राजनीति विज्ञान

कार्यपालिका का गठन | कार्यपालिका के विभिन्न रूप | कार्यपालिका के कार्य | कार्यपालिका से आप क्या समझते हैं ?

कार्यपालिका का गठन | कार्यपालिका के विभिन्न रूप | कार्यपालिका के कार्य | कार्यपालिका से आप क्या समझते हैं ?

कार्यपालिका का गठन

कार्यपालिका सरकार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो कानून को कार्यान्वित करने के लिए संगठित की जाती है। इसके अन्तर्गत व्यापक दृष्टि से वे सभी व्यक्ति आते है जो सरकार के कार्यों को कार्यान्वित करने के लिए नियुक्त किये जाते हैं। इस प्रकार राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री से लेकर एक साधारण लिपिक अथवा पुलिस का सिपाही भी इसमें सम्मिलित किया जा सकता है। किन्तु इसको इतने व्यापक अर्थ में प्रयोग न करके संकुचित अर्थ में ही प्रयोग करते हैं। इसमें मुख्य कार्यपालिका नेता और उसके परामर्शदाताओं तथा मन्त्रियों को ही सम्मिलित किया जाता है। आधुनिक अर्थ में कार्यपालिका में केवल नीति निर्धारित करने वाले व्यक्ति ही सम्मिलित किये जाते हैं। ये कानूनों की कार्यान्विति देखते हैं। इसके अन्तर्गत प्रशासनिक अधिकारी नहीं आते।

कार्यपालिका के विभिन्न रूप

(Various Forms of the Executive)

विद्वानों ने विभिन्न दृष्टियों से कार्यपालिका के विभिन्न रूपों का उल्लेख किया है। आधुनिक कार्यपालिका के मुख्यत: निम्नलिखित रूप हैं:-

(1) राजनीति और स्थायी कार्यपालिका (Political and Permanent Executive)-  राजनीतिक कार्यपालिका का कार्यकाल निर्वाचन पर निर्भर होता है अथवा एक सीमित समय के लिए होता है जबकि प्रशासनिक कर्मचारी अवकाश ग्रहण की आयु तक सेवा करते हैं। स्थायी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे राजनीतिक दृष्टि से पूर्णतः निष्पक्ष रहते हुए प्रत्येक राजनीतिक सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे।

(2) नाममात्र की और वास्तविक कार्यपालिका (Nominal and Real Executive)-  कार्यपालिका का यह भेद केवल संसदीय शासन प्रणाली और सीमित राजतंत्र में होता है। संसार के बहुत से देशों के राज्याध्यक्षों के पास नाम मात्र की ही शक्तियाँ होती हैं। कार्यपालिका का सम्पूर्ण कार्य उसके नाम पर होता है किन्तु वास्तव में शासन की शक्ति उसके पास नहीं होती। ब्रिटेन का राजा इसी प्रकार की कार्यपालिका है। दूसरी ओर अमेरिका में राज्य का अध्यक्ष राष्ट्रपति होता है और वह अपनी कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग स्वयं करता है। इस कारण उसे वास्तविक कार्यपालिका कहा जाता है।

(3) एकल और बहुल कार्यपालिका (Single and Plural Executive)-  एकल कार्यपालिका में कार्यपालिका की वास्तविक शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथों में होती है। जैसे अमरीका के राष्ट्रपति के हाथों में कार्यपालिका की समस्त शक्तियाँ निहित होती हैं, इसलिए वहाँ की कार्यपालिका को एकल कार्यपालिका कहते हैं।

बहुल कार्यपालिका वह है जिसमें शक्ति का स्रोत एक व्यक्ति नहीं अपितु अनेक व्यक्ति होते हैं और जिसमें प्रशासनिक उत्तरदायित्व एक से अधिक व्यक्तियों का होता है। इस प्रकार की कार्यपालिका का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण स्विट्जरलैण्ड की कार्यपालिका है। यह निःसन्देह अपने ढंग की अनूठी है। यह एक 6 सदस्यों की परिषद होती है। यह परिषद ही समस्त कार्यपालकीय कार्यों के लिए उत्तरदायी होती है।

(4) संसदीय एवं अध्यक्षीय कार्यपालिका (Parliamentary and Presidential Executive)-  जो कार्यपालिका अपने कार्यों के लिये संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और जिसका जीवन-मरण संसद के हाथों में होता है, उसे संसदात्मक कार्यपालिका कहते हैं। इस प्रकार की कार्यपालिका के सदस्य (मंत्रीगण) व्यवस्थापिका के भी सदस्य होते हैं और  व्यवस्थापिका किसी भी कार्यपालिका को पदच्युत कर सकती है।

जहाँ राष्ट्र के अध्यक्ष के पास वास्तविक कार्यपालकीय शक्तियाँ होती हैं वहाँ की कार्यपालिका को अध्यक्षीय कार्यपालिका कहते हैं। अमरीका में अध्यक्षीय कार्यपालिका है।

(5) उत्तरवायी तथा अनुत्तरदायी कार्यपालिका (Responsible and non-responsible Executive)-जो कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है उसे उत्तरदायी कार्यपालिका कहते हैं, और जो कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी नहीं होती उसे अनुत्तरदायी कार्यपालिका कहते हैं।

(6) वंशानुगत एवं निर्वाचित कार्यपालिका (Hereditary and elected Executive)- जिस कार्यपालिका के प्रमुख की नियुक्ति वंश-परम्परा या जन्म के आधार पर की जाती है उसे वंशानुगत कार्यपालिका कहते हैं। जैसे सम्राट् या जन्म के आधार पर राजपद के अधिकारी जो जीवनपर्यन्त पदारूढ़ रहते हैं तथा मृत्यु के बाद उनका उत्तराधिकारी कार्यपालिका का प्रमुख नियुक्त किया जाता है।

