भूगोल

नगरीय अधिवासों के आकार | नगरीय अधिवासों की उत्पत्ति एवं विकास के लिए उत्तरदायी कारक | नगरीय अधिवासों के प्रतिरूप | नगरों का वर्गीकरण

नगरीय अधिवासों के आकार | नगरीय अधिवासों की उत्पत्ति एवं विकास के लिए उत्तरदायी कारक | नगरीय अधिवासों के प्रतिरूप | नगरों का वर्गीकरण

नगरीय अधिवासों के आकार

ग्रामीण अधिवास वे अधिवास हैं, जहाँ के लोग प्राथमिक व्यवसायों, जैसे आखेट, मत्स्यपालन, पशुचारण, कृषि आदि कार्यों में लगे होते हैं, जबकि नगरीय अधिवास हैं, जहाँ के निवासी द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के व्यवसायों जैसे निर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, उच्च सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में संलग्न रहते हैं। नगरीय अधिवास सघन होते हैं। इनमें जीविकोपार्जन के अनेक साधन उपलब्ध होते हैं। साथ ही ग्रामीण अधिवासों की तुलना में नगरीय अधिवासों में जनसंख्या भी अधिक निवास करती है। नगरीय अधिवासों के मकान पक्के व सुंदर बने होते हैं उवं जनसंख्या शिक्षित होती है। नगरीय अधिवासों में शिक्षा, धर्म, चिकित्सा, सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों तथा राजनीतिक कार्यकलापों के कारण गतिशीलता भी अधिक होती है।

नगरीय अधिवासों के आकार

(Types of Urban Settlements)

नगरीय अधिवास छोटे-बड़े भिन्न-भिन्न आकारों में मिलते हैं। अतः आकार के अनुसार नगरीय अधिवासों को निम्नलिखित श्रेणियों में रखा जा सकता है-

(1) नगरीय गाँव (Urban Village),

(2) कस्बा (Town),

(3) नगर (City),

(4) महानगर (Metropolitan),

(5) सन्नगर (Conurbation),

(6) मेगालोपोलिस (Megalopolis),

(1) नगरीय गाँव- नगरीय गाँव की जनसंख्या लगभग 500 होती हैं। ऐसे गाँवों में नगरों की कुछ विशेषताएँ पायी जाती हैं, जैसे दैनिक आवश्यकता की वस्तुओं की दुकानें, स्कूल, पोस्ट आफिस, चिकित्सालय आदि। ऐसे गाँव संयुक्त राज्य अमेरिका में देखने को मिलते हैं। इन्हें ग्रामीण नगर (Rural centres) भी कहा जाता है।

(2) कस्बा- कस्बों की जनसंख्या 500 से 10,000 तक होती है, परन्तु कुछ विद्वान 50,000 से कम जनसंख्या वाले नगरीय अधिवासों को कस्बों की श्रेणी में रखते हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना दो आब तथा गंगा-घाघरा दोआव के अधिकांश नगर कस्बे हैं, जिनकी जनसंख्या 50,000 से कम है।

(3) नगर- नगरों की जनसंख्या 50,000 से 10 लाख तक मानी गयी है। नगरों में व्यापार, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा व प्रशासन सम्बन्धी कार्य अधिक होते हैं। नगरों में गलियो और सड़कों की समुचित व्यवस्था होती है।

(4) महानगर- 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर महानगर अथवा मिलियन सिटी कहे जाते हैं। ऐसे नगर प्रदेश की राजधानियाँ, औद्योगिक नगर या व्यापारिक मण्डी होते हैं। महानगर उद्योग व व्यापार के प्रमुख केन्द्र होते हैं।

(6) मेगालोपोलिस- मेगालोपोलिस की कोटि में विश्व के अत्यन्त विशा नगर रखे जाते हैं। ‘ममफोर्ड’ के अनुसार टोकियो, मैक्सिको सिटी, न्यूयार्क, लन्दन, पेरिस, मास्को, शंघाई, मुम्बई, ब्यूनस आयर्स तथा शिकागो आदि नगर मेगालोपोलिस की कोटि में हैं। इनकी जनसंख्या 50 लाख से अधिक होती है।

नगरीय अधिवासों की उत्पत्ति एवं विकास के लिए उत्तरदायी कारक

(Responsible Factors for the Growth & Development of Urban Settlements)

