अर्थशास्त्र

उपयोगिता के प्रकार | जहां सीमांत उपयोगिता शून्य होती है, वहां पर कुल उपयोगिता अधिकतम होती है

उपयोगिता के प्रकार | जहां सीमांत उपयोगिता शून्य होती है, वहां पर कुल उपयोगिता अधिकतम होती है

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उपयोगिता के प्रकार

किसी वस्तु में किसी मानवीय आवश्यकता को संतुष्ट करने की जो शक्ति, गुण अथवा क्षमता होती है उसे आर्थिक भाषा में उपयोगिता कहा जाता है।

उपयोगिता दो प्रकार की होती है-

  • सीमांत उपयोगिता
  • कुल उपयोगिता

  • सीमांत उपयोगिता उपभोग की जाने वाली किसी वस्तु की अंतिम पाई से प्राप्त होने वाली उपयोगिता को सीमांत उपयोगिता कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति साथ संतरे का प्रयोग करता है तथा पहले संतरे की उपयोगिता 10, दूसरे की 8 तथा तीसरे की छांव हो तो तीसरे संतरे की उपयोगिता (=5) को सीमांत उपयोगिता कहा जाएगा। प्रोफ़ेसर बोल्डिंग के अनुसार, “किसी वस्तु की किसी मात्रा की सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता में वह वृद्धि है जो उपभोग एक इकाई और बढ़ाने से उत्पन्न होती है।” इस प्रकार n इकाई की कुल उपयोगिता (n-1) वस्तुओं की कुल उपयोगिता घटा देने पर n वीं इकाई की सीमांत उपयोगिता प्राप्त हो जाती है। अथवा

MU n =TU n -TU (n-1)

MU n =nवीं इकाई की सीमांत उपयोगिता n

TU n =n इकाई से प्राप्त कुल उपयोगिता

TU (n-1) = (n-1) इकाइयों से प्राप्त उपयोगिता।

किसी वस्तु की सीमांत उपयोगिता ओं को एक सारणी में व्यवस्थित करने के लिए सर्वप्रथम यह में रखने की आवश्यकता है कि वस्तु की सभी इकाइयां समरूप (गुण, आकार में समान)हो तथा उसकी मात्रा संचित हो अर्थात वस्तु की प्रत्येक इकाई में मनुष्य की आवश्यकता को एक महत्वपूर्ण अंश तक संतुष्ट करने की क्षमता होनी चाहिए। वस्तु की इकाइयां निश्चित करके जब हम गणनावाचक विधि द्वारा उनकी उपयोगिता ओं को संख्यात्मक इकाइयों में एक सारणी के अंतर्गत व्यक्त करते हैं तो संपूर्ण सारणी की सीमांत उपयोगिता सारणी कहलाती है।

तालिका 1

आम की इकाइयां

सीमांत उपयोगिता

1

10
2

8

3

6

4

4

5

2

6

0 (शून्य उपयोगिता)

7

-2 (ऋणात्मक उपयोगिता)


सीमांत उपयोगिता की सारणी अवलोकन से यह विशेष तथ्य प्रकट होता है कि जैसे-जैसे उपभोक्ता नाम की अतिरिक्त इकाइयां उपभोग करता जाता है वैसे वैसे आम का हर अगली इकाई पहली इकाई की तुलना में कम उपयोगिता प्रदान करती है अर्थात सीमांत उपयोगिता निरंतर घटती जाती है। जब कुछ इकाइयों से उपभोग के बाद हमारी आवश्यकता संतुष्ट हो जाती है (सारणी में 6वीं इकाई) तो उस वस्तु की सीमांत उपयोगिता शुन्य हो जाती है। इसके बाद भी यदि उपभोग जारी रखा जाता है तो उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है। अतः पूर्ण संतुष्टि के बिंदु के पहले तक सीमांत उपयोगिता धनात्मक तथा पूर्ण संतुष्टि बिंदु के पास सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है।

