राजनीति विज्ञान

राजनीतिक समाजीकरण के साधन | राजनीतिक समाजीकरण के प्रत्यक्ष साधन |  राजनीतिक समाजीकरण के अप्रत्यक्ष साधन

राजनीतिक समाजीकरण के साधन | राजनीतिक समाजीकरण के प्रत्यक्ष साधन |  राजनीतिक समाजीकरण के अप्रत्यक्ष साधन

राजनीतिक समाजीकरण के साधन

(Agent’s or Agencies of Political Socialization)

राजनैतिक समाजीकरण मुख्यतः निम्नलिखित साधनों के द्वारा किया जाता है-

प्रत्यक्ष साधन

  1. परिवार (Family)- परिवार सामाजिक गुणों का भण्डार माना गया है। बॉल के मतानुसार परिवार एक ऐसा झरोखा है जिसके द्वारा मनुष्य को बाहा विश्व की शलक देखने का अवसर मिलता है। बच्चे का अपना कोई राजीतिक दृष्टिकोण नहीं होता। रराजनैतिक संस्कृति का प्रथम अध्याय उसे परिवार में अपने माता-पिता से ही मिलता है। माता-पिता राजनैतिक विश्वासों या दृष्टिकोणों का बच्चों पर अधिक प्रभाव पड़ता है। बच्चों के बड़े होने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक संस्कृत का निर्माण होता है। राजनैतिक संस्कृति दो रूपों में निर्मित हो सकती है-

(i) प्रत्यक्ष अथवा स्पष्ट,

(ii) अप्रत्यक्ष।

(i) प्रत्यक्ष अथवा स्पष्ट (Direct or Manifest)- जिन परिवारों के बड़े सदस्य किसी विशेष राजनैतिक दल से सम्बद्ध हैं या विशेष राजनैतिक रुचियाँ रखते हैं, उन परिवारों में राजनैतिक समाजीकरण की क्रिया स्पष्ट रूप में होती है। परिवार के प्रमुख सदस्य बच्चों के हृदयों में ऐसे राजनैतिक विश्वास या दृष्टिकोण विकसित करते हैं जो राजनीतिक विश्वास उनके जीवन के मूल सिद्धान्त हैं।

(ii) अप्रत्यक्ष अथवा अस्पष्ट (Indirect of Latent)-  सहयोग करने, आज्ञा को पालन करने, सत्ता के प्रति सम्मान व्यक्त करने इत्यादि के गुण मनुष्य अपने बच्चे में परिवार के वातावरण से अस्पष्ट रूप से ही सीखता है। ऐसे गुण उसे उस समय सहायक सिद्ध होते हैं जब वह बड़ा होकर विशाल सामाजिक और राजनैतिक वातावरण में प्रवेश करता है। जिस बच्चे ने परिवार में माता-पिता की सत्ता के प्रति विद्रोही भावनाएँ विकसित की हों, वह बच्चा बड़ा होकर सरकार की सत्ता के प्रति भी ऐसी भावनाओं की अभिव्यक्ति कर सकता है इसके विपरीत जिन बच्चों ने परिवार में अच्छे नागरिक के गुणों की शिक्षा प्राप्त की है वे बच्चे बड़े होकर पर्याप्त सीमा तक विशाल सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में ऐसे गुणों को अभिव्यत करते हैं।

(2) संगी-साथी समूह (Companions)-  संगी-साथी किसी सीमित क्षेत्र में नहीं होते। वे परिदार में भी होते हैं, पड़ोस में भी तथा स्कूल में भी।

