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इंटरनेट | इन्टरनेट का विकास | वेब सर्फिंग का अनुभव

इंटरनेट | इन्टरनेट का विकास | वेब सर्फिंग का अनुभव

वर्तमान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के कारण हम घर बैठे ही अपने देश में ही नहीं वरन् विश्व के किसी भी कोने तक अपना संदेश भेज सकते हैं तथा वहाँ से संदेश प्राप्त भी कर सकते हैं। हाल के वर्षों में संचार प्रौद्योगिकी में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए हैं। इन्टरनेट के तीव्र विस्तार के फलस्वरूप समाज, अर्थव्यवस्था व प्रशासनिक व्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावित हुए हैं। भू-मण्डलीय व्यापार में अन्तर्राष्ट्रीय संचार साधनों में इन्टरनेट का महत्व बढ़ता जा रहा है।

इंटरनेट (Internet)

इंटरनेट को अब तीस साल से ज्यादा हो गए हैं। इसका 30वाँ जन्मदिन मनाने के लिए सन् 2000 में सितम्बर के पहले हफ्ते में लॉस एंजिल्स कैलिर्फोनिया विश्वविद्यालय में एक समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर जानकारों ने नेट की 30 साल की यात्रा के विभिन्न चरणों को याद किया। इनमें कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लियोनोर्ड क्लीनरॉक भी थे जिन्हें इंटरनेट का पिता कहा जाता है। आज वे 65 साल के हैं। डॉ. क्लीनरॉक और उनके साथियों ने 2 सितम्बर, 1969 को दो कम्प्यूटरों के बीच संवाद कायम करने में सफलता पाई थी। यह संवाद रेफ्रिजरेटर के आकार के एक रूटर के जरिए बना था जिसे इंटरफेस मैसेज प्रोसेसर कहा गया, पर वास्तव में दो कम्प्यूटरों ने आपस में बात 20 अक्टूबर, 1969 को की। इसलिए कई लोगों का जोर है कि इंटरनेट का जन्म दिन 20 अक्टूबर को जाना चाहिए।

13 जून, 1934 को जन्मे और चार बच्चों के पिता डॉ. क्लीनरॉक खुद निश्चित नहीं हैं कि इनमें से कौन-सी तारीख इंटरनेट का असली जन्म दिन है। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा आप कह सकते हैं कि इंटरनेट इन्हीं दो में से किसी एक तारीख को जन्मा। दो सितम्बर की घटना का कोई रिकार्ड नहीं रखा गया था। उसकी कोई तस्वीर भी नहीं उतारी गई थी।

डॉ. क्लीनरॉक का कहना है कि इंटरनेट जन्म आवश्यकता के कारण हुआ। अमेरिका सरकार की उन्नत अनुसंधान परियोजना एजेंसी (एआरपीए) ऐसा नेटवर्क कायम करने के लिए धन दे रही थी जिससे चुने हुए केन्द्रों के शोधकर्ताओं को एक दूसरे के कम्प्यूटर का प्रयोग करने की क्षमता मिल सके। इसलिए आरम्भ में जो नेटवर्क बना उसे आर्पनेट कहा जाता था। तब डॉ. क्लीनरॉक और उनके साथियों को भी नहीं मालूम था कि भविष्य में इंटरनेट से इतनी संभावना निकल आएँगी। जो परियोजना शीतयुद्ध के काल में अमेरिका की सुरक्षा जरूरतों से शुरू हुई थी, वह सूचना, मनोरंजन ज्ञान-विज्ञान और सबसे बढ़कर व्यापार के माध्यम के रूप में विकसित हो गई। इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (www) का रूप लेने की यह यात्रा रोमांच भरी है। यह विकास 1980 के दशक के उत्तरार्द्ध में हुआ। तब डॉ.बर्नस ली ने अपने निजी प्रयोग के लिए एक छोटा कम्प्यूटर प्रोग्राम लिखा। इस प्रोग्राम से उनके कम्प्यूटर के भीतर लिखे पन्नों को आपस में जोड़ने की सुविधा मिली। जल्द ही इंटरनेट से जुड़े अलग-अलग कम्प्यूटरों के बीच दस्तावेजों को जोड़ पाना संभव हो गया। दस्तावेजों को जोड़ने के लिए जिस फॉर्मेटिंग (स्वरूप) भाषा का भीप्रयोग हुआ, उसे एच.टी.एम.एल. कहा गया।

