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अनुवाद प्रक्रिया | अनुवादक को किस तरह की अनुवाद प्रक्रिया अपनानी चाहिए

अनुवाद प्रक्रिया | अनुवादक को किस तरह की अनुवाद प्रक्रिया अपनानी चाहिए

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अनुवाद प्रक्रिया

अनुवाद प्रक्रिया की मूलभूत समस्या लक्ष्य भाषा में अनुवाद समानार्थी खोजने की है। अत: स्त्रोतभाषा की पाठ-सामग्री को पूरी तरह समझे बिना अनुवादक लक्ष्य भाषा के समानार्थी शब्दों के द्वारा उसे प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। साथ ही लक्ष्य भाषा के वाक्यों तथा संरचनात्मक तत्वों को भी अंत्यन्त सावधानीपूर्वक प्रयुक्त करना चाहिए। एक शब्द अनेक संदर्भो में प्रयुक्त होकर अनेक अर्थ देता है इसलिए मूल पाठ के संदर्भ और प्रयोग परिवेश को समझकर ही समानार्थी शब्दों का चयन किया जाना चाहिए। प्रत्येक भाषा में अभिव्यक्ति का अपना एक विशेष मुहावरा होता है। इसका लक्ष्य भाषा में अनुवाद कठिन होता है अतः इसका अनुवाद लक्ष्य भाषा की प्रकृति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अनुवाद करते समय सांस्कृतिक परंपराओं का ध्यान भी रखा जाना चाहिए। वाक्य में पदों का अनुक्रम भी लक्ष्य भाषा की अनुक्रम-व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। लक्ष्य भाषा में स्रोत भाषा से अनुवाद करते समय शब्दों के लिंग, वचन और व्याकरणिक रूपों की संगति को ध्यान में रखना चाहिए। वाक्यांश और लोकोक्तियों के अनुवाद से लक्ष्य भाषा को अस्पष्ट एवं अव्यवस्थित नहीं बनाना चाहिए।

अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। अनुवाद प्रक्रिया के अन्तर्गत व्यावहारिक ज्ञान का होना भी आवश्यक है।

उदाहरण के लिए अंग्रेजी भाषा का निम्नलिखित वाक्य देखें-

The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool.

यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है-

यह लड़का, जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मुख है। तो यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, Hard के लिए यहाँ ‘सख्त’ शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि अनुवाद निम्नलिखित हो-

प लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है। तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा। इसी प्रकार-

Soharab, was killed by his own father Rustam का अनुवाद- सोहराब मार दिया गया था अपने पिता रुस्तम के द्वारा। उचित नहीं है, हिन्दी में- सोहराब अपने पिता रुस्तम के ही हाथों मारा गया। अनुवाद उपयुक्त होगा।

अतः लक्ष्य भाषा के वाक्य-विन्यास को ध्यान में रखकर ही अनुवाद किया जाना चाहिए। जैसा कि कहा गया है प्रत्येक भाषा में अभिव्यक्ति का एक अपना विशेष मुहारवरा होता है, इसका लक्ष्य भाषा में यथावत् अनुवाद कठिन होता है, इसका अनुवाद लक्ष्य भाषा का प्रकृति के अनुरूप ही होना चाहिए। देखें-

स्रोत भाषा अंग्रेजी

  1. There is no room in the car

लक्ष्य भाषा हिन्दी में शब्दशःअनुवाद कार में कोई कमरा नहीं है

सही अनुवाद

कार में कोई स्थान नहीं है

यदि अनुवादक ‘no room’ मुहावरे का अर्थ नहीं जानता और कोश में से room का अर्थ ‘कमरा’ देखकर अनुवाद कर देता है तो यह भ्रष्ट अनुवाद ही होगा।

