वित्तीय प्रबंधन

पूँजी बजटन में जोखिम | पूँजी बजटन में अनिश्चितता | समायोजन की विधियाँ

पूँजी बजटन में जोखिम | पूँजी बजटन में अनिश्चितता | समायोजन की विधियाँ | Risk in capital budgeting in Hindi | Uncertainty in capital budgeting in Hindi | Adjustment methods in Hindi

पूँजी बजटन में जोखिम एवं अनिश्चितता

(Risk and Uncertainty in Capital Budgeting)

किसी भी पूंजी विनियोजन प्रस्ताव पर सहमत होने से पूर्व जोखिम तथा अनिश्चितता का भी ध्यान रखना चाहिये। ये दोनों तत्व न केवल विनियोग प्रस्ताव को ही प्रभावित करते हैं वरन् कालान्तर में व्यावसायिक संस्था के अंशों के बाजार मूल्य को भी प्रभावति करते हैं।

अर्थ (Meaning)- किसी पूँजी विनियोग प्रस्ताव में जोखिम तथा अनिश्चितता का अर्थ उसमें भविष्य में अनुमानित एवं वास्तवित प्रत्यायों में उत्पन्न परिवर्तनशीलता से है। किसी परियोजना द्वारा अर्जित लाभों में जितनी अधिक परिवर्तनशीलता एवं अस्थिरता होगी उतनी अधिक उसमें जोखिम एवं अनिश्चितता होगी।

कारण (Causes)- जोखिम एवं अनिश्चितता के उत्पन्न होने के अनेक कारण हैं- देश की आर्थिक एवं राजनैतिक स्थिति, विनियोजन में प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ताओं की रुचि में परिवर्तन, देश में औद्योगिक तथा तकनीकी विकास, उद्योग को दी जाने वाली शासकीय सुविधायें, राष्ट्रीयता की सम्भावना आदि। इन तत्वों से परियोजना की आय, लागत तथा अर्थिक जीवन में अनिश्चितता उत्पन्न हो जाती है तथा परियोजना में जोखिम का भय उत्पन्न हो जाता है।

समायोजन की विधियाँ (Methods of Adjustment)

उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट है कि पूँजी विनियोजन में जोखिम तथा अनिश्चितता के लिये समायोजन किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है। यद्यपि इनके लिये समायोजन करने का कार्य अत्यन्त कठिन है, किन्तु फिर भी निम्नलिखित प्रचलित विधियों का प्रयोग किया जा सकता है-

(1) जोखिम समायोजित अपहार दर (Risk Adjusted Discount Rate) – सामान्यतः जोखिम वाले पूँजी विनियोग प्रस्ताव पर व्यवसायी अधिक ऊंची प्रत्याय दर की आशा करता है। इस पद्धति में जोखिम के हिसाब से अतिरिक्त जोखिम प्रब्याजि दर (Risk Premium Rate) निर्धारित कर ली जाती हैं अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिये ऊँची अपहार दर तथा कम जोखिम वाली परियोजना के लिये कम अपहार दर निश्चित की जाती है।

(2) निश्चितता तुल्यमान (Certainty Equivalent) – इस विधि के अनुसार रोकड़ अन्तर्वाहों को जोखिम की मात्रा के आधार पर कम करके समायोजत कर लिया जाता है। इस पद्धति में सर्वप्रथम निश्चितता का अनुपात ज्ञात किया जाता है। तत्पश्चात् रोकड़ अन्तर्वाहों में उस अनुपात का गुणा करके वास्तविक अन्तर्वाह ज्ञात कर लिया जाता है। उदाहरणार्थ, यदि किसी वर्ष रोकड़ अन्तर्वाह 10,000 रु0 का होने का अनुमान है तथा यह अनुमान है कि इसमें निश्चितता 66% या (.6) एवं अनिश्चितता 4% या (.4) है तो इस प्रकार वास्तविक रोकड़ अन्तर्वाह 10,000 रू० न मानकर 10,000×6 = 6,000 रु0 के बराबर मान लिया जायेगा। तत्पश्चात NPV ज्ञात करके परियोजना के प्रस्ताव को स्वीकार करने या न करने का निर्णय लिया जायेगा।

