इतिहास

इतिहास में अकबर स्थान | अकबर को महान् क्यों कहा जाता है ? | अकबर महान्

इतिहास में अकबर स्थान | अकबर को महान् क्यों कहा जाता है ? | अकबर महान्

Table of Contents

इतिहास में अकबर स्थान

अकबर का युग महान् सम्राटों का युग था। उसके शासनकाल में यूरोप और एशिया के विभिन्न भागों में अनेक महान शासक राज्य कर रहे थे। इन शासकों में फ्रान्स का हेनरी चतुर्थ इंग्लैण्ड की साम्राज्ञी एलिजाबेथ, फारस का शाह अब्बास, और स्पेन का फिलिप प्रसिद्ध है। विभिन्न इतिहासकारों ने इन महान शासकों से अकबर की तुलना की है, परन्तु विन्सेन्ट स्मिथ का मत है कि अकबर इन सबसे महान था। वह लिखते हैं, “वहु जन्मजात नृपति था और संसार के महानतम सम्राटों में गिने जाने का उसका जायज हक है।” यह हक उसके अद्वितीय नैसर्गिक गुणों एवं शानदार उपलब्धियों पर आधारित है। अकबर के जीवन का कोई भी पहलू ऐसा नहीं है, जिसमें उसकी महानता के कारण न हों। अकबर महान् के कहने के कारण निम्नलिखित हैं-

(1) महान् साम्राज्य निर्माता- हुमायूं से जो अकबर ने हस्तगत किया था, वह बहुत छोटा था। अपने सिंहासनारूढ़ के पश्चात् ही उसने अपने साम्राज्य-विस्तार का कार्य प्रारम्भ किया। 1558 ई० से 1576 ई. तक उसने सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अपना अधिकार कर लिया। पश्चिमी सीमा को दृढ़ करने के लिए उसने काबुल और कन्धार पर आक्रमण किया। उसने दक्षिण भारत के राज्यों भी विजय प्राप्त की। इस प्रकार उसका राज्य काबुल से बंगाल तक और काश्मीर से बीजापुर तक फैला हुआ था। उसके साम्राज्य में निम्नलिखित प्रान्त थे-

(1) काबुल (2) लाहौर (3)मुल्तान (4) दिल्ली (5) आगरा (6) अवध (7) इलाहाबाद (8)अजमेर (9) अहमदनगर (10) मालवा (11) बिहार (12) बंगाल (13) खानदेश (14) बरार (15) अहमदाबाद।

(2) सम्पूर्ण साम्राज्य में एकता का नियामक- अकबर को महान् कहने का एक कारण यह भी है कि केवल उसने विशाल साम्राज्य पर अधिकार ही नहीं कर लिया, वरन् साम्राज्य के विभिन्न भागों में एकता की भावना भी जागृत की। सम्पूर्ण साम्राज्य की एक सरकारी भाषा थी, एक सी प्रशासकीय व्यवस्था थी, और एक सी विद्या प्रणाली थी। सरकारी लेखों में फारसी भाषा का प्रयोग होता था। समस्त प्रान्तों में शासन-व्यवस्था का एक ही नियम प्रचलित था। एक ही तरह की कार्य-प्रणाली और एक ही तरह की सरकारी उपलब्धियां प्रचलित थी। सरकारी कर्मचारी और सैनिक एक प्रान्त में स्थानान्तरित किये जाते थे। अकबर ने अपने साम्राज्य में केवल राजनीतिक एकता का ही प्रसार नहीं किया था, बल्कि उसने आर्थिक क्षेत्र में भी वराबरी लाने का प्रयास किया था। सांस्कृतिक दृष्टि से जनता को एक करने के लिये उसने भावात्मक एकता लाने का प्रयास किया। उत्तरी और दक्षिणी भारत के विभिन्न तथ्यों के मध्य उसने एकता का भाव उत्पन्न किया।

(3) योग्य प्रशासक- अकबर की महानता उसके प्रशासन में भी झलकती है। यह यद्यपि मध्य-काल में हुआ, परन्तु उसका मस्तिष्क आधुनिक युग का था। उसने एक ऐसे शासन तन्त्र की नींव डाली जो सम्राट की शक्ति पर आधारित था परन्तु साथ ही आधुनिक युग के शासन से वह बहुत कुछ मिलता-जुलता है। उसकी न्याय-प्रणाली उच्चकोटि की थी। योग्यता के अनुसार ही विभिन्न पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती थी। कुल, जाति अथवा धर्म के आधार पर ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाता था। वह स्वयं कहा करता था, ‘शासक के लिए न कोई छोटा है और न कोई बड़ा ।”अकबर के विषय में प्रो०श्रीराम शर्मा ने लिखा है-

“The greatest of monarchs in his time, Akbar is sure of a high place among the rulers of mankind for his brilliant success in the great adventure of governing men.”