दूसरा तरीका निर्वाचन है। इसका कार्यकाल निश्चित होता है।

स्वीडन, इंग्लैण्ड, नेपाल, बेल्जियम एवं नार्वे वंशानुगत कार्यपालिका के उदाहरण हैं जबकि भारत, फ्रांस, स्विट्जरलैण्ड, अमरीका आदि देश निर्वाचित कार्यपालिका के उदाहरण हैं।

कार्यपालिका के कार्य

(Functions of the Executive)

कार्यपालिका का प्रमुख कार्य राज्य की इच्छा को कार्य-रूप देना है जो व्यवस्थापिका द्वहैं कानूनों के रूप में व्यक्त होती है। विभिन्न देशों के संविधानों के अध्ययन से पता चलता है कि सभी स्थानों में, सभी समयों में कार्यपालिका के कार्य एक से नहीं रहते । सामान्यतया आधुनिक युग में कार्यपालिकाओं द्वारा जिन महत्त्वपूर्ण कार्यों का सम्पादन किया जाता है वे निम्नलिखित हैं:-

(1) प्रशासनिक कार्य- कार्यपालिका का मुख्य कार्य प्रशासन को सुचारु रूप से चलाना होता है। वह व्यवस्थापिका के द्वारा पारित कानूनों को लागू करने का कार्य भी करती है। इसके लिए वह बहुत से विभाग स्थापित करती है, उनके पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं उनके कार्यों की व्याख्या करती है। उन्हें पदच्युत कर देने का अधिकार भी कार्यपालिका को है। यह प्रशासनिक विभागों और कर्मचारियों को उचित आदेश देती है और यह देखती है कि प्रशासनिक कार्यों का संचालन ठीक प्रकार से हो रहा है अथवा नहीं। यह अनुशासन की कार्यवाही, चेतावनी आदि द्वारा प्रशासन में दक्षता लाने का प्रयत्न भी करती है।

(2) सैनिक-कार्य- कार्यपालिका का एक मुख्य कार्य बाह्य आक्रमणों से देश की रक्षा करना है। प्रायः कार्यपालिका अध्यक्ष राज्य की सेना का सर्वोच्च सेनापति होता है। वह सैनिक पदाधिकारियों की नियुक्ति, पदच्युति और युद्ध तथा शान्ति की घोषणा भी करता है।

(3) विधायी कार्य- कार्यपालिका विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थापिका के साथ विधि-निर्माण कार्य में अवश्य भाग लेती है अथवा उसे प्रभावित करती है। संसदीय शासन-पद्धति वाले राज्यों में मन्त्रि परिषद संसद का अधिवेशन बुलाती है, उसका सत्रावसान करती है और उसका विघटन करती है। यद्यपि कानूनों को सब जगह संसद ही पारित करती है तथा उनको प्रस्तुत करने, तैयार करने और पारित कराने में कार्यपालिका का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में योगदान रहता है। कार्यपालिका आवश्यकता पड़ने पर अध्यादेश भी जारी करती है।

(4) कूटनीतिक कार्य- इसके अन्तर्गत राजदूतों की नियुक्ति, विदेशी राजदूतों से भेट, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, अन्तर्राष्ट्रीय सन्धियाँ, व्यावहारिक समझौते आदि कार्य सम्मिलित होते हैं। ये सभी कार्य कार्यपालिका ही सम्पादित करती है यद्यपि कुछ क्षेत्रों में व्यवस्थापिका का भी पर्याप्त नियन्त्रण रहता है।

(5) न्यायिक कार्य- प्रत्येक देश की कार्यपालिका का प्रधान कुछ न्यायिक कार्य भी करता है; जैसे – न्यायाधीशों की नियुक्ति करना, अपराधियों को क्षमादान देना, दण्ड में कमी इत्यादि ।

(6) वित्तीय कार्य- देश के समस्त आय व्यय का व्यावहारिक उत्तरदायित्व कार्यपालिका का ही है, जबकि सैद्धान्तिक रूप से इस आय-व्यय की स्वीकृति व्यवस्थापिका ही देती है। कार्यपालिका ही वित्त विधेयकों को व्यवस्थापिका के सम्मुख प्रस्तुत करती है और अपने बहुमत के बल पर व्यवस्थापिका उन्हें पारित कराती है। राष्ट्रीय कोष की समुचित व्यवस्था के लिए कार्यपालिका के अन्तर्गत एक वित्त विभाग होता है। यह प्रत्येक विभाग के आय-व्यय का निरीक्षण करता है और इस पर नियन्त्रण रखता है।

(7) अन्य कार्य- उपर्युक्त कार्यों के अतिरिक्त कार्यपालिका कुछ अन्य कार्य भी सम्पादित करती है। आधुनिक युग में तो कार्यपालिका के कार्य और भी बढ़ गये हैं। उसे बहुत सी सार्वजनिक संस्थाओं की लोक हित में देखरेख करनी पड़ती है। देश में ऐसा वातावरण पैदा करना, जिसके अन्तर्गत जनता अपना चरित्र निर्माण कर सके, एक अच्छी सरकार की कसौटी है। जब तक नागरिकों में नैतिकता नहीं आएगी, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकेगा।

लोक कल्याण के आदर्श को प्राप्त करने के लिए कार्यपालिका का सक्रिय होना आवश्यक है।

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Pankaja Singh

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