शिक्षाशास्त्र

मध्यकालीन भारत के प्रमुख शिक्षण केन्द्र | Important Centres of Education in Medieval India in Hindi

मध्यकालीन भारत के प्रमुख शिक्षण केन्द्र | Important Centres of Education in Medieval India in Hindi

मध्यकालीन भारत के प्रमुख शिक्षण केन्द्र (Important Centres of Education in Medieval India)

मध्यकाल काल में दिल्ली, आगरा, जौनपुर,लाहौर, सियालकोट, अजमेर, बीदर, लखनऊ, जालंधर, मुल्तान, गोलकुण्डा, फिरोजाबाद, हैदराबाद, बीजापुर व मालवा आदि ऐसे प्रमुख स्थान थे जो इस्लामी शिक्षा के केन्द्र थे। इन केन्द्रों में दिल्ली, आगरा, जौनपुर, बीदर, मालवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं-

(1) दिल्ली-

दिल्ली नगर को राजधानी बनाने का सौभाग्य मिला था। निश्चित था कि यह शिक्षा का केन्द्र बनता। सर्वप्रथम दिल्ली में सुल्तान नासिरुद्दीन ने मिनहाजे शिराज की अध्यक्षता में ‘नसीरिया मदरसा’ की स्थापना की। बलबन के समय में भी विद्वानों की भरमार रहती थी। खिलजी वंश के शासनकाल में भी अनेक मदरसों का निर्माण हुआ। इन मदरसों में भी विख्यात योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की गई।

तुगलक वंश में सल्तनतकाल में शिक्षा की सबसे ज्यादा प्रगति हुई। मुहम्मद तुगलक स्वतः विद्या प्रेमी था। उस समय दिल्ली दरबार में विद्वानों का समादर था। राजधानी परिवर्तन से दिल्ली केन्द्र की शिक्षा को ठेस अवश्य लगी, परन्तु फिरोज तुगलक ने उसे पुन: गौरव प्रदान कर दिया। उसने लगभग 30 मदरसों का निर्माण और जीर्णोद्धार करवाया। विद्वानों के स्वागत के लिए अलग-अलग महल बनवाए। शिक्षा व्यवस्था के साथ ही यह नगरी साहित्य का केन्द्र बन गई।

मुगल काल में भी शिक्षण केन्द्र के रूप में दिल्ली का महत्व बना रहा। हुमायू ने दिल्ली में ज्योतिष व भूगोल के एक प्रसिद्ध मदरसे की स्थापना की। अकबर ने कई ऐसे मदरसों का निर्माण करवाया जहाँ पर अरबी, फारसी, ज्योतिष, व्याकरण व वेदान्त की शिक्षा दी जाती थी। अकबर की आया महम अनगा ने दिल्ली में एक विशाल मदरसे की स्थापना की। प्रसिद्ध विद्वान बदायूँनी इसी मदरसे का विद्यार्थी था। जहाँगीर व शाहजहाँ ने भी दिल्ली का ध्यान रखा तथा शैक्षिक प्रगति के लिए पुस्तकालयों व मदरसों की स्थापना की। जामा मस्जिद के पास शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया मदरसा कला की शिक्षा के लिए बहुत दिन तक प्रसिद्ध था। औरंगजेब ने इस्लाम के प्रचार के लिए अनेक सुविधाओं की व्यवस्था की, मकतबों को आर्थिक मदद प्रदान की, लेकिन औरंगजेब के पश्चात दिल्ली के विद्यालय अर्थविहीन होने लगे तथा इस नगर के शिक्षण केन्द्र गौरव होने लगे।

(2) आगरा-

मुस्लिम शिक्षा का प्रमुख केन्द्र आगरा था। सर्वप्रथम इसे श्रेष्ठता प्रदान करने वाला व्यक्ति सिकन्दर लोदी था, जिसने इस नगर में अनेक मकतब व मदरसे बनवाये । यहाँ विदेशी विद्यार्थी आकर अध्ययन करते थे। कालान्तर में आगरा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ता गया।

