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पर्यवेक्षित अध्ययन विधि | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि का अर्थ एवं परिभाषा | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के गुण | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के दोष | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के सोपान

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि का अर्थ एवं परिभाषा | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के गुण | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के दोष | पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के सोपान | Supervised Study Method in Hindi | Meaning and definition of supervised study method in Hindi | Properties of Supervised Study Method in Hindi | Defects of Supervised Study Method in Hindi | Steps of Supervised Study Method in Hindi

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि (Supervised Study Method)-

कुछ शिक्षाविद् इसे निर्देशित अध्ययन विधि (Directed study method) के नाम से भी पुकारते हैं। इस विधि का सुझाव ‘जॉन डेजी मारविल जॉन’ ने दिया। यह विधि 19वीं सदी के अन्तिम चरण में अमेरिका में अधिक लोकप्रिय हुई बाद में पर्यवेक्षित अध्ययन अन्य दोनों में भी इसका प्रयोग किया जाने लगा। इस अध्ययन में शिक्षक द्वारा छात्रों में एक समूह का निरीक्षण किया जाता है और छात्र पूर्व निर्धारित कार्य अपनी मेजों पर करते रहते हैं और अपनी समस्या का समाधान शिक्षक से कराते रहते हैं।

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Supervised)-

इस विधि में सम्पूर्ण कक्षा को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर विद्यार्थियों को सामूहिक रूप से कक्षा कक्ष अथवा किसी अन्य महत्वपूर्ण स्थान पर एक साथ मिलकर शिक्षक पूर्ण दत्त कार्य अपने निर्देशन में करवाता है। शिक्षक इन समूहों के छात्रों की समस्याओं का समाधान करता है इसमें शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों ही सक्रिय रहते हैं।

मौरीसन के अवबोध के स्तर पर यह विधि आधारित है। डेजी मारबिल जॉन ने इस अध्ययन में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री के प्रयोग तथा पाठ्यवस्तु के प्रयोग आदि का सुझाव दिया। इसमें समस्या समाधान प्रजातांत्रिक सिद्धान्तों के आधार पर किया जाता है एवं छात्रों को इस प्रयोजन हेतु प्रेरित किया जाता है। इसमें परम्परागत शिक्षण के दोषों को दूर करने का प्रयास किया गया है। इसमें शिक्षक व्याख्याता की भूमिका में न रहकर एक पथ प्रदर्शक की भूमिका में रहता है। शिक्षक बालकों द्वारा किये जाने वाले कार्य का निर्धारण इस प्रकार करता है कि वे सभी प्रकार से विषम वस्तु को स्वयं समझ लें। इस प्रकार इसमें शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण है और इसके कुशल निर्देशन पर इस विधि की सफलता टिकी हुई है-

इसके अर्थ को और भली प्रकार समझने की दृष्टि से विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग परिभाषाएँ दी हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

क्लासमीयर के अनुसार, “पर्यवेक्षण अध्ययन कालांश में शिक्षार्थी शिक्षक द्वारा प्रदत्त कार्य, शिक्षार्थियों द्वारा की गई क्रियाओं तथा विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत योजनाओं का कार्य करते हैं, तो अध्यापक प्रत्येक छात्र की सहायता करता है। शैक्षिक कालांश का आधा और कभी-कभी आधे से भी अधिक कालांश पर्यवेक्षण अध्ययन हेतु और शेष वाद-विवाद, व्याख्या आदि के लिए प्रयोग किया जाता है।”

बाईनिंग एवं बाईनिंग (Bining and Bining) के अनुसार, “निरीक्षित अध्ययन विधि वह विधि है जिसके अन्तर्गत शिक्षक द्वारा छात्रों या कक्षा से एक समूह का उस समय निरीक्षण किया जाता है जब वे अपनी मेजों पर कार्य कर रहे होते हैं।””

वैसले एवं रॉस्की (Wesley and Rosky) के अनुसार, “इस विधि की सबसे प्रमुख विशेषता शिक्षक की देखरेख में अध्ययन कालांशों की व्यवस्था है। यह अध्ययन कालांश या तो एक कालांश का अथवा दो कालांशों का एक हिस्सा हो सकता है।”

क्लार्क ए. स्टार (Clarck A. Star) के अनुसार, “निरीक्षण अध्ययन विधि छात्रों को शिक्षक के निर्देशन में अध्ययन करने तथा अध्यापक को छात्र अध्ययन का निरीक्षण एवं निर्देशित करने के अवसर प्रदान करती है।”

शिक्षा शब्द कोश (Dictionary of Education)- में इसके सम्बन्ध में लिखा है कि “पर्यवेक्षित अध्ययन एक प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक के बिना सहायता के छात्रों द्वारा स्वतंत्र अध्ययन के अपेक्षित अभ्यास में व्यतिरेक उत्पन्न होने पर शिक्षक प्रश्नों के उत्तर देने एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए उपलब्ध रहता है।”

सिम्पसन (Simpson) के अनुसार, “निरीक्षण ज्ञानेन्द्रिय सम्बन्धी सीखने की पद्धति है जिसमें व्यक्ति को अपने चारों ओर के संसार का ज्ञान प्राप्त होता है।”

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि छात्र इसमें किसी समस्या अथवा प्रकरण का स्वतंत्र अध्ययन करते हैं और शिक्षक उनका निरीक्षण करता है जब छात्रों को कोई कठिनाई होती है अथवा छात्र कोई त्रुटि करता है अथवा अनुचित या दोष पूर्ण विधि का अनुसरण करता है तो शिक्षक उसे रोकता है, कठिनाई अथवा त्रुटि का निराकरण करता है एवं उचित विधि के उपयोग का सुझाव देता है। इससे छात्र उक्त समस्या या प्रकरण से सम्बन्धित समुचित जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।”.