– Sri.Ram Sharma,

(4) धार्मिक उदारता- अकबर एक धार्मिक व्यक्ति था। परन्तु उसमें धार्मिक कट्टरता न थी। वह सभी धर्मों का आदर करता था। सभी धर्मों में एकता लाने की दृष्टि से उसने दीन-इलाही धर्म का प्रचलन किया । धार्मिक वाद-विवादों में वह बहुत अधिक अभिरुचि रखता था। विभिन्न इतिहासकारों का है कि धार्मिक सहिष्णुता को नीति अकबर की सबसे बड़ी विशेषता है। उसके विषय में वानोअर नामक एक जर्मन इतिहासकार ने लिखा है, “वास्तव में लोगों ने ही उस व्यक्ति को एक देवता बना दिया था, जो कि एक ऐसे मत का संस्थापक था, जिसका एक ही धार्मिक, दार्शनिक और राजनीतिक उद्देश्य था। उसकी एक कृति उसको निश्चय ही मानवता के हित विधायकों में उसको स्थान प्रदान करेगी। यह कृति थी धार्मिक विश्वास की महानता तथा सहिष्णुता।”

(5) हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों का सम्मिलनकर्ता- अकबर ने हिन्दू मुस्लिम संस्कृतियों के सम्मिलन का घोर प्रयास किया जिसके फलस्वरूप देश में राष्ट्रीयता की जड़ मजबूत हो सकी। वास्तुकला की अत्यधिक उन्नति हुई और मथुरा में अनेक मन्दिर बनवाये गये। अकबर के द्वारा बनवाई गई इमारतों को देखने से यह पता चलता है कि उसकी शैली मिश्रित शैली है। फतेहपुर सीकरी की इमारतें इस बात की साक्षी हैं कि अकबर ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों प्रकार की शैलियों को अपनाया था। अपने दरबार के मुस्लिम चित्रकारों द्वारा उसने हिन्दुओं के पौराणिक चित्रों को चित्रित करवाया था। उसने अपनी राजसभा में वैष्णव संगीत को प्रोत्साहन दिया था। धार्मिक क्षेत्र में समन्वय लाने के लिए उसने दीनइलाही धर्म का प्रचलन किया था। उसके विषय में प्रो०के०टी०शाह ने लिखा है, “अकबर की महानता का कारण यह था कि वह पूर्णतया भारतीय हो गया था, उसकी प्रतिभा ने हिन्दू मुसलमान दो जातियों को एक विशाल साम्राज्य की समान सेवा व समान नागरिकता के बन्धनों द्वारा एक राष्ट्र के रूप में परिणित करने के कार्य की सम्भावना का अनुभव किया और उसके उत्साह ने यह कार्य सम्पादित किया।”

(6) कला की उन्नति- अकबर के काल में कला की अपार उन्नति हुई। भवन निर्माण-कला, चित्रकला और संगीत-कला आदि विभिन्न कलाओं में अकबर के काल में बहुत अधिक प्रगति हुई। अकबर ने आगरा, लाहौर और इलाहाबाद में तीन किले बनवाए। फतेहपुर सीकरी और जामा मस्जिद बनवाने का श्रेय भी अकबर को प्राप्त है। बुलन्द दरवाजे के सम्बन्ध में एक विद्वान् ने लिखा ‘यह समस्त भारतवर्ष में पूर्ण-भवन निर्माण का प्रतीक है।’ अजमेर और मेरठ की मस्जिदों के बनवाने का श्रेय भी उसी को प्राप्त है। चित्रकारी से अकबर को विशेष प्रेम था। उसने अलग से चित्रकला विभाग को स्थापना की थी। उसके काल की चित्रकला में भारतीय और फारसी शैली का सम्मिश्रण है। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के दरबार में था। अबुल फजल की आइने अकबरी में 36 संगीतकारों का उल्लेख हुआ है। मुद्रा-निर्माण कला और सुलेखन कला के प्रोत्साहन में भी अकबर ने बहुत अधिक अभिरुचि दिखाई।

(7) साहित्य की उन्नति- अकबर यद्यपि स्वयं पढ़ा-लिखा नहीं था परन्तु वह साहित्यकारों और विद्वानों का आदर करता था। उसके दरबार में फारसी और हिन्दी दोनों ही भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्यकार थे। फारसी के विद्वानों में अबुलफजल का स्थान बहुत ऊंचा है। हिन्दी का प्रसिद्ध कवि अब्दुलरहीम खानखाना अकबर के दरबार में था। साथ ही मानसिंह और टोडरमल आदि को भी कविता से विशेष प्रेम था। अकबर का काल हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग था। इसी युग में सूर और तुलसी जैसे महान् कवि उत्पन्न हुए।