प्राचीन काल में हुमायूँ व बाबर के समय अनेक मदरसों तथा मकतबों स्थापना हुई, परन्तु इसका सबसे ज्यादा श्रेय अकबर को है जिसके समय आगरा नगर संस्कृति व कला-कौशल का प्रमुख केन्द्र बन गया। भिन्न-भिन्न स्थानों से विद्वान यहाँ आते थे। दार्शनिकों व कलाकारों के विशाल जमघट के कारण आगर धीरे-धीरे विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

आगरा के मदरसों में अरबी, फारसी, साहित्य, गणित, ज्योतिष, व्याकरण, कृषि, दर्शन, चिकित्सा, संस्कृत, वाणिज्य व ललित कलाओं की व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की जाती थी। आगरा के मदरसों के साथ छात्रावासों की व्यवस्था सराहनीय थी। मुगल साम्राज्य के पतन के बाद इस्लामी शिक्षा का भी पतन हो गया।

(3) बीदर-

दक्षिण भारत में बहमनी राज्य का प्रसिद्ध मुस्लिम शिक्षा केन्द्र बीदर था । मुहम्मद शाह प्रथम ने यहाँ पर मुस्लिम शिक्षा की तरक्की के लिए हर सम्भव प्रयत्न किये । मुहम्मद शाह द्वितीय भी शिक्षा के प्रति रुचि रखने वाला विद्वान था। बहमनी में एक मदरसे की स्थापना थी। इस मदरसे के मध्य में एक विशाल पुस्तकालय में 3 हजार पुस्तकें थीं। बहमनी राज्य के प्रत्येक गाँव में एक मकतब था।

(4) जौनपुर-

जौनपुर तुर्क अफगान व मुगल काल में विद्या की नगरी रहा है। मध्य युग में पेरिस व शिराज की समकक्षता का यदि कोई नगर भारत में था तो वह था जौनपुर, जहाँ पर विदेशों से भी विद्यार्थी आकर शिक्षा ग्रहण करते थे। जौनपुर के मदरसों में इतिहास, दर्शन व राजनीति के साथ सैनिक शिक्षा की विशेष व्यवस्था थी। शेरशाह सूरी की शिक्षा इसी नगर में हुई था। अफगान शासक इब्राहीम शारीकी ने जौनपुर में अनेक मदरसों का निर्माण करवाया तथा उनके व्यय के लिए जागीरों की व्यवस्था भी की। शाहजहाँ ने जौनपुर का गौरव इसको ‘शिराज-ए-हिन्द’ कहकर बढ़ाया था। जौनपुर की हस्त व शिल्प कला उन्नति के शिखर पर थी। मुहम्मद शाह के शासन काल तक जौनपुर शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की करता रहा। इसके काल में 20 मदरसों की स्थापना की गई थी। मुगल साम्राज्य का पतन होने के बाद उस शिक्षण केन्द्र का भी पतन हो गया।

(5) मालवा-

मालवा कला का एक केन्द्र था, विशेष रूप से संगीत के क्षेत्र में यह अपने समय का अद्वितीय शिक्षण केन्द्र था। फरिस्ता के अनुसार मालवा पूर्वी एशिया के प्रसिद्ध गौरवशाली शिक्षण केन्द्रों शिराज व समरकन्द की बराबरी करता था। मालवा में अनेक विद्वान थे, जिनके संरक्षण में अनेक विद्यालय थे। मालवा के राज्य संस्थापक महमूद के समय शिक्षा की अद्भुत प्रगति हुई ।

स्त्री शिक्षा का ज्वलन्त उदाहरण मुस्लिम काल में मालवा है। मालवा के अन्त:पुर की रमणियों में से कुरान कंठस्थ थी। अकबर के समय मालवा के शिक्षण केन्द्र बहुत प्रसिद्ध थे।

(6) गोलकुण्डा-

गोलकुण्डा मुस्लिम शिक्षालयों के केन्द्रों में एक केन्द्र है। यहाँ के शासक कुतुबशाह मुहम्मद कुली खाँ ने मदरसों का निर्माण करवाया । यहाँ के मदरसों में योग्य अध्यापकों की व्यवस्था थी। छात्र तथा अध्यापक साथ-साथ ही छात्रावासों में रहते थे।

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Pankaja Singh

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