(3) समान स्थिति वाले समूह (Peer Groups)- समान स्थिति वाले समूहों (Pecr Groups) से अभिप्राय ऐसे समूहों से है जिनमें लगभग एक समान आय के व्यक्ति सम्मिलित हों और उनकी स्थिति भी लगभग एकसमान हो। जो राजनैतिक समाजीकरण समान स्थिति वाले समूहों (Pcer Grops) द्वारा होता है, उसमें पर्याप्त सीमा तक व्यक्ति की अपनी बुद्धि या विवेक की देन होती है | समान स्थिति वाले समूहों के सदस्यों में परस्पर निकटता होती है और किसी विशिष्ट सत्ता का अस्तित्व नहीं होता; अतएव सदस्यों में खुले रूप में राजनैतिक अभिवृत्तिसम्बन्धी विचार-विमर्श होता है। विभिन्न देशों में युवकों के संगठन ऐसे समूहों के ही उदाहरण हैं। परिवार के पश्चात् बच्चा खेल-समूह, मैत्री-समूह आदि के सम्पर्क में आता है, इन्हें संगी-साथी कहा जा सकता है |

(4) पड़ोस (Neighborhood)- पड़ोस के सम्पर्क में बच्चा उस समय आता है जब वह अपने रक्त-सम्बन्धी पारिवारिक सदस्यों की सीमा को पार करके अपने घर की चारदीवारी से बाहर जाता है। पड़ोस के बच्चों से उसका सम्पर्क सर्वप्रथम होता है।

(5) स्कूल (School)- शैक्षणिक संस्थाएँ राजनैतिक समाजीकरण का अर्थ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में करती हैं। स्कूल द्वारा प्रत्यक्ष रूप में राजनैतिक समाजीकरण बच्चों के लिये निश्चित पाठ्यक्रमों (Syllabi) में उन विषयों को अंकित करके किया जाता है जिनके अध्ययन से बच्चों के मन में विशेष प्रकार के विचार उत्पन्न किये जाते हैं। उदाहरणार्थ साम्यवादी देशों में स्कूलों के पाठ्यक्रम में विषय निश्चित किये जाते हैं जो स्पष्ट रूप में को साम्यवादी विचारधारा के अनुर र दत जाने की प्रेरणा देते हैं। बच्चे अपने अध्यापकों से भी बहुत कुछ प्राप्त करते हैं। यदि किसी अध्यापक के राजनैतिक विचार किसी विशिष्ट प्रकार के हों तब वह उन विचारों का प्रभाव अपने छात्रों पर भी डाल सकता है। शैक्षणिक संस्थाएँ बच्चे को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करती हैं:-

(i) शिक्षा का माध्यम (Medium of Education)- शिक्षा के माध्यम का बच्चे पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उत्तरी भारत के विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी के स्थान पर मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा किया जाये तब बच्चों को जो कुछ पढ़ाया जाता है वे उसे सरलता से समझते रहते हैं। इस प्रकार उनके राजनीतिक समाजीकरण की प्रक्रिया सुविधाजनक हो जाती है।

(ii) बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement)- स्कूल में बैठने की क्या व्यवस्था है, इसका भी प्रभाव बच्चे के राजनीतिक समाजीकरण पर पड़ता है। बच्चे पट्टे पर बैठ कर पढ़ते हैं या मेज कुर्सी पर, यह उनकी सीख के लिये महत्त्वपूर्ण है। सम्भवतः इसी कारण विद्यालयों में कुर्सी पर बैठने का प्रबन्ध किया जाता है। यदि एक ही स्कूल में कुछ विद्यार्थी पट्टे पर और कुछ कुर्सियों पर बैठकर पढ़ते हैं तो नीचे बैठकर पढ़ने वाले बच्चों में निम्नता का भाव उत्पन्न हो सकता है और उनका राजनीतिक समाजीकरण कुप्रभावित हो सकता है।

(iii) स्कूल के साथी (School Mates)- बच्चे पर सबसे अधिक प्रभाव स्कूल के साथियों पर पड़ता है। यदि साथी अच्छे हुए तब तो बच्चे का समाजीकरण उचित प्रकार से ले जाता है। इसके विपरीत यदि साथी बिगड़े हुए होते हैं तो समाजीकरण ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है।

(iv) स्कूल की अनुशासन-व्यवस्था (Discipline in the School)- स्कूल में अन्य व्यवस्थाओं के साथ ही उसकी अनुशासन-व्यवस्था का भी बच्चे पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में शिक्षाप्राप्त बच्चे अपेक्षाकृत अधिक शिष्ट पाये जाते हैं।