नगरीय अधिवासों की उत्पत्ति एवं विकास में निम्नलिखित परिस्थितियाँ सहायक होती हैं-

(1) भौतिक परिस्थितियाँ- भौतिक परिस्थितियों में उच्चावच, जलवायु, जलापूर्ति का विशेष प्रभाव होता है।

उच्चावच का प्रभाव नगर-स्थल (Site) की भूमि पर पड़ता है। नगरों में आवसीय तथा औद्योगिक दोनों ही प्रकार की इमारतों के लिए समतल भूमि आवश्यक होती है। नगरों का विकास पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों की अपेक्षा मैदानों में अधिक होता है।

नगरों की उत्पत्ति और विकास पर जलवायु का विशेष प्रभाव पड़ता है। अत्यन्त ठण्डी तथा अत्यन्त गर्म जलवायु के क्षेत्र नगरों  के लिए सदैव से ही अनुपयुक्त रहे हैं, इसीलिए विश्व के लगभग 95% नगर उपोष्ण तथा समशीतोष्ण जलवायु के प्रदेशों में ही स्थित हैं, क्योंकि यह प्रदेश मानव तथा आर्थिक क्रियाओं के सर्वथा अनुकूल है।

नगरों के लिए जलपूर्ति (Water supply) भी एक महत्त्वपूर्ण कारक है, क्योंकि नगरों में विभिन्न कार्यों के लिए पर्याप्त मात्रा में जल की आवश्यकता है, इसीलिए विश्व के अधिकांश नगर नदियों, झीलों तथा बड़ी नहरों के किनारे स्थित हैं। उदाहरणार्थ, शिकागो-मिशिगन झील पर, न्यूयार्क हडसन नदी के मुहाने पर, लन्दन टेम्स नदी पर, मास्को वोल्गा नदी पर, पेरिस सीन नदी पर, दिल्ली यमुना पदी पर, अहमदाबाद साबरमती पर और कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, पटना तथा हावड़ा आदि बड़े नगर गंगा नदी के किनारे स्थित हैं। प्राचीनकाल में नदियों और झीलों से केवल जल की पूर्ति ही नहीं होती थी, बल्कि इनका उपयोग परिवहन के लिए भी किया जाता रहा था।

(2) आर्थिक परिस्थितियाँ- नगरों के विकास में आर्थिक, व्यवसायों का अत्यधिक महत्त्व है। नगरों में जनसंख्या के जीविकोपार्जन के प्रमुख साधन-निर्माण उद्योग, व्यापार, परिवहन तथा प्रशासनिक सेवाएँ आदि कार्य होते हैं। इनके विकास के साथ नगर बढ़ते जाते हैं।

(क) औद्योगिकरण के साथ-साथ विनिर्माण उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धि भी नगरों को प्रोत्साहित करती है। ग्रेट ब्रिअन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की 80-85% जनसंख्या नगरीय है, ऐसा इन देशों के औद्योगिक विकास के प्रतिफलस्वरूप ही है। एशिया में जापान औद्योगिक प्रगति में अग्रणी है, जहाँ टोकियो, याकोहामा ओसाका आदि महानगर औद्योगिक प्रगति के परिणामस्वरूप ही विकसित हो सके।

कच्चे माल की उपलब्धि भी औद्योगिक नगरों को जन्म देती है। भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर, जमशेदपुर आदि लौह इस्पात केन्द्रों के लिए कच्चे लोहे, चूना, मैंगनीज आदि खनिजों की स्थानीय उपलब्धि ने ही इन्हें इस्पात नगर के रूप में जन्म दिया है।

(ब) परिवहन की सुविधाएँ नगरों को जन्म देती हैं और उन्हें विकसित करती हैं। बड़े नगर तथा महानगर सर्वाधिक महत्त्व के मार्गों पर ही विकसित होते हैं। जहाँ दो अथवा दो से अधिक मार्ग आकर मिलते हैं वहाँ अन्य परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर नगरों का जन्म हो जाता है। उत्तर प्रदेश के ‘कवाल’ (KAVAL)-कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद और लखनऊ) नगर इसी प्रकार के हैं। ये सभी नगर महत्त्वपूर्ण मार्गों के संगम स्थल पर बसे हैं।