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के गुण (Merits of Supervised Study Method)-

पर्यवेक्षित अथवा निरीक्षित अध्ययन विधि के निम्नलिखित गुण हैं-

(1) इसमें छात्र शिक्षक के पर्यवेक्षक में विषय वस्तु को स्वयं के प्रयत्न द्वारा समझने का प्रयास करता है ताकि उसके ज्ञान में वृद्धि हो सके।

(2) इस अध्ययन में शिक्षक को छात्रों के द्वारा किये जाने वाले कार्य को निकट से देखने के अवसर मिलते हैं। इसके अलावा एक की अपेक्षा अधिक छात्रों का एक ही समय में निरीक्षण एवं उससे सम्बन्धित पथ-प्रदर्शन करने में सफल हो सकता है और यथा योग्य सहायता भी प्रदान कर सकता है।

(3) इसके उपयोग से शिक्षण में अनुशासन की समस्या नहीं रहती है क्योंकि दूसरे छात्र अपने कार्य में मनोयोग में संलग्न रहते हैं।

(4) इसमें शिक्षक द्वारा व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने से छात्रों को विशेष लाभ होता है क्योंकि शिक्षक इसमें छात्रों को वैयक्तिक विभिन्नताओं के प्रति जागरूक करता है।

(5) इसमें पिछड़े छात्रों की शिक्षा की उचित व्यवस्था की जा सकती हैं।

(6) इसमें शिक्षक छात्रों की अध्ययन की आदतों, अध्ययन कौशलों में दक्षता और प्रगति की मात्रा का भी मूल्यांकन कर सकता है और छात्रों को तुरन्त ही यथा स्थान परामर्श दे सकता है।

(7) इससे शिक्षक-शिक्षार्थी सम्बन्ध मधुर होते हैं।

(8) किस चीज को कैसे पढ़ा जाये विधियों की जानकारी होती है।

(9) प्रत्येक छात्र को  प्रजातांत्रिक सिद्धान्तों के आधार पर स्वाध्याय का अवसर मिलता है।

(10) यह विधि अर्थ ग्रहण के उद्देश्य तथा अपेक्षित परिवर्तनों की पूर्ति करती है।

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के दोष (Demerits of Supervised Study Method) –

पर्यवेक्षित अध्ययन अथवा निरीक्षित अध्ययन विधि के फायदे होने के साथ-साथ हानियाँ अथवा इसमें कुछ दोष भी व्याप्त हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

(1) इस विधि के उपयोग में प्रशिक्षित एवं कुशल शिक्षकों की आवश्यकता होती है। इनके अभाव में पर्यवेक्षण कार्य संदिग्ध रहता है।

(2) सभी स्तर के छात्र एक समान रूप से लाभन्वित नहीं होते।

(3) अन्तर्मुखी व्यक्तित्व के छात्र अपनी शंका का समाधान शिक्षक के द्वारा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

(4) इसमें अधिकांश छात्र शिक्षक पर आश्रित हो जाते हैं इससे छात्र में स्वतंत्र चिन्तन एवं स्वाध्याय की आदत का विकास नहीं हो पाता।

(5) समय अधिक लगता है।

(6) यह विधि सभी विषयों हेतु उपयुक्त नहीं।”

(7) छोटी अथवा प्राथमिक स्तर के छात्रों हेतु अनुपयुक्त विधि।

(8) इस विधि से अध्ययन हेतु प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शिक्षण सामग्री, बड़े हॉल आदि की आवश्कता होती है जो अधिकांश विद्यालयों में उपलब्ध नहीं।

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के सोपान (Step of Supervised Study Method) –

इस विधि के अध्ययन में निम्न सोपानों से होकर गुजरना पड़ता है-

(1) अध्ययन कार्य का निर्धारण

(2) अध्ययन हेतु निर्देश

(3) शिक्षक द्वारा पर्यवेक्षण

(4) श्यामपट्ट सार एवं आवृति कार्य

प्रो. बाईनिंग एवं बाईनिंग ने पर्यवेक्षित अध्ययन विधि की पाठ योजना के पाँच प्रकार बताये हैं-

(1) सम्मेलन योजना (Conference Plan)

(2) विभाजित कालांश योजना (Divided period plan)

(3) विशिष्ट शिक्षक योजना (Special teacher plan)

(4) द्विकालांश योजना (Double period plan)

(5) सामयिक योजना (Periodical plan) ।

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Pankaja Singh

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