  1. She is taking food, “Taking meals’, “Taking tea’

वह खाना ले रही है।

आदि विशेष प्रयोग है।

वह खाना खा रही है।

इनके अनुवाद हिन्दी की प्रकृति के अनुरूप होना चाहिए।

  1. He is playing on violin वह वायोलिन पर खेल रहा है। वह वायोलिन बजा रहा है।

उदाहरण-

(अ) स्त्रोत भाषा अंग्रेजी

The central core of Gandhiji’s teaching was meant not for his country or his people alone but for all mankind and is valid not only for today but for all time, he He wanted all men to be free so that they could grow unhampered into full self realisation. He wanted to abolish the exploitation of man by man in any shape or form because both exploitation and submission to it are a sin not only against society but against the moral law, the law of out being. The means to be compatible with this end therefore, he said, have to be purely moral, namely, unadulterated truth and non-violence. He had been invited by many foreigners to visit their countries and deliver his message to them directly but declined to accept such invitations as, he said, he must make good what he claimed for Truth and Ahinsa in his own country before he could launch on the gigantic task of winning or rather converting the world. With the attainment of freedom by India. by following his method, though in a limited way and in spite of all the imperfections in its practice, the condition precedent for taking his message to other countries was to a certain extent fulfilled. And although the partition had abused wounds and raised problems which claimed all his time and energy, he might have been able to turn his attention to his larger question even in the midst of his distractions. But Providence had of drained otherwise. May some individual or nation arise and carry forward the effort launched by him till the experiment is completed the work finished and the objective achieved !

लक्ष्य-भाषा हिन्दी

गाँधी की शिक्षा का मर्म केवल उनके देश भारत या यहाँ की जनता के लिए ही सीमित नहीं था। वह सारी मानव-जाति के लिए था, और वह केवल वर्तमान काल के लिए ही नहीं, परन्तु त्रिकाल के लिए सत्य है। वे चाहते थे कि सारे मानव स्वतंत्र हों जिससे वे अपना अबाधित मनुष्य द्वारा होने वाला सभी प्रकार का शोषण मिटा देना चाहते थे, क्योंकि शोषण करना और शोषण का शिकार होना दोनों ही पाप है- ने केवल समाज के प्रति बल्कि नैतिक नियम के प्रति भी, हमारे जीवन के नियम के प्रति भी इसलिए उनका कहना था कि इस उद्देश्य के अनुरूप ही साधन भी सर्वथा नैतिक अर्थात् विशुद्ध सत्य और अहिंसा पर आधारित होने चाहिये। अनेक विदेशियों ने अपने देशों में गाँधीजी को बुलाया था, ताकि वे अपना संदेश उन्हें स्वयं दे सकें। परन्तु गाँधीजी ने ये निमन्त्रण स्वीकार नहीं किये। उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा के विषय में उनका जो दावा है उसे पहले उन्हें अपने ही देश में पूरा करना चाहिये, उसके बाद ही वे संसार का हृदय जीतने या उसके विचार बदलने का भगीरथ कार्य हाथ में ले सकते हैं। सीमित रूप में ही सही और पालन में अनेक अपूर्णताएँ रहने के बावजूद भी उनकी अहिंसक कार्य-पद्धति का अनुसरण करके जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली, तब किसी हद तक दूसरे देशो में उसका संदेश ले जाने की वह पूर्व शर्त पूरी हो गई और यद्यपि देश के विभाजन के कारण ऐसे आघात लगे और ऐसी समस्याएँ पैदा हुई जिन पर उन्हें अपना सारा समय और सारी शक्ति लगानी पड़ी, फिर भी वे अपनी व्यस्तताओं के बीच भी इस विशाल और व्यापक प्रश्न की और ध्यान देने की क्षमता रखते थे। परन्तु विधाता को कुछ और ही स्वीकार था। भगवान करे कोई व्यक्ति या राष्ट्र ऐसा आगे आये, जो गाँधीजी के आरंभ किए हुए प्रयास को उस समय तक जारी रखे जब तक उनका प्रयोग पूरा न हो जाये, कार्य समाप्त न हो जाये और उद्देश्य सिद्ध न हो जाये।

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Pankaja Singh

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