नगरों का जन्म ऐसे स्थलों पर भी होता है जहाँ एक प्रकार का परिवहन साधन समाप्त होकर दूसरे प्रकार का परिवहन सााधन प्रारम्भ होता है। उत्तर प्रदेश का काठगोदाम नगर इसी  प्रकार का नगर है, जहाँ पूर्वोत्तर (N.E.R.) रेलवे समाप्त होती है और नैनीताल के लिए सड़क परिवहन प्रारम्भ होता है। ऐसे स्थानों पर मालगोदामों, धर्मशालाओं तथा होटलों और दुकानों की स्थापना हो जाती है।

नगरों के जन्म एवं विकास पर महासागरीय परिवहन का भी विशेष प्रभाव पड़ता है। विश्व के सभी महानगर तथा मेगालोपोलिस आज बड़े पत्तन हैं एवं नाव्य नहरों से सागरों से जुड़े हुए हैं। टोकियो, लन्दन, न्यूयार्क, मुम्बई, कलकत्ता, मद्रास, ब्यूनस आयर्स, साओपालो, मेलबोर्न, एडीलेड, सिडनी, जकार्ता आदि ऐसे ही महानगर हैं। इनके अतिरिक्त बर्लिन, पेसिर तथा लिवरपूल आदि नगर जहाजों के चलने योग्य द्वारा सागरों से सम्बन्धित हैं।

(स) खनिजों व शक्ति के साधनों की सुविधाएँ- खनिज आधुनिक सभ्यता के प्रधान अंग हैं। उद्योगों की स्थापना एवं विकास तो शक्ति के साधनों पर ही आधारित होता है। जितनी अधिक मात्रा में खनिजों एवं शक्ति के साधनों की उपलब्धि होगी उतना ही उद्योगों तथा विनिर्माण उद्योगों पर आधारित नगरों का विकास होता है।

भारत में रानीगंज, झरिया, बोकारो आदि नगर कोयले की खानों के कारण पनप सके हैं। बिहार के अधिकांश नगरों का जन्म एवं विकास वहाँ की खनिज सम्पदा पर आधारित है।

जर्मनी में सर्वाधिक नगरीय विकास रूर घाटी के कोयला क्षेत्र में हुआ है। ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम आदि देशों में भी कोयला क्षेत्रों में औद्योगिक नगरों की स्थापना हुई है। पूर्व सोवियत संघ तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में कोयले तथा जल विद्युत केन्द्रों के स्थान पर बड़े नगरों का प्रादुर्भाव हुआ है।

नगरीय अधिवासों के प्रतिरूप

(Patterns of Urban Settlements)

नगरों के प्रतिरूप का निर्धारण उनकी सड़कों के स्वरूप, नगर में आन-जाने वाले प्रधान मार्गों (सड़क तथा रेल), इमारतों की सापेक्षिक सिति आदि द्वारा किया जाता है। इस प्रकार ग्रामीण अधिवासों के प्रतिरूप से मिलता-जुलता ही नगरों का बसाव प्रतिरूप निर्मित होता है।

उपर्युक्त दृष्टियों से नगरों में निम्नलिखित प्रमुख प्रतिरूप मिलते हैं-

(1) चेकर बोर्ड प्रतिरूप (Checker Board Pattern),

(2) रेखीय प्रतिरूप (Linear Pattern),

(3) अरीय प्रतिरूप (Radial Pattern),

(4) तारा प्रतिरूप (Star Pattern),

(5) वृत्ताकार प्रतिरूप (Circular Pattern),

(6) त्रिभुजाकार प्रतिरूप (Triangular Pattern),

(7) तीरनुमा प्रतिरूप (Arrow type pattern),

(8) सीढ़ीनुमा प्रतिरूप (Stain Pattern),

इन विभिन्न प्रतिरूपों की उत्पत्ति ग्रामीण अधिवासों के प्रतिरूपों के समान ही होती है। अतः विस्तृत विवरण का उल्लेख करना यहाँ आवश्यक नहीं है।

नगरों का वर्गीकरण

(Classification of Towns)

विभिन्न नगरों की स्थिति (Sites) तथा उनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः नगरों का वर्गीकरण भी इन्हीं दृष्टिययों से होना चाहिए।

स्थिति की दृष्टि से नगरों का वर्गीकरण

(Towns According to Sites)

स्थिति के अनुसार नगरों को निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में रखा जाता है-