(v) विषय एवं विषय-अध्यापक (Subject and Subject Teachers)- बच्चों पर उन विषयों का प्रभाव पड़ता है, जिन्हें वह अपने पाठ्य-विषय के रूप में पढ़ता है। इसके अतिरिक्त अध्यापक के पढ़ाने की पद्धति, पोशाक एवं बोलने के ढंग का भी बच्चे के चरित्र पर प्रभाव पड़ता है।

(6) विवाह-संस्था एवं समाजीकरण (The Institution of Marriage & Socialization)-  विवाह भी बच्चे के समाजीकरण को प्रभावित करता है। अब उसके सम्मुख विषम-लिंगियों से सामंजस्य स्थापना की समस्या आ खड़ी होती है। पारिवारिक जीवन को निभाने के लिये बच्चा त्याग की भावना को विकसित करता है। वह कितनी ही ऐसी बातें भी सहन करने लगता है, जो उसे पहले बिल्कुल पसन्द नहीं थी। वह पत्नी की रुचि के कारण अपनी रुचि का बलिदान कर देता है।

अप्रत्यक्ष साधन

(Secondary Groups)

गौण समूह से अभिप्राय उस समूह से है जो आकार में बहुत विशाल होता है और जिसके अत्यधिक सदस्यों में कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता; जैसे-राष्ट्र, राजनैतिक बल, व्यापारिक संघ आदि। ऐसे गौण समूहों द्वारा भी राजनैतिक समाजीकरण की क्रिया होती है। जो गौण समूह राजनैतिक समाजीकरण के साधन सिद्ध होते हैं, उन्हें मुख्यतया दो भागों में विभक्त किया जा सकता है

(1) राजनैतिक गौण समूह या राजनीतिक दल (Political Secondary Groups or Political Parties)-  राजनैतिक गौण समूह से अभिप्राय ऐसे समूह से है। जिसका स्वरूप स्पष्ट रूप में राजनैतिक है और जो राजनैतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये कार्य करता है। राजनैतिक दल राजनैतिक सत्ता की प्राप्ति के उद्देश्य हेतु विशेष रूप से संगठित किये जाते हैं। राजनैतिक दल अपनी नीतियों एवं कार्यक्रम तैयार करते हैं तथा लोगों में उनका प्रभावशाली प्रचार करते हैं। राजनीतिक दल सामान्यत: निम्नलिखित विधियों के द्वारा राजनैतिक समाजीकरण की भूमिका अभिनीत करते हैं:-

(i) राजनैतिक दल के सदस्य अनन्त होते हैं और प्रत्येक दल अपने सदस्यों की संख्या निरन्तर रूप से बढ़ाता जाता है। इन सदस्यों के राजनैतिक दृष्टिकोण उनकी अभिवृत्ति की निश्चित विचारधारा के अनुसार होते हैं।

(ii) ये दल किसी विशेष राजनैतिक विचारधारा के आधार पर अपनी नीतियों का निर्माण करते हैं तथा उन नीतियों का लोगों में प्रभावशाली प्रचार करते हैं। विरोधी दलों की नीतियों की आलोचना करके प्रत्येक राजनैतिक दल लोगों को यह विश्वास कराने का प्रयास करता है कि केवल उसी की नीतियों सम्पूर्ण देश और लोगों के हित में हैं।

(iii) लोकतन्त्रीय प्रणाली वाले देशों में राजनैतिक दलों की गतिविधियों द्वारा राजनैतिक समाजीकरण की क्रिया निरन्तर रूप में होती रहती है। जिस दल को लोगों का बहुमत प्राप्त होता है वह दल सरकार का निर्माण करके और दूसरा दल विरोधी दलों के रूप में राजनीतिक समाजीकरण की क्रिया में निरन्तर भूमिका अभिनीत करते हैं।