(3) सम्भावना निर्धारण (Probability Assignments) – इस पद्धति में रोकड़ अन्तर्वाहों की सम्भावना ज्ञात करके तथा उसका समायोजन करके वास्तविक अन्तर्वाह की गणना कर लेते हैं। उदाहरणार्थ, व्यवसाय में कुल 20,000 रु० का रोकड़ अन्तर्वाह सम्भावित है। इसमें 16,000रु0 के अन्तर्वाह की सम्भावना 80% या. 8 है तथा 4,000 की सम्भावना मात्र 20% या.2 है तो कुल अन्तर्वाह 16,000x .8 = 12,800 + 4,000 x 2 = 800 कुल 13,600 रू० माना जाएगा। सामान्यतः सम्भावना वस्तुनिष्ठ (Objective) या विषयगत (Subjective) होती है, किन्तु एक ही घटना पर आधारित होने के कारण पूँजी बजटन सम्बन्धी निर्णयों में सम्भावना विषयगत ही होती है।

(4) सूक्ष्म ग्राह्यता विश्लेषण (Sensitivity Analysis) – इस पद्धति में किसी पूँजी विनियोजन पर मिलने वाले प्रत्याय का अनुमान तीन श्रेणियों में किया जाता है- (i) आशावादी दर (Optimistic Rate), (ii) सम्भावना दर (Most Likely Rate) तथा (iii) निराशावादी दर (Pessimistic Rate) । आशावादी तथा निराशावादी दर में जितना ही अधिक अन्तर होता है, परियोजना उतनी ही अधिक जोखिमपूर्ण मानी जाती है।

(5) प्रमाप विचलन (Standard Deviation)- रोकड़ प्रवाहों की परिवर्तनशीलता को  एक निश्चित मूल्य प्रदान करने के लिये सांख्यकीय की प्रमाप विचलन गणना का प्रयोग किया जा सकता है। इस पद्धति के अनुसार विभिन्न पूँजी परियोजनाओं से प्राप्त होने वाले सम्भावित रोकड़ अन्तर्वाहों की उनके माध्य (Average) से परिवर्तनशीलता की तुलना की जाती है यह तुलना प्रमाप विचलन निकालकर की जाती है। अधिक प्रमाप विचलन वाली परियोजना अधिक जोखिमपूर्ण तथा कम प्रमाप विचलन वाली परियोजना कम जोखिमपूर्ण मानी जाती है। यह निरपेक्ष माप होता है।

(6) विचरण गुणांक (Coefficient of Variation) – प्रमाप विचलन शैली पद्धति निरपेक्ष माप वाली पद्धति है। रोकड़ अन्तर्वाह असमान होने पर या असमान माध्य वाली परियोजनाओं पर प्रमाप विचलन पद्धति से तुलना करना सम्भव नहीं होता। विचरण गुणांक सापेक्ष माप होने के कारण इसमें विभिन्न परियोजनाओं की तुलना सम्भव हो जाती है। विचरण गुणांक की गणना करने के लिये प्रमाप विचलन में सम्भावित माध्य या रोकड़ प्रवाह का भाग दिया जाता है।

(7) निर्णय वृक्ष (Decision Tree) – यह एक रेखाचित्रीय विधि है जिसमें वर्तमान निर्णय तथा सम्भावित भावी घटना या निर्णय तथा उसके परिणामों के बीच सम्बन्ध को प्रदर्शित किया जाता है। इस विधि में पूर्वानुमानित सम्भावनाओं को घटना क्रमों से जोड़कर सम्भावित परिणामों के विस्तार एवं सम्भावनाओं के आपसी सम्बन्धों को प्रदर्शित किया जाता है।

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Pankaja Singh

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