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मूल्यांकन की विधियाँ | अधिशासी विकास कार्यक्रम को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सकता है?

मूल्यांकन की विधियाँ | अधिशासी विकास कार्यक्रम को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सकता है? | Methods of Evaluation in Hindi | How can an executive development program be made effective in Hindi

मूल्यांकन की विधियाँ

(Methods of Evaluation)

‘अधिशासी विकास कार्यक्रम के मूल्यांकन के लिए वर्तमान विभिन्न विधियाँ उपयोग में लायी जाती है। सामान्यतः इस मूल्यांकन के लिए निम्न तीन विधियों का उपयोग किया जाता है।

(1) साधारण बोध मूल्यांकन (Common Sense Approach) – साधारण बोध मूल्यांकन विधि में मूल्यांकन प्रस्तुत तथ्यों, अनुभवों, अनुभूतियों आदि साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है। मूल्यांकनकर्ता इन साक्ष्यों का अध्ययन करता है और कार्यक्रम की सफलता अथवा असफलता का पूर्वानुमान लगाता है। साधारण बोध मूल्यांकन विधि में मूल्यांकनकर्ता का सामर्थ्य पर निर्भर करता है; अधिशासियों पर विकास क्रम का क्या परिणाम हुआ है और क्या होना चाहिए? इसकी तुलना मूल्यांकनकर्ता अपने सहज बोध के द्वारा करता है। साधारण बोध इस तथ्य पर आधारित है कि मनुष्य अपने अनुभवों के आधार पर भी सही मूल्यांकन कर सकता है और इसलिए इस विधि में मूल्यांकनकर्ता के अवलोकन द्वारा जो अनुभव प्राप्त होता है, वे ही अधिशासी विकास के वास्तविक परिणाम के रूप में स्वीकार किये जाते हैं। किन्तु इस विधि को उत्तम विधि नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि किसी समय मूल्यांकनकर्ता किसी तथ्य या अनुभूति को अधिक महत्व देता है। इस कारण इसके परिणामों में यथार्थता नहीं होती तथा इनके परिणामों को प्रमाणित भी नहीं किया जा सकता।

(2) व्यवस्थित मूल्यांकन (Systematic Evaluation) – इस विधि में जो साक्ष्य मूल्यांकन का आधार होते हैं उन्हें पहले ही निर्धारित कर लिया जाता है। इस विधि में सामान्यतः उन विधियों को ही प्राथमिकता दी जाती है जिनके परिणामात्मक मूल्यांकन सम्भव हो सके। यह विधि मूल्यांकन सम्बन्धी निर्णय या अनुमान के लिए साक्षात्कार प्रश्नावली या समूह विचार विनिमय तकनीकों का उपयोग करती है। सूचनाएं उच्च अधिकारियों, अधीनस्थों एवं अधिशासियों द्वारा प्राप्त की जाती है। मूल्यांकन के लिए अनेक सूचनाएं विकास सम्बन्धी प्रतिवेदनों से भी प्राप्त होती है।

(3) प्रयोगात्मक मूल्यांकन विधि (Experimental Evaluation) – प्रयोगात्मक मूल्यांकन विधि के तथ्यों का संकलन कुछ विशेष नियंत्रित दशाओं के अंतर्गत किया जाता है। अनुमानों की त्रुटि से बचने के लिए नियंत्रित अधिशासी समूह पर नियंत्रित अवस्थाओं में प्रयोग किये जाते हैं। इस नियंत्रित समूहों पर परीक्षण करके अनुमान द्वारा पता लगाया जाता है कि वास्तविक परिस्थितियों में क्या परिणाम हो रहे हैं। प्रयोगात्मक मूल्यांकन में यह आवश्यक होता है कि चयनित प्रायोगिक समूह हर प्रकार के वास्तव में परीक्षण प्राप्त करने वाले समूह के समान होना चाहिए। साथ ही अवस्थाएं भी एक समान होनी चाहिए। दोनों के बीच अवस्थाओं के अन्तर से परिणामों में भारी अन्तर हो जाता है।

अधिशासी विकास कार्यक्रम को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सकता है?

अधिशासी विकास के किसी भी प्रभावशाली कार्यक्रम में निम्न तत्वों का समावेश होना आवश्यक है

(1) अधिशासी मूल्यांकन (Executive Appraisal) – इसके अंतर्गत व्यक्तियों की योग्यताओं, अनुभव एवं कार्य निष्पादन का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाता है, ताकि यह बात स्पष्ट हो सके कि कौन व्यक्ति आगे विकास के लिए उपयुक्त है तथा प्रशिक्षण की और क्या आवश्यकताएं हैं?

(2) अधिशासी स्थितियों के लिए नये व्यक्तियों की उपलब्धि (Providing New Blood for Executive Positions) – इसके अंतर्गत रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए तत्काल नये व्यक्तियों की व्यवस्था की जाती है।

(3) वैयक्तिक विकास नियोजन कार्यक्रम (Planning Programmes for Individual Development) – इसके अंतर्गत वैयक्तिक विकास कार्यक्रमों को लिपिबद्ध किया जाता है।

(4) संगठन नियोजन (Organisation Planning) – इसके अंतर्गत उपक्रम की वर्तमान एवं भावी आवश्यकताओं का निर्धारण किया जाता है।

(5) मुख्य स्थितियों की जानकारी (Finding Out Key Posiions Requirement)- इसके अंतर्गत उप प्रमुख आवश्यकताओं पर विचार किया जाता है जो चयनित अधिशासी स्थितियों के लिए अपेक्षित हैं।

(6) कार्यक्रम लक्ष्य निर्धारण (Programme Forgetting) – कार्यक्रम लक्ष्य निर्धारण में वे लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं, जिन पर उपक्रम, कार्यक्रम में अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहता है।

(7) प्रतिस्थापन स्कन्ध ज्ञात करना (Making Replacement Inventories) – इसके अंतर्गत योग्य प्रतिस्थापन क्षमता वाले अधिशासियों की उपलब्धि एवं स्थिति का हावला रखा जाता है।

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Pankaja Singh

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