(iv) अधिनायकवादी, साम्यवादी आदि जिन राज्यों में एक ही राजनैतिक दल होता है. वहाँ लोगों का राजनैतिक समाजीकरण उस दल की विचारधारा के आधार पर ही किया जाता है और किसी विरोधी विचारधारा पर आधारित राजनैतिक दल के अस्तित्व को सहन नहीं किया जाता; जैसे-एवं अन्य साम्यवादी देश चीन |

(2) गैर-राजनैतिक गौण समूह (Non-Political Secondary Groups)-  गैर- राजनीतिक गौण समूह वे होते हैं, जो मुख्यतः राजनैतिक स्वरूप के न हों और न ही उनका संगठन राजनैतिक उद्देश्य प्राप्त करने के लिये किया गया हो। व्यापारिक संघ (Trade Unions) विद्यार्थी संघ (Students’ Unions), आदि गैर राजनैतिक गौण समूह के उदाहरण हैं। व्यापारिक संघ का उद्देश्य अपने सदस्यों के आर्थिक हितों की रक्षा करना और उनके कार्यों की अवस्थाओं में सुधार करवाना होता हैं-

(i) जाति एवं समाजीकरण (Caste and Class in Socialization)- समाजीकरण में जाति एवं वर्ग की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्ग एक ऐसी खुली व्यवस्था है जिसमें एक व्यक्ति अपनी सदस्यता एक वर्ग से तोड़ सकता है तथा दूसरे से जोड़ सकता है। एक वर्ग के सदस्यों पर कुछ प्रतिबन्ध होते हैं। एक वर्ग के खाने-पीने, उठने-बैठने तथा पहनने- ओढ़ने के कुछ विशेष ढंग होते हैं। इसको हम उसी वर्ग विशेष की संस्कृति कहते हैं। इन सबका बच्चे के समाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

जाति एक बन्द व्यवस्था है। एक जाति के सदस्यों पर दूसरी जाति के सदस्यों के सन्दर्भ में अनेक प्रतिबन्ध हैं। एक जाति के सदस्य दूसरी जाति में विवाह नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति अपनी जाति को नहीं बदल सकता। उससे सम्बन्धित निषेधों को दूर करना भी सम्भव नहीं है। यह व्यक्ति के समाजीकरण को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है।

(ii) धार्मिक संस्थाएँ एवं समाजीकरण (Religious Institution and Socializations)- धार्मिक संस्थाएँ भी व्यक्ति के विकास में सहयोग देती है। बच्चा बड़ा होने पर दूसरे लोगों के द्वारा कम एक सत्ता (Authority) से परिचित होता है। वह सत्ता है। अति मानववादी सत्ता (Superhuman Authority)| धर्म व्यक्ति को उसी सत्ता में विश्वास करना सिखाता है। धर्म व्यक्ति में बहुत से ऐसे गुणों का विकास करता है जिन्हें व्यक्ति अन्यत्र प्राप्त नहीं कर सकता।

(iii) प्रेस और संचार के साधन (Press and Means of Communication)- समाचारपत्रों और पत्रिकाओं द्वारा लोगों तक ऐसे विचार पहुँचते हैं जो उनकी राजनीतिक अभिवृत्ति को प्रभावित करते हैं। समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं में विद्वानों और अनुभवी व्यक्तियों के प्रकाशित लेख और टिप्पणियों लोगों को किसी राजनैतिक विषय के प्रति अपना मत बनाने में सहायता प्रदान करते हैं। इसी प्रकार आकाशवाणी, दूरदर्शन और संचार के अन्य साधन भी राजनैतिक र.माजीकरण में सहायक साधन माने जाते हैं।

(iv) सरकार की गतिविधियाँ (Activities of the Governments)- सरकार के समस्त कार्यों का लोगों के विचारों पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि सरकार की कार्यवाहियाँ लोगों की समस्याओं को हल करने में सहायक सिद्ध नहीं होती तो लोग उस सरकार के प्रति अपना दृष्टिकोण बदल लेते हैं। इसके विपरीत यदि सरकार की कार्यवाहियाँ लोगों की इच्छाओं के अनुसार होती है, तो इस सरकार के प्रति लोगों में श्रद्धा या लगन उत्पन्न होती है।

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Pankaja Singh

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