पाठ योजना

पंचायती राज पाठ योजना | पंचायती राज लेसन प्लान

पंचायती राज पाठ योजना | पंचायती राज लेसन प्लान | Panchayati Raj Lesson Plan in Hindi

पंचायती राज पाठ योजना

विद्यालय का नाम अ – ब – स विद्यालय

दिनांक 00/00/0000

कक्षा 6

विषय नागरिक शास्त्र

प्रकरण पंचायती राज

अवधि 30 मिनट 

सामान्य उद्देश्य

  • छात्रों में नागरिक शास्त्र के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  • नागरिक शास्त्र के माध्यम से छात्रों की मानसिक शक्ति का विकास करना।
  • छात्रों में नागरिकता के गुणों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।
  • छात्रों में देश प्रेम तथा विश्व बंधुत्व की भावना का विकास करना ।
  • छात्रों के वर्तमान राजनीतिक मानोवृत्त तथा सामाजिक मनोवृत्ति का विकास करना।
  • छात्रों मेरा सामाजिक तथा राष्ट्रीय समस्या का ज्ञान करना।

विशिष्ट उद्देश्य

  1. छात्र-छात्राएं पंचायती राज को प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
  2. छात्र-छात्राएं पंचायती राज के महत्व का प्रत्याभिज्ञान कर सकेंगे।
  3. छात्र-छात्राएं पंचायती राज के उद्देश्यों की व्याख्या कर सकेंगे।
  4. छात्र-छात्राएं पंचायत के स्तर का विश्लेषण कर सकेंगे।
  5. छात्र-छात्राएं पंचायती राज दिवस मनाने के उद्देश्यों को अपने शब्दों में लिख सकेंगे।

शिक्षण सामग्री

चार्ट, चाक, डस्टर, संकेतांक एवं अन्य कक्षा उपयोगी सामग्री।

पूर्व ज्ञान

विद्यार्थी पंचायती राज के विषय में सामान्य जानकारी रखते होंगे।

प्रस्तावना के प्रश्न

छात्र अध्यापिका क्रिया

विद्यार्थी अनुक्रिया

अधिकांश मिट्टी के घर कहां पाए जाते हैं?

गांवों में पाए जाते हैं

गांवों में बिजली, पानी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को कौन देखता है?

ग्राम पंचायत तथा ग्राम समिति

ग्राम पंचायत तथा ग्राम समिति किसका हिस्सा है?

पंचायती राज का

उद्देश्य कथन

आज हम लोग पंचायती राज के विषय में अध्ययन करेंगे।

प्रस्तुतीकरण (शिक्षण बिंदु, छात्र अध्यापिका क्रिया, विद्यार्थी अनुक्रिया)

पंचायती राज

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम,तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था अस्तित्व में रही है। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम 1992 के तहत इसे संवैधानिक मान्यतामिला था तथा 24 अप्रैल 1993 को लागू किया गया था। 24 अप्रैल को इसलिए पंचायती राज दिवस के रुप में मनाया जाता है।

पंचायती राज के उद्देश्य

1.लोकतांत्रिक सरकार में भागीदारी को बढ़ावा देना ग्रामीणों को विकास के प्रयासों में शामिल करना है और राज्यों पर प्रशासनिक बोझ को कम करना।

  1. गांव के लोग स्वयं पर शासन करने की जिम्मेदारी निभाए।
  2. भारत के ग्राम समुदाय को सामाजिक आर्थिक, संस्कृति की एवं राजनीतिक जीवन में बराबर की हिस्सेदारी के लिए प्रोत्साहित करना।
  3. या योजना इस बात पर आधारित है कि “ग्रामीण लोगों के लिए ग्रामीण विकास ग्रामीण लोगों द्वारा स्वयं हो।’’

पंचायती राज के तीन स्तर

सबसे निम्न स्तर पर ग्राम पंचायत होती है जो ग्रामीण लोगों की भागीदारी तय करती है। फिर पंचायती राज व्यवस्था में लोगों की भागीदारी दो और स्तरोंपर होती है। ग्राम पंचायत के बाद दूसरा इस्तर विकासखंड का होता है। इसे जनपद पंचायत या पंचायत समिति करते हैं। एक पंचायत समिति में कई ग्राम पंचायतें होती हैं। पंचायत समिति के ऊपर जिला पंचायत या जिला परिषद होती है। यह तीसरा स्तर होता है। जिला परिषद 1 जिले के स्तर पर विकास की योजनाएं बनाती है। पंचायत समिति की मदद से जिला परिषद सभी पंचायतों में आवंटित राशि के वितरण की व्यवस्था करती है।

श्यामपट्ट सारांश

  • पंचायती राज व्यवस्था का प्रारंभ राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव से 2 अक्टूबर 1959 मैं हुआ था।
  • संवैधानिक से इसे मान्यता 1992 में मिली तथा 1993 में से लागू किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक सरकार में ग्रामीण भागीदारी को सुनिश्चित करना था।
  • पंचायती राज के तीन स्तर हैं-
  1. ग्राम पंचायत
  2. ग्राम समिति
  3. जिला पंचायत या जिला परिषद

निरीक्षण कार्य

छात्र अध्यापिका छात्रों से श्यामपट्ट पर लिखी सामग्री को अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखने का निर्देश देगी और निरीक्षण करते हुए उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।

मूल्यांकन के प्रश्न

  1. प्रारंभ में ग्राम पंचायत की शुरुआत कहां से हुई थी?
  2. भारत में पंचायती राज कब लागू किया गया?
  3. पंचायती राज के उद्देश्य बताएं?
  4. पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है?
  5. किस संविधान संशोधन के अंतर्गत पंचायती राज को मान्यता मिली।

गृह कार्य

पंचायती राज के स्तरों को बताएं?

पाठ योजनामहत्वपूर्ण लिंक

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Pankaja Singh

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