वित्तीय प्रबंधन

अधिकतम सम्पत्ति अर्जन का उद्देश्य | शुद्ध वर्तमान मूल्य की गणना के लिए सूत्र का प्रयोग

अधिकतम सम्पत्ति अर्जन का उद्देश्य | शुद्ध वर्तमान मूल्य की गणना के लिए सूत्र का प्रयोग | Objective of earning maximum wealth in Hindi | Using the Formula to Calculate Net Present Value in Hindi

अधिकतम सम्पत्ति अर्जन का उद्देश्य (Objectives of Wealth Maximisation)

इस उद्देश्य को मूल्य अधिकतमीकरण अथवा शुद्ध वर्तमान मूल्य अधिकतमीकरण के नाम से भी जाना जाता है। प्रोफेसर सोलोमन इजरा के अनुसार एक व्यवसाय के वित्तीय प्रबन्ध का उद्देश्य मूल्य अधिकतमीकरण (Wealth Maximisation) होना चाहिए। दूसरे शब्दों में, व्यवसाय का परिचालन इस प्रकार सम्पन्न किया जाना चाहिए जिससे कि व्यवसाय के स्वामियों को अधिकतम शुद्ध वर्तमान मूल्य (Maximum Net Present Value) प्राप्त हो सके। इस प्रकार अधिकतम सम्पित्ति अर्जन का अर्थ है कि एक निश्चित क्रियाकलाप के अन्तर्गत शुद्ध वर्तमान मूल्य (Net Present Worth) को अधिकतम करना। शुद्ध वर्तमान मूल्य एवं क्रियाकलापों से उपलब्ध लामों के सकल वर्तमान मूल्य तथा उन लाभों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक विनियोग की मात्रा का अन्तर होता है। एक क्रियाकलाप के सकल वर्तमान मूल्य की गणना में लाभों को उस दर पर पूँजीकृत (Capitalise) किया जाता है जो कि उसके समय मूल्य तथा अनिश्चितता को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है। उपरोक्त अन्तर धनात्मक (Positive) होने के साथ-साथ जितना ही अधिक होगा, शुद्ध वर्तमान मूल्य (Net Present Value) उतना ही अधिक होगा और इस प्रकार प्रबन्ध तन्त्र उद्यम के अंशधारियों के हितों को अधिकाधिक रूप से पूरा करने में सफल होंगे। एक वित्तीय क्रियाकलाप यदि धनात्मक शुद्ध वर्तमान मूल्य प्राप्त करता है तो वह सम्पत्ति अर्जन करता है और इसलिए यह उचित है और उसे आगे जारी रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर यदि क्रियाकलाप से ऋणात्मक शुद्ध वर्तमान मूल्य प्राप्त होता है तो वह उचित नहीं होगा और उसे अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए। विभिन्न विनियोग परियोजनाओं में केवल उसी परियोजना को स्वीकार किया जाना चाहिए जिसका शुद्ध वर्तमान मूल्य अधिकतम हो। इस प्रकार स्पष्ट है कि एक व्यावसायिक उद्यम की शुद्ध कीमत मूल्यों या सम्पत्ति अर्जन तभी अधिकतम होगा जबकि इस प्रकार के मापदण्ड का प्रयोग वित्तीय निर्णयों में करती है। प्रोफेसर सोलोमन इजरा के अनुसार सम्पत्ति अर्जन उद्देश्य एक ऐसा केन्द्र बिन्दु है जिस पर व्यवसाय के अन्य सभी उद्देश्य निर्भर करते हैं।

शुद्ध वर्तमान मूल्य की गणना के लिए सूत्र का प्रयोग

(Formula used for the Calculation of Net Profit Value)

अधिकतम सम्पत्ति अर्जन उद्देश्य को पूरा करने के लिए शुद्ध वर्तमान मूल्य को मालूम करना आवश्यक होता है। शुद्ध वर्तमान मूल्य की गणना के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-

NPW = GPW – C

यहाँ पर, NPW= Net Present Worth of Value शुद्ध वर्तमान मूल्य

GPW = Gorss Present Worth of Value सकल वर्तमान मूल्य

C = Cost of Action (investment of Equity Capital) required to acquire the asset or to purchase the course of action.

क्रियाकलाप की लागत (क्रियाकलाप को पूरा करने की लागत या उसके लिए प्रयुक्त सम्पत्ति को प्राप्त करने के लिए आवश्यक समता पूँजी या विनियोग)

व्यवहार में यदि व्यावसायिक क्रियाकलापों का परिणाम अर्थात् शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPW) शून्य से ज्यादा होता है तो उसका आशय यह होगा कि अंशधारियों की सम्पत्ति के वर्तमान मूल्य में वृद्धि हुई है और उद्यम ने अपने परिचालन के उद्देश्य को प्राप्त कर लिया है। लेकिन यदि शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPW) शून्य है तो यह निष्कर्ष निकाला जायेगा कि सम्पत्ति के वर्तमान मूल्य में न तो वृद्धि हुई है और न ही कमी हुई है। व्यवसाय का स्तर पूर्ववत है। दूसरी ओर यदि शुद्ध वर्तमान मूल्यों में कमी हुई है तो इसका अर्थ यह है कि उद्यम अपने सम्पत्ति के वर्तमान मूल्य को बढ़ाने के बजाय उसे बनाये रखने में भी असफल हुई है। इस प्रकार व्यवसाय के परिचालन (Operation) का उद्देश्य ही विफल हो गया।

अतः यह स्पष्ट है कि अधिकतम सम्पत्ति अर्जन मूल्य को यदि वित्तीय निर्णयन का आधार अपनाया जाय तो धन (Money) के साथ मूल्य तथा सम्भावित लाभों या सम्भावित रोकड़ प्रवाहों की अनिश्चितता द्वारा मापित जोखिम इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अंग के रूप में कार्य करते हैं। वित्तीय प्रबन्ध का परिचालन उद्देश्य एक व्यावसायिक उद्यम के सम्पत्ति अर्जनमूल्य अथवा, शुद्ध वर्तमान मूल्य को अधिकतम करके ने होना चाहिए। एक उद्यम के स्वामियों के सम्पत्ति अर्जन मूल्य (Wealth) का उनके अंशों के बाजार मूल्य (वर्तमान मूल्य) को बढ़ाकर अधिकतम किया जा सकता है लेकिन यह तभी सम्भव हो सकता है जबकि उद्यम का प्रबन्धतंत्र कुशलता से कार्य करे तथा पूँजी, विनियोग, वित्तीयकरण, लाभांश तथा चालू सम्पत्ति प्रबन्ध के क्षेत्र में अनुकूलतम निर्णय लें।

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Pankaja Singh

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