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भारत में लौह अयस्क का प्रादेशिक वितरण | भारत में लौह अयस्क के वितरण प्रतिरूप एवं उत्पादन उपनति की विवेचना

भारत में लौह अयस्क का प्रादेशिक वितरण | भारत में लौह अयस्क के वितरण प्रतिरूप एवं उत्पादन उपनति की विवेचना

भारत में लौह अयस्क का प्रादेशिक वितरण (लौह अयस्क)

भारत में लौह अयस्क काफी मात्रा में पाया जाता है और यहाँ के लौह अयस्क में शुद्ध धातु की मात्रा भी बहुत अधिक होती है इसलिए हमारे देश में लौह अयस्क उत्तम कोटि का माना जाता है। ब्रिटेन में पाये जाने वाले लौह अयस्क में लौहांश 29 प्रतिशत, फ्रांस के लौह अयस्क में लौहांश 33 प्रतिशत, संयुक्त राज्य अमेरिका में 50 प्रतिशत और स्पेन तथा स्वीडन में 56 प्रतिशत लौहांश पाया जाता है जबकि भारत के लौह अयस्क में लौहांश की मात्रा 58.60 प्रतिशत से भी अधिक पायी जाती है।

भारतवर्ष में पाये जाने वाले लौह अयस्क की द्वितीय महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ पाया जाने वाला अधिकांश लौह अयस्क हेमेटाइट जाति का है जिसमें फास्फोरस का अंश बहुत कम होता है। लौह अयस्क में फास्फोरस का आधिक्य एक दोष माना जाता है। हेमेटाइट के अतिरिक्त यहाँ मैंगनेटाइट, साइडराइट किस्म के लौह अयस्क भी पाये जाते हैं।

लौह अयस्क सर्वाधिक महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ है। इसका कारण यह है कि कारखानों में चलने वाली विविध मशीनें और यातायात परिवहन के साधन-रेल, मोटर, वायुयान, जलयान आदि के निर्माण में लोहे का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार लोहा आधुनिक औद्योगिक सभ्यता की आधारशिला है।

संचित निधि (Reserve)- भारत के भू-सर्वेक्षण विभाग की गणना के अनुसार देश के अन्यान्य क्षेत्रों में 1300 करोड़ टन लौह अयस्क का भंडार है। अमेरिका की खोज मिशन ने सन् 1942 में जो सर्वेक्षण किया था उसके अनुसार बिहार के सिंहभूमि जिले में ही 300 करोड़ टन लौह अयस्क भूगर्भ में दबा पड़ा है। बस्तर में भी लगभग 72.1 करोड़ टन लौह अयस्क के भंडार का अनुमाकन है। वर्तमान खोजों के अनुसार लौह अयस्क के संचित भंडार की दृष्टि से भारत का स्थान विश्व में प्रथम कहै जबकि विश्व में कुल लौह अयस्क के उत्पादन का भारत में केवल 7 प्रतिशत निकाला जाता है। उत्पादन की दृष्टि से विश्व में भारत स्थान तृतीय है।

लौह-अयस्क

किस्म

भंडार (करोड़ टन)

हेमेटाइट

818.3

मेग्नेटाइट

206.1

लाइमोनाइट एवं अन्य

1271.6

कुल भारत

2295.0

लौह अयस्क के संचित भंडार की दृष्टि से भारत के राज्यों में कर्नाटक का स्थान पकुल भारत तत्पश्चात् बिहार, ओडिशा एवं मध्य प्रदेश का स्थान है।

उत्पादक क्षेत्र- लौह अयस्क के उत्पादक राज्यों में बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र आदि उल्लेखनीय है।