(8) सामाजिक सुधार- अपने सुधारों के लिए भी अकबर अत्यन्त प्रसिद्ध है। उसने विधवा विवाह को प्रोत्साहन दिया और बाल-विवाह को रोकने का प्रयास किया। शराब पर पाबन्दी लगाई, और वेश्याओं को नगर से बाहर रहने की आज्ञा दी। तुलादान की प्रथा प्रचलित की और अस्पतालों, शिक्षालयों आदि का निर्माण करवाया।

(9) मानवीय गुणों का भण्डार- अकबर में मानवोचित गुण बहुत अधिक मात्रा में विद्यमान थे। वह कृतज्ञ, नम्र, विनयशील, उदार और दानी था। फरिश्ता के अनुसार उसकी उदारता असीम थी। सभी के प्रति उसका व्यवहार अत्यन्त उत्तम होता था। दोनों के प्रति उसका विशेष अनुराग और उसके साधारण से साधारण उपहार को भी वह हृदय से लगा लेता था। जहांगीर ने अपनी ‘तुजके जहांगीर’ में लिखा है, ‘काम करने में तथा दैनिक चाल-ढाल में अकबर जनसाधारण से भिन्न था और उसमें ईश्वरीय गुण विद्यमान थे।

(10) राष्ट्रीयता का प्रचारक- अकबर सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रचारक था। वह राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का संस्थापक था। डा०आर०सी०मजूमदार के शब्दों में, “उसने एक ऐसा विचारपूर्ण रास्ता दिखाया जिस पर उस व्यक्ति को चलना चाहिए जो भारत का राष्ट्रीय शासक होना चाहता है।” समस्त भारतवर्ष को एक राष्ट्र के रूप में देखने का उसका प्रयास निसंदेह प्रशंसनीय है।

उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि अकबर सभी क्षेत्रों में महानू था। विभिन्न विद्वानों ने. उसके गुणों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। डा० बेनी प्रसाद ने लिखा है,” उसने भारतीय राजनीति में एक नये युग का उदय ला दिया। उसने देश महत्वपूर्ण शासकों की एक श्रृंखला दी। उसने चार पीढ़ियों तक मुगल सम्राटों को महान् सरदारों तथा राजनीतिज्ञों जिन्हें मध्यकालीन भारत ने उत्पन्न किया, की सेवा अर्पित की।”

डा. विन्सेन्ट स्मिथ एक ओर उसे ढोंगी, पाखण्डी और कुचक्री बतलाते हैं, परन्तु दूसरी ओर उसकी प्रशंसा किये विना नहीं रह पाते। वह लिखते हैं, “एक सैनिक, सेनानायक, शासक कूटनीतिज्ञ, तथा महान् सम्राट के रूप में अकबर की क्रियात्मक योग्यता का पूरा परिचय उसके सम्पूर्ण इतिहास से मिल जाता है। उसकी अधिक विवेचना की आवश्यकता नहीं है। उसके चरित्र का वैयक्तिक प्रभाव जो अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।  वह मनुष्यों का जन्म-सिद्ध सम्राट था और इतिहास में जितने महानतम सम्राट हुए हैं। उनमें स्थान पाने का वास्तविक अधिकारी है। यह अधिकार उसे अपनी अलौकिक प्राकृतिक प्रतिभा, मौलिक विचारों तथा गौरवपूर्ण कार्यों के आधार पर प्राप्त है।”

“Akbar was the greatest of the Mughals and perhaps the greatest of all Indian rulers for a thousand years, if not since the days of the mighty Mauryas.’

– Prof. K. T. Shah.

प्रो. के. टी. शाह ने भी एक महान् शासक बतलाया है-

डा० ईश्वरी प्रसाद लिखते हैं कि अकबर भारत के ही इतिहास में नहीं बल्कि विश्व इतिहास में एक अद्वितीय सम्राट था-

Akbar is one of the most remarkable kings, not only in the history of India but of the world.”

-Ishwari Prasad.

अन्त में हम एक इतिहासकार के शब्दों में कह सकते हैं कि “अकबर सभी दृष्टियों से विभिन्न युग के शासकों में महानतम था।”

इतिहास – महत्वपूर्ण लिंक

Disclaimer: e-gyan-vigyan.com केवल शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए बनाई गयी है। हम सिर्फ Internet पर पहले से उपलब्ध Link और Material provide करते है। यदि किसी भी तरह यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है तो Please हमे Mail करे- vigyanegyan@gmail.com

About the author

Pankaja Singh

Leave a Comment

error: Content is protected !!