्रथम मुगलों के शासन काल में अनुवाद का प्रभाव पड़ा। तत्पश्चात् अंग्रेजों के शासन में भी यह निरन्तर पड़ता रहा। मुगलकाल में फारसी शासन की भाषा थी अंग्रेजों के शासन काल में अंग्रेजी स्वीकृत हुई। लोगों को अंग्रेजी न जानने का कारण परेशान होते थे। उन्हें अपनी अर्जी कचहरी में पेश करने के लिए भी अंग्रेजी अनुवाद का सहारा लेना पड़ता था।

भारत जब स्वतन्त्र हो गया जब संविधान के निर्माताओं ने शासन की भाषा के विषय में भी प्रावधान बनाया। तद्नुसार राज्यों का भीतरी प्रशासन राज्य की भाषा में करने की व्यवस्था हुई। उनमें भी ऐसा प्रबन्ध अपेक्षित है जिससे अल्पमत वालों को असुविधा या नुकसान न हो। पूरे देश के प्रशासन के लिए हिन्दी को राजभाषा स्वीकार किया गया। हिन्दीत्तर-भाषी लोगों के लिए हिन्दी में प्रशासकीय पत्र-व्यवहार की कठिनाई महसूस करते हुए कुछ वर्षों तक अंग्रेजी को सह-राजभाषा के रूप में स्वीकार करने का भी प्रावधान है। इस सावधान के कारण प्रशासन के क्षेत्र में अनुवाद अनिवार्य हो गया।

प्रशासनिक भाषा के अनुवाद पर विचार करने के लिए प्रशासन कार्य के विभिन्न को अलग-अलग समझना अधिक सुविधाजनक रहेगा। हर सरकारी विभाग के संचालन के लिए आधारभूत प्रशासनिक नियम-संहिता या कोड होता है। सरकार के सारे विभागों के लिए सामान्यतः लागू होने वाले नियमों के संकलन भी होते हैं, जैसे-सरकारी सेवा नियम, सरकारी वित्त नियम आदि। इन नियमावलियों की भाषा शुद्ध प्रशासनिक भाषा है जो विशेष वैधानिक महत्व रखती है। इतनी आजादी तो जरूर हो सकती है कि अंग्रेजी की जटिलता को हिन्दी में दूर करें और हिन्दी की प्रकृति का निर्वाह करें, किन्तु मूल का कोई महत्वपूर्ण अंश छूट नहीं जाना चाहिए। ऐसी नियमावलियाँ वर्षों में, त्रुटियों-कमियों का संशोधन करते-करते अंतिम रूप में प्रस्तुत होती है। फिर भी संशोधन स्वीकार किए जाते हैं। इसलिए मूल के पूरे भाव का प्रस्तुतीकरण अनुवाद में अपेक्षित है।

प्रशासनिक पत्र-व्यवहार में सरकारी कार्यालय से व्यक्तियों या संस्थाओं को भेजे जाने वाले पत्र शामिल हैं। सरकारी कार्यालयों का परस्पर पत्र-व्यवहार तो प्रशासनिक है ही। व्यक्ति या संस्थाएं सरकार को जो पत्र लिखती हैं उसमें भाषा की व्यवस्था उतनी कठोर होना जरूरतो नहीं है। फिर भी प्रशासन की संकेतित शब्दावली का प्रयोग जहाँ करना है वहाँ उनकी जगह अपनी शब्दावली स्वीकार करने की आजादी नहीं है। वह तो पत्र-व्यवहार में निरंकुशता लाएगी।

प्रशासनिक अंग्रेजी में जो पत्राचार होता हैं। वह तो पत्र-व्यवहार में निरंकुशता लाएगी। अभिव्यक्तियाँ और नियत संरचनाएं होती हैं। ये कभी-कभी सामान्य व्याकरणिक प्रक्रिया के नियमों का पालन नहीं करती। इनको बदलने का अधिकार प्रशासन व्यक्तियों को नहीं है। अतः इनके प्रामाणिक अनुवाद में दक्षता पाना प्रशासनिक हिन्दी में पत्र-व्यवहार के लिए आवश्यक है।

अंग्रेजी के संकेतित शब्दो में निन्यानवे प्रतिशत सामान्य शब्द ही हैं। उन्हें प्रशासन में विशिष्ट रूढ़ अर्थ दिया जाता है। अतः ऐसे रूढ़ शब्दों को बदलकर उनके पर्यायवाची सामान्य शब्दों का व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। इसी प्रकार इनके हिन्दी पर्यायों को गढ़ने का काम सरकार पर छोड़ना चाहिए। जो अनुदित शब्द सरकार ने प्रस्तुत किए हो उनका प्रयोग चुपचाप करते जाना ही लाभकारी है। हिन्दी-भाषी राज्य कई हैं और प्रत्येक हिन्दी-भाषी राज्य की सरकार प्रशासनिक अंग्रेजी के संकेति शब्दों का अलग-अलग अनुवाद करने की कोशिश करती है। प्रारम्भ में यह भले ही उचित रहा हो, परन्तु अब समय आ गया है कि पूरे भारतवर्ष में एक ही समेकित हिन्दी शब्दावली का प्रयोग प्रशासन में किया जाए।

अंग्रेजी संकेतित शब्दों के लिए हिन्दी अनुवाद के कुछ उदाहरण-

Affidavit – शपथ-पत्र

Appropriation – विनियोजन

Copyist – प्रतिलिपिक

Days of grace – रियायती दिन

प्रशासन में संकेतित शब्द और सामान्य शब्द दोनों प्रयुक्त होते हैं। विDays of grac शब्दों का अर्थ भी बदलता है। अंग्रेजी के हजारों शब्द नानार्थवाची हैं और वे प्रसंगानुसार अलग- अलग अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। अनुवाद करते समय इसका ध्यान रखना चाहिए।

उदाहरण-

Balance – तराजू, संतुलन, शेष, बकाया

Bar – सिल्ली, रोक, शराबघर, कठघरा, वकील-समुदाय

Bill – बीजक, विधेयक, विज्ञापन, विवरण

Capital – शिर-सम्बन्धी, राजधानी, मूर्धन्य, पूँजी, बड़े अक्षर

Drive – आंदोलन, संचालन, कर्मशक्ति, सैर, प्रचार

Section – धारा, अनुभाग, खण्ड, विभाग।

जैसा कि श्री काशीराम शर्मा ने लिखा है, यदि प्रत्येक अनुवादक अपने-अपने हिन्दी पर्याय गढ़े तो भाषा-विषयक भ्रांति बड़ी अहितकर हो सकती है। उदाहरणार्थ अंग्रेजी Dismissal (from service), removal (from service), termination (of service) dis- charge (from service) के और जैसे शब्दों के अर्थों में सूक्ष्य होने के कारण उन सब के लिए अलग-अलग पर्याय निर्धारण करके सदा उन्हीं पर्यायों का प्रयोग करना उचित होगा।

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Pankaja Singh

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