शिक्षाशास्त्र

पत्राचार शिक्षा | पत्राचार के स्वरुप | पत्राचार शिक्षा के प्रयोजन | पत्राचार शिक्षा किसके लिये है?

पत्राचार शिक्षा | पत्राचार के स्वरुप | पत्राचार शिक्षा के प्रयोजन | पत्राचार शिक्षा किसके लिये है? | Correspondence Education in Hindi | Form of correspondence in Hindi | Purpose of correspondence education in Hindi

पत्राचार शिक्षा क्या है?

यदि नाम की दृष्टि से देखा जाये तो पत्राचार शिक्षा-प्रणाली एक ऐसी प्रणाली हैं, जिसमें पाठ्य-सामग्री चाहे वह मुद्रित हो, चाहे टाइप करके साक्लोस्टाइल की गयी हो, डाक के द्वारा दूर रहने वाले छात्र-छात्राओं को प्रेषित की जाती है।

ग्लाटर और वेडिल ने पत्राचार शिक्षा के सम्बन्ध में जो विचार व्यक्त किये हैं, उनका सार यह है—‘पत्राचार शिक्षा की परिभषा व्यक्त करते हुए हम कह सकते हैं कि यह अनुदेशन और शिक्षा की एक ऐसी सुगठित व्यवस्था है, जिसमें पाठ डाक के द्वारा प्रेषित किये जाते हैं। पत्राचार शिक्षा को सम्पूर्ति दूरसंचार के माध्यमों के द्वारा तथा आमने-सामने बैठकर दी जाने वाली शिक्षा के द्वारा की जाती है।‘

“Correspondence Education can be defined as organised provision for Instruction and education through post, although postal tuition can be Supplemented by many other distance media as well as. By face-to-face teaching.” -Glatter, R. And Wedell, E.H.: Study By Correspondence Longman, London, 1971

पत्राचार शिक्षा के कई नाम प्रचलित है। विविध राष्ट्रों की ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण ये बहुरूपी नाम प्रचलित है-

पत्राचार के स्वरुप

(1) खुला विश्वविद्यालय (Open University)– ग्रेट-ब्रिटेन में पत्राचार शिक्षा का एक और नाम प्रचलित है। इस प्रकार की शिक्षा में आयु का कोई बन्धन नहीं, निवास का कोई बन्धन नहीं तथा आधारभूत शिक्षा योग्यता को कोई परिसीमा नहीं। इसलिए वहाँ इस खुला- विश्वविद्यालय कहा जाता है।

(2) वायुमण्डलीय विश्वविद्यालय (University of the Air)— बहुत से स्थानों पर विद्यार्थियों को पत्राचार की शिक्षा देते समय सम्पूर्ति के रूप में आकाशवाणी या रेडियो के कार्यक्रमों की सहायता ली जाती है, इसलिए इसे वायुमण्डलीय विद्यालय भी कहा जाता है।

नाम चाहे कुछ भी हो, इन सभी शिक्षा प्रणालियों में जो मुख्य बात है, वह है अध्यापकों (शिक्षण संस्थाओं) और छात्र-छात्राओं के बीच व्युक्तता या दूरी। धीरे-धीरे पत्राचार के पाठ ही ज्ञान के स्थानान्तरण के प्रमुख साधन माने जाने लगे।

(3) प्राचीरहीन विश्वविद्यालय (University without walls) – पत्राचार शिक्षा विश्वविद्यालयों की भौगोलिक सीमाओं से पूरी तरह आजाद है, कुछ शिक्षाविदों ने इसे अपनी पुस्तक में प्रचारहीन विश्वविद्यालय कहा है।

(4) स्वतंत्र या मुक्त अध्ययन प्रणाली (Independent Study Method)- विद्यार्थियों को जो मुद्रित पाठ्य सामग्रो भेजी जाती है, वह उन्हें कोई अध्यापक नहीं पढ़ाता। उसका वे स्वतंत्र अध्ययन करते हैं, इसलिए इसे स्वतंत्र या मुक्त अध्ययन प्रणाली कहते हैं।