भारत में इंटरनेट का सबसे पहले उपयोग करने वालों में अखबार रहे हैं। देश के बड़े अखबार आज इंटरनेट पर हैं। इस दिखा में द हिन्दू और द इण्डियन एक्सप्रेस ने पहल की थी और इसके बाद एक-एक कर लगभग सभी बड़े अखबार नेट पर चले गए। नेट पर जाने का फायदा यह है कि आपकी पहुँच दुनिया भर के पार्कों तक हो जाती है। अब इन अखबारों ने अपने  वेबसाइट पर विज्ञापन की दरें अलग से तय कर दी हैं। मसलन, एक्सप्रेस इंडिया वेबसाइट पर मासिक विज्ञापन की दर डेढ़ लाख रुपए, इंडिया टाइम्स पर 90 हजार रुपए मिड डे साइट पर 45 हजार और हिन्दू साइट पर 20 हजार रुपए है। पहले अखबारी वेबसाइटों का लक्ष्य अनिवासी भारतीय होते थे, जो भारत की खबर जानने के लिलए व्यग्र रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे भारत में नेट की सेवा लेने वालों की संख्या बढ़ती गई अखबारों ने उन्हें भी अपना लक्ष्य बना लिया। इतना निश्चित है कि इंटरनेट से जुड़ने और इस पर समय खर्च करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। 1996 के अंत तक जहाँ दुनिया में सिर्फ चार करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़े थे, वहीं 1997 के अंत तक यह संख्या दस करोड़ तक पहुँच गई। हर सौ दिन में नेट पर यातायात दोगुना हो जाता है। इसलिए नेट कारोबार, जनसम्पर्क, वित्त आदि क्षेत्रों में भी फैलता जा रहा है। शेयर बाजार में इसका महत्व बढ़ता जा रहा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इंटरनेट का अनजाने हलकों में प्रसार हो रहा है और इससे रोज नई संभावनाएं खुल रही हैं। इनके रास्ते में जो अड़चनें हैं, उनका भी हल निकल रहा है। इसलिए अगर संभव हो तो इंटरनेट से जुड़ जाने में भी फायदा है।

इंटरनेट से ऐसे जुड़े-भारत में इंटरनेट को पहुँचे चार साल हो गए हैं। विदेश संचार निगम लि.पहला सेवाप्रदाता है। फिलहाल इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या करीब तीन लाख है। पिछले साल यह 85,000 हजार थी। इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। एक सर्वेक्षण के अनुसार इस साल पीसी खरीदने वालों में से तकरीबन आधे से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिन्हें इंटरनेट की पहुँच व्यापक हुई है। सिर्फ इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कम्पनियों में ही इजाफा नहीं हुआ है, बल्कि अनेक शहर इसके दायरे में आए हैं और बेहतर स्पीड के साथ नई प्राइवेट कम्पनियाँ अलग-अलग किस्म की सेवाएं अपने ग्राहकों को मुहैया करा रही हैं। करीब 148 आई.एस.पी. यानी इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कम्पनियाँ अपना कारोबार शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं। कम शुल्क और विभिन्न विकल्पों के साथ बीस कम्पनियों ने तो अपना कामकाज शुरू भी कर दिया है। ये कम्पनियाँ फ्री में सॉफ्टवेयर और ट्रेनिंग किट्स के साथ-साथ अनेक प्रकार की सुविधाएँ अपने ग्राहकों को मुहैया करा रही हैं। सवाल है कि आप किस कम्पनी को चुनें।

नेट कलेक्शन कहाँ से लें-

एक समय था जब इंटरनेट सेवा में बीएसएनएल का एकक्षत्र एकाधिकार था अब स्थितियाँ बदल गई हैं और बीएसएनएल अब इस क्षेत्र में अकेला नहीं रहा। नई आईएसपी नीति लागू हो जाने के बाद निजी क्षेत्र में अनेक आईएसपी यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियाँ मैदान में आ गई हैं, जिनसे इंटरनेट एकाउंट के लिए आप सम्पर्क कर सकते हैं। अगर बीएसएनएल के पास 500 घंटे का आपका एकाउंट समाप्त होने को आ रहा है, तो आपको अब बीएसएनएल के पास भागने की जरूरत नहीं है। आपके पास दूसरे कई विकल्प हैं। पहला महत्वपूर्ण सवाल कीमत का है। अगर आप औसत से ज्यादा खर्च करने जा रहे हैं, तो आपको इसके अतिरिक्त फायदों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कीमत की तुलना करते समय कम्पनियों के शानदार और खूबसूरत ब्रोसरों पर गम्भीरता से नजर डालें। कुछ दरें प्रमोशनल हो सकती हैं और यह पहले कुछ सप्ताहों के दौरान ही लागू होती हो। कुछ आईएसपी कम्पनियों की व्यस्त और सामान्य समय के लिए अलग-अलग दरें हैं। ऐसा देखा गया कि हमेशा एक अघोषित रजिस्ट्रेशन शुल्क कहीं किनारें में छुपा होता है। इसे वास्तविक शुल्क में शामिल करके ही कीमत का अंदाजा लगाएँ। किसी आईएसपी के साथ जुड़ने के लिए आपको कम्पनी की ओर से किसी तकनीकी सहायता की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इसलिए (इंस्टालेशन’ या- ‘एक्टिवेश’ के नाम पर किसी प्रकार के भुगतान को अनावश्यक रूप से जबरदस्ती वसूला गया समझें।

वेब सर्फिंग का अनुभव-

वेब सर्फिंग का अनुभव निराशा से आपको निजात दिलाता है या निराशा को बढ़ा सकता है। पूछने के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपके आईएसपी के पास फोन लाइनों की संख्या कितनी है और कितने फोन नंबर वहाँ तक पहुँचते हैं ? इस मामलें में जवाब जानने चाहिए। बीएसएनएल प्रत्येक दस इंटरनेट इस्तेमालकर्ताओं के लिए ओक फोन लाइन का अनुपात बनाए रखने का प्रयास कर रहा है और अगर यह प्रयास सफल हो जाता है, तो यह संख्या काफी प्रशंसनीय होगी, लेकिन बीएसएनएल के पास ढेर सारे नंबर भी हैं, जबकि सिर्फ एक नंबर होना चाहिए।

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Pankaja Singh

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