(1) पर्वतीय नगर- पर्वतों पर स्थित स्वास्थ्यवर्द्धक जलवायु तथा मनमोहक प्राकृतिक छटा वाले नगर पर्वतीय नगर कहलाते हैं। शिमला, नैनीताल, मसूरी, ऊटी, पचमढ़ी, दार्जिलिंग आदि इसके उत्तम उदाहरण हैं।

(2) पठारी नगर- पठारों पर स्थिति नगर इस कोटि में आते हैं। पुणे, बालाघट, नागपुर, झरिया आदि पछारी नगर हैं।

(3) मैदानी नगर- मैदान में स्थित नगर मैदानी नगर कहे जाते हैं। ये नगर कृषि-उद्योगों के लिए प्रसिद्ध होते मेरठ, अलीगढ़, आगरा, लुधियाना, वाराणसी, गोरखपुर, पटना आदि मैदान में स्थित नगर हैं।

कार्य की दृष्टि से नगरों का वर्गीकरण

(Towns According to Fractions)

यद्यपि नगरों में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा प्रशासनिक सभी प्रकार के कार्य सम्पन्न होते हैं, तथापि किसी एक कार्य की विशेष प्रधानता के कारण नगर विशेष को उसी कार्य के नाम पर विशिष्टीकृत कर दिया दिया जाता है। इस प्रकार कार्य एवं व्यवसाय की दृष्टि से नगरों को निम्नलिखित वर्गों में रखा जाता है-

(1) औद्योगिक नगर- टाटानगर, भिलाई, राउरकेल, जमशेदपुर, मुम्बई, कलकत्ता, कानपुर, बर्मिघम तथा मैननेस्टर आदि औद्योगिक नगर हैं।

(2) व्यापारिक नगर- न्यूयार्क, लन्दन, मुम्बई, राउरकेला, जमशेदपुर, हांगकांग, हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर आदि व्यापारिक नगर हैं, जिनमें व्यापारिक कार्यों की प्रधनता है।

(3) परिवहन नगर- भारत के विशाखापत्तनम, कोचीन, कांदला तथा अन्य देशों के शिकागों, काष्ट्रियल, न्यूयार्क, मास्को आदि में पविहन कार्यों की प्रधानता पाई जाती है, इसीलिये ये परिवहन नगरों की श्रेणी में आते हैं।

(4) प्रशासनिक नगर- जिन नगरों में प्रशासनिक कार्यों की प्रधानता होती है, वे इस कोटि में रखे जाते हैं। दिल्ली, चण्डीगढ़, भेपाल, कैनबरा, मास्को, वाशिंगटन आदि प्रशासनिक नगर है।

(5) खनिज नगर- खनिज पदार्थों की प्राप्ति के कारण जहाँ गनरों की उत्पत्ति हो जाती. है, वे नगर खनिज नगर कहे जाते हैं। भारत में डिगबोई, झरिया, बोकरो, कोलार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में पेंसिलवानिया, अफ्रीका में जोहांसबर्ग (सोना), आस्ट्रेलिया में कालगूली तथा कूलगार्डी. द. अमरीका का चक्युकमाता (ताँबा) आदि नगर खनिज नगर हैं।

(6) शैक्षणिक केन्द्र- विभिन्न नगरों का विकास उनकी शिक्षा की सुविधाओं के कारण हुआ है। खड़गपुर, यादवपुर, पिलानी, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, हारवर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैब्रिज तथा लेनिनग्राड आदि शिक्षा केन्द्र हैं।

(7) सुरक्षा केन्द्र- सैनिकों के प्रशिक्षण कार्य वाले नगर सुरक्षा केन्द्र कहे जाते है। कामटी (नागपुर), पुणे, और देहरादून आदि इसके उदाहरण हैं।

(8) धार्मिक केन्द्र- धार्मिक महत्त्व के कारण जिन नगरों का विकास हुआ है, वे धार्मिक केन्द्र माने जाते हैं। काशी, प्रयाग, मथुरा, अमृतसर, मक्का, रोम आदि धार्मिक केन्द्र है।

(9) स्वास्थ्य केन्द्र-स्वास्थ्यवर्द्धक जलवायु एवं सुन्दर दृश्यावली के नगर स्वास्थ्य केन्द्र माने जाते हैं। यहाँ पर्यटन उद्योग की भी प्रधानता हो जानी है। शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग तथा आबू स्वास्थ्य केन्द्र माने जाते हैं।

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Pankaja Singh

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