(5) गृह अध्ययन विधि (Home Study Method) — मुद्रित पाठ विद्यार्थी लोगों के घरों को भेजे जाते हैं और विद्यार्थीगण भी अपने घर पर ही विषय-वस्तु का अध्ययन करते हैं-इसलिए इसे गृह अध्ययन विधि कहा जाता है।

(6) दूर शिक्षा या परिसर-बाह्य अध्ययन (Distance Education or off Campus Study)- इस शिक्षा को ग्रहण करने वाले विद्यार्थी दूर-दूर स्थानों में निवास करते हैं, इसलिए इसे दूर-शिक्षा या परिसर बाह्य शिक्षा कहते हैं।

पत्राचार शिक्षा के प्रयोजन

(Aims of Correspondence Education)

प्राय: पत्राचार-पाठ्यक्रम के जो उद्देश्य समझे जाते हैं, उनको परिगणना इस प्रकार से की जा सकती है-

(1) सेवापूर्व और सेवारत प्रशिक्षण देना।

(2) ऐसे भी स्थान हैं, जहाँ के पाठ्यक्रमों का कोई भी सम्बन्ध उपाधियों या प्रसारण पत्रों से नहीं होता, वहाँ पर पत्राचार शिक्षा का उद्देश्य है-लोगों को विभिन्न प्रकार के कौशलों (Skills) में निपुण बनाना।

(3) विद्यार्थियों को विभिन्न माध्यमिक शिक्षा परिषदों और विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के लिए तैयार करना।

भारतीय प्रसासन के शिक्षा मंत्रालय ने 1978 ई० में एक पुस्तक का प्रकाशन किया, जिसका नाम था ‘भारतीय प्रशासन के विकास कार्यक्रमों में प्रौढ़-शिक्षा के विभिन्न अंगों की भूमिका’ (Adult Education components in development schemes of government of India) इसमें पत्राचार शिक्षा सम्बन्धी पाठ्यक्रमों के अधोलिखित उद्देश्यों की पूर्ति की गयी है-

(1) व्यक्ति अपनो गति और सुविधा को ध्यान में रखकर शिक्षा की प्राप्ति करें। उन पर किसी भी प्रकार का तनाव न हो।

(2) शिक्षा की ऐसी वैकल्पिक प्रणाली की व्यवस्था करना कि देश का बड़ा जनसंख्या ज्ञानार्जित करे और अपनी व्यावसायिक कुशलता में वृद्धि करे।

(3) लोग अपने विश्रान्ति के क्षणों को शिक्षा की प्रक्रियाओं में लगायें।

पत्राचार शिक्षा किसके लिये है?

पत्राचार के द्वारा शिक्षा को कौन प्राप्त कर सकते हैं? विभिन्न अध्ययनों के आधार पर इसके सम्बन्ध में ये बातें कही जा सकती हैं-

(1) ऐसे विद्यार्थी, जिन्हें किन्हीं कारणों से परम्परागत विद्यालयों अथवा महाविद्यालयों से निकाल दिया गया है।

(2) भिन्न-भिन्न व्यवसाय में लगे वे लोग, जिन्होंने जीवन निर्वाह के लिए, अपनी शिक्षा बीच में छोड़कर, किसी-न-किसी व्यवसाय को अपना लिया है।

(3) वे छात्र-छात्राएँ जिन्होंने शिक्षण संस्थाओं को किन्हीं कारणों से स्वयं ही त्याग दिया है।

सर्वेक्षणों के आधार पर ज्ञात होता है कि पत्राचार शिक्षा प्राप्त करने वालों में लगभग पचास- प्रतिशत लोग, किसी न किसी व्यवसाय से सम्बन्धित है।

शनै:- शनै: पत्राचार शिक्षा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। वनवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में जो लोग दूर-दूर रह रहे हैं, वे भी अब पत्राचार के द्वारा शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

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Pankaja Singh

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