बिहार- यहाँ पर अधिकांशतया हेमेटाइट जाति का लौह अयस्कक पाया जाता है। यहाँ थोड़ा मैगनेटाइट लौह अयस्क भी निकाला जाता है। यहाँ सिंहभूमि की लोहा पेटी से देश का सर्वाधिक लौह अयस्क निकाला जाता है। यहाँ के लौह अयस्क में शुद्ध धातु की मात्रा 60-64 प्रतिशत तक पायी जाती है। इस क्षेत्र की प्रमुख खदानें मन्सिराबुरू, गुआ, बुदाबुरू तथा नोवामुंडी हैं। पन्सिराबुरू का अनुमानित संचित भंडार एक करोड़ मीटरी टन से कुछ अधिक तथा बुदाबुरू का संचित भंडार लगभग 18 करोड़ मीटिक टन है।

ओडिशा- भारत के लौह-उत्पादक राज्यों में ओडिशा का तृतीय स्थान है। यहाँ से भारत का लगभग 18 प्रतिशत लौह अयस्क की आपूर्ति होती है। यहाँ की प्रमुख खदानें मयूरभंज, क्योन्झर तथा सुंदरगढ़ में हैं। मयूरभंज की लोहे की पेटी में गुरुमहिसानी, सुलाईपट तथा बदाम पहाड़ की खदानें स्थित हैं। इनमें लौहांश 65 प्रतिशत तक पाया जाता है। सुलाईपट में सबसे उत्तम कोटि का लौह अयस्क पाया जाता है। क्योन्झर बगियाबुरू तथा नोवामुंडी और सुंदरगढ़ की बोनाय की खदानों से लौह अयस्क निकाला जाता है। ओडिशा में बरसुआ, माघाहातु बुरू, किरिबुरू तथा दैतारी खदानों को भी विकसित किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश- लौह अयस्क उत्पादन की दृष्टि से यह भारत का सबसे बड़ा राज्य है किंतु बस्तर जनपद में स्थित बेलाडिला की आधुनिक यंत्रों से चालित खदान की छत्तीसगढ़ राज्य बन जाने पर इस राज्य का स्थान उत्पादन की दृष्टि से द्वितीय हो जाने की संभावना है। मध्यप्रदेश में लौह अयस्क का वितरण दुर्ग, बस्तर, ग्वालियर, रायगढ़, बालाघाट, मांडा, विलासपुर तथा जबलपुर जनपदों में है। मध्यप्रदेश की दुर्ग पहाड़ी पर हेमेटाइट जाति का लौह अयस्क पाया जाता है। इनमें दिल्ली एवं राजहारा प्रमुख पहाड़ियाँ हैं। इन पहाड़ियों में मिलने वाले अयस्क में शुद्ध धातु की मात्रा 67 प्रतिशत से भी अधिक होती है।

महाराष्ट्र- यहाँ से देश का लगभग 3.1 प्रतिशत लौह अयस्क प्राप्त होता है। यह भारत का छठा सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादन राज्य है। यहाँ पर लौह अयस्क के संचित भंडार का अनुमान लगभग 22.5 करोड़ मीट्रिक टन है। यहाँ चाँदा की पहाड़ी पर उच्चकोटि का लौह अयस्क पाया जाता है जिसमें लौहांश 67 प्रतिशत से भी अधिक है। रत्नागिरि में पाया जाने वाला लौह अयस्क पर्याप्त कड़ा होता है। राजदीप एवं लखिडा में भी लौह अयस्क पाया जाता है।

तमिलनाडु- इस राज्य में सलेम, दक्षिण अकार्ट तथा तिरूचिरापल्ली जनपदों में स्थित हैं। जहाँ पर मैगनेटाइट जाति का लौह अयस्क पाया जाता है। इसमें शुद्ध धातु का अंश 30-40 प्रतिशत तक पाया जाता है। राज्य में लौह अयस्क के भंडार का अनुमान 30 करोड़ टन है।

व्यापार-विश्व बाजार में आने वाले समस्त अयस्क का लगभग 7 प्रतिशत भारतीय लौह अयस्क होता है। हमारे अयस्क के प्रमुख ग्राह जर्मनी, इटली, रूमानिया, चेकोस्लोवाकिया, पोलैंड, बेल्जियम, हँगरी एवं जापान हैं। सन् 1993-94 में देश में लौह अयस्क के निर्यात से लगभग सात अरब रूपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।

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Pankaja Singh

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