राजनीति विज्ञान

फ्रांस में व्यवस्थापिका की रचना | फ्रांस में संसद की शक्तियाँ और कार्य | नेशनल असेम्बली और सीनेट का सम्बन्ध

फ्रांस में व्यवस्थापिका की रचना | फ्रांस में संसद की शक्तियाँ और कार्य | नेशनल असेम्बली और सीनेट का सम्बन्ध

फ्रांस में व्यवस्थापिका की रचना

पंचम गणतंत्र की व्यवस्थापिका द्वि-सदनीय है। इसके प्रथम सदन को नेशनल एसेम्बली और दूसरे सदन को सीनेट कहा जाता है। नेशनल असेम्बली का गठन 5 वर्ष के लिए होता है। प्रतिनिधियों का चुनाव एकल निर्वाचन से दो बार मतदान प्रणाली द्वारा लागू होता है। इस पद्धति को 1858 में अपनाया गया था। इस पद्धति के अनुसार पहली बार केवल वे ही प्रत्याशी निर्वाचित घोषित किये जाते हैं जिन्हें कुल निर्वाचनों का पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाता है। दूसरे मतदान को साधारण बहुमत की प्रणाली द्वारा सम्पन्न किया जाता है।

मतदान का अधिकार 21 वर्ष की अवस्था के प्रत्येक व्यक्ति को है। नागरिक अथवा सैनिक उपाधिप्राप्त व्यक्ति 18 वर्ष की अवस्था में ही मताधिकार प्राप्त कर लेता है। नेशनल एसेम्बली का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की आयु कम से कम 23 वर्ष होनी चाहिए। 1958 के संविधान के अनुसार प्रत्येक सीट के लिए दो प्रतिनिधियों के चुने जाने की व्यवस्था की गई है। एक को डिप्युटी और दूसरे को वैकल्पिक डिप्युटी कहा जाता है। वैकल्पिक डिप्युटी तब नेशनल एसेम्बली का सदस्य बनता है जब डिप्युटी किन्हीं कारणों से नेशनल असेम्बली की सदस्यता त्याग दे या उसे नेशनल एसेम्बली की सदस्यता से वंचित कर दिया जाय। नेशनल एसेम्बली साधारण जनता का प्रतिनिधित्व करती है, और इसमें जनता के द्वारा चुने गये प्रतिनिधि पहुँचते हैं। सीनेट में स्थानीय समुदायों एवं फ्रान्स से बाहर रहने वाले फ्रान्सीसियों को प्रतिनिधित्व कर दिया जाता है। सीनेट का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से व्यापक मताधिकार के आधार पर सम्पन्न होता है। इसके सदस्यों का चुनाव 9 वर्ष के लिए होता है और उसके सदस्य प्रत्येक तीसरे वर्ष अवकाश प्राप्त कर लेते हैं। इसकी सदस्यता के लिये 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए।

फ्रांस में संसद की शक्तियाँ और कार्य-

फ्रांस की संसद बहुमुखी कार्यों को सम्पन्न करती है। उसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:-

(i) निर्वाचनसम्बन्धी कार्य- नेशनल एसेम्बली समुदाय की सीनेट के आधे फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को चुनती है। उच्च न्यायालय के आधे फ्रान्सीसी प्रतिनिधियों का चुनाव भी वही सम्पन्न करती है। उसे यूरोपियन एसेम्बली के आधे प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार प्रदान किया गया था। वह प्रधान संवैधानिक परिषद के तीन सदस्यों को भी मनोनीत करती है।

(ii) विधायी कार्य- पंचम गणतंत्र के संविधान की 35,36, 44 और 53 धाराओं के अंतर्गत संसद की विधायी शक्तियों का उल्लेख किया गया है। युद्ध की घोषणा का अधिकार भी संसद को है।

(iii) वित्तीय कार्य- संसद को समस्त फ्रांस के हेतु बजट बनाने का अधिकार प्राप्त है। बजट को आय और व्यय दो भागों में बाँटा जाता है। बजट नेशनल एसेम्बली में प्रस्तुत किया जाता है। यदि नेशनल एसेम्बली प्रथम वाचन के 40 दिन में उस पर कोई निर्णय लेने में असफल रहती है तो उसे सीनेट के सम्मुख रखा जाता है। सीनेट को उस पर 15 दिन के अन्दर अवश्य ही निर्णय लेना होता है। यदि बजट सम्बन्धी विधेयक पर कोई भी निर्णय 70 दिन के अन्दर नहीं हो पाता है तो उस विधेयक को अध्यादेश द्वारा लागू किया जाता है।

(iv) नियंत्रणसंबंधी अधिकार-नेशनल एसेम्बली को सरकार के उत्तरदायित्व के प्रश्न पर निंदा-प्रस्ताव रखने का अधिकार होता है। यह प्रस्ताव तभी रखा जा सकता है जब उस पर नेशनल असेम्बली के कम से कम 1/10 सदस्यों के हस्ताक्षर हों । प्रस्ताव प्रस्तुत करने के 48 घण्टे बाद उस पर मतदान हो सकता है और उसको सदस्यों के बहुमतद्वारा पारित किया जाना चाहिए। नेशनल एसेम्बली के निन्दा प्रस्ताव पारित कर देने पर या सरकार के किसी कार्यक्रम या नीति की घोषणा को अस्वीकृत कर देने पर प्रधानमन्त्री अपनी सरकार का त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे देता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नेशनल एसेम्बली प्रधानमंत्री और उसकी सरकार पर नियंत्रण रखती है। किन्तु पंचम गणतंत्र के संविधान के कुछ प्रावधानों द्वारा संसद का कार्यपालिका पर नियंत्रण बहुत कम हो गया है। राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार प्राप्त है। वह नेशनल एसेम्बली का विघटन कर सकता है। संसद का बजट के ऊपर भी कोई विशेष नियंत्रण नहीं होता। क्योंकि संसद यदि नियत अवधि में बजट पारित नहीं करती है तो उसे अध्यादेश द्वारा लागू किया जाता है।

नेशनल असेम्बली और सीनेट का सम्बन्ध-

नेशनल एसेम्बली और सीनेट के निर्वाचन संबंधी एक से अधिकार हैं। सीनेट भी नेशनल एसेम्बली की भाँति संवैधानिक परिषद् के तीन सदस्यों का चुनाव करती है। नेशनल एसेम्बली की भाँति ही सीनेट को भी उच्च न्यायालय के आधे न्यायाधीशों को चुनने का अधिकार प्राप्त है। विधायी क्षेत्र में सीनेट की शक्तियाँ नेशनल एसेम्बली से कम होती हैं। सीनेट संसद के साधारण अधिवेशनों को बुला सकती है जबकि नेशनल एसेम्बली ऐसा नहीं कर सकती। बजट और वित्तीय विधेयक पहले नेशनल एसेम्बली में ही रखे जाते हैं, जबकि सीनेट बजट पर अधिक से अधिक 15 दिन तक विचार करती है। नेशनल एसेम्बली कुछ विधेयक सीनेट की बिना स्वीकृति के भी पारित कर सकती है। किन्तु पाँचवें गणतन्त्र के संविधान के अनुसार यह आवश्यक है कि किसी विधेयक को कानून बनने के लिए दोनों सदनों की स्वीकृति प्राप्त है।

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Pankaja Singh

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