अर्थशास्त्र

भारत में जनसंख्या की प्रमुख जनांकिकीय विशेषता | जनांकिकी का अर्थ | भारत में कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण | भारत में ऊँची जन्म-दर के कारण

भारत में जनसंख्या की प्रमुख जनांकिकीय विशेषता | जनांकिकी का अर्थ | भारत में कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण | भारत में ऊँची जन्म-दर के कारण | Major Demographic Characteristics of Population in India in Hindi | Meaning of Demography in Hindi | Occupational distribution of working population in India in Hindi | Reasons for high birth rate in India in Hindi

भारत में जनसंख्या की प्रमुख जनांकिकीय विशेषता

जनांकिकी का अर्थ-

जनांकिकी का सामान्य अर्थ जनसंख्या से लगाया जाता है, जिसमें जनसंख्या की मात्रा, उसमें कमी या वृद्धि, स्त्री-पुरुष अनुपात, ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या आयु संरचना जन्म-दर व मृत्यु दर, व्यावसायिक वितरण आदि तथ्य शामिल किये जाते हैं।

उपर्युक्त सभी तथ्य एक देश के आर्थिक विकास पर प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह कहा जाता है कि जनांकिकी तत्वों का आर्थिक विकास से घनिष्ठ संबंध है। जनसंख्या तथा आर्थिक विकास दोनों एक-दूसरे पर गहन प्रभाव डालते हैं, जिसे निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) जनसंख्या का आर्थिक विकास पर प्रभाव- जिन देशों में जनसंख्या कम है, वहाँ जनसंख्या वृद्धि होने पर आर्थिक विकास पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक साधनों का  उचित विदोहन होता है, जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो जाती है, किंतु यदि यह जनसंख्या वृद्धि निरंतर जारी रहती है तो इसका आर्थिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। प्रति व्यक्ति आय कम होने लगती है। अतः जिन देशों में जनसंख्या अधिक है, वहाँ बढ़ती हुई जनसंख्या आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

(2) आर्थिक विकास का जनसंख्या पर प्रभाव- एक देश के आर्थिक विकास का उस देश की जनसंख्या पर भी प्रभाव पड़ता है। प्रारंभ में देश अविकसित होता है। अशिक्षा, बाल विवाह, धार्मिक अंधविश्वास, जन्म-दर की अधिकता होती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण मृत्यु- दर भी बढ़ जाती है। कुछ समय पश्चात् जब देश विकासशील होता है तो स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ती हैं। मृत्यु दर कम हो जाती है, किंतु जन्म-दर में कोई विशेष कमी नहीं होती है। धीरे-धीरे शिक्षा में वृद्धि, रहन-सहन के स्तर में वृद्धि होने से धार्मिक अंधविश्वासों में कमी आने लगती है तथा उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जन्म-दर व मृत्यु-द र की दरों में कमी आने लगती है। समाज में आर्थिक संतुलन होने लगता है। इस प्रकार आर्थिक विकास जनसंख्या को प्रभावित करता है।

भारत में कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण

व्यवसाय

कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत

(1) कृषि व संबंधित व्यवसाय

68.8

(2) खनन व निर्माणी उद्योग

13.5

(3) सेवाओं (परिवहन, संचार, व्यापार, वाणिज्य व अन्य)

17.7

यदि किसी देश में कार्यशील जनसंख्या का 31 प्रतिशत कृषि कार्य में लगा है तो वह देश आर्थिक विकास की निम्न अवस्था में होगा। इसके विपरीत कम प्रतिशत जनसंख्या कृषि में लगी हो तथा उद्योग व सेवाओं में अधिक प्रतिशत हो तो वह देश विकसित देश की श्रेणी में जाना जायेगा। भारत में कृषि क्षेत्र से अतिरिक्त जनसंख्या को हटाकर उद्योगों व सेवाओं में लगाया जाना चाहिए। इससे राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी, उत्पादन व जीवन स्तर में वृद्धि होगी तथा गरीबी व बेरोजगारी में कमी आयेगी।

(5) प्रत्याशित आयु (Life Expectancy)- प्रत्याशित आयु से आशय जीवित रहने की संभावित आयु से है। यदि मृत्यु दर उच्च होती है या मृत्यु कम आयु पर हो जाती है तो प्रत्याशित आयु कम होती है। इसके विपरीत यदि मृत्यु दर निम्न होती है तो व्यक्तियों की आयु अधिक होती है और इस प्रकार प्रत्याशित आयु भी अधिक होती है।