सीमांत उपयोगिता तालिका के आधार पर सीमांत उपयोगिता को रेखाचित्र-1 की सहायता से भी दिखाया जा सकता है।AB रेखा सीमांत उपयोगिता की देखा है। 6वीं इकाई की सीमांत उपयोगिता शून्य है और यदि सातवीं इकाई का उपभोग किया जाता है तो ऋणात्मक उपयोगिता मिलती है।

(ब) कुल उपयोगिता किसी वस्तु के उपभोग की जाने वाली समस्त इकाइयों में प्राप्त सीमांत के योग को कुल उपयोगिता कहते हैं।

तालिका 2

आम की इकाइयां सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता
1 10 10
2 8 18
3 6 24
4 4 28
5 2 30
6 0 30
7 -2 28

 प्रोफ़ेसर मेयर्स के अनुसार,  “किसी वस्तु की उत्तरोत्तर इकाइयों के उपभोग के परिणाम स्वरूप प्राप्त सीमांत उपयोगिता ओं का योग कुल उपयोगिता है।”इससे स्पष्ट है कि किसी वस्तु की जितनी इकाइयों का हम एक निर्धारित समय में उपभोग करते हैं, यदि उन सबको प्राप्त होने वाले उपयोगिता को जोड़ दिया जाए तो हमें कुल उपयोगिता प्राप्त हो जाएगी। तालिका-2मैं सीमांत उपयोगिता की सहायता से कुल उपयोगिता की गणना दिखाई गई है। इस तालिका से स्पष्ट है कि उपभोक्ता कुल 7 इकाइयों का उपभोग करता है और यदि उसे जोड़ते हैं तो कुल उपयोगिता प्राप्त हो जाती है।

चित्र में कुल उपयोगिता को रेखाचित्र की सहायता से दिखाया गया है। तालिका-2 मैं दी गई कुल उपयोगिता के आधार पर AB कुल उपयोगिता वक्र की रचना की गई है।

सीमांत उपयोगिता तथा कुल उपयोगिता का संबंध तालिका-2मैं सीमांत उपयोगिता तथा कुल उपयोगिता का संबंध स्पष्ट हो जाता है। तालिका से स्पष्ट है कि प्रथम 5 इकाइयां धनात्मक उपयोगिता प्रदान करती है तथा कुल उपयोगिता घटते दर पर बढ़ती है। वस्तु की 6वीं इकाई उपयोगिता प्रदान करती है। अतः कुल उपयोगिता में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है अर्थात 5 इकाइयों की जितनी कुल उपयोगिता है उतनी ही कुल उपयोगिता 6 इकाइयों की भी होती है। इसके बाद जब उपभोक्ता सातवीं इकाई का उपयोग करता है तो उसे ऋणात्मक उपयोगिता मिलती है। इसका परिणाम यह होता है कि कुल उपयोगिता भी घटना प्रारंभ हो जाती है। सीमांत और कुल उपयोगिता के संबंध को स्पष्ट करने में उपरोक्त प्रवृत्तियों को निष्कर्ष रूप मैं इस प्रकार रखा जा सकता है।

  1. सीमांत उपयोगिता वस्तु की हर अगली इकाई पर घटने की प्रवृत्ति दिखाती है किंतु जब तक वह धनात्मक रहती है तब तक कुल उपयोगिता घटते दर पर बढ़ती जाती है।
  2. संतुष्टि बिंदु पर जब सीमांत उपयोगिता शुन्य हो जाती है तब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है।
  3. संतुष्टि बिंदु के बाद सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती हैतब कुल उपयोगिता घटने लगती है। इन तथ्यों को रेखा चित्र में दिखाया गया है। इस चित्र में-

AF = धनात्मक सीमांत उपयोगिता

F = शून्य सीमांत उपयोगिता

FC = ऋणात्मक उपयोगिता

AD = घटते दर पर बढ़ती हुई कुल उपयोगिता

FB = घटती हुई कुल उपयोगिता

ED = सामान कुल उपयोगिता

चित्र में F बिंदु पर शून्य सीमांत उपयोगिता है जबकि इस स्थिति में B बिंदु पर कुल रेखाचित्र अधिकतम है क्योंकि इस बिंदु के बाद कुल उपयोगिता घटने लगती है।

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Pankaja Singh

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