लगभग 90 वर्ष पूर्व भारत में प्रत्याशित आयु 24 वर्ष थी, लेकिन इसमें धीरे-धीरे वृद्धि हो गई है। गत वर्षों की प्रत्याशित आयु इस प्रकार रही- 1911 में 24 वर्ष, 1951 में 32.1 वर्ष, 1971 में 46.4 वर्ष व 1991 में 58.7 वर्ष तथा वर्तमान में 68.8 वर्ष है।

(6) जन्म-दर तथा मृत्यु दर (Birth Rate and Death Rate) – जन्म दर (Birth Rate) – जन्म दर से आशय एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के पीछे बच्चों के जन्म से है। भारत में जन्म-दर में निरंतर कमी होती रहती है। 1910-11 के मध्य में 49.2 प्रति हजार थी, जो 1961-71 के मध्य कम होकर 41.7 प्रति हजार हो गई, लेकिन विभिन्न परिवार कल्याण कार्यक्रमों के अपनाने से इसमें और कमी हुई है, अतः यह 1990-91 के मध्य 29.5 प्रति हजार रही है, जबकि 2011 में यह 19.2 प्रति हजार है। यह अन्य देशों की तुलना में काफी ऊंची है।

भारत में ऊँची जन्म-दर के कारण (Reasons of High Birth Rate in India ) –

(अ) सामाजिक विश्वास, (ब) पारिवारिक मान्यता, (स) बाल विवाह, (द) विवाह की अनिवार्यता, (य) ईश्वरीय देन, (र) मनोरंजन साधनों का अभाव, (ल) निम्न आय व निम्न जीवन-स्तर, (व) जलवायु, (श) ग्रामीण क्षेत्रों में निरोधक सुविधाओं की कमी।

मृत्यु दर (Death Rate)- मृत्यु दर से आशय एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के पीछे मृत्युओं की संख्या से है। इस दर में अत्यधिक कमी हुई है। 1911-20 के मध्य यह दर 47.7 थी, जो 1950-51 के बीच 9.8 रह गई तथा वर्तमान में 7.3 है। यह भी अन्य देशों की तुलना में उच्च है।

मृत्यु-दर की कमी के कारण (Reasons of Reduction in Death Rate) – भारत में मृत्यु दर में कमी के कई कारण हैं, लेकिन इनमें प्रमुख हैं-

(अ) अकालों व महामारियों में कमी, (ब) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों का विस्तार, (स) स्त्रियों की शिक्षा में वृद्धि, (द) विवाह आयु में वृद्धि, (य) मनोरंजन साधनों का विस्तार, (र) अंधविश्वासों में कमी, (ल) शहरीकरण, (व) जीवन-स्तर में वृद्धि।

(7) साक्षरता अनुपात (Literacy Ratio)- जिस देश में साक्षरता अनुपात जितना अधिक होगा उतना ही उस देश का विकास होगा। इस दृष्टिकोण से हमारे देश में स्थिति संतोषजनक नहीं है, यद्यपि यहाँ साक्षरता के प्रतिशत में निरंतर वृद्धि हो रही है। 1951 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता का प्रतिशत 18.33 था, जो 1961 में बढ़कर 28.30, 1971 में 34.45, 1981 में 43.57, 1991 में 52.21 व 2001 में 64.8 तथा 2011 में 73.01 इस प्रकार पिछले 60 वर्षों में साक्षरता दर में चार गुने की वृद्धि हुई है। साक्षरता के अनुपात के संबंध में अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित प्रकार हैं-

(1) स्त्रियों की साक्षरता दर पुरूषों की साक्षरता दर से कम- स्त्रियों की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार स्त्रियों का साक्षरता प्रतिशत 65.46 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों का 82.14 प्रतिशत है।

(2) ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों में साक्षरता दर में अंतर- ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता का प्रतिशत 59.40 है, जबकि शहरी क्षेत्रों का प्रतिशत 80.30 हे। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की साक्षरता का प्रतिशत 46.70 है, जबकि शहरी क्षेत्रों की स्त्रियों का यह प्रतिशत 73.10 है। ग्रामीण क्षेत्रों से पुरुषों की साक्षरता का प्रतिशत 71.40 है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह प्रतिशत 86.70 है।

(3) विभिन्न राज्यों की साक्षरता प्रतिशत में अंतर-देश के भिन्न-भिन्न राज्यों में साक्षरता का प्रतिशत एक समान नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में केरल राज्य ऐसा राज्य है, जहाँ साक्षरता का प्रतिशत 93.91 है, जो सबसे ऊंची है। भारत में सबसे कम साक्षरता बिहार में है, जिसका साक्षरता प्रतिशत 63.82 है। शेष सभी राज्यों का साक्षरता प्रतिशत इन दोनों सीमाओं के बीच है।

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Pankaja Singh

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